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Friday,04-April-2025
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सीएए ख़िलाफ़ एनआरसी: क्या अंतर है, क्या ये जुड़े हुए हैं? आपको जो कुछ जानने की जरूरत है वह यहां है

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लोकसभा चुनाव से पहले गृह मंत्रालय ने 11 मार्च को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), 2019 लागू करने की घोषणा की थी. दिसंबर 2019 में पारित होने के बाद, इस कानून ने पूरे भारत में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, कई लोगों ने इसे भेदभावपूर्ण करार दिया। एक और विवादास्पद निर्णय जिसका देश में कड़ा विरोध हुआ, वह था राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) जिसने भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया।

उनकी शुरूआत के बाद से, एनआरसी और सीएए के बीच संभावित संबंध के बारे में चिंताएं जताई गई हैं। आलोचकों की राय है कि सीएए और एनआरसी मिलकर मुसलमानों के खिलाफ प्रभावी रूप से भेदभाव करेंगे।

सीएए क्या है?

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), जो 2016 का है, को 2019 में संसद द्वारा अनुमोदित किया गया था। इस फैसले के कारण भारत में, मुख्य रूप से असम में, व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ। 11 दिसंबर 2019 को पारित यह कानून उन हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की अनुमति देता है जो 31 दिसंबर 2014 से पहले मुस्लिम बहुल बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में चले गए।

केंद्र ने कहा कि इन छह धर्मों के लोगों को पड़ोसी मुस्लिम बहुल देशों में उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है और सरकार ने मानवीय आधार पर उन्हें भारतीय नागरिकता की पेशकश की है। हालाँकि, सूची से मुसलमानों को बाहर करने से सरकार की पहल पर संदेह पैदा हो गया है, आलोचकों ने इसे एक जानबूझकर किया गया प्रयास और भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों को कमजोर करने वाला बताया है।

गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार स्पष्ट किया है कि सीएए केवल अवैध अप्रवासियों पर लागू है और यह किसी भी भारतीय नागरिक को प्रभावित नहीं करता है।

एनआरसी क्या है?

1955 के नागरिकता अधिनियम के तहत स्थापित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) भारतीय नागरिकों का एकमात्र रिकॉर्ड है। इसका मुख्य उद्देश्य वैध भारतीय निवासियों की पहचान करना है और अब तक इसे केवल असम में लागू किया गया है। हालाँकि, गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध अप्रवासियों की पहचान के लिए देशभर में एनआरसी का विस्तार करने की योजना की घोषणा की है।

सीएए की तरह, एनआरसी को भी कड़े विरोध और संदेह का सामना करना पड़ा, जिससे सीएए के साथ इसके संबंधों पर सवाल उठे। दोनों ने मिलकर चिंता जताई है कि नागरिकों को भारत में अपनी कानूनी स्थिति साबित करने के लिए मजबूर किया जाएगा।

सीएए और एनआरसी के बीच अंतर

जबकि सीएए केवल भारत में रहने वाले अवैध अप्रवासियों पर लागू होता है, एनआरसी केवल भारतीय नागरिकों को कवर करता है। सरकार के आश्वासन के बावजूद, सीएए और एनआरसी के संभावित संयुक्त प्रभाव के बारे में चिंताएं बनी हुई हैं, मुसलमानों को एनआरसी से बाहर किए जाने और संभावित रूप से उन्हें राज्यविहीन कर दिए जाने का डर है।

राजनीति

दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने वक्फ संशोधन विधेयक पास होने पर कहा – ‘न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत तय’

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नई दिल्ली, 4 अप्रैल। लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी वक्फ संशोधन विधेयक के पास होने पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुशी जताई। उन्होंने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि इस विधेयक को मंजूरी मिलने से अन्याय और भ्रष्टाचार को खत्म कर न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत होगी।

उन्होंने कहा कि 2013 में तुष्टिकरण के लिए रातों-रात वक्फ कानून को अतिवादी बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 वीवीआईपी संपत्तियां वक्फ को दे दी गईं। इस विधेयक के पारित होने से देश के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है, जो न्याय और समानता को सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट किए।

सीएम रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज का दिन ऐतिहासिक है। संसद ने ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक – 2025’ को मंजूरी दे दी है, जो दशकों से चले आ रहे अन्याय और भ्रष्टाचार को खत्म कर न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत करेगा। 2013 में तुष्टिकरण के लिए रातों-रात वक्फ कानून को अतिवादी बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 वीवीआईपी संपत्तियां वक्फ को दे दी गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस ऐतिहासिक कदम से अब इसकी पारदर्शिता से निगरानी की जा सकेगी।”

उन्होंने लिखा, “2013 में लाए गए संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में कुल साढ़े 5 घंटे चर्चा हुई थी, जबकि इस विधेयक पर दोनों सदनों में 16 घंटे से ज्यादा की चर्चा हुई। मोदी सरकार ने संयुक्त समिति बनाई, जिसमें 38 बैठकें हुईं, 113 घंटे चर्चा हुई और 284 हितधारकों को शामिल किया गया। ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025’ को संसद के पटल पर लाने से पहले मोदी सरकार को देशभर से करीब एक करोड़ ऑनलाइन सुझाव मिले, जिनका विश्लेषण करने के बाद यह कानून बनाया गया, जो दर्शाता है कि जहां मोदी सरकार मुस्लिमों के साथ खड़ी है, वहीं विपक्ष केवल वोट बैंक की आड़ में गुमराह कर रहा है।”

सीएम रेखा गुप्ता ने लिखा, “इस विधेयक के पारित होने से देश के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है, जो न्याय और समानता को सुनिश्चित करेगा। इसे समर्थन देने वाले सभी दलों और सांसदों का भी धन्यवाद। वक्फ बोर्ड को अधिक उत्तरदायी बनाना अनिवार्य था। यह विधेयक सुनिश्चित करेगा कि वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग न हो और इसका लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे। यह पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे करोड़ों लोगों को न्याय मिलेगा।”

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राष्ट्रीय समाचार

झारखंड हाईकोर्ट के त्योहारों के दौरान बिजली नहीं काटने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रोका

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नई दिल्ली/रांची, 4 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में रामनवमी सहित अन्य त्योहारों के दौरान बिजली काटने पर रोक लगाने के झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट की ओर से 3 अप्रैल को जारी आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

झारखंड सरकार के निर्देश पर राज्य बिजली वितरण निगम (जेबीवीएनएल) त्योहारों पर निकलने वाली शोभायात्रा या जुलूस में शामिल लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर एहतियात के तौर पर कई घंटों तक बिजली आपूर्ति बंद कर देता है। 1 अप्रैल, 2025 को सरहुल त्योहार की शोभायात्रा के दौरान भी रांची में पांच से दस घंटे तक बिजली काटी गई थी।

इस पर झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रौशन ने 3 अप्रैल को स्वतः संज्ञान लेते हुए त्योहारों के दौरान बिजली आपूर्ति बंद करने के झारखंड सरकार के निर्देश पर रोक लगा दी थी।

हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार और जेबीवीएनएल से पूछा था कि सरहुल के दिन घंटों बिजली आपूर्ति बाधित क्यों रही? इससे होने वाली परेशानी को ध्यान में क्यों नहीं रखा गया? बिजली काटे जाने से लोगों को होने वाली परेशानी से निजात दिलाने के लिए क्या वैकल्पिक उपाय किए जाते हैं?

हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई की।

झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि रामनवमी के जुलूस में लोग लंबे झंडे लेकर चलते हैं, जिससे करंट लगने की आशंका बनी रहती है। पूर्व में झारखंड में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि बिजली कटौती केवल शोभायात्रा मार्गों तक सीमित रहे और उसे न्यूनतम स्तर पर रखा जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं की बिजली आपूर्ति पर कोई असर न पड़े।

शीर्ष अदालत ने जेबीवीएनएल के प्रबंध निदेशक को यह अंडरटेकिंग देने का निर्देश दिया है कि कम समय के लिए बिजली काटी जाएगी और अस्पताल एवं अन्य जरूरी सेवा वाली संस्थाओं को बिजली आपूर्ति की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई आठ अप्रैल को मुकर्रर की है।

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राजनीति

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती मामले पर राज्यसभा में हंगामा, कार्यवाही स्थगित

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नई दिल्ली, 4 अप्रैल। राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार को प्रारंभ होने के कुछ देर बाद ही सत्ता पक्ष के सांसदों ने पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले को सदन में उठाया। भाजपा सांसदों का कहना था कि पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि पश्चिम बंगाल में शिक्षक और गैर शिक्षक भर्ती में अनियमितता बरती गई।

इस विषय पर सदन में काफी हंगामा हुआ, जिसके कारण सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

भाजपा सांसद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि वर्ष 2016 में पश्चिम बंगाल में 25 हजार शिक्षकों और गैर-शिक्षक पदों पर बहाली हुई थी। अनियमितताओं को देखते हुए पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट ने भर्तियां निरस्त कर दी थीं। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थी।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भी चीफ जस्टिस की बेंच ने हाईकोर्ट के निर्णय को यथावत रखा है। इसके साथ कोर्ट ने कहा कि हटाए गए कर्मचारियों से वेतन की रिकवरी न की जाए। पश्चिम बंगाल की सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ अन्याय किया है। पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार ने निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन किया है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को कलंकित किया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने वहां स्थापित नियमों और कानून का उल्लंघन किया है।

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर यह बात साबित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उनका केवल इतना कहना है कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने ओबीसी के साथ अन्याय किया है। अन्य पिछड़ा वर्ग के कोटे को पूरा नहीं किया गया।

उन्होंने जैसे ही अपनी बात पूरी की, सदन में एक बार फिर जमकर हंगामा शुरू हो गया। दोनों ओर से सांसदों ने नारेबाजी की। इस विषय पर सदन में जमकर हंगामा हुआ और सत्ता पक्ष के सांसदों ने नारेबाजी की।

सदन में हो रहे जबरदस्त हंगामे के बीच सभापति जगदीप धनखड़ ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन को अपनी बात रखने का अवसर दिया। सदन में हो रहे जबरदस्त हंगामा के बीच डेरेक ने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि सत्ता पक्ष से जुड़े भाजपा सांसद सदन में नारेबाजी और हंगामा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। इस बीच सदन में हंगामा बढ़ता चला गया, जिसके चलते सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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