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Tuesday,18-August-2026
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महाराष्ट्र

नोटबंदी पर कांग्रेस और एनसीपी ने पीएम मोदी को घेरा, कहा हिम्मत हैं तो साबित करें कि नोटबंदी से कालाधन समाप्त हो गया है

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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी की घोषणा के ठीक छह साल बाद सरकार इसे सही नहीं ठहरा पाई है। पार्टी ने कहा कि नोटबंदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पंगु बना दिया। 2016 में आज ही के दिन उठाए गए भाजपा के इस कदम पर कांग्रेस ने भी कटाक्ष किया और इसे भारत के आम आदमी पर क्रूर हमला बताया।

राकांपा के मुख्य प्रवक्ता महेश तापसे ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि देश यह कभी नहीं भूलेगा कि अपनी गाढ़ी कमाई को बचाने की कोशिश करते हुए आम जनता को किस पीड़ा से गुजरना पड़ा।

तापसे ने मांग की, अब समय आ गया है . पीएम को देश को बताना चाहिए कि कितना काला धन बरामद हुआ। नोटबंदी ने आतंकवाद के वित्तपोषण को कैसे समाप्त किया? क्या इसने जाली नोटों को अर्थव्यवस्था से समाप्त कर दिया है?

उन्होंने कहा कि पीएम के दावों के विपरीत भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया था कि 99.3 प्रतिशत नोट बैंक में वापस आ गए।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंधे ने व्यंग्यात्मक तरीके से पूछा: देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद हुए कितने साल हो गए और कुछ भाजपा नेताओं को कथित तौर पर नोटबंदी का जश्न मनाते हुए दिखाने का एक वीडियो पोस्ट किया।

तापसे ने याद किया कि कैसे प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने नोटबंदी के कदम के दुष्परिणामों के बारे में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को आगाह किया था, लेकिन प्रशासन में किसी ने भी चेतावनियों पर ध्यान देने की जहमत नहीं उठाई और यहां तक कि केंद्रीय मंत्री भी इससे अनजान थे जब तक कि पीएम ने उस रात फैसले की घोषणा नहीं की।

कांग्रेस महासचिव सचिन सावंत ने कहा कि 500-1000 रुपये के नोटों का विमुद्रीकरण एक क्रूर कदम था जिसने देश की प्रगति को रोक दिया और सभी भारतीयों के जीवन को चकनाचूर कर दिया।

राकांपा नेता ने कहा कि नोटबंदी जैसी भाजपा की गलत नीतियों के साथ-साथ वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को बेतरतीब ढंग से लागू करने से भारतीय अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है।

तापसे ने कहा, कोविड-19 महामारी के बाद के दो वर्षों में देश के सभी संसाधनों का सफाया हो गया, हमारे भंडार, नौकरियों पर असर, जीडीपी में गिरावट और उद्योगों को विशेष रूप से एमएसएमई को भारी नुकसान हुआ।

महाराष्ट्र

सीएम फडणवीस को मिला मंत्रियों के फैसले बदलने का अधिकार, महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स 2026 लागू

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महाराष्ट्र में प्रशासनिक अधिकारों के बड़े केंद्रीकरण के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कानूनी रूप से यह अधिकार दे दिया गया है कि वे व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए राज्य के किसी भी कैबिनेट मंत्री द्वारा लिए गए फैसले में हस्तक्षेप कर सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर उसे निरस्त या पलट भी सकते हैं।

महाराष्ट्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स ऑफ बिजनेस, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, मुख्य सचिव और विभागीय सचिवों की प्रशासनिक शक्तियों और कार्यप्रणाली को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 166(2) और 166(3) के तहत राजपत्र में प्रकाशित इस नए ढांचे ने राज्य में कार्यपालिका के निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए सभी पुराने नियमों और प्रक्रियाओं का स्थान ले लिया है।

नए नियमों के तहत मुख्यमंत्री को स्पष्ट कानूनी अधिकार दिया गया है कि वे जनहित में आवश्यक समझे जाने पर किसी भी मंत्री द्वारा लिए गए निर्णय में बदलाव, संशोधन या उसे रद्द कर सकते हैं। हालांकि, अर्ध-न्यायिक मामलों को इस अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है।

अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री के लिए किसी मंत्री के निर्णय को पलटने के विस्तृत कारण लिखित रूप में दर्ज करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। मुख्यमंत्री को किसी भी समय किसी भी विभाग से आधिकारिक दस्तावेज, फाइलें या अभिलेख मंगवाने का अधिकार है और संबंधित मंत्री और विभागीय सचिव कानूनी रूप से इनका पालन करने के लिए बाध्य हैं। नियमित प्रशासनिक कार्य और विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रभारी मंत्री के पास ही रहेगी।

नियम 13(5) के तहत मुख्यमंत्री को सार्वजनिक हित के लिए विभागीय मंत्रियों द्वारा लिए गए निर्णयों को बदलने, संशोधित करने या रद्द करने का स्पष्ट अधिकार प्राप्त है। नियम 2(सी) औपचारिक रूप से “मामले” को परिभाषित करता है, जिसमें राज्य के ई-ऑफिस सिस्टम के भीतर संसाधित डिजिटल नोट्स, ई-दस्तावेज और डिजिटल फाइलें शामिल हैं।

नियम 17(2) और नियम 39 के अनुसार, कोई भी प्रशासनिक विभाग वित्त विभाग की पूर्व सहमति के बिना राजस्व परित्याग, भूमि अनुदान, रियायतें या अनिर्धारित व्यय जैसे वित्तीय निहितार्थों से संबंधित आदेश जारी नहीं कर सकता है। मुख्य सचिव राज्य में सिविल सेवाओं के प्रमुख और मंत्रिमंडल के सचिव के रूप में कार्य करते हैं।

नियम 16(1) के तहत, मुख्य सचिव को मुख्यमंत्री या मंत्रियों को यह सूचित करने का अधिकार है कि यदि कोई प्रस्तावित कार्य विधि वैधानिक प्रावधानों या स्थापित नीति का उल्लंघन करती है। विभागों को निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित मंत्रालयों से परामर्श करना आवश्यक है। भारत सरकार या अन्य राज्य सरकारों से संबंधित किसी भी संभावित विवाद या मतभेद की सूचना मुख्यमंत्री और राज्यपाल को तुरंत दी जानी चाहिए।

इस अधिसूचना के अनुसार, राज्य सरकार को मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव की अध्यक्षता में अधिकृत समितियों का गठन करने की अनुमति दी गई है, जो निर्दिष्ट विषयों पर निर्णय ले सकेंगी। नए नियम 14 अगस्त, 2026 को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होते ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गए।

अधिकारियों का कहना है कि इस अधिसूचना ने राजनीतिक गलियारों में चिंताएं बढ़ा दी हैं कि इस कदम का सत्तारूढ़ महायुति सरकार के भीतर गठबंधन की गतिशीलता पर क्या प्रभाव पड़ेगा। राज्य मंत्रिमंडल में विभागों का बंटवारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), एकनाथ शिंदे की शिवसेना और सुनेत्रा पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) सहित प्रमुख गठबंधन सहयोगियों के बीच किया जाता है।

विश्लेषकों का मानना ​​है कि अगर मुख्यमंत्री फडणवीस सहयोगी दलों के मंत्रियों द्वारा लिए गए निर्णयों को पलटने के लिए इस अधिकार का प्रयोग करते हैं, तो इससे गठबंधन के भीतर आंतरिक राजनीतिक मतभेद या बहस छिड़ सकती है।

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अंतरराष्ट्रीय

मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

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भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।

सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।

गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”

गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”

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महाराष्ट्र

वैश्विक तनावों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से शेयर बाजार पर दबाव; सेंसेक्स 365 अंक टूटा, निफ्टी 24,250 के नीचे फिसला

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पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों के 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। यह लगातार छठा दिन है जब बाजार में बिलवाली देखने को मिली है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर दबाव देखने को मिला।

कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,728.16 से 309.19 अंक यानी 0.39 प्रतिशत गिरकर 77,418.97 के स्तर पर खुला। वहीं एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,287.65 से 0.26 प्रतिशत गिरकर 24,223.85 लेवल पर खुला।

खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 263.98 अंकों यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,464.18 पर कारोबार करता नजर आया। दिन के सत्र में इसने 77,575.21 का हाई और 77,362.19 का लो बनाया, जो 365 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।

वहीं निफ्टी 50 42.40 अंक यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर करीब 24,245.25 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया। दिन के सत्र में इसने 24,211.10 का लो और 24,269.65 का हाई बनाया।

व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप में 0.08 प्रतिशत की गिरावट आई और स्मॉलकैप में 0.27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

सेक्टोरल मोर्चे पर सबसे ज्यादा दबाव निफ्टी आईटी इंडेक्स में देखने को मिला, जो 1 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इसके अलावा, निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम में 0.62 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी में करीब 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, मीडिया, मेटल और एफएमसीजी शेयरों में भी बिकवाली का रुख रहा।

हालांकि कुछ क्षेत्रों में मजबूती भी देखने को मिली। निफ्टी ऑटो इंडेक्स लगभग 0.40 प्रतिशत चढ़ा, जबकि पीएसयू बैंक इंडेक्स में 0.29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि व्यापक बाजार में चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी जारी है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड के बढ़कर 4.73 प्रतिशत पर पहुंचने से इक्विटी बाजारों पर दबाव बढ़ा है। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के लिए उभरते बाजारों में निवेश को कम आकर्षक बना सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि निकट अवधि में कच्चे तेल के ऊंचे भाव भारतीय बाजार की तेजी को सीमित कर सकते हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल कीमतों में बढ़ोतरी का असर महंगाई, चालू खाते के घाटे और कॉरपोरेट लागत पर पड़ सकता है।

हालांकि बाजार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और कॉरपोरेट आय में सुधार के संकेत घरेलू बाजार को सहारा दे सकते हैं। उनका कहना है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) के पास पर्याप्त नकदी है और वे बड़ी गिरावट आने पर खरीदारी कर सकते हैं। साथ ही खुदरा निवेशक भी बाजार में कमजोरी का उपयोग लंबी अवधि के लिए अच्छे शेयरों में निवेश बढ़ाने के अवसर के रूप में कर सकते हैं।

बाजार में यह दबाव ऐसे समय आया है जब रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि ईरान अधिक आक्रामक रणनीति अपना सकता है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम व्यवस्था को आगे बढ़ाने की संभावना से इनकार किया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं फिर बढ़ गई हैं।

इन घटनाक्रमों के बाद ब्रेंट क्रूड पिछले बंद स्तर से करीब 0.60 प्रतिशत बढ़कर 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी 1 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 85.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और तेल बाजार में स्थिरता नहीं आती, तब तक वैश्विक और भारतीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर बनी हुई है।

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