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Wednesday,16-September-2026
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महामारी के बावजूद मई में जीएसटी राजस्व के रूप में 1 लाख करोड़ रुपये की वसूली

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 भारत का सकल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व संग्रह 1 लाख करोड़ रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर रहा है। यह मई 2021 में 1,02,709 करोड़ रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिसने कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के कारण हुए व्यवधानों के मद्देनजर कम संग्रह की सभी उम्मीदों को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि मई 2021 में जीएसटी राजस्व पिछले महीने में अर्जित किए गए 1.41 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड संग्रह से कम है, जो कि 2017 में नई कर प्रणाली की शुरुआत के बाद से सबसे अधिक दर्ज किया गया था। यह कर संग्रह भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा हैं, क्योंकि अधिकांश कर विशेषज्ञों को डर था कि महामारी और देश के विभिन्न हिस्सों में लॉकडाउन के कारण मई में जीएसटी संग्रह काफी कम रह सकता है।

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, मई 2021 की राजस्व वसूली पिछले साल के इसी महीने में जीएसटी राजस्व वसूली से 65 प्रतिशत अधिक है।

बयान में कहा गया है कि महीने के दौरान, वस्तुओ के आयात से राजस्व वसूली 56 प्रतिशत अधिक थी और घरेलू लेनदेन (सेवाओं के आयात सहित) से राजस्व वसूली पिछले वर्ष के इसी महीने के दौरान इन स्रोतों से प्राप्त राजस्व वसूली की तुलना में 69 प्रतिशत अधिक है।

बयान के अनुसार, मई 2021 में सकल वस्तु एवं सेवा कर-जीएसटी राजस्व के रूप में 1,02,709 करोड़ रुपये की वसूली की गई है, जिसमें से सीजीएसटी 17,592 करोड़ रुपये, एसजीएसटी 22,653 करोड़ रुपये और आईजीएसटी 53,199 करोड़ रुपये हैं (वस्तुओं के आयात पर वसूली गई 26,002 करोड़ रुपये राशि सहित) और उपकर 9,265 करोड़ रुपये (वस्तुओं के आयात पर वसूली गई 868 करोड़ रुपये की राशि सहित) शामिल हैं।

इन आंकड़े में 4 जून तक घरेलू लेनदेन की माध्यम से जीएसटी की वसूली राशि शामिल है, क्योंकि करदाताओं को कोविड महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर मई-2021 के लिए रिटर्न फाइलिंग में 15 दिनों के लिए देरी से रिटर्न दाखिल करने पर ब्याज में छूट/ब्याज के रूप में विभिन्न राहत उपाय दिए गए थे।

बयान में कहा गया है कि इस महीने के दौरान सरकार ने नियमित निपटान के रूप में आईजीएसटी से 15,014 करोड़ रुपये सीजीएसटी और 11,653 करोड़ रुपये एसजीएसटी को निपटान किया है।

यह लगातार आठवां महीना होगा, जब जीएसटी राजस्व वसूली 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गई है। अधिकांश राज्यों में कोविड महामारी के कारण सख्त लॉकडाउन जारी होने के बावजूद जीएसटी राजस्व वसूली में यह उपलब्धि प्राप्त हुई है।

इसके अलावा, 5 करोड़ से अधिक लेनदेन वाले करदाताओं को 4 जून तक अपना रिटर्न दाखिल करने का अवसर दिया गया था, हालांकि उन्हें 20 मई की नियति तिथि तक जीएसटी रिटर्न दाखिल करना होता है। 5 करोड़ से कम लेन देन वाले छोटे करदाताओं के पास अब भी जुलाई के पहले सप्ताह तक बिना किसी विलंब शुल्क और ब्याज के रिटर्न फाइल करने का समय है। इन करदाताओं से प्राप्त होने वाली आय को तब तक के लिए टाल दिया गया है।

वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि मई 2021 महीने के लिए वास्तविक राजस्व वसूली, इस प्रकार अधिक होगी और सभी विस्तारित तिथियों की समय सीमा समाप्त होने पर वास्तविक जीएसटी राजस्व वसूली ज्ञात हो सकेगी।

शार्दूल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के पार्टनर रजत बोस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मई 2021 के महीने के लिए संग्रह उम्मीद से अधिक है। हालांकि अधिकांश व्यवसाय अप्रैल में लॉकडाउन के कारण काम नहीं कर रहे थे, इसलिए यह आंकड़ा एक सुखद आश्चर्य के रूप में सामने आया है। यह देखते हुए ये संख्या और भी बढ़नी चाहिए कि ऐसे व्यवसायों के लिए सरकार द्वारा दी गई कोविड से संबंधित छूट के कारण कई छोटे व्यवसायों ने अभी तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं किया है।

डेलॉइट इंडिया के वरिष्ठ निदेशक एम.एस. मणि ने इस पर कहा कि अप्रैल 2021 के महीने में लेनदेन से संबंधित 1 लाख करोड़ रुपये के संग्रह से संकेत मिलता है कि लॉकडाउन का आर्थिक प्रभाव उम्मीद से बहुत कम रहा है। वित्त वर्ष 2022 में जीएसटी संग्रह पर प्रभाव की सीमा निर्धारित करने के लिए अगले महीने के संग्रह पर कड़ी नजर रखने की आवश्यकता है।

राजनीति

असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”

मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”

उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।

आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।

इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।

सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।

यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।

सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।

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राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

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सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।

सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।

सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।

सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।

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राजनीति

राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।

उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।

बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।

समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।

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