व्यापार
डेल ने भारत में 2020 गेमिंग लैपटॉप के पोर्टफोलियो का अनावरण किया
डेल टेक्नोलॉजीज और इसकी सहयोगी कंपनी-एलाइनवेयर ने गुरुवार को भारतीय बाजार के लिए नवीनतम 2020 गेमिंग लैपटॉप का अनावरण किया। एलाइनवेयर एम15 आर3 की कीमत 199,990 रुपये से शुरू होती है, डेल जी5 एसई को 74,990 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, डेल जी5 15 की कीमत 82,590 है और डेल जी3 15 की कीमत 73,990 से शुरू होगी।
डेल टेक्नोलॉजीज इंडिया में कंज्यूमर एंड स्मॉल बिजनेस के लिए प्रबंध निदेशक और उपाध्यक्ष राज कुमार ऋषि ने कहा, अगर आप पीसी गेमिंग के मामले में नए हैं या मोबाइल से अब पीसी की ओर मूव कर रहे हैं तो डेल जी सीरीज पोर्टफोलियो शुरूआत करने के लिए बेहतरीन है।
एलाइनवेयर एम15 आर3 क्रायो-टेक थर्मल टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित है जो न्यू वैपर कूलिंग सिस्टम के साथ आता है।
सीईएस 2020 में पहले पेश किए गए डेल जी5 15 एसई, डेल के जी सीरीज पोर्टफोलियो में नवीनतम है।
यह डेल का पहला जी सीरीज लैपटॉप है जिसमें एएमडी राइजेन 4000 एच-सीरीज मोबाइल प्रोसेसर (8-कोर, 16-थ्रेड तक) की सुविधा है जिसे नए एएमडी रेडॉन आरएक्स 5600एम जीपीयू के साथ डेस्कटॉप ग्रेड परफॉर्मेंस देने के लिए जोड़ा गया है।
चिप्स एएमडी स्मार्टशिफ्ट तकनीक का उपयोग जरूरत के हिसाब से परफॉर्मेंस को अनुकूलित करने के लिए समझदारीपूर्वक राइजेन प्रोसेसर और रेडॉन जीपीयू के बीच पावर को शिफ्ट करके करते हैं।
डेल जी5 15 टेंथ जेनरेशन इंटेल कोर आई7 प्रोसेसर के साथ आता है। गेमिंग सेशन के दौरान गर्मी को फैलने से रोकने के लिए इसमें बड़े कूलिंग वेंट्स और एक डुअल-फैन कूलिंग तकनीक है।
कंपनी के मुताबिक, डेल जी5 उन गेमर्स के लिए है जिन्हें खासतौर पर गेमिंग के लिए एक पीसी की तलाश है। यह 1650 टीआई ग्राफिक्स के साथ आता है ताकि परफॉर्मेंस के साथ कोई समझौता न करना पड़े।
व्यापार
पश्चिम एशिया तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर, ब्रेंट क्रूड में 8 प्रतिशत की वृद्धि

नई दिल्ली, 3 अप्रैल : वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को तेज उछाल देखा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर अगले 2-3 हफ्तों में संभावित सैन्य हमले की चेतावनी देने के बाद बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 8 प्रतिशत बढ़कर 109.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) फ्यूचर्स 111.54 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
सप्ताह के दौरान यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड में पिछले शुक्रवार के मुकाबले 11.94 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि ब्रेंट क्रूड में इसी अवधि में 3.14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब पांचवें हफ्ते में पहुंच गया है, जिससे वैश्विक बाजार से हर दिन लाखों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते ऊर्जा कीमतें कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से गुजरने वाली सप्लाई पर निर्भर देशों में ईंधन की कमी भी देखने को मिल रही है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।
इस हफ्ते दिए गए अपने भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर ‘बेहद कड़ा प्रहार’ कर सकता है। हालांकि, उन्होंने इस अहम समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की कोई स्पष्ट योजना नहीं बताई और अन्य देशों से इसे सुचारू करने की जिम्मेदारी लेने को कहा।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों, भारतीय रुपए और उभरते बाजारों में विदेशी निवेश पर दबाव बना रह सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर स्थिति में सुधार होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और करेंसी में स्थिरता आ सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने पर बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और बढ़ेगी।
कीमती धातुओं की बात करें तो कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स 0.48 प्रतिशत गिरकर 4,679.70 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था, क्योंकि निवेशक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश विकल्प तलाश रहे हैं।
इस बीच, गुड फ्राइडे के कारण घरेलू कमोडिटी बाजार सुबह के सत्र में बंद रहे।
वहीं, पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव और करेंसी में उतार-चढ़ाव के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए, जहां दोनों प्रमुख बेंचमार्कों – सेंसेक्स और निफ्टी – में कमजोरी रही।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका ने पेटेंट वाली दवाओं पर लगाया 100 प्रतिशत टैरिफ

TRUMP
वॉशिंगटन, 3 अप्रैल : संयुक्त राज्य अमेरिका आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों और विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर भारी निर्भरता को कारण बताया है।
जारी घोषणा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दवाइयां और उनसे जुड़े घटक “इतनी मात्रा में और ऐसी परिस्थितियों में अमेरिका में आयात किए जा रहे हैं कि वे संयुक्त राज्य की राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचा सकते हैं।”
यह घोषणा पेटेंट दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों (एपीआई) को निशाना बनाती है। ये नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं और सैन्य तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी कि विदेशी उत्पादन पर निर्भरता भू-राजनीतिक या आर्थिक संकट के दौरान “जीवन रक्षक दवाओं” की उपलब्धता को बाधित कर सकती है।
आदेश के तहत, अधिकांश आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत का मूल्य-आधारित (एड वैलोरेम) शुल्क लगाया जाएगा। जो कंपनियां उत्पादन को अमेरिका में स्थानांतरित करने का वादा करेंगी, उन्हें 20 प्रतिशत का कम शुल्क देना होगा, जो चार साल बाद बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा।
घोषणा में प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के लिए अलग-अलग शुल्क दरों का भी उल्लेख है। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्ज़रलैंड से आयात पर लगभग 15 प्रतिशत का कम शुल्क लगेगा, जबकि अनाथ दवाएँ, परमाणु दवाएँ और जीन थेरेपी जैसी कुछ विशेष श्रेणियाँ इस शुल्क से मुक्त रहेंगी।
फिलहाल जेनेरिक दवाओं और बायोसिमिलर्स को इस शुल्क व्यवस्था से बाहर रखा गया है। घोषणा में कहा गया, “जेनेरिक दवाएँ और उनसे जुड़े घटक… इस समय शुल्क के अधीन नहीं होंगे।”
अधिकारियों ने बताया कि यह नीति घरेलू दवा निर्माण को मजबूत करने और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। व्हाइट हाउस में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि ध्यान केवल शुल्क पर नहीं बल्कि उत्पादन के दीर्घकालिक पुनर्गठन पर भी है।
उन्होंने कहा, “मुद्दा सिर्फ शुल्क दर का नहीं है बल्कि उन समझौतों का है जो हम देशों और कंपनियों के साथ कर रहे हैं ताकि आपूर्ति शृंखलाएँ सुरक्षित रहें और उत्पादन अमेरिका में हो।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि कंपनियां पहले से ही इस नीति पर प्रतिक्रिया दे रही हैं। उन्होंने अमेरिका में हो रहे निवेश की ओर इशारा करते हुए कहा, “हम नए फार्मास्युटिकल संयंत्रों के निर्माण में ठोस प्रगति देख रहे हैं।”
ये शुल्क 31 जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे और कुछ कंपनियों को मौजूदा समझौतों के आधार पर समयसीमा में छूट दी जाएगी।
इस फैसले का वैश्विक दवा व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है, खासकर उन देशों पर जो तैयार दवाओं और कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।
भारत और चीन दुनिया में जेनेरिक दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों के सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल हैं, जो अमेरिकी बाजार का बड़ा हिस्सा आपूर्ति करते हैं। हालांकि फिलहाल जेनेरिक दवाएं छूट में हैं लेकिन भविष्य में शुल्क बढ़ने पर वैश्विक दवा कीमतों और आपूर्ति शृंखलाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।
इस मामले में लागू किया गया ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 अमेरिकी राष्ट्रपति को उन आयातों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देती है जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है। इस प्रावधान का पहले स्टील और एल्यूमिनियम पर शुल्क लगाने के लिए उपयोग किया गया था और अब इसे दवाओं तक बढ़ाना व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
व्यापार
‘गुड फ्राइडे’ के अवसर पर शुक्रवार को शेयर बाजार में छुट्टी, इक्विटी से लेकर कमोडिटी तक सभी में कारोबार बंद

मुंबई, 3 अप्रैल : आज शुक्रवार यानी 3 अप्रैल 2026 को गुड फ्राइडे के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बंद हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर किसी भी प्रकार की ट्रेडिंग गतिविधि नहीं होगी। बाजार में यह अप्रैल महीने की पहली और इस सप्ताह की दूसरी छुट्टी है। इससे पहले 31 मार्च को महावीर जयंती के कारण भी बाजार बंद रहा था।
स्टॉक एक्सचेंज के अवकाश कैलेंडर के अनुसार, शुक्रवार को इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, एनडीएस-आरएसटी और ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट के साथ-साथ कमोडिटी डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (ईजीआर) सेगमेंट में भी ट्रेडिंग पूरी तरह बंद रहेगी।
निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि अब बाजार सोमवार यानी 6 अप्रैल से फिर से सामान्य रूप से खुलेगा और सभी ट्रेडिंग गतिविधियां शुरू हो जाएंगी, क्योंकि 4 और 5 अप्रैल को शनिवार और रविवार पड़ने के कारण बाजार में साप्ताहिक अवकाश रहेगा।
वैश्विक स्तर पर भी गुड फ्राइडे के कारण प्रमुख बाजारों में छुट्टी रहेगी। अमेरिका सहित कई एशियाई और यूरोपीय शेयर बाजार शक्रवार को बंद रहेंगे, जिससे वैश्विक ट्रेडिंग पर भी असर देखने को मिलेगा।
कमोडिटी बाजार की बात करें तो देश का प्रमुख एक्सचेंज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) भी आज पूरी तरह बंद रहेगा। इसमें सुबह और शाम दोनों सत्रों में ट्रेडिंग नहीं होगी, जिसके चलते सोना, चांदी, कच्चा तेल, तांबा और अन्य धातुओं में कोई कारोबार नहीं होगा।
शेयर बाजार में अप्रैल महीने में कुल दो हॉलिडे हैं। आज गुड फ्राइडे के बाद अगली छुट्टी 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के मौके पर होगी।
साल 2026 में कुल 20 स्टॉक मार्केट छुट्टियां निर्धारित हैं, जिनमें से 4 वीकेंड पर पड़ती हैं। यानी नियमित कारोबारी दिनों में बाजार कुल 16 दिन बंद रहेगा, जिनमें से अब तक 5 छुट्टियां हो चुकी हैं।
कुल मिलाकर, निवेशकों के लिए आज का दिन पूरी तरह अवकाश का है, और बाजार की गतिविधियां अब अगले कारोबारी दिन यानी सोमवार से ही देखने को मिलेंगी।
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
महाराष्ट्र9 months agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
-
अनन्य3 years agoउत्तराखंड में फायर सीजन शुरू होने से पहले वन विभाग हुआ सतर्क
-
न्याय2 years agoमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ हाईकोर्ट में मामला दायर
-
अपराध4 years agoबिल्डर पे लापरवाही का आरोप, सात दिनों के अंदर बिल्डिंग खाली करने का आदेश, दारुल फैज बिल्डिंग के टेंट आ सकते हैं सड़कों पे
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
अपराध3 years agoपिता की मौत के सदमे से छोटे बेटे को पड़ा दिल का दौरा
