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Saturday,01-August-2026
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दिल्ली सरकार की परामर्श सेवा फ्रंटलाइन कर्मियों की मदद में विफल

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दिल्ली सरकार की मनोरोग टेली काउंसलिंग सेवा, ‘समर्थन’, उन डॉक्टरों, स्वास्थ्य देखभाल और फ्रंटलाइन कर्मियों के लिए है जो कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में कड़ी मशक्कत कर रहे हैं, हालांकि इस सेवा में इन कर्मियों के फोन बहुत कम आ रहे हैं, और जिस उद्देश्य से इसे खोला गया, उसमें यह नाकाम साबित होती मालूम पड़ रही है।

टेली काउंसलिंग को लॉन्च होने के महीने भर के अंदर ही अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली है। औसतन, परामर्श के लिए हेल्पलाइन सेवा पर कॉल करने वाले लोगों की संख्या एक दिन में एक से भी कम है।

पिछले तीस दिनों में, केवल 20 लोगों ने सेवा का लाभ उठाया है। रिकॉर्ड के अनुसार, 12 डॉक्टर टेली-परामर्श प्रदान करने के लिए स्वेच्छा से काम कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि पूरे महीने में किसी काउंसलर ने दो कॉल भी अटेंड नहीं किया। अधिकारियों ने कहा कि हेल्पलाइन को मिली अपर्याप्त प्रतिक्रिया के पीछे कई कारक हैं। मानसिक तनाव में मदद पाने को लेकर इससे जुड़े समाजिक लांछन और इस परामर्श सेवा को सही से प्रचारित नहीं किया जाना भी लोगों के इसका लाभ नहीं उठा पाने की एक महत्वपूर्ण वजह है।

सेवा 17 जून को ‘इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज’ (आईएचबीएएस) के सहयोग से शुरू की गई थी। इसके अलावा, दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए), दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी), और दिल्ली साइकिएट्रिक सोसाइटी ने भी इसमें सहयोग किया है। सेवा को फ्रंटलाइन कर्मियों को तनाव और चिंता से निपटने में मदद करने के लिए शुरू किया गया था, क्योंकि कोरोनोवायरस महामारी उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है।

यह हेल्पलाइन सोमवार से शनिवार तक सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक उपलब्ध है। कॉलर 09868396802 या 09868396859 पर डायल कर सकते हैं।

आईएचबीएएस के निदेशक प्रोफेसर निमेश देसाई, जो टेली-काउंसलिंग सेवा का समन्वय कर रहे हैं, ने कहा कि फ्रंटलाइन कर्मियों को इस हेल्पलाइन के बारे में जानकारी नहीं है जसेस सेवा तक उनकी पहुंच नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा, “वे (फ्रंटलाइन वर्कर्स) नहीं जानते कि ऐसी कोई चीज मौजूद है। इस तरह के संकटपूर्ण समय में, उन्हें काउंसलिंग और सपोर्ट की जरूरत होती है, जिसका वे फायदा इसलिए नहीं उठा पा रहे, क्योंकि वे इस सेवा से अनजान है।”

देसाई ने कहा कि अगर सरकार ने इस सेवा का और प्रचार करने की कोशिश की होती तो ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकते।

डीएमए के अध्यक्ष डॉक्टर गिरीश त्यागी ने कहा कि उनका एसोसिएशन सरकार से संपर्क करेगा और टेली-काउंसलिंग सेवा के प्रचार के लिए अभियान शुरू करने का अनुरोध करेगा।

जहां पुलिस और पत्रकारों सहित सभी फ्रंटलाइन कर्मियों के लिए टेली-काउंसलिंग सेवा खुली है, लेकिन केवल स्वास्थ्य देखभाल कर्मी ही इसका लाभ उठा पाए हैं। डॉक्टरों ने कहा कि फोन करने वालों ने लंबे समय तक काम करने और मास्क और पीपीई किट की गुणवत्ता संबंधी मुद्दों और खुद के बीमारी के संपर्क में आने और फिर परिवार को ट्रांसिमट करने जैसे डर को साझा किया था।

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नीट पेपर लीक मामला : दिल्ली की अदालत ने आरोपी शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई

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नई दिल्ली, 6 जून। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनार को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 13 मई को सीबीआई ने शुभम खैरनार को नासिक से गिरफ्तार किया था।

आरोपी शुभम खैरनार की शनिवार को न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद उसे राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई।

शुभम खैरनार, महाराष्ट्र के नासिक जिले के नंदगांव का रहने वाला है। उसने मध्य प्रदेश की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से बीएएमएस (आयुर्वेद) की पढ़ाई की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का आरोप है कि उसने पुणे के एक संदिग्ध से यह पेपर 10 लाख में खरीदा और इसे हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख में बेच दिया।

बता दें कि नीट पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जानकारी सामने आई कि सीबीआई अधिकारियों ने शुक्रवार को कल्याण के म्हारल क्षेत्र में रहने वाली एक छात्रा से भी पूछताछ की।

सूत्रों ने बताया कि जांच टीम ने म्हारल इलाके में छात्रा के घर पहुंचकर उसका बयान दर्ज किया। सूत्रों का दावा है कि संबंधित छात्रा नाशिक की एक अन्य छात्रा के संपर्क में थी, जिसकी जांच के दौरान उसका मोबाइल नंबर जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में आया। इसी आधार पर सीबीआई ने उससे पूछताछ की है। हालांकि, सीबीआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। एजेंसियों की शुरुआती जांच में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। इसी आधार पर परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया और अब इसे नए सिरे से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी।

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कथित बांग्लादेशियों के जाली और फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों की जांच शुरू; किरीट सोमैया के आरोपों के बाद मुंबई पुलिस हरकत में।

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मुंबई: भाजपा नेता किरीट सौम्या ने मुंबई में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था, जिसके बाद मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच भी एक्शन में आ गई है। मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट के मामलों में कार्रवाई करने के लिए एक एसआईटी टीम बनाने को मंजूरी दे दी है और एक आदेश भी जारी किया है। किरीट सौम्या ने पहले इस मामले की जांच की मांग की थी। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने अब एक आदेश जारी कर यह जिम्मेदारी मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी को दी है, जो इन मामलों की जांच करेगी। मुंबई शहर से अब तक एक हजार से ज्यादा बांग्लादेशी अप्रवासियों को निकाला जा चुका है, इसके बावजूद किरीट सौम्या ने आरोप लगाया है कि शहर में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रहते हैं और यह देश की अखंडता के लिए खतरा है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में धार्मिक नफरत फैलाना भी शुरू कर दिया है। मुंबई मुंबई पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बर्थ सर्टिफिकेट और शिकायत की जांच के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी बनाई है। इस एसआईटी के बारे में डिपार्टमेंटल ऑर्डर जारी करते हुए मुंबई पुलिस कमिश्नर ने साफ किया है कि इस टीम को जॉइंट पुलिस कमिश्नर क्राइम लक्ष्मी गौतम हेड करेंगी, जबकि एडिशनल कमिश्नर क्राइम मुंबई, एडिशनल कमिश्नर स्पेशल ब्रांच, डीसीपी डिटेक्शन क्राइम और असिस्टेंट कमिश्नर क्राइम इस टीम का हिस्सा हैं। ऑर्डर में कहा गया है कि यह एसआईटी टीम बड़े पैमाने पर फर्जी डॉक्यूमेंट्स और बर्थ सर्टिफिकेट में फर्जी सर्टिफिकेट की शिकायतें सामने आने के बाद बनाई गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का मकसद डॉक्यूमेंट्स की जांच करके जरूरी एक्शन लेना है। यह ऑर्डर मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने जारी किया है।

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नासिक: जालसाज अशोक खराट की जांच में अहम नतीजा, कई जगहों पर छापेमारी के दौरान जानवरों के अवशेष और महिलाओं के बाल बरामद, बली देने का संदेह

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मुंबई: नासिक के धोखेबाज अशोक खरात की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और SIT ने कई जगहों पर छापेमारी की है। SIT को यहां से जानवरों के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन SIT ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या ये सच में जानवरों के अवशेष हैं या फिर मानव बलि का मामला है। इस मामले में SIT ने अवशेषों को अपने कब्जे में भी ले लिया है, वहीं शक है कि अशोक खरात अघोरी करता था और इसी प्रथा के चलते उसने मानव बलि भी दी होगी। इस बारे में SIT की जांच सही दिशा में जा रही है। नासिक के धोखेबाज अशोक खरात मामले में SIT की जांच में कई अहम नतीजे भी निकले हैं। SIT टीम की हेड तेजस्वी सतपोवे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर काम कर चुकी हैं और उनकी जांच कर चुकी हैं। इसी तरह अब नासिक मामले में भी जांच चल रही है। तेजस्वी सतपोवे की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता किसान हैं। वह अहमदनगर के शेगांव की रहने वाली हैं। तेजस्वी सतपोवे ने अब खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अशोक खरात के कई बड़े नेताओं और अफसरों से भी कनेक्शन थे। महिला आयोग की हेड रूपाली चाकणकर से भी उनके कनेक्शन थे, इसी आधार पर रूपाली को इस्तीफा देना पड़ा था। SIT जांच में जानवरों के अवशेषों के साथ महिलाओं के बाल भी मिले थे। अब SIT टीमें पता लगा रही हैं कि ये बाल किसके हैं, क्या ये एक महिला के बाल हैं या कई महिलाओं के बाल हैं।

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