राजनीति
तेलंगाना बीजेपी प्रमुख के खिलाफ केस दर्ज, गिरफ्तार
हैदराबाद, 7 जनवरी : तेलंगाना के कामारेड्डी कस्बे में पुलिस ने औद्योगिक क्षेत्र के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए नगरपालिका के मास्टरप्लान के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान शुक्रवार को हुई घटनाओं के संबंध में भाजपा के राज्य प्रमुख बंदी संजय के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बाद में देर रात उन्हें गिरफ़तार कर लिया गया। संजय के साथ के. वनेकटरमना रेड्डी, ई. रविंदर रेड्डी और अन्य के खिलाफ देवनपल्ली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।
कामारेड्डी के पुलिस अधीक्षक बी. श्रीनिवास ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग किसानों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।
तनाव के बीच संजय व अन्य को पुलिस ने शुक्रवार की रात कलेक्ट्रेट के पास से गिरफ्तार कर लिया। भाजपा कार्यकर्ताओं और कुछ किसानों ने समाहरणालय में घुसने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस से उनकी झड़प हुई।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व अन्य पुलिस बैरिकेड्स हटाकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उनके समर्थकों ने भी गिरफ्तारी का विरोध किया। पुलिस ने संजय को हैदराबाद शिफ्ट कर दिया।
इस बीच मास्टरप्लान का विरोध कर रहे किसानों ने तेलंगाना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। किसानों ने मास्टर प्लान के मसौदे में कृषि भूमि को औद्योगिक क्षेत्र में शामिल करने को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की है।
प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए अपनी दो एकड़ जमीन खोने के डर से एक किसान द्वारा आत्महत्या करने के तीन दिन पहले किसानों ने अपना विरोध तेज कर दिया था।
वे अपनी मांगों को लेकर शहर में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। गुरुवार को किसानों के आह्वान पर बंद रखा गया।
एक अन्य घटनक्रम में कामारेड्डी के जिला कलेक्टर जितेश पाटिल ने स्पष्ट किया कि 61.55 वर्ग किलोमीटर का मास्टर प्लान मसौदा चरण में है। उन्होंने कहा कि 60 दिनों में प्राप्त सुझावों और आपत्तियों के आधार पर आवश्यक संशोधनों के बाद अंतिम मास्टर प्लान जारी किया जाएगा। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि अधिकारी उनकी आपत्तियों पर ध्यान देंगे।
महाराष्ट्र
मुंबई के लालबाग परेल में ईद मिलाद-उन-नबी जुलूस से लौटते समय हिंसा

मुंबई के परेल के लालबाग में ईद मिलाद-उन-नबी (पीबीयूएच) के जुलूस से लौटते समय आधी रात को सांप्रदायिक हिंसा भड़कने के बाद पुलिस ने दंगा करने का केस दर्ज किया है और पांच लोगों को हिरासत में लिया है। मुंबई पुलिस के सूत्रों ने यह जानकारी दी। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 189(1), 189(2), 191(1), 195(1), 118(1), 121 और महाराष्ट्र पुलिस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। लालबाग परेल इलाके में उस समय तनाव फैल गया जब दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई। ईद मिलाद-उन-नबी (पीबीयूएच) के जुलूस के दौरान मुस्लिम युवक अपनी मोटरसाइकिलों पर लालबाग परेल से गुजर रहे थे, तभी दूसरे समुदाय के युवक इकट्ठा हो गए और मोटरसाइकिलों के शोर और तेज गति से गाड़ी चलाने पर आपत्ति जताई। इस दौरान पुलिस ने कई युवकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी शुरू कर दी। उसी समय, दूसरे समुदाय के युवकों ने मुस्लिम युवकों की मोटरसाइकिल पर लगे धार्मिक झंडे का अपमान किया और दोनों तरफ से नारे लगने लगे। इलाके में मेजोरिटी कम्युनिटी के युवाओं ने पहले से ही पहरा लगा रखा था और जब इन युवाओं ने पुलिस के सामने मुस्लिम युवाओं पर हमला करने की कोशिश की, तो हालात बिगड़ गए और मामले ने हिंसा का रूप ले लिया। पुलिस ने हालात को कंट्रोल करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया। फिलहाल यहां टेंशन बनी हुई है लेकिन शांति बनी हुई है। लालबाग परेल विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें भी फैल रही हैं, साथ ही नफरत फैलाने वाले तत्व इसे धार्मिक रंग देकर हालात को और बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, यही वजह है कि अब मुंबई पुलिस ने सोशल मीडिया पर नज़र रखना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही इंस्टाग्राम और फेसबुक समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सैकड़ों ऐसे नफरत फैलाने वाले वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें नफरत फैलाने वाले तत्वों ने एक खास कम्युनिटी को टारगेट किया है। इस मामले में भोईवाड़ा पुलिस ने दंगा करने का केस दर्ज किया है और करीब 5 आरोपियों को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही पुलिस दूसरे पक्ष से भी बात कर रही है और इस संबंध में क्रॉस एफआईआर दर्ज होने की संभावना है। जिस तरह से मुंबई शहर में हालात बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है, उसके बाद पुलिस ने यहां अलर्ट जारी कर दिया है। ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस से लौट रहे मुस्लिम युवकों पर हुए हमले के बाद पुलिस ने हिंसा और दंगे का केस दर्ज किया है और सीसीटीवी फुटेज भी चेक कर रही है। इसके साथ ही पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की रिक्वेस्ट की है। इतना ही नहीं, अलर्ट जारी किया गया है, सोशल मीडिया पर भी नज़र रखी जा रही है। यह दंगा बदमाशों की शरारत की वजह से हुआ था। अब सोशल मीडिया पर भी भड़काने वाली बातें आम हो गई हैं, जिस पर पुलिस एक्शन ले सकती है।
राष्ट्रीय समाचार
2026 की दूसरी छमाही की शुरुआत में भारत में कई आर्थिक संकेतों ने दिखाई मजबूती : रिपोर्ट

भारत ने 2026 की छमाही की शुरुआत कई सकारात्मक आर्थिक संकेतों के साथ की है, जिसमें विदेशी निवेशकों की खरीदारी, मानसून की रिकवरी, घरेलू वृद्धि और कंपनियों की आय का मजबूत होना शामिल हैं। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
पीएल वेल्थ के ताजा अगस्त 2026 के मार्केट आउटलुक में बताया गया कि कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में अनिश्चितता से बाजारों में व्यापक स्तर पर तेजी आने की संभावना कम है।
पीएल वेल्थ के सीईओ इंदरबीर जॉली ने कहा, “हमारा मानना है कि निवेशकों के लिए यह समय सोच-समझकर निवेश करने, क्वालिटी पर ध्यान देने और किस्तों में पैसा लगाने का है। भारत को लेकर हमारा लंबे समय का भरोसा बना हुआ है, जिसे घरेलू निवेश, वित्तीय क्षेत्र के विस्तार, डेमोग्राफिक्स और देश में स्ट्रक्चरल ग्रोथ के मौकों का समर्थन मिल रहा है।”
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की घरेलू विकास की गति मजबूत बनी हुई है। इसे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के नेट खरीदार के तौर पर लौटने, बेहतर होते मानसून और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजों के सीजन की आम तौर पर स्थिर शुरुआत से सहारा मिल रहा है।
भारत की वित्त वर्ष 2026 की जीडीपी विकास दर का शुरुआती अनुमान 7.7 प्रतिशत है, जबकि आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए विकास दर का अनुमान 6.7 प्रतिशत लगाया है।
जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां वृद्धि के दायरे में रहीं, जिसमें पीएमआई क्रमशः 53.9 और 53.1 रहा।
बैंक क्रेडिट ग्रोथ सालाना आधार पर बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो गई, जिससे जून 2026 तक कुल बकाया क्रेडिट 219.3 ट्रिलियन रुपए तक पहुंच गया, जबकि कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 75.2 प्रतिशत के अच्छे स्तर पर बना रहा, जो इसके लंबे समय के औसत से अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई पर नजर रखना जरूरी है। जुलाई में सीपीआई बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गया, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से अधिक है। इसकी मुख्य वजह खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ना है। वहीं, आरबीआई ने वित्त वर्ष 27 के लिए सीपीआई का अनुमान 5.1 प्रतिशत पर बनाए रखा है, जिसमें तीसरी तिमाही में इसके 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।
हालांकि, विदेशी निवेशकों का निवेश एक सकारात्मक संकेत रहा। साल की पहली छमाही में लगातार इक्विटी की निकासी के बाद, जुलाई में एफपीआई नेट खरीदार बन गए और लगभग 20,200 करोड़ रुपए का इक्विटी निवेश दर्ज किया गया, जो फरवरी के बाद से पहला सकारात्मक महीना था।
रिपोर्ट में मानसून की स्थितियों में मजबूत सुधार का भी जिक्र किया गया है। जुलाई में बारिश सामान्य से लगभग 1 प्रतिशत अधिक रही, जिससे जून-जुलाई की कुल कमी कम होकर लंबे समय के औसत से लगभग 13 प्रतिशत नीचे आ गई।
बाहरी दबावों के बावजूद भारत का मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल काफी मजबूत बना हुआ है। बाहरी मोर्चे पर, व्यापार से जुड़ी गतिविधियां मध्यम अवधि के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई हैं।
राष्ट्रीय समाचार
भारत के फ्लेक्स स्पेस सेगमेंट ने जनवरी-जून के दौरान दर्ज की 68.4 प्रतिशत की वृद्धि

भारत के शीर्ष आठ शहरों में फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटरों ने 2026 की पहली छमाही में 1,91,306 सीटें लीज पर दीं, जो सालाना आधार पर 68.4 प्रतिशत की वृद्धि है। यह जानकारी गुरुवार को जारी हुई एक रिपोर्ट दी गई।
कुशमैन एंड वेकफील्ड की रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेटरों ने ऑफिस मार्केट में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। उन्होंने 2026 की पहली छमाही में 8.4 मिलियन वर्ग फुट (एमएसएफ) का ग्रॉस लीजिंग वॉल्यूम (जीएलवी) दर्ज किया, जो इस सेगमेंट का अब तक का सबसे अधिक छमाही स्तर है। यह सालाना आधार पर 55 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दिखाता है।
फ्लेक्स ऑपरेटरों की हिस्सेदारी इस अवधि के दौरान कुल लगभग 43 एमएसएफ की ऑफिस लीजिंग गतिविधि में करीब 20 प्रतिशत रही, जो 2025 की पहली छमाही के आंकड़े से 13 प्रतिशत अधिक थी। इसकी प्रमुख वजह एंटरप्राइजेज, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और अधिक फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की तलाश कर रही कंपनियों से लगातार मांग बने रहना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जीसीसी फ्लेक्स वर्कस्पेस सेगमेंट के लिए मांग का प्रमुख स्रोत बने रहे। कुल सीट लीजिंग में उनकी हिस्सेदारी 44 प्रतिशत रही, जो 2025 में दर्ज 37 प्रतिशत से अधिक है।
बेंगलुरु भारत के सबसे बड़े फ्लेक्स मार्केट के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा। 2026 की पहली छमाही में यहां 57,487 सीटें लीज पर दी गईं, जो कुल सीट लीजिंग का 30 प्रतिशत हैं। इसमें सालाना आधार पर 31.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
हैदराबाद 40,451 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रहा और यहां सालाना आधार पर 170.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसे टेक्नोलॉजी कंपनियों और जीसीसी से लगातार मिल रही मांग का समर्थन मिला।
मुंबई और दिल्ली-एनसीआर में भी मजबूत वृद्धि देखी गई। यहां लीजिंग वॉल्यूम में क्रमशः 130 प्रतिशत और 152.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
पुणे में सीटों की मांग 27.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि चेन्नई में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अहमदाबाद में फ्लेक्स सीट लीजिंग में सबसे तेज वृद्धि हुई, जहां अपेक्षाकृत छोटे आधार पर सालाना आधार पर 570.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कुशमैन एंड वेकफील्ड की एग्जीक्यूटिव मैनेजिंग डायरेक्टर, बेंगलुरु और हेड-फ्लेक्स, इंडिया, रमीता अरोड़ा ने कहा, “आज कारोबार अत्यधिक कस्टमाइज्ड और बेहतर अनुभव देने वाले वर्कप्लेस की तलाश कर रहे हैं। फ्लेक्स ऑपरेटर तेजी से ऐसे विशेष वातावरण उपलब्ध करा रहे हैं, जो वैश्विक ऑफिस मानकों, ब्रांड पहचान और कार्यस्थल संस्कृति के अनुरूप हैं।”
टेक्नोलॉजी आधारित वर्कप्लेस अनुभव, वेलनेस-केंद्रित डिजाइन और सस्टेनेबिलिटी को ध्यान में रखकर तैयार किए गए ये समाधान उद्यमों और जीसीसी दोनों के बीच फ्लेक्स वर्कस्पेस की लोकप्रियता बढ़ा रहे हैं।
इस बीच, सूचीबद्ध फ्लेक्स ऑपरेटरों की बढ़ती मौजूदगी से पारदर्शिता, बेहतर गवर्नेंस मानकों और कारोबारों के भरोसे में सुधार हो रहा है। इससे भारत के फ्लेक्स वर्कस्पेस मार्केट के लगातार परिपक्व होने में मदद मिल रही है।
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