अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत के खिलाफ आक्रामक रुप में चीन और पाकिस्तान
नई दिल्ली, 16 दिसंबर : अगर पिछले कुछ दिनों की घटनाओं को एक संकेत माना जाए तो चीन और पाकिस्तान एक ही समय में भारत के खिलाफ आक्रामक होते दिख रहे हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कुछ घटनाएं जुड़ी हुई हैं या आपस में संबंधित हैं, लेकिन निश्चित रूप से काफी शांति के बाद, भारत के शत्रुतापूर्ण पड़ोसी देश आक्रामक रुप में हैं।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को संसद को बताया कि भारतीय सैनिकों ने 9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को पार करने के चीनी सैनिकों के प्रयास को सफलतापूर्वक विफल कर दिया।
एक बयान में जिसे मंत्री ने संसद के दोनों सदनों में पढ़ा, उन्होंने कहा कि सेक्टर के यांग्त्से क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच हाथापाई के बाद भारतीय सैनिकों ने बहादुरी के साथ चीनी सैनिकों को वापस उनके कैंप में जाने के लिए मजबूर कर दिया।
राजनाथ सिंह ने सदन को सूचित किया कि इस घटना के दौरान भारत की ओर से किसी के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारतीय कमांडरों द्वारा समय पर हस्तक्षेप किए जाने के कारण, चीनी सैनिक अपने स्थान पर लौट आए।
जियो न्यूज ने बताया कि चीनी उकसावे के कुछ ही दिनों बाद पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री राणा सनाउल्लाह ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान में होने वाली सभी आतंकी गतिविधियों में भारत के उंगली के निशान देखे जा सकते हैं।
पंजाब प्रांत के अतिरिक्त महानिरीक्षक आतंकवाद रोधी विभाग के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में मंत्री इमरान महमूद ने कहा, भारत किसी न किसी तरह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लुभाता है और फिर पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होता है और हमारे पास इसके स्पष्ट सबूत हैं।
राणा सनाउल्लाह ने कहा कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक घटना पेश करने और भारत के ‘नापाक एजेंडे’ को बेनकाब करने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा, यह घटना कुछ समय पहले हुई थी और हमने इससे जुड़े सभी दोषियों को पकड़ा है। भारत ने कुछ हद तक इसकी जिम्मेदारी स्वीकार की है।
महमूद ने अपनी ब्रीफिंग में कहा कि यह घटना 23 जून, 2021 को सुबह 11.09 बजे लाहौर के जौहर टाउन में हुई।
विस्फोट में करीब 200 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री और एक कार का इस्तेमाल किया गया था। विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गई और दो पुलिस अधिकारियों सहित 22 अन्य घायल हो गए।
राणा की टिप्पणी के अगले दिन, पाकिस्तान की विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी खार ने अपने देश में नापाक आतंकी गतिविधियों के लिए भारत पर निशाना साधते हुए नई दिल्ली को दुष्ट राज्य करार दिया।
उन्होंने इस्लामाबाद में विदेश मंत्रालय (एमओएफए) में प्रेस को बताया, हम अनोखी जगह पर हैं, जहां सच को सच कहने को कोई तैयार नहीं है। कोई भी इस पूरे कृत्य में स्पष्ट पाखंड को उजागर करने को तैयार नहीं है।
यह विशेष प्रयास दुनिया के ध्यान में लाने और उनसे अपेक्षा करने और वास्तव में सबूत के आधार पर चीजों को देखने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के विदेश सचिव असद मजीद खान ने इस्लामाबाद में राजनयिक कोर के सदस्यों को बुलाया था और 2012 के जौहर टाउन विस्फोट पर पाकिस्तान के डोजियर को साझा किया था।
खार ने जौहर टाउन ब्लास्ट पर कहा, ‘इस डोजियर में इस बात के विस्तृत सबूत हैं कि कैसे भारत इस घटना के पीछे पूरी तरह से शामिल है, जिसके कारण जानमाल का नुकसान हुआ।’
जियो न्यूज ने बताया कि दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक साजिश का चौथा चरण पिछले कुछ हफ्तों में लगभग एक साथ अफगानिस्तान में चल रहा है।
एमओएफए ने पुष्टि की, कि 3 दिसंबर को, काबुल में पाकिस्तान के मिशन के प्रमुख उबैद-उर-रहमान निजामानी एक हत्या के प्रयास से बच गए।
विदेश कार्यालय ने कहा, निजामनी की रक्षा करते हुए हमले में एक पाकिस्तानी सुरक्षा गार्ड इसरार मोहम्मद गंभीर रूप से घायल हो गया है।
5 दिसंबर को, अफगानिस्तान में तालिबान शासन के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पुष्टि की, कि पिछले महीने काबुल में पाकिस्तानी दूतावास पर हमले के पीछे के आतंकवादी को गिरफ्तार कर लिया गया था।
उन्होंने कहा कि गिरफ्तार संदिग्ध इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकी समूह से संबंधित है, जिसने हमले की जिम्मेदारी ली है।
मुजाहिद ने कहा कि जांच के दौरान, उन्हें पता चला कि हमले की योजना आईएस और एक अन्य आतंकवादी समूह द्वारा संयुक्त रूप से बनाई गई थी।
समा टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, उसने इसमें किसी विदेशी हाथ के शामिल होने का भी संकेत दिया, जिसका उद्देश्य दो इस्लामी पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को बर्बाद करना था।
लेविस और अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि बृहस्पतिवार को अफगान सीमा बलों द्वारा पाकिस्तानी सीमा के एक नागरिक इलाके में अंधाधुंध गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और 15 लोग घायल हो गए थे, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया।
जियो न्यूज ने बताया कि पांच दिनों में यह दूसरी बार है, जब अफगान सीमा बलों ने बलूचिस्तान के चमन शहर के नागरिक क्षेत्र में भारी हथियारों का इस्तेमाल करते हुए बिना कारण अंधाधुंध गोलीबारी की।
काबुल पुलिस के अनुसार, मंगलवार को काबुल शहर में हमलावरों द्वारा मुख्य रूप से चीनी नागरिकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एक गेस्टहाउस पर हमला करने के बाद गोलियों की आवाज सुनाई दी।
इतालवी संचालित आपातकालीन अस्पताल ने कहा कि इस हमले में घायल हुए लोगों में से 21 मरीज उनके अस्पताल में भर्ती किए गए थे, जिनमें से तीन की मौत हो गई थी।
काबुल पुलिस द्वारा सीबीएस न्यूज के साथ साझा की गई एक तस्वीर में बहुमंजिला इमारत की दीवार पर चीनी संकेत दिखाई दे रहे हैं। काबुल के एक निवासी ने सीबीएस न्यूज को बताया कि चीनी नागरिक होटल में अक्सर आते रहते हैं।
सीबीएस न्यूज ने बताया कि सोमवार का हमला चीनी नागरिकों को निशाना बनाते हुए प्रतीत होता है कि कुछ देशों में निर्देशित हिंसक कृत्यों की कड़ी में नवीनतम है, जिसे तालिबान अपने सहयोगियों में गिना सकता है।
इस बीच, पेंटागन ने कहा है कि चीन तथाकथित एलएसी के पार बलों को इकट्ठा करना और सैन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण करना जारी रखता है।
अमेरिकी रक्षा विभाग के प्रेस सचिव ब्रिगेडियर जनरल पैट राइडर ने एक ब्रीफिंग में कहा कि डीओडी भारत-चीन सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ-साथ घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहा है।
उन्होंने कहा, हमने देखा है कि चीन एलएसी पर सेना जुटाना और सैन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण करना जारी रखे हुए है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ट्रंप ने क्यूबा को लेकर अमेरिकी नीति में बदलाव के दिए संकेत, बोले-वहां के लोग बहुत अच्छे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को लेकर अपनी नीति में संभावित बदलाव के संकेत दिए हैं। साथ ही उन्होंने अपनी सरकार की क्षेत्रीय संघर्षों और घरेलू जांच मामलों को संभालने के तरीके का बचाव भी किया। उन्होंने ये भी कहा कि ईरान के साथ उसकी बातचीत अंतिम चरण में है। अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका कड़ा रुख अपना सकता है।
क्यूबा को लेकर बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी संघीय अभियोजकों ने क्यूबा क्रांति के नेता राउल कास्त्रो पर आरोप तय किए हैं। इसी बीच अमेरिकी सदर्न कमांड ने यह भी घोषणा की कि निमित्ज कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (जिसमें एयरक्राफ्ट कैरियर, उसका एयर विंग और कम से कम एक गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर शामिल है) कैरेबियन क्षेत्र में पहुंच चुका है।
बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने क्यूबा को एक असफल देश बताया और कहा कि जल्द ही इस द्वीपीय देश को लेकर बड़ी घोषणा की जा सकती है।
ट्रंप ने कहा कि वे लोग पिछले 65 वर्षों से इस पल का इंतजार कर रहे हैं। उनका इशारा क्यूबा मूल के अमेरिकियों और उन परिवारों की तरफ था जो दशकों से वॉशिंगटन और हवाना के बीच तनाव का असर झेलते आए हैं।
उन्होंने कहा कि क्यूबा मूल के अमेरिकियों ने उन्हें 94 प्रतिशत तक समर्थन’ दिया और यह मुद्दा फ्लोरिडा के कई परिवारों के लिए बेहद भावनात्मक है। वहां न खाना है, न बिजली और न ऊर्जा बची है लेकिन वहां के लोग बहुत अच्छे हैं।”
जब उनसे पूछा गया कि क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंध कितने समय तक जारी रहेंगे तो उन्होंने जवाब दिया, “देखते हैं। हम बहुत जल्द इसकी घोषणा करेंगे।”
राष्ट्रपति ने कहा कि क्यूबा को लेकर किसी तरह का तनाव बढ़ने वाला नहीं है। वहां के हालात पहले ही खराब हैं। पूरा देश बिखरा हुआ है।
ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत पर कहा कि अब ईरान की तरफ से बातचीत करने वाले लोग पहले के अधिकारियों से ज्यादा व्यावहारिक हैं। हम ऐसे लोगों से बात कर रहे हैं जो पहले वालों की तुलना में ज्यादा समझदार और व्यवहारिक हैं। उनमें अच्छी सोच और समझ है। वे युद्ध की बजाय बातचीत को बेहतर मानते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर मैं कुछ दिन इंतजार करके युद्ध टाल सकता हूं और लोगों की जान बचा सकता हूं, तो यह बहुत अच्छी बात है।
अमेरिका की ओर से ईरान को बातचीत के दौरान प्रतिबंधों में राहत देने की खबरों को खारिज करते हुए ट्रंप ने कहा कि जब तक वे समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करते, मैं कोई राहत नहीं दूंगा।”
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नौकरियों पर उसके असर को लेकर ट्रंप ने कहा कि दुनिया में तनाव के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस समय अमेरिका में पहले से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं। हमारे पास रिकॉर्ड स्तर पर नौकरियां हैं।
ट्रंप ने ईरान से जुड़े हालिया सैन्य अभियानों का भी बचाव किया और दावा किया कि अमेरिका की नाकेबंदी की वजह से स्ट्रेट इलाके से तेल की कोई खेप नहीं गुजर पाई है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
‘आपका स्वागत है, मेरे दोस्त!’ रोम में पीएम मेलोनी ने किया प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत, भारतीय समुदाय में उत्साह

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मंगलवार रात रोम पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी अपने पांच देशों के दौरे के आखिरी चरण में इटली पहुंचे हैं।
मेलोनी ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक खास संदेश भी पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “रोम में आपका स्वागत है, मेरे दोस्त!” इससे दोनों नेताओं के बीच की अच्छी दोस्ती साफ दिखाई दी।
प्रधानमंत्री मोदी की इटली यात्रा के दौरान उनकी प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ द्विपक्षीय बातचीत होगी। इसके अलावा, वह इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटरेला से भी मुलाकात करेंगे।
रोम पहुंचते ही वहां मौजूद भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत किया। प्रधानमंत्री के आने की खुशी में लोग पहले से ही इंतजार कर रहे थे। जैसे ही पीएम मोदी पहुंचे, लोगों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। इस दौरान “मोदी-मोदी” और “भारत माता की जय” के नारे गूंजते रहे। पीएम मोदी ने भी लोगों का आभार व्यक्त किया और खुशी-खुशी उनसे हाथ मिलाया। इस दौरान कुछ बच्चे भी पीएम मोदी का हाथ से बनाया चित्र लेकर पहुंचे। पीएम ने बच्चों की इस प्रतिभा पर खुशी जाहिर करते हुए चित्र पर अपने हस्ताक्षर किए।
पीएम मोदी ने भी अपनी यात्रा की जानकारी साझा करते हुए कहा कि वह भारत और इटली के रिश्तों को और मजबूत करने के मकसद से आधिकारिक दौरे पर रोम पहुंचे हैं।
बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात जॉर्जिया मेलोनी से ऐतिहासिक विला डोरिया पैम्फिली में होगी। उम्मीद है कि दोनों नेता भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए एक संयुक्त घोषणा पत्र भी जारी करेंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आधिकारिक यात्रा पर रोम पहुंचे हैं। इटली के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने एयरपोर्ट पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।”
उन्होंने आगे कहा, “भारत और इटली के बीच लंबे समय से मजबूत और कई क्षेत्रों में फैले रिश्ते हैं। यह यात्रा दोनों देशों की साझेदारी को नई रफ्तार देगी।”
विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक, यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तेजी आ रही है। भारत और इटली मिलकर 2025-2029 की संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना पर काम कर रहे हैं।
इस योजना में व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, तथा लोगों के बीच आपसी संबंध बढ़ाने जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।
एमईए ने बताया कि 2025 में भारत और इटली के बीच व्यापार 16.77 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं, अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 के बीच इटली से भारत में कुल 3.66 अरब डॉलर का निवेश आया है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह दौरा यूरोप के साथ भारत के रिश्तों को और मजबूत करेगा, खासकर व्यापार और निवेश के क्षेत्र में। हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर बातचीत पूरी हुई है, जिससे दोनों पक्षों के आर्थिक रिश्तों को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इटली गए थे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत-वियतनाम रक्षा संबंधों को नई मजबूती, रक्षा मंत्री ने की उच्चस्तरीय वार्ता

भारत और वियतनाम के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में हुए इस समझौते से दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा मिलेगी।
रक्षा मंत्री ने इसे दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी में एक बड़ा और भविष्य उन्मुख कदम बताया है। इसके अलावा वियतनाम के साथ समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, सैन्य प्रशिक्षण तथा क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। दरअसल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने आधिकारिक दौरे पर वियतनाम में हैं। यहां मंगलवार को उन्होंने वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल फान वान जियांग के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच तेजी से मजबूत हो रहे रक्षा संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई।
बैठक के बाद रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। भारत इस साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
दौरे के दौरान दोनों रक्षा मंत्रियों ने संयुक्त रूप से वियतनाम एयर फोर्स ऑफिसर कॉलेज में स्थापित भाषा प्रयोगशाला का उद्घाटन भी किया। इसे दोनों देशों के सैन्य सहयोग और प्रशिक्षण संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस पहल से सैन्य अधिकारियों के बीच बेहतर संवाद और प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। भारत और वियतनाम के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग को नई दिशा मिली है। दोनों पक्षों ने इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया।
अपनी यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री ने वियतनाम के राष्ट्रपिता और महान क्रांतिकारी नेता हो ची मिन्ह की समाधि पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह अवसर हो ची मिन्ह की 136वीं जयंती का था। राजनाथ सिंह ने कहा कि हो ची मिन्ह का दृष्टिकोण, नेतृत्व और राष्ट्रीय स्वतंत्रता के प्रति उनका समर्पण आज भी दुनिया की कई पीढ़ियों को प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि भारत और वियतनाम की मित्रता साझा मूल्यों, पारस्परिक सम्मान और ऐतिहासिक विश्वास पर आधारित है।
गौरतलब है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने रणनीतिक और रक्षा सहयोग को लगातार मजबूत कर रहा है। वियतनाम को भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है और दोनों देश चीन की बढ़ती आक्रामकता तथा क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर जोर दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा मंत्री का यह दौरा भारत-वियतनाम संबंधों को नई गति देने के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक संतुलन को भी मजबूत करेगा। इससे पहले सोमवार को रक्षा मंत्री ने हनोई में कहा कि भारत न्यूक्लियर ब्लैकमेल को स्वीकार नहीं करेगा। परमाणु धमकी के सामने भारत नहीं झुकेगा।
उन्होंने कहा कि हम परमाणु हथियार पहले इस्तेमाल न करने की नीति के प्रति प्रतिबद्ध है। हमारी नीति हमेशा शांति और जिम्मेदारी पर आधारित रही है, लेकिन भारत किसी भी प्रकार के ‘न्यूक्लियर ब्लैकमेल’ को स्वीकार नहीं करेगा। यदि कोई देश भारत को परमाणु धमकी देने की कोशिश करेगा, तो भारत उसके सामने झुकने वाला नहीं है।
रक्षा मंत्री राजनाथ ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने एक बार फिर दुनिया को देश की सैन्य क्षमता, साहस और निर्णायक शक्ति का परिचय कराया है। भारतीय जवानों ने जिस प्रकार अद्भुत पराक्रम दिखाया, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि आज का भारत कमजोर नहीं, बल्कि हर चुनौती का जवाब देने में सक्षम एक मजबूत और आत्मविश्वासी राष्ट्र है।
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