राष्ट्रीय समाचार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए तत्काल राहत पैकेज की मांग की
नई दिल्ली, 3 सितंबर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बाढ़ प्रभावित राज्य पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में सोशल मीडिया पोस्ट किया और साथ में एक वीडियो भी शेयर किया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि इन राज्यों में राहत और बचाव कार्यों को तेज किया जाए, ताकि प्रभावित लोगों को सहायता मिल सके।
उन्होंने कहा कि पंजाब में बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश के साथ ही उत्तराखंड की स्थिति भी गंभीर है।
उन्होंने बताया कि हजारों परिवार अपने घर, संपत्ति और अपनों को बचाने के लिए जूझ रहे हैं। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों की रक्षा करे। उन्होंने केंद्र से इन राज्यों, खासकर किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज की घोषणा करने का आग्रह किया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लिखा, “पंजाब में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में भी स्थिति बेहद चिंताजनक है। ऐसे मुश्किल समय में आपका ध्यान और केंद्र सरकार की सक्रिय मदद अत्यंत आवश्यक है। हजारों परिवार अपने घर, जीवन और अपनों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मैं आग्रह करता हूं कि इन राज्यों के लिए, खासतौर पर किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की तत्काल घोषणा की जाए और राहत एवं बचाव कार्यों को तेज किया जाए।”
देश के कई राज्य मौजूदा समय में बाढ़ से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। पंजाब में भारी बारिश और नदियों के उफान ने कई इलाकों में तबाही मचाई है। खेतों में धान और सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कई गांव पानी में डूब गए हैं, जिससे लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं। सड़कें और बुनियादी ढांचा भी क्षतिग्रस्त हुआ है।
जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश और भूस्खलन ने स्थिति को और खराब कर दिया है। कई क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूट गया है और नदियों के किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है।
वहीं, हिमाचल प्रदेश में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया है। सड़कें और पुल टूट गए हैं, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है।
इसके अलावा, उत्तराखंड में गंगा और अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। तीर्थस्थल और ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत ने महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की 56 नीलामियां सफलतापूर्वक संपन्न कीं: सरकार

नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। सरकार ने मंगलवार को कहा कि भारत ने महत्वपूर्ण (क्रिटिकल) और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की 56 नीलामियां सफलतापूर्वक संपन्न कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जो देश की घरेलू खनिज आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने और भारत के क्रिटिकल मिनरल मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
खान मंत्रालय ने केंद्र सरकार द्वारा आयोजित सातवें चरण की नीलामी के तहत 10 महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की है। इसके साथ ही अब तक सफलतापूर्वक नीलाम किए गए ऐसे खनिज ब्लॉकों की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा नीलामी के लिए रखे गए 88 अलग-अलग खनिज ब्लॉकों में से 56 की सफल नीलामी हुई है, जो 63 प्रतिशत से अधिक की सफलता दर को दर्शाती है।
सातवें चरण की नीलामी ने भारत में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और विकास के दायरे को और बढ़ाया है। पहली बार केंद्र सरकार ने गुजरात, उत्तराखंड और तेलंगाना में क्रिटिकल मिनरल ब्लॉकों की नीलामी की।
इस चरण में ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई), वैनेडियम, टाइटेनियम, ग्लॉकोनाइट, रॉक फॉस्फेट और अन्य संबंधित खनिजों के ब्लॉक शामिल थे। इससे देश में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज का भौगोलिक दायरा और विस्तृत हुआ है।
सातवें चरण की नीलामी में कुल 19 खनिज ब्लॉक शामिल थे, जिनमें महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज मौजूद हैं।
यह नीलामी खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा समय-समय पर संशोधित खनिज (नीलामी) नियम, 2015 के तहत आयोजित की गई।
क्रिटिकल मिनरल ब्लॉकों की नीलामी के साथ-साथ खान मंत्रालय ने एक्सप्लोरेशन लाइसेंस (ईएल) नीलामी के दूसरे चरण को भी सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिससे भारत के खनिज अन्वेषण तंत्र को और मजबूती मिली है।
दूसरे चरण में पहली बार केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में एक्सप्लोरेशन लाइसेंस ढांचे का विस्तार किया। इससे महत्वपूर्ण और गहराई में मौजूद खनिजों की खोज के लिए नए अवसर खुलेंगे।
सरकार ने बताया कि दूसरे चरण की सफल नीलामी के बाद एक्सप्लोरेशन लाइसेंस व्यवस्था लागू होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा सफलतापूर्वक नीलाम किए गए एक्सप्लोरेशन लाइसेंस ब्लॉकों की कुल संख्या 11 हो गई है।
एक्सप्लोरेशन लाइसेंस व्यवस्था का उद्देश्य महत्वपूर्ण और गहराई में मौजूद खनिजों की व्यवस्थित खोज को बढ़ावा देना है, जिसके तहत निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को खनिज अन्वेषण में भाग लेने का अवसर मिलता है।
राजनीति
टीएमसी के तीन बैंक खातों की साइबर पुलिस जांच शुरू, पांच साल के लेन-देन पर नजर

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की साइबर पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन बैंक खातों की विस्तृत जांच शुरू की है। पुलिस के निर्देश पर हाल ही में इन खातों पर डेबिट फ्रीज लगा दिया गया था।
बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में चल रही जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि अधिकारी पिछले पांच साल में इन खातों से हुए लेन-देन की बारीकी से जांच कर रहे हैं। जांच का फोकस इस बात पर है कि पैसा कहां से आ रहा था और इन खातों से पैसा कहां भेजा गया।
जांचकर्ता इन खातों से जुड़े दूसरे पहलुओं की भी जांच कर रहे हैं, जैसे कि ये खाते कब खोले गए, किसके नाम पर रजिस्टर किए गए और इतने सालो तक इन्हें किन लोगों (अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं) ने ऑपरेट किया।
लेन-देन के रिकॉर्ड का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है क्योंकि आरोप है कि जबरन वसूली और गैर-कानूनी कमीशन से मिला पैसा इन खातों में जमा किया गया था। जांचकर्ता इस दावे की भी जांच कर रहे हैं कि ऐसी गतिविधियों से मिले पैसे को बाद में दूसरे गैर-कानूनी कामों के लिए इन खातों से निकाला गया।
यह जांच बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में टीएमसी के कई बागी विधायकों की शिकायतों के बाद शुरू हुई है। अपनी शिकायतों में विधायकों ने आरोप लगाया कि जबरन वसूली से इकट्ठा किया गया पैसा तीन बैंक खातों में रखा गया था।
इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू की। जांच के पहले चरण में, अधिकारियों ने बैंक को तीनों खातों पर डेबिट फ्रीज लगाने का निर्देश दिया।
कुछ दिन पहले, पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष और ममता बनर्जी सरकार में पूर्व खेल और बिजली मंत्री अरूप बिस्वास ने प्राइवेट सेक्टर के बैंक को पत्र लिखकर खातों को फ्रीज करने का अनुरोध किया था। अपने पत्र में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी झगड़े के कारण पार्टी फंड के कंट्रोल को लेकर हुए विवाद का हवाला दिया था।
इस बीच, तृणमूल का एक गुट, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार है, सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा और खातों को फ्रीज करने के फैसले को चुनौती दी।
अपनी याचिका में पार्टी ने कोर्ट से दखल देने की मांग की ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसके आदेश पर और किस आधार पर तीनों खातों पर डेबिट फ्रीज लगाया गया था।
राष्ट्रीय समाचार
भारत के विकास में कृषि और टेक्नोलॉजी की होगी अहम भूमिका : एक्सपर्ट्स

भारत आने वाले समय में भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना रहेगा और इसके विकास में कृषि और टेक्नोलॉजी क्षेत्र अहम भूमिका निभाएंगे। यह बयान एक्सपर्ट्स की ओर से मंगलवार को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘एनुअल न्यू चैंपियंस मीटिंग’ या ‘समर दावोस’ में दिया गया।
आईएएनएस के साथ बातचीत में, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मैनेजिंग डायरेक्टर मिरेक डुसेक ने भारत के आर्थिक विकास अनुमानों की संभावनाओं पर भरोसा जताया और देश को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया।
डुसेक ने कहा, “भारत वैश्विक विकास दर में अहम योगदान दे रहा है और हमें उम्मीद है कि आने वाले सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती रहेगी।”
उन्होंने कहा कि समर दावोस बैठक ने दुनिया भर के इनोवेटर्स, टेक्नोलॉजी लीडर्स, नीति निर्मताओं और बिजनेस एग्जीक्यूटिव्स को एक साथ लाया है, ताकि सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके और वैश्विक चुनौतियों का समाधान ढूंढा जा सके।
इसके अलावा, डुसेक ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी उभरती हुई टेक्नोलॉजी में प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और वैश्विक आर्थिक विकास को सहारा देने की क्षमता है।
इसके अलावा, आईएएनएस से बातचीत में पद्म श्री से सम्मानित और ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में मृदा विज्ञान के प्रतिष्ठित प्रोफेसर, प्रो. रतन लाल ने कहा, “भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है और इस विकास में कृषि की अहम भूमिका होगी।”
इसके अलावा, उन्होंने खेती की पैदावार बढ़ाने के लिए मिट्टी की सेहत सुधारने और जमीन के टिकाऊ प्रबंधन के तरीकों को बढ़ावा देने की अहमियत पर जोर दिया।
लाल ने भारतीय खेती में बदलाव लाने के लिए नई उभरती टेक्नोलॉजी की संभावनाओं के बारे में भी बताया।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल टूल्स किसानों के लिए मिट्टी की जांच को तेज, सस्ता और ज्यादा आसान बना सकते हैं, जिससे किसान सही जानकारी के आधार पर फैसले ले सकें और फसल की पैदावार बढ़ा सकें।
समर दावोस 23 जून को शुरू हुआ और 25 जून को खत्म होगा। इसमें बिजनेस, सरकार, एकेडेमिया और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के ग्लोबल लीडर्स इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप और आर्थिक विकास के भविष्य पर चर्चा करने के लिए एक साथ एक मंच पर आएंगे।
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