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Wednesday,03-June-2026
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कांग्रेस ने पीठ में छुरा घोंपा, मुंबई में खाता भी नहीं खोल पाएगी: शिवसेना-यूबीटी प्रवक्ता आनंद दुबे

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मुंबई, 29 दिसंबर: शिवसेना-यूबीटी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने आरोप लगाए हैं कि कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र में ‘उद्धव ठाकरे’ के नाम का इस्तेमाल करके फायदा उठाया। बीएमसी चुनाव में अकेले उतरने का फैसला करके कांग्रेस ने शिवसेना-यूबीटी की पीठ में छुरा घोंपा है।

मीडिया से बातचीत में आनंद दुबे ने कहा, “2019 से पहले कांग्रेस डूब चुकी थी, जिसे शिवसेना-यूबीटी ने अपने साथ लेकर उसकी मदद की। लेकिन कांग्रेस ने शिवसेना-यूबीटी का नाम छीनने का काम किया। कांग्रेस मुंबई में भारतीय जनता पार्टी की बी-टीम के तौर पर काम कर रही है। जब कांग्रेस को पता है कि बीएमसी चुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण है, तो अकेले चुनाव क्यों लड़ा जा रहा है?”

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस मुंबई में अपना खाता भी नहीं खोल पाएगी और सिंगल डिजिट तक सिमट जाएगी। आनंद दुबे ने यह भी कहा कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका समेत पूरे महाराष्ट्र में 28 नगर निगमों के चुनाव हैं। कांग्रेस को एक-दो सीटों के अलावा कहीं और जीत नहीं मिलेगी, क्योंकि मुंबई में कांग्रेस की कोई असली ताकत नहीं है।

एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान के ‘बुर्का वाली मेयर’ वाले बयान पर भी आनंद दुबे ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जानबूझकर हिंदू-मुस्लिम करना और विवादित बयान देना वारिस पठान की पुरानी आदत है। अगर उनको बुर्का वाली या पठान-खान मेयर बनाने हैं तो उन्हें पड़ोस के देशों में चले जाना चाहिए।

शिवसेना-यूबीटी के प्रवक्ता ने कि वारिस पठान भारतीय जनता पार्टी की बी-टीम के तौर पर काम करते हैं। ऐसे समय में उनका बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पूरी मुंबई में उद्धव ठाकरे की शिवसेना ही मुख्य ताकत बनकर उभरेगी और यहां एक हिंदू और मराठी मेयर होगा।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की ओर से आरएसएस की तारीफ पर आनंद दुबे ने कहा कि कांग्रेस को इस संगठन, उसके अनुशासन और मातृभूमि के प्रति उसके समर्पण से सीखना चाहिए।

आनंद दुबे ने कहा, “आरएसएस पूरे देश में 60-70 लाख से ज्यादा वॉलंटियर्स के जरिए देश की सेवा करता है। हालांकि यह सीधे तौर पर राजनीति में शामिल नहीं है, लेकिन यह पर्दे के पीछे से राजनीतिक पार्टियों को सपोर्ट करता है। आरएसएस इस देश की परंपरा को चलाने वाला सांस्कृतिक और संस्कारी संगठन है। इस संगठन के जैसा कोई नहीं बन सकता है। अगर ऐसे संगठन से कांग्रेस नहीं सीखेगी तो क्या वह खुद से ही सीखेगी, जिसमें अनुशासन और रणनीति का कोई अता-पता नहीं होता है?”

महाराष्ट्र

मीरा-भयंदर में पानी की कटौती: एमआईडीसी में 4-5 जून को 24 घंटे तक पानी की आपूर्ति बंद रहेगी – पूरी जानकारी यहां देखें

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मीरा भायंदर के निवासियों को 24 घंटे की पानी की कटौती का सामना करना पड़ेगा क्योंकि मीरा-भायंदर नगर निगम (एमबीएमसी) ने घोषणा की है कि एमआईडीसी की जल आपूर्ति कल, 4 जून को निलंबित रहेगी। एमबीएमसी के अनुसार, 4 जून को दोपहर 12 बजे से 5 जून को दोपहर 12 बजे तक एमआईडीसी की जल आपूर्ति नहीं होगी।

एमबीएमसी ने कहा कि अल नीनो और हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) की स्थितियों के संभावित प्रभाव को देखते हुए एहतियाती उपाय के रूप में अस्थायी जल आपूर्ति बाधित की गई है, जिससे आने वाले महीनों में पानी की कमी हो सकती है।

गौरतलब है कि एमबीएमसी ने यह भी कहा कि एसटीईएम प्राधिकरण से पानी की आपूर्ति पहले की तरह जारी रहेगी, लेकिन एमआईडीसी सेवाएं पूरी तरह से बहाल होने तक निवासियों को कम पानी के दबाव और पानी की आपूर्ति में देरी का सामना करना पड़ सकता है।

एमबीएमसी ने निवासियों से नगर निकाय के साथ सहयोग करने की अपील की है और उनसे कहा है कि वे केवल आवश्यक मात्रा में पानी का भंडारण करें और अस्थायी व्यवधान के दौरान इसका विवेकपूर्ण उपयोग करें।

मीरा भायंदर के अलावा, ठाणे नगर निगम (टीएमसी) ने 4 जून दोपहर 12 बजे से 5 जून दोपहर 12 बजे तक शहर के कई हिस्सों में 24 घंटे की पूर्ण जल आपूर्ति बंद की घोषणा की है। इस बंद से महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) के जांभुल जल शोधन संयंत्र से पानी की आपूर्ति वाले क्षेत्र प्रभावित होंगे। दिवा और कालवा वार्ड समितियों, मुंब्रा (वार्ड संख्या 26 और 31 के कुछ हिस्सों को छोड़कर), वागले एस्टेट और मनपाड़ा सहित कई क्षेत्रों में जल आपूर्ति बाधित रहेगी।

इस बीच, मुंबई में बीएमसी ने 19 अगस्त तक पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 15 मई से 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू कर दी है, लेकिन मानसून में देरी को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। नगर निगम के आंकड़ों से पता चला है कि मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाली सात झीलों में पानी का भंडार घटकर 2.13 लाख मिलियन लीटर (एमएल) रह गया है, जो कुल क्षमता का 15.30 प्रतिशत है।

2 जून तक के नागरिक आंकड़ों से पता चला है कि ऊपरी वैतरणा में उपयोगी जल भंडार समाप्त हो चुका है, जबकि मोदक सागर में 33.89 प्रतिशत, विहार में 45.71 प्रतिशत, तुलसी में 27.10 प्रतिशत, मध्य वैतरणा में 22.21 प्रतिशत, भाटसा में 14.57 प्रतिशत और तानसा में 10.58 प्रतिशत जल भंडार बचा है।

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राजनीति

महाराष्ट्र: महायुति ने विधान परिषद चुनाव के लिए घोषित किए 17 उम्मीदवार

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मुंबई, 3 जून: महाराष्ट्र में स्थानीय स्वराज्य संस्था (विधान परिषद) चुनाव को लेकर महायुति ने बुधवार को अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के गठबंधन महायुति ने कुल 17 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है।

महायुति ने नागपुर से डॉ. राजीव भास्करराव पोतदार, भंडारा-गोंदिया से अविनाश आनंदराव ब्राह्मणकर, वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली से अरुण हनुमंत लखानी, अमरावती से प्रवीण रामचंद्र पोटे, सोलापुर से राजेंद्र विठ्ठल राजवत, अहमदनगर से प्राजक्त प्रसादराव तनपुरे, जलगांव से नंदकिशोर भागवत महाजन और सांगली-सातारा से धैर्यशील ज्ञानदेव कदम को उम्मीदवार बनाया है।

इनके अलावा पार्टी ने नांदेड़ से अमरनाथ अंतरराव राजूरकर, उस्मानाबाद-लातूर-बीड़ से बसवराज माधवराव पाटिल, औरंगाबाद-जालना से सुहास चंद्रकांत शिरसाट, ठाणे से रविंद्र सदानंद फाटक, यवतमाल से दुष्यंत सतीश चतुर्वेदी, परभणी-हिंगोली से सैयद गोरगुल खान, नासिक से नरेंद्र मिकाजी दराडे, रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से अनिकेत सुनील तटकरे तथा पुणे से विक्रम संजय काकड़े को मैदान में उतारा गया है।

महायुति ने मतदाताओं से अपील की है कि वे 18 जून को मतदान के दौरान महायुति के उम्मीदवारों को प्रथम वरीयता दें और उन्हें भारी मतों से विजयी बनाएं। इस उम्मीदवार सूची पर भाजपा महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और शिवसेना के सरचिटणीस राहुल शेवाले के हस्ताक्षर हैं।

महायुति नेताओं ने उम्मीद जताई है कि सभी उम्मीदवारों को समर्थन मिलेगा और महायुति विधान परिषद चुनाव में मजबूत प्रदर्शन करेगी। इस चुनाव में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के प्रतिनिधि मतदाता के रूप में वोट डालेंगे।

राज्य की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन इस चुनाव को अपनी ताकत का प्रदर्शन करने का मौका मान रही है। महायुति नेताओं का कहना है कि विकास और स्थिरता के मुद्दे पर वे जनता का समर्थन हासिल करेंगे।

विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवारों की घोषणा के साथ अब सभी दलों में चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है। महायुति ने सभी उम्मीदवारों को मजबूत बनाने के लिए रणनीति तैयार करने के संकेत भी दिए हैं।

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राजनीति

महिलाओं के वोट खरीदकर सत्ता में आई महायुति सरकार : शिवसेना (यूबीटी) ने उठाई नए चुनाव कराने की मांग

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मुंबई, 3 जून: शिवसेना (यूबीटी) ने महायुति सरकार पर महिलाओं के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है। पार्टी का आरोप है कि ‘लाडकी बहिन योजना’ के जरिए सरकारी धन का उपयोग कर महिलाओं को प्रभावित किया गया और उनके वोट हासिल कर सत्ता तक पहुंचा गया।

शिवसेना (यूबीटी) ने ई-केवाईसी प्रक्रिया के बाद मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के तहत लाभ पाने वाली करीब 80 लाख महिलाओं के अपात्र घोषित होने के मामले में हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से जांच कराने की मांग की है।

पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा है कि इस मामले में सरकार एक बड़े घोटाले में शामिल है। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों की संपत्ति जब्त की जाए।

संपादकीय में कहा गया कि यह कोई राज नहीं है कि देवेंद्र फडणवीस-एकनाथ शिंदे-अजित पवार की तिकड़ी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव ‘हेरफेर’ करके जीता था। चुनावों के ठीक बीच में इन तीनों ‘भाइयों’ ने लाडकी बहिन योजना शुरू की और राज्य सरकार ने 2.38 करोड़ महिलाओं को 1,500 रुपए का मासिक भत्ता देने की घोषणा की। इन महिलाओं की रैलियां आयोजित करने को लेकर इन तीनों के बीच जबरदस्त होड़ मची हुई थी।”

संपादकीय में कहा गया कि ‘केवाईसी’ पूरा न होने का हवाला देते हुए लगभग 80 लाख महिलाओं को अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसका मतलब है कि इन लोगों ने वोट खरीदने और चुनाव जीतने के लिए बिना सोचे-समझे सरकारी फंड लाखों अयोग्य महिलाओं के खातों में डाल दिया।

शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया, “इस पूरे खेल में चुनाव आयोग ने बहरे, गूंगे और अंधे की भूमिका निभाई। महिलाओं ने 1,500 रुपए मासिक भत्ते के बदले इस तिकड़ी को वोट दिया। उनके वोटों की संख्या लगभग एक करोड़ बढ़ गई और ये लोगभ्रष्ट तरीकों से सत्ता में आ गए।”

आगे लिखा गया, “लाडकी बहिन योजना के लाभार्थियों को अयोग्य घोषित किए जाने के पीछे की सच्चाई अब सबके सामने आ गई है। सरकार पिछले डेढ़ साल से इन अयोग्य लाभार्थियों को पैसे बांट रही थी। दिसंबर 2024 तक इस तरह से 17,000 करोड़ रुपए से ज्यादा बांटे जा चुके थे। यह पैसा सत्ताधारी तिकड़ी की जेब से नहीं आया था। अगर पैसों का यह बंटवारा गैरकानूनी है तो सरकार को इसे वापस लेना होगा।”

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि यह वसूली अयोग्य लाभार्थी महिलाओं की जेब से नहीं की जानी चाहिए। इसके बजाय यह पैसा उन लोगों से वापस लिया जाना चाहिए जिन्होंने यह फिजूलखर्ची और हेराफेरी की है। इस तिकड़ी (एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री) की चल और अचल संपत्तियों को जब्त करना जरूरी है।

उस सरकारी मशीनरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए जाने चाहिए जिसने बिना किसी जांच-पड़ताल के हजारों करोड़ रुपए अयोग्य महिलाओं में बांट दिए। जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें खासकर संबंधित विभाग के तत्कालीन सचिव को बर्खास्त किया जाना चाहिए।”

संपादकीय के अनुसार, इस तिकड़ी ने कबूल किया कि महिलाओं ने भारी संख्या में वोट इसलिए दिए, क्योंकि उन्हें लाडकी बहिन योजना के तहत फायदे दिए गए थे। तर्क दिया गया, “अब, महिलाओं को पैसे का यह बंटवारा भ्रष्ट और गैर-कानूनी साबित हो गया है। यह साबित हो चुका है कि सरकारी पैसा लाखों महिलाओं में गलत तरीके से बांटा गया था। इसके अलावा, इन्हीं महिलाओं ने अभी सत्ता में मौजूद ‘तिकड़ी’ को वोट दिया था। इसलिए चुनाव आयोग को ऐसी महिलाओं द्वारा किए गए मतदान को अमान्य घोषित करना चाहिए और महाराष्ट्र में नए चुनावों की घोषणा करनी चाहिए।”

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