राष्ट्रीय समाचार
उत्तर भारत में पांच दिनों तक जारी रहेगा घना कोहरा
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने सोमवार को कहा कि अगले 4-5 दिनों के दौरान उत्तर भारत में घने कोहरे की स्थिति जारी रहने की संभावना है, जबकि अगले तीन दिनों के दौरान उत्तर भारत में अधिक ठंडे दिन की स्थिति बनी रहने और उसके बाद तीव्रता में कमी आने की संभावना है।
मौसम पूर्वानुमान एजेंसी ने अपने दैनिक बुलेटिन में कहा कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में समुद्र तल से 12.6 किमी ऊपर 130-150 समुद्री मील की जेट स्ट्रीम हवाएं चल रही हैं।
आईएमडी ने कहा, ”इससे ठंडी हवाएं नीचे आ रही हैं और उत्तर भारत में ठंडे दिन की स्थिति बढ़ रही है। अगले 3-4 दिनों के दौरान जेट स्ट्रीम की इसी तरह की तीव्रता जारी रहने की संभावना है। ताजा पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से गुरुवार से रविवार तक पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में छिटपुट बारिश/बर्फबारी होने की संभावना है।”
आईएमडी ने आगे कहा कि पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तरी राजस्थान, उत्तरी मध्य प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान 3-7 डिग्री सेल्सियस के बीच है।
आईएमडी ने कहा, ”दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तरी राजस्थान, उत्तरी मध्य प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में ये सामान्य से 2-4 डिग्री सेल्सियस नीचे है और पंजाब और हरियाणा में सामान्य है। आज सबसे कम न्यूनतम तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस दतिया में दर्ज किया गया।”
आईएमडी ने आगे चेतावनी दी कि पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में शनिवार सुबह के लिए घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।
”सोमवार रात और शनिवार सुबह के बीच दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर घने कोहरे की स्थिति होने की संभावना है। राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में शुक्रवार सुबह तक और उत्तरी मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बुधवार सुबह के लिए घने कोहरे की स्थिति बने रहने की संभावना है।”
आईएमडी ने कहा कि उत्तर पश्चिम भारत में अगले पांच दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है।
आईएमडी ने कहा, ”अगले पांच दिनों के दौरान देश के बाकी हिस्सों में न्यूनतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण बदलाव होने की संभावना नहीं है। मंगलवार तक पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और उत्तरी राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में शीत लहर चलने की संभावना है।”
आईएमडी ने कहा कि सोमवार और मंगलवार को उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर जमीन पर पाला पड़ने की संभावना है।
राष्ट्रीय समाचार
केरल में ओणम त्योहार के बीच बारिश की संभावना, 8 जिलों में येलो अलर्ट जारी

केरल में ओणम का उत्साह अपने चरम पर है, लेकिन मौसम इसमें खलल डाल सकता है। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बन रहे कम दबाव के क्षेत्र के कारण त्योहार के दिनों में राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है।
पहला ओणम 25 अगस्त को है और उत्सव का सबसे बड़ा दिन ‘थिरुवोणम’ 26 अगस्त को है, जिसके बाद तीसरा और चौथा ओणम मनाया जाएगा।
उधर, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आने वाले दिनों में कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। सोमवार को आठ जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में कासरगोड, कन्नूर, त्रिशूर, इडुक्की, पथानामथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम शामिल हैं।
मंगलवार को भी तीन जिलों में यह अलर्ट जारी रहेगा, जबकि राज्य के कई हिस्सों में मौसम के हालात अस्थिर रहने की उम्मीद है। इस समय बारिश की संभावना ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि राज्य ओणम उत्सव के मुख्य दौर की तैयारी कर रहा है।
सड़कों, बाजारों और शॉपिंग सेंटरों में त्योहार की रौनक है और परिवार पारंपरिक ओणम दावत व उत्सव की तैयारी कर रहे हैं। त्योहार के दौरान राज्य भर में सार्वजनिक कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन और लोगों का जमावड़ा भी होगा।
केरल में ओणम जितना पारिवारिक त्योहार है, उतना ही सार्वजनिक उत्सव भी है। इसी बीच, अधिकारी मौसम की बदलती स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं, खासकर इसलिए क्योंकि त्योहार अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहा है।
वहीं, बारिश के खतरे के साथ-साथ तटीय इलाकों के लिए भी चेतावनी जारी की गई है। भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना को देखते हुए केरल और लक्षद्वीप के तटों पर मछली पकड़ने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) ने ‘कल्लकाडल’ की घटना के कारण तटीय इलाकों में पानी भरने की संभावना के बारे में भी चेतावनी दी है। सोमवार रात 11.30 बजे तक केरल तट पर 0.9 से 1.3 मीटर ऊंची लहरें उठने की उम्मीद है।
तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को बहुत सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। चेतावनी वापस लिए जाने तक समुद्र तट पर जाने और समुद्र से जुड़ी मनोरंजक गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई है। मछली पकड़ने वाली नावों को भी सुरक्षित रूप से बंदरगाहों पर खड़े रहने की सलाह दी गई है।
राष्ट्रीय समाचार
आईएसओ 55001:2024 प्रमाणन हासिल करने वाला भारत का पहला मेट्रो संगठन बना डीएमआरसी

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएमआरसी) ने मुंबई मेट्रो लाइन-3 के एसेट मैनेजमेंट सिस्टम के लिए आईएसओ 55001:2024 प्रमाणन हासिल कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। डीएमआरसी भारत का पहला मेट्रो संगठन बन गया है, जिसे परिसंपत्ति प्रबंधन के इस नवीनतम अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप प्रमाणित किया गया है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि यह उपलब्धि केवल एक प्रमाणन नहीं, बल्कि मेट्रो परिसंपत्तियों के प्रबंधन में रोकथाम-आधारित देखभाल से आगे बढ़कर रणनीतिक, जोखिम-आधारित और जीवन-चक्र आधारित परिसंपत्ति प्रबंधन की दिशा में डीएमआरसी की महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है।
आईएसओ 55001:2024 के तहत परिसंपत्तियों का प्रबंधन केवल उनके अनुरक्षण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि प्रदर्शन, जोखिम, लागत और दीर्घकालिक जीवन-चक्र को संगठन के समग्र उद्देश्यों के साथ जोड़कर किया जाता है। इससे परिसंपत्तियों की विश्वसनीयता एवं उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर उपयोग और दीर्घकालिक लागत-प्रभावशीलता में भी सहायता मिलती है।
डीआरएमसी ने ने यह प्रमाणन रिकॉर्ड समय में हासिल किया है। इसके लिए रणनीतिक संपत्ति प्रबंधन योजना (एसएएमपी) को मजबूत करने, परिसंपत्ति प्रबंधन के उद्देश्यों को संगठनात्मक प्राथमिकताओं से जोड़ने, जोखिम आकलन एवं जीवन-चक्र नियंत्रणों को सुदृढ़ करने और अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया। संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था की निरंतर निगरानी केपीआईएस, ऑडिट और प्रबंधन समीक्षा के माध्यम से की जा रही है।
विज्ञप्ति के अनुसार, डीएमआरसी मुंबई मेट्रो लाइन-3 के 33.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के परिचालन और रक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहा है, जो कोलाबा, बांद्रा और सीपज को जोड़ता है। इसके अंतर्गत रोलिंग स्टॉक, ट्रैक्शन, सिग्नलिंग, टेलीकम्युनिकेशन, स्टेशन, लिफ्ट, एस्केलेटर, ट्रैक और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अनेक महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों का सुरक्षित एवं कुशल प्रबंधन शामिल है।
आईएसओ 55001:2024 प्रमाणन के साथ डीएमआरसी ने सुरक्षा, विश्वसनीयता, दक्षता और स्थायित्व के अपने मूल उद्देश्यों को परिसंपत्ति प्रबंधन की एक वैश्विक रूप से मान्य प्रणाली के साथ और मजबूती से जोड़ा है।
यह उपलब्धि भारत के शहरी रेल क्षेत्र में वैज्ञानिक, संरचित और जीवन-चक्र आधारित परिसंपत्ति प्रबंधन के लिए एक नया बेंचमार्क स्थापित करती है। साथ ही, यह डीएमआरसी की उस क्षमता को भी प्रदर्शित करती है जिसके माध्यम से वह देश के विभिन्न शहरों में विश्वस्तरीय मेट्रो ओ एंड एम एवं परिसंपत्ति प्रबंधन विशेषज्ञता उपलब्ध करा सकता है।
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7,756 मीटर ऊंची माउंट कामेट फतह करेंगे भारत-अर्जेंटीना के 35 जवान

भारत और अर्जेंटीना की सेना के संयुक्त सैन्य सहयोग को नई ऊंचाई मिलने जा रही है। दोनों देशों के 35 जवानों का एक संयुक्त पर्वतारोहण दल 7,756 मीटर ऊंची ‘माउंट कामेट’ पर चढ़ाई के लिए रवाना हो गया है। ‘माउंट कामेट’ उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है।
गौरतलब है कि यह चोटी भारत की तीसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। इस चुनौतीपूर्ण अभियान को शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर से लेफ्टिनेंट जनरल अजय रामदेव ने हरी झंडी दिखाई। वह महानिदेशक एकीकृत प्रशिक्षण और आर्मी सर्विस कोर के कर्नल कमांडेंट हैं। अभियान का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल चिराग चटर्जी कर रहे हैं। दल में भारतीय सेना के 25 और अर्जेंटीना की सेना के 10 सैनिक शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों का यह संयुक्त पर्वतारोहण माउंट कामेट पर अभियान आसान नहीं होगा। यह पर्वतीय चोटी अत्यधिक ऊंचाई पर है जहां ऑक्सीजन की कमी है। इसके साथ ही पहाड़ी कठिन भूभाग और मौसम में अचानक बदलाव सैनिकों के सामने बड़ी चुनौती होंगे। अभियान के दौरान उनकी शारीरिक सहनशक्ति, तकनीकी पर्वतारोहण क्षमता और आपसी तालमेल की परीक्षा होगी। सेना के मुताबिक दोनों सेनाओं इससे पहले भी संयुक्त पर्वतारोहण अभियान किया है।
माउंट कामेट अभियान भारत और अर्जेंटीना की सेनाओं के बीच अब यह तीसरा संयुक्त पर्वतारोहण अभियान है। इससे पहले दोनों सेनाओं ने जनवरी 2025 में अर्जेंटीना की माउंट एकोंकागुआ पर संयुक्त चढ़ाई की थी। इसके बाद अगस्त 2025 में लद्दाख की 7,077 मीटर ऊंची माउंट कुन पर भी संयुक्त अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। अब माउंट कामेट अभियान दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ते सैन्य-से-सैन्य सहयोग और पेशेवर संबंधों की अगली कड़ी है।
अभियान को रवाना करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल अजय रामदेव ने कहा कि ऐसे संयुक्त अभियान केवल पर्वतारोहण तक सीमित नहीं हैं। इनके जरिए मित्र देशों की सेनाओं के बीच आपसी विश्वास, सौहार्द और पेशेवर समझ मजबूत होती है।
उन्होंने अभियान दल को सफल शिखर आरोहण और सुरक्षित वापसी के लिए शुभकामनाएं दीं। माउंट कामेट की कठिन चढ़ाई अब भारत और अर्जेंटीना के सैनिकों के साहस और कौशल की परीक्षा लेगी। साथ ही, बर्फ से ढकी यह ऊंची चोटी दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ती दोस्ती और सहयोग की नई मिसाल भी बनेगी।
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