अपराध
दिल्ली में अपराध का आंकड़ा बरकरार, बदमाशों को लॉकडाउन और कोरोना का डर नहीं

देश और दिल्ली में लगातार कोरोना वायरस का खतरा बढ़ता जा रहा है, लेकिन ऐसी महामारी में भी बदमाशों के हौसले बुलंद है। उम्मीद थी कि लॉकडाउन में अपराधों की संख्या में कमी आएगी, लेकिन आंकड़े साफ बताते हैं कि अपराध के मामलों में कमी नहीं आई है। इसी क्रम में बुधवार/गुरुवार की आधी रात को प्रीत विहार इलाके में रोड रेज के चलते बाइक सवार बदमाशों ने आई-20 कार में जा रहे दो युवकों पर गोली चला दी, जिससे ड्राइवर की मौत हो गई। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। पहले के मुकाबले सड़कों पर अब लोग कम निकल रहें हैं, इसके बावजूद भी ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब तो स्ट्रीट क्राइम के साथ-साथ राजधानी दिल्ली में ऑनलाइन क्राइम भी धड़ल्ले से हो रहे हैं।
दिल्ली में लगातार बढ़ते अपराध को देखते हुए उपराज्यपाल अनिल बैजल ने गुरुवार को विशेष पुलिस आयुक्त ( कानून और व्यवस्था) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक भी की। उपराज्यपाल ने दिल्ली पुलिस को स्मार्ट पेट्रोलिंग द्वारा स्ट्रीट क्राइम और संवेदनशील वर्गों जैसे वरिष्ठ नागरिकों, अकेली महिलाओं की सुरक्षा पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। साथ ही सुरक्षा दिशा-निदेशरें का पालन करने की भी सलाह दी।
उन्होंने बैठक में पुलिस से कहा, “अपने सभी मोबिलिटी साधनों से ज्यादा से ज्यादा गश्त करें और अधिक से अधिक क्षेत्रों की सुरक्षा करें। साथ ही स्ट्रीट क्राइम विशेषकर स्नैचिंग और लिफ्टिंग पर ध्यान केंद्रित कर पुलिस पिकेट को पुनर्व्यवस्थित करें।”
पुलिस सूत्रों की माने तो कोरोना के चलते करीबन 2500 से ज्यादा बदमाशों को जेल से रिहा किया गया था। आंकड़ों की बात करें तो दिल्ली में 31 मई 2020 तक स्नैचिंग के 2141 मामले, रॉबरी के 596 मामले और जघन्य अपराध के 2205 मामले सामने आ चुके है। पिछले साल के मुताबिक इन आंकड़ों में ज्यादा फर्क नहीं है।
दिल्ली में साइबर क्राइम का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है। एक ओर जहां लॉकडाउन में लोगों ने ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन लेनदेन की, तो वहीं साइबर अपराधियों ने इसे अपना हथियार बना डाला। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि लॉकडाउन के दौरान साइबर अपराध को लेकर आने वाली शिकायतों में करीब 80 से 90 फीसदी का इजाफा हुआ है। पिछले साल की तुलना में इस साल ऑनलाइन अपराध की शिकायतों में 30 से 40 फीसदी का इजाफा हुआ है।
लॉकडाउन के चलते सड़कों पर भी गिने चुने लोग निकला करते थे। जिसका फायदा अपराधियों को भी मिला और अकेले व्यक्ति को देख उसके साथ लूटपाट जैसे घटना को अंजाम दिया गया। कोरोना संक्रमण की चपेट में पुलिस विभाग भी आया, जिसका फायदा अपराधियों को भी मिला है।
राजधानी दिल्ली में स्ट्रीट क्राइम को देखते हुए 19 जून को दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने आला अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक भी की थी। दिल्ली की आठ डिस्ट्रिक्ट में ‘रोको टोको’ अभियान भी शुरू किया गया। साथ ही उन्होंने कोरोना से अपना बचाव करते हुए स्ट्रीट क्राइम पर भी जल्द काबू पाने की हिदायत भी दी थी।
अपराध
मुंबई लॉरेंस बिश्नोई गैंग के पांच सदस्य गिरफ्तार, बिश्नोई गैंग को मुंबई क्राइम ब्रांच का झटका

मुंबई: मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक बड़े ऑपरेशन में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के पांच शूटरों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। इन शूटरों के कब्जे से 5 रिवॉल्वर और 21 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। मुंबई पुलिस भी इन शूटरों से पूछताछ कर रही है। पुलिस ने घटना को अंजाम देने से पहले ही हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया और घटना को टाल दिया। मुंबई क्राइम ब्रांच ने इन पांचों को अंधेरी इलाके से गिरफ्तार किया है। वे यहां बड़ी तोड़फोड़ की वारदात को अंजाम देने के इरादे से आए थे, लेकिन पुलिस ने उससे पहले ही वारदात को नाकाम कर दिया।
गिरफ्तार आरोपियों में विकास ठाकुर, समित दिलावर, देवेन्द्र रूपेश सक्सैना, श्रेया सुरेश यादव, विवेक गुप्ता शामिल हैं। विकास ठाकुर वर्सोवा अंधेरी के रहने वाले हैं, समित मुकेश कुमार दिलावर सोनीपत, हरियाणा के रहने वाले हैं, देवेन्द्र रूपेश सक्सेना मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं, श्रेया सुरेश यादव जगदीशपुर, बिहार की रहने वाली हैं और विवेक कुमार गुप्ता रामपुर, राजस्थान के रहने वाले हैं।
उनके कब्जे से हथियार बरामद किए गए हैं और अपराध शाखा ने उनके खिलाफ बीएनएस की धारा 3 और 25, धारा 55 और 61 (2) और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। क्राइम ब्रांच इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी हथियार कहां से लाए थे।
सलमान खान की शूटिंग के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग मुंबई में सक्रिय होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मुंबई क्राइम ब्रांच की सख्त कार्रवाई के चलते गैंग की कमर टूट चुकी है और अब क्राइम ब्रांच ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को बड़ा झटका दिया है और इसके पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। अपराध शाखा मामले की आगे जांच कर रही है।
अपराध
मुंबई मलाड गुड़ी पड़वा हिंसा: तीन गिरफ्तार, स्थिति शांतिपूर्ण, पुलिस अलर्ट, डीसीपी अस्मिता हॉटल

मुंबई: मलाड में गुड़ी पड़वा पर हुई हिंसा के बाद अब यहां हालात शांतिपूर्ण हैं, लेकिन इसके बावजूद इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है और इसे हिंदू-मुस्लिम रंग देकर सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की गई है। गुड़ी पड़वा के अवसर पर नूरानी मस्जिद के सामने से गुजर रहे पांच नाबालिगों पर एक स्थानीय युवक ने हमला कर दिया। इस मामले में पुलिस ने स्थिति पर काबू पा लिया है और अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनके खिलाफ दंगा फैलाने का मामला भी दर्ज किया गया है। भीड़ की भी पहचान की जा रही है।
सीसीटीवी के आधार पर आरोपियों की पहचान कर ली गई है और तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके साथ ही स्थिति पर नियंत्रण पाने के बाद पुलिस ने मलाड को हाई अलर्ट पर रखा है और सांप्रदायिक तत्वों पर भी नजर रख रही है। अब सांप्रदायिक तत्वों ने मुंबई में माहौल बिगाड़ने की कोशिश शुरू कर दी है, ऐसे में पुलिस सोशल मीडिया पर भी नजर रख रही है।
स्थानीय डीसीपी स्मिता पाटिल ने बताया कि मलाड मालोनी में स्थिति शांतिपूर्ण है और उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज व अन्य फुटेज की जांच के बाद गिरफ्तारियां भी जारी हैं। इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें से एक शरण भी है, जिसने नाबालिग पर हमला किया था। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल ने पुलिस को अल्टीमेटम दिया है कि अगर उन्होंने जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस मामले में डीसीपी ने सभी जगहों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और अफवाहों पर ध्यान न देने और सोशल मीडिया पर असत्यापित वीडियो या विवादित पोस्ट शेयर न करने की अपील भी की है। मुंबई में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अलर्ट पर है और मुंबई पुलिस आयुक्त विवेक पंचालकर ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।
गुड़ी पड़वा पर हुई हिंसा पर संजय ब्रोपम का ज़हरीला हमला
गुड़ी पड़वा पर हुई हिंसा के बाद संजय निरुपम ने पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, उन्होंने पुलिस पर कार्रवाई में देरी करने और आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मुंबई पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मुख्य आरोपी शरण और उसकी मां हिंदुओं को उनके त्योहार नहीं मनाने देती हैं और यहां उनकी गुंडागर्दी चलती है। संजय निरुपम ने मुसलमानों को जिहादी कहा है. संजय निरुपम ने कहा कि पुलिस ने तब कार्रवाई की जब उन पर दबाव डाला गया।
अंतरराष्ट्रीय
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार : विदेश मंत्री जयशंकर ने बताई संख्या, कहा – ‘हमारी कड़ी नजर’

नई दिल्ली, 28 मार्च। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत पाकिस्तान में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर करीब से नजर रख रहा है और इन मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है।
उनकी यह टिप्पणी संसद के चल रहे बजट सत्र के दौरान लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान आई।
जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार के बारे में चिंताओं को संयुक्त राष्ट्र में उठाया गया है ताकि इस मामले पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया जा सके।
विदेश मंत्री ने कहा, “हम पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार पर बहुत बारीकी से नजर रखते हैं। उदाहरण के तौर पर, मैं सदन को बताना चाहूंगा कि सिर्फ फरवरी महीने में ही हिंदू समुदाय के खिलाफ़ अत्याचार के 10 मामले सामने आए। उनमें से सात अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन से संबंधित थे। दो किडनैपिंग से संबंधित थे। एक होली मना रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से संबंधित था।”
विदेश मंत्री ने अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा के मामलों का भी विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में सिख समुदाय से संबंधित तीन घटनाएं हुईं। एक मामले में, एक सिख परिवार पर हमला किया गया। दूसरे मामले में, एक पुराने गुरुद्वारे को फिर से खोलने के कारण एक सिख परिवार को धमकाया गया। समुदाय की एक लड़की के साथ अपहरण और धर्मांतरण का मामला भी सामने आया।”
पाकिस्तान में अहमदिया और ईसाई समुदायों के खिलाफ अन्याय जिक्र करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “अहमदिया समुदाय से संबंधित दो मामले थे। एक मामले में, एक मस्जिद को सील किया गया और दूसरे में, 40 कब्रों को अपवित्र किया गया था। एक मामला ऐसा भी था जिसमें एक ईसाई व्यक्ति, जो कथित तौर पर मानसिक रूप से अस्थिर था, पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया।”
वैश्विक मंचों पर भारत की प्रतिक्रिया पर जोर देते हुए विदेश मंत्री ने हाल की दो घटनाओं का जिक्र किया, जहां भारतीय प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड की कड़ी आलोचना की।
जयशंकर ने कहा, “फरवरी के महीने में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में हमारे प्रतिनिधि ने बताया कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जहां ‘मानवाधिकारों का हनन, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और लोकतांत्रिक मूल्यों का व्यवस्थित क्षरण राज्य की नीतियों का हिस्सा है।’
विदेश मंत्री ने कहा, “पाकिस्तान बेशर्मी से संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों को पनाह देता है और किसी को उपदेश देने की स्थिति में नहीं है। इसके बजाय, उसे अपने लोगों को वास्तविक शासन और न्याय प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।”
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