महाराष्ट्र
आर्थिक मामलों के कारण धारावी पुनर्विकास की नई निविदा, अडानी नहीं: महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे एचसी को बताया
मुंबई: 2018 की धारावी पुनर्विकास निविदा को रद्द कर दिया गया था और पिछले साल COVID-19 महामारी और यूक्रेन-रूस युद्ध सहित कई कारकों के कारण एक नया टेंडर जारी किया गया था, जिसने वित्तीय और आर्थिक मामलों को प्रभावित किया, महाराष्ट्र सरकार ने दावा किया। सरकार ने यह भी कहा कि चयनित बोलीदाता (अडानी) के पक्ष में मनमाने ढंग से काम करने के आरोप “अस्पष्ट और अस्पष्ट” हैं। इसने आगे कहा कि पुराना टेंडर और नया टेंडर अलग-अलग थे और उनकी तुलना नहीं की जा सकती थी।
संयुक्त अरब अमीरात स्थित कंपनी Seclink याचिका
संयुक्त अरब अमीरात स्थित कंपनी सिकलिंक टेक्नोलॉजीज कॉर्पोरेशन द्वारा दायर एक याचिका के जवाब में शुक्रवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के समक्ष दायर एक हलफनामे में महाराष्ट्र सरकार द्वारा विवाद किए गए थे, जो 7,200 करोड़ रुपये के साथ पहले निविदा में सबसे अधिक बोली लगाने वाले के रूप में उभरा था। बोली लगाना। कंपनी ने 2018 के टेंडर को रद्द करने और नए सिरे से जारी करने के सरकार के कदम को चुनौती दी है। गौतम अडानी समूह ने 259 हेक्टेयर क्षेत्र के पुनर्विकास के लिए 5,069 करोड़ रुपये की बोली के साथ 2022 का टेंडर हासिल किया था। राज्य आवास विभाग द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि कई कारकों के कारण पहले के टेंडर को रद्द करने का निर्णय लिया गया था। इसमें कहा गया है कि 2019 और 2022 में वित्तीय और आर्थिक स्थिति “भौतिक रूप से” भिन्न थी। हलफनामा पढ़ता है: “वर्तमान आर्थिक स्थिति COVID-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, रुपये-यूएसडी दर पर अनिश्चितता, ब्याज दर में अस्थिरता और आम निवेशक की समग्र उच्च जोखिम धारणा के प्रभाव से भौतिक रूप से प्रभावित है।” इसलिए सरकार ने कानूनी सलाह लेकर टेंडर रद्द करने और जनहित में नया टेंडर निकालने का फैसला लिया।
टेंडर जारी किए
सरकार के अनुसार, पहली निविदा नवंबर 2018 में जारी की गई थी, और बोलियां मार्च 2019 में खोली गई थीं। बाद में मार्च में ही रेलवे द्वारा पुनर्विकास परियोजना के लिए सरकार को अतिरिक्त 45 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई थी, हलफनामे में कहा गया है। इसने आगे तर्क दिया कि सरकार और सिकलिंक के बीच किसी अनुबंध पर हस्ताक्षर नहीं किया गया था और इसलिए, कंपनी के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है। हलफनामे में कहा गया है, “… किसी भी व्यक्ति को अधिकार के रूप में सरकार के साथ व्यापार करने का अधिकार नहीं है।”
14 मार्च को सुनवाई
आगे हलफनामे में चयनित बोलीदाता (अडानी) का पक्ष लेने के लिए कंपनी के मनमाने ढंग से लगाए गए आरोपों को “अस्पष्ट और अस्पष्ट” करार दिया गया है। इसने आगे तर्क दिया कि नई निविदा में, बोलियों को नए सिरे से प्रस्तुत किया जाना था और याचिकाकर्ता भाग ले सकता था क्योंकि किसी की भागीदारी को बाहर करने का कोई सवाल ही नहीं था। सिकलिंक का तर्क था कि उसने 7200 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी, जबकि दूसरे टेंडर (अडानी) में सबसे ऊंची बोली 5,069 करोड़ रुपये की थी। हाई कोर्ट 14 मार्च को सेक्लिंक की याचिका पर सुनवाई करेगा।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र एटीएस की बड़ी कार्रवाई, ठाणे के ठाकुर्ली से 10 लाख के इनामी नक्सली को किया गिरफ्तार

महाराष्ट्र एटीएस ने कार्रवाई करते हुए ठाणे जिले के ठाकुर्ली इलाके से एक नक्सली को गिरफ्तार किया है। यह नक्सली झारखंड के जंगलों का रहने वाला है। सूत्रों ने बताया कि यह पिछले 10 दिनों से ठाकुर्ली में रह रहा था। इस नक्सली पर 10 लाख रुपये का इनाम झारखंड सरकार ने रखा था। आरोपी को शनिवार को एटीएस कोर्ट में पेश करेगी।
गिरफ्तार नक्सली का नाम संजय सरोज यादव उर्फ संजय गोदराय उर्फ बुधराम है। इसकी उम्र 45 साल है। यह नक्सली यहां क्यों और किस मकसद से आया था, इसकी जांच की जा रही है।
एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या वह ठाकुर्ली में किसी संपर्क में था, क्या किसी संगठन के लिए काम कर रहा था या फिर यहां छिपने के इरादे से आया था। पिछले 10 दिनों में उसकी गतिविधियों और मिलने-जुलने वाले लोगों की भी जांच हो रही है।
इससे पहले 24 अक्टूबर को, महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने मुंबई के माहिम इलाके से 33 वर्षीय एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया था। उस पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने का शक था।
आरोपी की पहचान मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर के रूप में हुई थी। उसे एक गुप्त सूचना के आधार पर महाराष्ट्र एटीएस की कालाचौकी यूनिट ने माहिम मेट्रो स्टेशन के पास से पकड़ा गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी रैपिडो राइडर और इत्र विक्रेता के तौर पर काम करने की आड़ में कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार कर रहा था। एटीएस ने बताया था कि वह विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सांप्रदायिक नफरत और राष्ट्र-विरोधी भावनाएं फैलाने की कोशिश कर रहा था। जांच टीम को उसके मोबाइल फोन से ऐसी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री भी मिली थी।
एजेंसी के मुताबिक, आरोपी एक टेलीग्राम ग्रुप चलाता था। आरोप है कि उसने 1 जून को इस ग्रुप पर जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के भड़काऊ ऑडियो भाषण अपलोड किए थे, जो बाबरी मस्जिद और अन्य मुद्दों से जुड़े थे। एटीएस ने यह भी दावा किया कि वह ‘इब्न-ए-कासिम’ नाम के एक पाकिस्तान-समर्थित चरमपंथी टेलीग्राम चैनल का सक्रिय सदस्य था।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आज बीएमसी कर्मचारियों को देंगे दिवाली गिफ्ट, सौंपेंगे नए आवासों की चाबी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शुक्रवार को बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के कर्मचारियों को नए आवासों की चाबी सौपेंगे। मुंबई में बीएमसी कर्मचारियों को आश्रय योजना कक्ष, चरण-2 के तहत आवास वितरित किए गए हैं।
मुंबई के कोलाबा स्थित राजवाडकर स्ट्रीट, पंचशील नगर में यह समारोह आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष और स्थानीय विधायक राहुल नार्वेकर, मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
मुंबई की महापौर रितु राजेश तावड़े की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में उपमहापौर संजय घाड़ी भी विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। इसके अलावा विधायक अमित साटम, सांसद अरविंद सावंत, विधायक सुनील शिंदे और विधायक राजहंस सिंह सहित मुंबई महानगरपालिका के विभिन्न दलों के गुटनेता, समितियों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नगरसेवक भी समारोह में शामिल होंगे।
इस अवसर पर बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े, अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे और अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (पश्चिम उपनगर) डॉ. विपिन शर्मा सहित महानगरपालिका के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कुल 140 फ्लैट की चाबियां कर्मचारियों को सौंपेंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह आवास कुल 4,166.90 वर्ग मीटर के भूखंड क्षेत्रफल में बने हुए हैं। इन आवासों में हर इमारत में ग्राउंड फ्लोर के अलावा 3 और मंजिलें हैं। पहले का फ्लैट का कुल क्षेत्रफल 150 वर्ग फुट था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 300 वर्ग फुट किया गया है। इसके अलावा, हर फ्लैट में अलग शौचालय और बाथरूम बने हुए हैं।
महाराष्ट्र
कानून व्यवस्था के मुद्दे पर शिवसेना-यूबीटी का केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला, मांगा केंद्रीय गृह मंत्री का इस्तीफा

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था की सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं। लॉरेन्स बिश्नोई गैंग के नाम से व्यापारियों, बिल्डर्स, सिने अभिनेताओं और निर्माताओं को धमकियां मिल रही हैं। ऐसे महानायक को बुलेटप्रूफ पिंजरे में घूमना पड़ रहा है। बच्चन और उनके परिजनों को सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा है। यह मुख्यमंत्री फडणवीस और केंद्रीय गृहमंत्री शाह की असफलता है।
अभिनेता अमिताभ बच्चन के ‘बुलेटप्रूफ ग्लास’ के अंदर से अपने प्रशंसकों का अभिवादन करने की एक तस्वीर के साथ शिवसेना-यूबीटी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में ‘पिंजरे में बच्चन!’ शीर्षक के साथ एक लेख लिखा है। शिवसेना-यूबीटी ने कहा कि यह मौजूदा प्रशासन के तहत कानून-व्यवस्था के पूरी तरह चरमरा जाने का सबूत है।
मुखपत्र ‘सामना’ में छपे संपादकीय में ठाकरे गुट ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा। संपादकीय में कहा गया है कि देश में सार्वजनिक सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक स्तर तक गिर गई है।
शिवसेना-यूबीटी ने कहा, “शाह ने मानो अपने स्वार्थ के लिए एक अदृश्य शक्ति का निर्माण किया है और उस अदृश्य शक्ति के जरिए देश में किसी को भी धमकियां दिलाई जाती हैं, किसी से भी वसूली की जाती है या गोलीबारी करके लाशें गिराई जाती हैं। इसी के लिए अमिताभ बच्चन (आयु ८४ वर्ष) जैसे महानायक को बुलेटप्रूफ कांच का पिंजरा लेकर घूमना पड़ रहा है।”
अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी के पास हुई गोलीबारी की हालिया घटनाओं और नागपुर में सर्राफा व्यापारियों से रंगदारी मांगने के मामलों का जिक्र करते हुए शिवसेना-यूबीटी ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों हाई-प्रोफाइल फिल्मी हस्तियां, बड़े कारोबारी और आम नागरिक लगातार डर के साये में जी रहे हैं?
उद्धव ठाकरे गुट ने सवाल किया कि अपराधी गिरोह, खासकर लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क, बिना किसी डर के कैसे काम कर रहे हैं? आरोप लगाया गया है कि गृह मंत्रालय के एक आदेश ने राज्य पुलिस को गुजरात की साबरमती जेल से बिश्नोई को हिरासत में लेने से रोक दिया है, जिससे जेल में बंद इस गैंगस्टर को एक तरह का ‘अदृश्य सुरक्षा कवच’ मिल गया है।
संपादकीय में पूछा गया, “एक तरफ सत्ताधारी नेता भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बड़ी-बड़ी रैलियां कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिक, बिल्डर और फिल्मी हस्तियां लगातार खौफ में जी रही हैं। आखिर सरकार कितने नागरिकों को इस तरह के विशेष सुरक्षा कवच मुहैया करा सकती है?”
संपादकीय में कहा गया है कि जो प्रशासन अपने प्रमुख नागरिकों की रक्षा नहीं कर सकता और बुनियादी अपराधी नेटवर्क को खत्म नहीं कर सकता, उसने अपना नैतिक अधिकार खो दिया है। साथ ही, उद्धव गुट ने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की।
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