राजनीति
मुख्यमंत्री का अखिलेश पर पलटवार, बोले, ‘भाजपा सरकार में लड़के हैं गलती कर देते हैं वाली सोच नहीं’
यूपी विधान सभा में मंगलवार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष में तीखी नोंक झोंक हुई। नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा सरकार अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करती है। भाजपा की सरकार में ये नहीं कहा जाता कि लड़के हैं गलती कर देते हैं। यूपी में 18वीं विधानसभा के प्रथम सत्र के दूसरे दिन विधानमंडल में राजनीति दलों के नेताओं ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा की। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने चंदौली, प्रयागराज और ललितपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यूपी में महिलाओं के खिलाफ सर्वाधिक अपराध हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने नेता प्रतिपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टालरेंस के तहत कार्रवाई हो रही है। चुस्त दुरूस्त कानून व्यवस्था के मसले पर देश में यूपी आज नंबर वन है इसीलिए जनता ने हमें दूसरी बार मौका दिया है। सरकार अपराधियों के खिलाफ अभियान जारी रखेगी, हत्या, लूट, दुष्कर्म जैसी घटनाओं में कमी आई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव के दौरान और उसके बाद भी कुछ लोगों ने शाति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की थी लेकिन उसे नाकाम किया गया। उन्होंने बिना किसी दल या नेता का नाम लिए कहा कि कुछ लोगों की अच्छे ढंग से गर्मी शांत हो रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है पिछले पांच साल से यूपी में कही दंगा नही हुआ, कोई कर्फ्यू नहीं लगा, कानून व्यवस्था के मामले में यूपी एक नजीर बना, एक लाख से ज्यादा लाउस्पीकर उतरवाए गए, सड़कों पर अलविदा की नमाज नहीं होने दी गई और सारे धर्मो के पर्व शांति पूर्वक संपन्न कराए गए। यही नहीं अपराधियों माफियाओं की कमर तोड़ने की गरज से दो हजार करोड़ की संपत्ति जब्त की गई। इस मौके पर उन्होंने आजमगढ़ में जहरीली शराब से हुई मौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना का मुख्य आरोपी समाजवादी पार्टी से संबंध था।
उन्होंने कहा कि इसी तरह की कई घटनाओं में एक दल विशेष के लोगों की संलप्तिता पाई गई। उन्होंने इस मौके पर यह भी कहा कि कानून व्यवस्था की दुहाई देने वाले दल यह न भूले कि उनके नेता ने कहा था कि लड़के हैं लड़कों से गलती हो जाती है। इससे पूर्व कार्य स्थगन के प्रस्ताव के पर नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि जीरों टालरेंस की बात करने वाली सरकार में जितनी आपराधिक घटनाएं हो रही हैं वह सरकार के दावे को खोखला साबित करने के लिए काफी है।
कहा कि सदन में राज्यपाल के अभिभाषण करने से एक दिन पूर्व ही 19 साल की एक लड़की के साथ दुष्कर्म जैसी घटना हुईं, महिला अपराधों में इस समय यूपी नंबर वन है गंभीर घटनाओं में भी सरकार संवेदनशील नहीं है। कानून-व्यवस्था की दुहाई देने वाली सरकार में दो दिन पूर्व रामपुर के एक थाने में बीजेपी कार्यकर्ता की पिटाई कर दी गई।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस वक्तव्य का भी उल्लेख किया। जिसमें उन्होंने कहा था कि कार्यकर्ता दलाली बंद कर दें अधिकारियों को मैं सुधार दूंगा, नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री की इस स्वीकारोक्ति से स्पष्ट है कि पिछले पांच साल से यूपी में दलाली चल रही थी, नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पुलिस प्रशासन को खुली छूट दे दी गई है जो दबिश के नाम पर दबंगई दिखा रही है। कार्य स्थगन के जरिए ही सुभासपा विधान मंडल दल के नेता ओम प्रकाश राजभर ने गाजीपुर में अपने उपर हुए हमले का मामला उठाते हुए कहा कि वहां का पुलिस और जिला प्रशासन अपराधियों के साथ खड़ा है, पीड़ित होने के बावजूद पुलिस ने मेरे खिलाफ ही केस दर्ज कर लिया है इसपर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि महानिरीक्षक कानून व्यवस्था की रिपोर्ट के अनुसार उल्लिखित मामले में जांच चल रही है इस पर ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उन्हें पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है इसलिए इसकी जांच किसी दूसरी एजेंसी से कराई जाए। उनकी इस मांग को सरकार ने खारिज कर दिया। विधान सभा में आज बजट सत्र की समयअवधि कम किए जाने का मामला सपा सदस्य मनोज पांडे व लालजी वर्मा ने उठाते हुए कहा कि बजट सत्र के दिन कम करके लोगों को अपनी बात रखने से वंचित कर रही है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि बजट सत्र की अवधि कम किए जाने का मुद्दा उठाने वाले दलांे को याद रखना चाहिए कि उन्होंने अपनी सरकारों में कितने दिन बजट सत्र चलाया था।
संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि अभी तक कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के अनुसार आगामी 28 जून तक सदन की कार्यवाही चलने का कार्यक्रम निर्धािरत है लिहाजा विपक्ष के सदस्यों का अभी से बजट सत्र कम किए जाने की शंका निर्मूल है।
राजनीति
बसपा को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है दुष्प्रचार : मायावती

एक कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर उठे विवाद के बीच बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने इसे पार्टी और उसके नेतृत्व को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पार्टी की बढ़ती सक्रियता और जनाधार से घबराए राजनीतिक विरोधी तथा मीडिया का एक वर्ग भ्रामक और गुमराह करने वाले अभियान चला रहा है।
मायावती ने दावा किया कि बसपा में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पारदर्शी और बहुस्तरीय है तथा पार्टी के पदाधिकारी संभावित प्रत्याशियों की सामाजिक, राजनीतिक और संगठनात्मक क्षमता का आकलन करने के लिए नियमित रूप से संवाद और स्क्रीनिंग करते हैं।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से अफवाहों पर ध्यान न देने और मिशन-2027 की तैयारियों में जुटे रहने का आह्वान किया। बसपा मुखिया मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”बसपा देश में ’बहुजन समाज’ व अपरकास्ट समाज के गरीब शोषित-पीड़ित व उपेक्षितों द्वारा, उनके संवैधानिक हक व न्याय आदि के लिए परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताए रास्तों पर चलने वाली ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सच्ची व ईमानदार अंबेडकरवादी पार्टी है, जो दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के सहारे और उनके इशारे पर नहीं चलती है, बल्कि अपने लोगों के ही तन, मन और धन के बलबूते पर चलती है, जो स्वाभाविक तौर पर संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व पूंजीवादी ताकतों को यह फुटी कौड़ी नहीं सुहाता है और इसीलिए वे समय-समय पर और ख़ासकर चुनाव के नजदीक आने पर किस्म-किस्म के हथकंडे इस्तेमाल करके बसपा पार्टी व मूवमेंट को तथा उसके आयरनलेडी नेतृत्व को भी बदनाम करने में लगे रहते हैं।”
बसपा प्रमुख ने आगे लिखा, ”इसी क्रम में मीडिया के एक वर्ग द्वारा दूसरी पार्टियों की चुनावी जुगाड़ आदि पर से लोगों का ध्यान बांटने तथा उन पर पर्दा डालने के लिए बसपा पार्टी उम्मीदवार के चयन को लेकर सवालिया निशान खड़े करते रहते हैं, जबकि बसपा को जो भी आर्थिक सहयोग हासिल होता है वह पार्टी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने पर ही कानूनी तौर से ज़्यादातर खर्च कर दिया जाता है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। फिर भी उसको लेकर षडयंत्र के तहत गुमराह करने वाली तरह-तरह की गलत बातें व अफवाहें आदि फैलाना मीडिया को शोभा नहीं देता है।”
उन्होंने कहा कि सर्वविदित है कि केवल बीएसपी यूपी स्टेट यूनिट के अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ही नहीं, बल्कि पार्टी के अन्य सभी छोटे-बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्तागण भी इस समय पार्टी संगठन की मजबूती तथा पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के साथ-साथ आगामी यूपी विधानसभा आम चुनाव हेतु पार्टी उम्मीदवारों की संभावित सूची बनाने तथा उनकी ठोस स्क्रीनिंग करने आदि में लगे हुए हैं और पार्टी की उम्मीदवारी को लेकर उनसे मिलने वालों से अन्य बातों के अलावा उनकी सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हैसियत के साथ ही उनके पार्टी के प्रति वफादारी व टिकाऊपन आदि को भांपने के लिए, कोर्ट में जिरह की तरह, उनसे तरह-तरह के सवाल-जवाब भी करते रहते हैं, जिसकी गहराई में गए बिना ही उसे उसके पूरे फेस वैल्यू पर अन्यथा लेना उचित नहीं है।
मायावती ने अपील करते हुए कहा कि यह मीडिया से भी अनुरोध है तथा पार्टी के लोगों से भी अपील है कि वे विरोधी पार्टियों के ऐसे प्रायोजित किसी भी षडयंत्र का शिकार होकर गुमराह ना हों, बल्कि अपने मिशन 2027 के लक्ष्य में पूरे जी-जान से लगे रहें, जिस बसपा जिन्दाबाद की आपकी जबरदस्त तैयारी को देखकर ही विरोधियों की नींद काफी उड़ी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
राष्ट्रपति ट्रंप ने तीन अमेरिकी सैनिकों को उनकी वीरता और जज्बे के लिए मेडल ऑफ ऑनर से किया सम्मानित

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वियतनाम युद्ध और अफगानिस्तान युद्ध में असाधारण बहादुरी दिखाने के लिए रिटायर्ड मरीन मेजर जेम्स कैपर्स जूनियर, रिटायर्ड आर्मी मेजर निकोलस डॉकरी और मरणोपरांत मरीन कर्नल जॉन डब्ल्यू. रिप्ले को अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य सम्मान ‘मेडल ऑफ ऑनर’ दिया।
व्हाइट हाउस में समारोह के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने तीनों सैनिकों को हिम्मत और कुर्बानी की मिसाल बताया, जो अमेरिकी सुरक्षा बलों की पहचान है। ट्रंप ने कहा, “अमेरिकी सुरक्षा बलों के कमांडर इन चीफ के तौर पर सेवा करने से बड़ा कोई खास मौका मेरे लिए नहीं है। धरती पर अब तक के सबसे बहादुर और महान हीरो की 250 साल की परंपरा। लेकिन कुछ ही लोगों को हमारा सबसे बड़ा सैन्य सम्मान, कांग्रेसनल मेडल ऑफ ऑनर मिला है।”
कैपर्स को 1967 में वियतनाम में चार दिन के टोही मिशन के दौरान उनके कामों के लिए पहचान मिली थी।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, उस समय के सेकंड लेफ्टिनेंट कैपर्स और उनकी टीम ने उत्तरी वियतनामी रेजिमेंटल बेस कैंप का पता लगाने की कोशिश में दुश्मन की बड़ी सेना से बार-बार भिड़ंत की। एक हमले में कई गंभीर चोटें लगने के बावजूद, उन्होंने अपने सैनिकों का नेतृत्व करना जारी रखा, सपोर्टिंग फायर को कोऑर्डिनेट किया और उन्हें निकालने का काम निर्देशित किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि कैसे कैपर्स बुरी तरह घायल होने के बावजूद लड़ते रहे। उन्होंने कहा, “उनके सभी साथी घायल हो गए, लेकिन जेम्स एक पैर पर उठ खड़े हुए और आगे बढ़ते गए। उनका एक पैर उनकी पूरी वजन नहीं उठा सकता था। मुश्किल से होश में आने पर, उन्होंने पूरे एक घंटे तक क्लोज एयर सपोर्ट के लिए कॉल किया।”
बता दें कि क्लोज एयर सपोर्ट एक सैन्य हवाई रणनीति है, जिसमें लड़ाकू विमानों (फिक्स्ड-विंग) और हेलीकॉप्टरों (रोटरी-विंग) द्वारा दुश्मन के उन ठिकानों पर सटीक हमले किए जाते हैं, जो जमीन पर लड़ रहे मित्र देशों की सेनाओं के बहुत करीब होते हैं।
राष्ट्रपति ने बताया कि कैपर्स को असल में 1967 में मेडल ऑफ ऑनर के लिए रिकमेंड किया गया था, लेकिन पेपरवर्क पूरा होने से पहले उनके कमांडिंग ऑफिसर की मौत हो जाने के बाद अवॉर्ड प्रोसेस रुक गया।
ट्रंप ने कहा, “जेम्स, देश ने तुम्हें बहुत लंबा इंतजार करवाया। इसलिए मैं तुमसे कहता हूं, बधाई हो, तुम कर पाए।”
कर्नल जॉन डब्ल्यू. रिप्ले को यह सम्मान मरणोपरांत 2 अप्रैल, 1972 को उत्तरी वियतनाम के एक बड़े हमले के दौरान उनके कामों के लिए मिला। उस समय के कैप्टन रिप्ले, एक सीनियर मरीन सलाहकार के तौर पर, दुश्मन की तेज फायरिंग के बीच एक पुल के नीचे बार-बार चढ़े और 500 पाउंड से ज्यादा विस्फोटक रखे, जिससे पुल का ढांचा नष्ट हो गया और आगे बढ़ रही दुश्मन सेना रुक गई।
ट्रंप ने कहा, “लगातार पांच घंटे तक, वह एक्सप्लोसिव ले गए, चार्ज लगाए और हर एक तक एक प्राइमर कॉर्ड पहुंचाया। जब जॉन ने एक्सप्लोसिव ब्लास्ट किया, तो पुल नदी में गिर गया, जिससे आगे बढ़ रहे लोग मारे गए।”
डॉकरी को अक्टूबर 2012 में अफगानिस्तान के कपिसा प्रांत में तालिबान के हमले के दौरान की गई कार्रवाई के लिए सम्मानित किया गया था। व्हाइट हाउस ने कहा कि घायल सैनिकों को बचाने, जवाबी हमलों का नेतृत्व करने और हवाई मदद का निर्देशन करते समय उन्होंने बार-बार दुश्मन की गोलीबारी का सामना किया।
ट्रंप ने बताया कि कैसे निकोलस डॉकरी ने ना केवल घायल साथियों को बचाया, बल्कि उन्हें दुश्मन के हमलों से सुरक्षित किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “जब उनके चारों ओर मोर्टार फायर की गड़गड़ाहट हो रही थी, निक ने अपने घायल साथी को अपने शरीर से कवर कर लिया। मेजर डॉकरी, आप उस दिन युद्ध के मैदान से जाने वाले आखिरी आदमी थे और आप इसे एक लीजेंड और हीरो के तौर पर छोड़ गए।”
समारोह खत्म करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि देश उन सैनिकों का कर्जदार है जिन्होंने लड़ाई में अपनी जान जोखिम में डाली।
उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे हम अपनी स्थापना की 250वीं सालगिरह के करीब पहुंच रहे हैं, हमें याद है कि हम उन जैसे हीरो के लिए सब कुछ कर्जदार हैं जिनका हम आज जश्न मना रहे हैं। हम आपका शुक्रिया अदा करते हैं और हम आपको कभी नहीं भूलेंगे।”
मेडल ऑफ ऑनर अमेरिकी सुरक्षा बलों के उन सदस्यों को दिया जाता है जो ड्यूटी से हटकर अपनी जान जोखिम में डालकर “वीरता और निडरता” से अपनी अलग पहचान बनाते हैं। यह अमेरिकी सरकार द्वारा दिया जाने वाला सबसे बड़ा सैन्य सम्मान है।
ये सम्मान ऐसे समय में दिए जा रहे हैं जब अमेरिका 2026 में अपनी स्थापना की 250वीं सालगिरह मनाने की तैयारी कर रहा है। अपने पूरे इतिहास में, मेडल ऑफ ऑनर उन सेवा सदस्यों को दिया गया है जिनके लड़ाई में किए गए कामों को सैन्य हिम्मत और कुर्बानी के सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड को दिखाने वाला माना जाता है।
राजनीति
‘यह मुंबई हमारी है’, शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर उद्धव गुट ने विरोधियों को दिया संदेश

शिवसेना की स्थापना को आज 60 साल पूरे हो गए हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने पार्टी की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि पिछले छह दशकों में शिवसेना को तोड़ने और कमजोर करने के कई प्रयास किए गए। पार्टी का दावा है कि विरोधियों के मन में शिवसेना के प्रति भय के कारण समय-समय पर कई समानांतर ‘सेनाओं’ का गठन हुआ और वे खत्म भी हो गईं, लेकिन बालासाहेब ठाकरे द्वारा रखी गई नींव और स्थापित की गई विचारधारा अडिग रही।
पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में छह सांसदों की हालिया बगावत का नाम लिए बिना कहा गया कि आज भी व्यावसायिक सोच से प्रेरित कई नकली संगठन खड़े किए जा रहे हैं, लेकिन शिवसेना की स्थापना कभी व्यापारिक सौदे के रूप में नहीं हुई। संपादकीय में कहा गया कि शिवसेना प्रमुख ने पार्टी को कभी कारोबार नहीं बनने दिया। इसलिए समय-समय पर अवसरवादी और सौदेबाजी करने वाले लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया गया, ताकि मराठी अस्मिता और हिंदुत्व की यह धारा शुद्ध बनी रहे, जिसकी गूंज आज भी महाराष्ट्र की घाटियों में सुनाई देती है।
संपादकीय में कहा गया कि शिवसेना ने मराठी समाज को स्वाभिमान के साथ जीना सिखाया। लोगों में यह आत्मविश्वास जगाया कि वे कह सकें, “यह मुंबई हमारी है।” पार्टी ने आम लोगों को पार्षद बनाया और शाखाओं का ऐसा मजबूत नेटवर्क खड़ा किया, जो जनता के लिए पारिवारिक न्यायालय की तरह काम करता था। सड़क, पानी, स्कूल में प्रवेश, अस्पताल में सहायता और राशन कार्ड जैसी समस्याओं के समाधान के लिए शिवसैनिक दिन-रात लोगों की सेवा में जुटे रहते थे। अन्याय की किसी भी घटना पर सबसे पहले शिवसैनिक ही मौके पर पहुंचते थे।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में महाराष्ट्र के इस गौरव को खत्म करने और राज्य के स्वाभिमान को कमजोर करने की कोशिशें तेज हुई हैं। संपादकीय में कहा गया कि पार्टी की स्थापना के समय से ही राजनीतिक महत्वाकांक्षा से प्रेरित लोगों ने समय-समय पर पीठ में छुरा घोंपा। इसके बावजूद शिवसेना हर वार को सहते हुए आज इस मुकाम तक पहुंची है, क्योंकि उसके विरोधियों में कभी सामने से मुकाबला करने का साहस नहीं था। इसमें बालासाहेब ठाकरे के उस कथन का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “मेरी पीठ पर इतने घाव हो चुके हैं कि अब नए घाव के लिए भी जगह नहीं बची।”
संपादकीय में कहा गया कि शिवसेना ने समाजसेवा की परिभाषा बदल दी। चाहे कोई स्थानीय दुर्घटना हो या बम विस्फोट, शिवसैनिक हमेशा सबसे पहले राहत कार्य में पहुंचते थे। रक्तदान शिविर, शिक्षा अभियान, स्वास्थ्य शिविर और मुफ्त किताब-कॉपी वितरण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी हर घर तक पहुंची। निस्वार्थ भाव से काम करते हुए शिवसेना मजदूरों और श्रमिकों का सबसे बड़ा सहारा बनी।
संपादकीय के अनुसार, इसी जनसेवा के दम पर शिवसेना ने नगर निगमों, महाराष्ट्र विधानसभा और संसद तक अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। पार्टी ने आम नागरिकों को विधायक, सांसद और मंत्री बनाया और महाराष्ट्र के गौरव का प्रतीक बनी।
संपादकीय में कहा गया कि 60वें वर्ष में प्रवेश करते समय पार्टी के मन में एक पीड़ा भी है। एक ओर जहां समर्पित कार्यकर्ताओं की बड़ी सेना हमेशा पार्टी के साथ खड़ी रही, वहीं दूसरी ओर कुछ अवसरवादी, स्वार्थी और दल-बदल करने वाले लोग निजी लाभ के लिए पार्टी छोड़कर चले गए। इसे वर्तमान राजनीति में नैतिकता के पतन का प्रतीक बताया गया।
जिस तरह शिवसेना ने सह्याद्रि की घाटियों में मराठी अस्मिता का संदेश फैलाया, उसी तरह हिंदुत्व का शंखनाद कर पूरे हिंदू समाज को जागृत किया। मलंगगढ़ से लेकर अयोध्या आंदोलन तक हिंदुत्व की लड़ाई में शिवसेना ने बड़े बलिदान दिए। इसमें सवाल उठाया गया कि “क्या आज खुद को हिंदुत्व का सबसे बड़ा समर्थक बताने वाले लोग उस योगदान का एक अंश भी दे पाए हैं?”
संपादकीय के अंत में कहा गया कि जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में कहा जाता है कि यदि वे नहीं होते तो हिंदुओं की पहचान समाप्त हो जाती, उसी विरासत को शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने आगे बढ़ाया और देश की अखंडता की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। नेशन फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) शिवसेना का स्थायी मंत्र रहा है। यह मंत्र आज भी गूंज रहा है और भविष्य में भी गूंजता रहेगा। शिवसेना अमर है।
-
दुर्घटना10 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
महाराष्ट्र12 months agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
-
अनन्य3 years agoउत्तराखंड में फायर सीजन शुरू होने से पहले वन विभाग हुआ सतर्क
