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आईपीएल प्रसारणकर्ता स्टार के सदस्य को कोरोना, कार्यक्रम में किया बदलाव
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के आगामी 13वें सीजन की समय पर शुरूआत मुश्किल में दिख रही है क्योंकि लीग के आधिकारिक प्रसारणकर्ता स्टार के प्रोडक्शन दल का एक सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाया गया है।
स्टार के कोरोना संक्रमित पाए गए सदस्य को सोमवार को भारत से यूएई रवाना होना था, लेकिन कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद लीग के आधिकारिक प्रसारणकर्ता को अपनी उड़ान स्थगित करनी पड़ी है।
आईपीएल 13वें सीजन की शुरूआत 19 सितंबर से शुरू होनी है और उससे पहले ही चेन्नई सुपर किंग्स के दो खिलाड़ी सहित 13 सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं जबकि उसके स्टार बल्लेबाज सुरेश रैना टीम प्रबंधन के साथ कुछ असहमति के बाद वापस भारत लौट गए हैं।
सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि आईपीएल प्रसारणकर्ता स्टार प्रोडक्शन टीम के पहले बैच को बेंगलुरू, दिल्ली, कोलकाता और मुंबई से रविवार को यूएई रवाना होना था, लेकिन अब स्टार ने उनसे अगले आदेश तक इंतजार करने को कहा है।
बीसीसीआई और आईपीएल के एक विश्वसनीय सूत्र ने आईएएनएस से कहा, “स्टार ने शनिवार को कोविड-19 टेस्ट आने के बाद अपनी पहली बैच के भारतीय सदस्यों को 31 अगस्त को भारत से यूएई पहुंचने को कहा था। लेकिन उनमें से एक सदस्य के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद प्रसारणकर्ता ने तुरंत ने ही अपने सभी स्टाफ कर्मियों को फिर एक निर्देश दिया है कि वे 31 अगस्त को यूएई की अपनी रवानगी को स्थगित कर दें।”
इससे पहले, प्रोडक्शन टीम के सदस्यों को संयुक्त अरब अमीरात पहुंचने और सीधे क्वारंटाइन में जाना था लेकिन अब, न केवल उनकी रवानगी को स्थगित कर दिया गया है बल्कि यूएई पहुंचने के बाद उनकी क्वारंटाइन अवधि भी लंबी हो सकती है।
आईपीएल को शुरू होने में अब केवल 18 दिन का ही समय बचा है, लेकिन बीसीसीआई ने अभी तक आईपीएल मैच कार्यक्रम जारी नहीं किया है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि अब तक कई सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जिसने टूर्नामेंट के शुरू होने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीसीसीआई-आईपीएल सूत्र ने कहा कि स्टार अब इंतजार कर सकते हैं और अन्य प्रोडक्शन टीम के सदस्यों के कोविड-19 परिणामों के घटनाक्रम को देख सकते हैं।
सूत्र ने कहा, ” आईपीएल टीम के और प्रसारणकर्ता टीम के सदस्यों के कोविड-19 पॉजिटिव पाए जाने के बाद आईपीएल में बड़े बदलाव हो सकते हैं। मौजूदा चैंपियन मुंबई इंडियंस और उपविजेता चेन्नई सुपर किंग्स के बीच अबू धाबी में खेले जाने वाले शुरूआती मैचों में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक बड़ा कारण यह है कि अबू धाबी में कोविड-19 मामलों की संख्या बढ़ रही है, हालांकि शुरूआत में दुबई और शारजाह ज्यादा प्रभावित थे।”
अबू धाबी के स्थानीय निवासी ने आईएएनएस से कहा, ” यहां के अधिकारी सभी सात स्थानों के लिए अलग से पॉजिटिव मामलों की संख्या जारी नहीं करते है। पूरे यूएई के लिए सामूहिक रूप से नंबर जारी किए गए हैं। इसलिए कोई यह नहीं कह सकता है कि संख्या के आधार पर कौन से अमीरात में सबसे अधिक मामले है। बहरहाल, अबू धाबी अब तक सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जैसा कि सख्त प्रोटोकॉल से देखा जा सकता है।”
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नासिक: जालसाज अशोक खराट की जांच में अहम नतीजा, कई जगहों पर छापेमारी के दौरान जानवरों के अवशेष और महिलाओं के बाल बरामद, बली देने का संदेह

मुंबई: नासिक के धोखेबाज अशोक खरात की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और SIT ने कई जगहों पर छापेमारी की है। SIT को यहां से जानवरों के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन SIT ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या ये सच में जानवरों के अवशेष हैं या फिर मानव बलि का मामला है। इस मामले में SIT ने अवशेषों को अपने कब्जे में भी ले लिया है, वहीं शक है कि अशोक खरात अघोरी करता था और इसी प्रथा के चलते उसने मानव बलि भी दी होगी। इस बारे में SIT की जांच सही दिशा में जा रही है। नासिक के धोखेबाज अशोक खरात मामले में SIT की जांच में कई अहम नतीजे भी निकले हैं। SIT टीम की हेड तेजस्वी सतपोवे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर काम कर चुकी हैं और उनकी जांच कर चुकी हैं। इसी तरह अब नासिक मामले में भी जांच चल रही है। तेजस्वी सतपोवे की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता किसान हैं। वह अहमदनगर के शेगांव की रहने वाली हैं। तेजस्वी सतपोवे ने अब खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अशोक खरात के कई बड़े नेताओं और अफसरों से भी कनेक्शन थे। महिला आयोग की हेड रूपाली चाकणकर से भी उनके कनेक्शन थे, इसी आधार पर रूपाली को इस्तीफा देना पड़ा था। SIT जांच में जानवरों के अवशेषों के साथ महिलाओं के बाल भी मिले थे। अब SIT टीमें पता लगा रही हैं कि ये बाल किसके हैं, क्या ये एक महिला के बाल हैं या कई महिलाओं के बाल हैं।
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मुंबई : मलाड रेलवे स्टेशन पर नमाज़ का वीडियो वायरल होने के बाद 3 हॉकरों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज

मुंबई : रेलवे पुलिस ने बताया कि मलाड रेलवे स्टेशन पर नमाज़ पढ़ते हुए तीन फेरीवालों का एक वीडियो ऑनलाइन वायरल होने के बाद उनके खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, तीनों हॉकरों की पहचान मुश्ताक बाबू लोन, सोहेब सदाकत साहा और बिस्मिल्लाह दीन अंसारी के रूप में हुई है। आरपीएफ ने अनाधिकार प्रवेश के लिए रेलवे अधिनियम की धारा 147 के तहत मामला दर्ज किया, जबकि जीआरपी ने स्टेशन मास्टर की शिकायत के बाद बीएनएस की धारा 168 के तहत एक और मामला दर्ज किया। वीडियो वायरल होने के बाद, भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा कि इस घटना के संबंध में एफ आई आर दर्ज की जाएगी। समाचार एजेंसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुंबई के मलाड रेलवे स्टेशन पर, स्टेशन के प्लेटफॉर्म के ऊपर, खुलेआम एक छोटे मंडप जैसी संरचना बना दी गई है, और वहाँ नमाज़ पढ़ी जाने लगी है… इस पूरे मामले को लेकर एक एफ आई आर दर्ज की जाएगी।”
वायरल वीडियो में कुछ लोग मलाड रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 के ठीक बगल में बने एक अस्थायी शेड के नीचे नमाज़ पढ़ते हुए दिखाई दिए। रिपोर्ट के अनुसार, मलाड वेस्ट रेलवे स्टेशन पर विस्तार का काम चल रहा है और रेलवे ने इस प्रोजेक्ट के लिए प्लेटफॉर्म नंबर 1 के पास एक बड़ी खुली जगह बनाई है। इस बीच, पिछले ही हफ़्ते बॉम्बे हाई कोर्ट ने टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों को रमज़ान के दौरान शहर के हवाई अड्डे के भीतर एक अस्थायी शेड में नमाज़ अदा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि सुरक्षा धर्म से ऊपर है।
अदालत ने कहा कि रमज़ान मुस्लिम धर्म का एक अहम हिस्सा है, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि लोग किसी भी जगह पर नमाज़ पढ़ने के धार्मिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते, खासकर हवाई अड्डे के आस-पास, जहाँ सुरक्षा को लेकर काफ़ी चिंताएँ होती हैं। अदालत टैक्सी-रिक्शा ओला-ऊबर मेंस यूनियन की तरफ़ से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि जिस अस्थायी शेड में वे नमाज़ पढ़ते थे, उसे पिछले साल गिरा दिया गया था। याचिका में अदालत से यह गुज़ारिश की गई थी कि वह अधिकारियों को निर्देश दे कि वे उन्हें उसी इलाके में नमाज़ पढ़ने के लिए कोई जगह आवंटित करें।
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असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, विवादित वीडियो को लेकर दी शिकायत

हैदराबाद, 9 फरवरी : एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर को औपचारिक शिकायत दी। यह शिकायत एक कथित विवादित और अब डिलीट किए जा चुके वीडियो को लेकर की गई है, जिसमें सीएम सरमा को मुसलमानों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया है।
पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में ओवैसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य मंचों के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयान देते रहे हैं, जिनमें से कई अब भी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।
पुलिस कमिश्नर के नाम पत्र में ओवैसी ने कहा, “मैं आपका ध्यान इस बात की ओर दिलाना चाहता हूं कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई सालों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लगातार बयान दे रहे हैं। ऐसे कई भाषण अभी भी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं। हाल के महीनों में मुख्यमंत्री ने जानबूझकर अपने नफरत भरे भाषणों को और तेज कर दिया है, जिसका साफ और सचेत इरादा मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दुश्मनी और नफरत को बढ़ावा देना है, यह जानते हुए भी कि ऐसे आरोप राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक हैं और सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करने वाले हैं।”
ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन अब्दुल्ला बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य के मामले में साफ तौर पर कहा है कि मौलिक अधिकारों की रक्षा करना, संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र, विशेष रूप से कानून के शासन की रक्षा करना राज्य और कानून लागू करने वाली एजेंसियों का संवैधानिक कर्तव्य है। कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि पुलिस को औपचारिक शिकायत के अभाव में भी नफरत भरे भाषणों के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए और कोई भी निष्क्रियता या हिचकिचाहट कर्तव्य की गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।
उन्होंने कहा, “मैं यह बताना चाहता हूं कि असम भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट द्वारा 7 फरवरी को पोस्ट किया गया एक हालिया वीडियो, जिसे एक दिन बाद हटा दिया गया था लेकिन अभी भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, उसमें हिमंत बिस्वा सरमा को हथियार से लैस दिखाया गया है और वे उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जिन्हें साफ तौर पर मुसलमान दिखाया गया है और उन्हें गोली मार रहे हैं। उक्त पोस्ट और वीडियो, उसमें इस्तेमाल की गई तस्वीरों और ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ और ‘कोई दया नहीं’ जैसे बयानों के साथ, मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, धार्मिक समुदायों के बीच नफरत और दुर्भावना को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के इरादे से किया गया एक जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किया गया था और पूरे भारत में उपलब्ध था, जिसमें इस पुलिस स्टेशन का अधिकार क्षेत्र भी शामिल है। मैंने इसे इस पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में देखा है। उपरोक्त तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप कानून के अनुसार श्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ तत्काल और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें।
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