राजनीति
बीएमसी चुनाव परिणाम 2026: ‘ठाकरे ब्रांड’ के मुंबई में सत्ता बरकरार रखने में विफल रहने के 5 कारण, जिससे लगभग तीन दशक लंबे नगर निकाय शासन का अंत हुआ।
मुंबई: 2026 के बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव को ‘ठाकरे ब्रांड’ की अंतिम परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था। वर्षों की दूरी के बाद, चचेरे भाई उद्धव और राज ठाकरे के पुनर्मिलन से एक एकीकृत मराठा मोर्चा बनने की उम्मीद थी।
हालांकि, नतीजों ने कुछ और ही कहानी बयां की। भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति पार्टी ने कुल 118 सीटों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया और भारत के सबसे धनी नगर निकाय पर ठाकरे परिवार की तीन दशक पुरानी पकड़ को खत्म कर दिया।
यहां पांच कारण दिए गए हैं कि क्यों बहुचर्चित ठाकरे पुनर्मिलन अपनी छाप छोड़ने में विफल रहा:
हालांकि चचेरे भाई मराठी गौरव के झंडे तले एकजुट हुए, लेकिन जमीनी हकीकत बदल चुकी थी। मूल शिवसेना में फूट पड़ने से एकनाथ शिंदे के गुट ने पारंपरिक मराठी वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा सफलतापूर्वक हथिया लिया। विकास और हिंदुत्व के माध्यम से बालासाहेब ठाकरे की विरासत के ‘सच्चे’ निष्पादक के रूप में खुद को पेश करके, शिंदे सेना ने उन भावनात्मक एकाधिकार को कमजोर कर दिया, जिसे चचेरे भाई हासिल करने की उम्मीद कर रहे थे।
देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में महायुति के चुनाव प्रचार अभियान ने ‘डबल इंजन’ विकास, बुनियादी ढांचे और मुंबई के बदलते स्वरूप पर ज़ोर दिया। इसके विपरीत, ठाकरे गठबंधन ने भावनात्मक अपीलों और ‘मराठी पहचान बचाओ’ के नारे पर बल दिया। जर्जर बुनियादी ढांचे, मेट्रो विस्तार और सुगम जीवन को लेकर चिंतित आधुनिक मुंबई के मतदाताओं के लिए, महायुति का भावनात्मक पहलुओं के बजाय सुविधा का वादा अधिक प्रभावी साबित हुआ।
पारिवारिक पुनर्मिलन के दिखावे से परे, शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस के गठबंधन में एक साझा, व्यावहारिक घोषणापत्र का अभाव था। राज ठाकरे का अतीत का आक्रामक बाहरी विरोधी रुख अक्सर उद्धव ठाकरे की अधिक समावेशी, ‘महा विकास अघाड़ी’ शैली की राजनीति से टकराता था। इस वैचारिक असंगति ने मतदाताओं, विशेष रूप से महानगरीय और गैर-मराठी समुदायों के बीच भ्रम पैदा किया, जो राज ठाकरे की राजनीति को संदेह की दृष्टि से देखते हैं।
ठाकरे गठबंधन के फिर से एक होने से अनजाने में कांग्रेस नाराज हो गई, जिसके चलते उसने 2026 के नगर निगम चुनावों में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया। पिछले चुनावों में, एमवीए गठबंधन (यूबीटी, एनसीपी-एसपी और कांग्रेस) ने यह साबित कर दिया था कि भाजपा विरोधी एकजुट वोट बहुत मजबूत हो सकता है। एमएनएस की ओर रुख करने से उद्धव ने मुस्लिम और दलित बहुल क्षेत्रों का वह महत्वपूर्ण समर्थन खो दिया, जिस पर कांग्रेस का पारंपरिक रूप से दबदबा रहा है। इससे विपक्षी वोटों में फूट पड़ गई, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिला।
भाजपा के बूथ स्तर के प्रबंधन और विशाल संसाधनों ने शिवसेना यूबीटी-एमएनएस गठबंधन को पछाड़ दिया। पार्टी चिन्हों और संपत्तियों को लेकर वर्षों से चल रहे कानूनी विवादों ने शिवसेना यूबीटी की संगठनात्मक शक्ति को कमजोर कर दिया था। वहीं, एक दशक से अधिक समय से चुनावी प्रासंगिकता के लिए संघर्ष कर रही एमएनएस, भाजपा के तेजतर्रार और तकनीक-आधारित अभियान का मुकाबला करने के लिए आवश्यक ताकत जुटाने में विफल रही।
राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, 2026 के बृहन्मुंबई नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिसने 227 वार्डों में से 89 पर जीत हासिल की। शिवसेना (यूबीटी) 65 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, उसके बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 29 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही, जबकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने छह सीटें जीतीं।
2026 के बीएमसी चुनाव मुंबई की सत्ता की गतिशीलता में एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक हैं, जो यह दर्शाता है कि हालांकि ठाकरे का नाम अभी भी महत्वपूर्ण है, लेकिन यह अब महापौर के बंगले तक पहुंचने की गारंटी नहीं है।
राष्ट्रीय समाचार
एआईएमई 2026 में भारतीय नौसेना के जहाज सह्याद्रि और कुलिश की भागीदारी संपन्न

भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश ने फिलीपींस में आयोजित बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास एआईएमई 2026 में अपनी भागीदारी सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस अभ्यास की थीम “भरोसे की नींव, समुद्र में एकजुट” यानी “विश्वास में जड़ें, समुद्र में एकजुट” थी।
एआईएमई 2026 के दौरान भारतीय नौसेना के जहाजों ने हार्बर और सी फेज में विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। अभ्यास का उद्देश्य पेशेवर संवाद, संचालन संबंधी समन्वय और समुद्री प्रशिक्षण के जरिए भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच सहयोग और आपसी तालमेल को मजबूत करना था।
अभ्यास के उद्घाटन समारोह के बाद हार्बर फेज आयोजित किया गया। इसमें प्रमुख अधिकारियों के बीच संवाद, खेल गतिविधियां, योग, सामुदायिक संपर्क और विशेषज्ञ स्तर पर विचार-विमर्श जैसी गतिविधियां शामिल रहीं। इसके अलावा टेबल-टॉप एक्सरसाइज, ऑपरेशनल सिंक्रोनाइजेशन और प्री-सेल ब्रीफ के जरिए समुद्री चरण के लिए योजनाओं और तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।
सी फेज के दौरान आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश ने विभिन्न समन्वित समुद्री अभ्यासों में हिस्सा लिया। इनमें मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर), विजिट-बोर्ड-सर्च-सीजर (वीबीएसएस) और अंडरवे रीप्लेनिशमेंट ड्रिल शामिल थीं।
इसके अलावा हेलीकॉप्टर से जुड़े अभ्यासों में क्रॉस-डेक लैंडिंग, वर्टिकल रीप्लेनिशमेंट और केसवैक (घायल या बीमार लोगों को चिकित्सा निकासी) ड्रिल भी की गईं। इन गतिविधियों के जरिए भाग लेने वाली समुद्री सेनाओं के बीच संचालन संबंधी समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा मिला।
एआईएमई 2026 के हार्बर और सी फेज ने भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करने के साथ समुद्री सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाया। इससे प्रभावी समुद्री साझेदारी को और मजबूती मिली।
आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश की इस भागीदारी ने भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और महासागर के विजन के अनुरूप साझेदार समुद्री सेनाओं के साथ निरंतर सहयोग और जुड़ाव के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित किया।
राष्ट्रीय समाचार
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिलने पर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची इंडियन यूथ कांग्रेस

इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने पर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आईवाईसी अध्यक्ष उदय भानु चिब की ओर से याचिका दाखिल कर दिल्ली पुलिस के फैसले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।
आईवाईसी की याचिका में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने की मांग करते हुए कहा गया है कि संगठन चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी बात रखना चाहता है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
आईवाईसी ने हाई कोर्ट से मांग की है कि दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति नहीं देने के फैसले में हस्तक्षेप किया जाए और संगठन को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की इजाजत दी जाए।
यह मामला ऐसे समय में हाई कोर्ट पहुंचा है, जब एक दिन पहले जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज की थीं। इनमें से दो मामले संसद मार्ग थाने और एक मामला कनॉट प्लेस थाने में दर्ज किया गया।
पुलिस के मुताबिक, संसद मार्ग थाने में दर्ज दोनों एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(ए), 221, 132 और 3(5) लगाई गई हैं। वहीं, कनॉट प्लेस थाने में दर्ज मामले में बीएनएस की धारा 223, 221, 132 और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।
ये मामले 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर के आसपास हुए प्रदर्शन के बाद दर्ज किए गए। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, वाम दलों, छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।
पुलिस ने प्रदर्शन से पहले नई दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ने और वहां एकत्र होने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एफआईआर दैनिक डायरी में दर्ज प्रविष्टियों के आधार पर दर्ज की गई हैं। इनमें फिलहाल किसी व्यक्ति या संगठन को आरोपी के तौर पर नामित नहीं किया गया है। हालांकि, प्रदर्शन के आयोजकों और इसमें शामिल संगठनों का उल्लेख किया गया है।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में भी लिया गया था। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से करीब 750 लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन के मद्देनजर इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था।
विपक्षी दलों और संगठनों का यह विरोध निर्वाचन आयोग की ओर से कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची की एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इन्हीं आरोपों को लेकर सीईसी के इस्तीफे की मांग भी की जा रही है।
विपक्ष ने दावा किया है कि एसआईआर के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए। हालांकि, यह विपक्ष का दावा है। निर्वाचन आयोग एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करते हुए इसे मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने की कवायद बताता रहा है।
महाराष्ट्र
मुंबई के शिवाजी पार्क में बिना इजाजत जमा होने पर सीजेपी समर्थकों के खिलाफ केस दर्ज

मुंबई के शिवाजी पार्क में बिना इजाजत के इकट्ठा होने, नारे लगाने और घोषणाएं करने के आरोप में शनिवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
मुंबई पुलिस के अनुसार, लगभग 400 से 500 अज्ञात समर्थक और प्रदर्शनकारी, जिनमें सीजेपी सदस्य अजिंक्य शिंदे, प्रणय अहीरे, आशुतोष रंका, अभिजीत दिपके, सौरव दास, आफरीन नवाज, सौम्या कोर्डे, अंकित भारद्वाज, विजय मलंगी और योगेश इंगले शामिल थे, ने दादर वेस्ट में मीनाताई ठाकरे मेमोरियल के सामने शिवाजी पार्क ग्राउंड के गेट नंबर 6 पर बिना अनुमति के जमा हुए।
बताया जा रहा है कि यह जमावड़ा 2 अक्टूबर की शाम 4 बजे से 7 बजे के बीच शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में हुआ।
पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारी एक सार्वजनिक सड़क पर जमा हुए और नारे लगाए, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई। बिना जरूरी अनुमति के लाउडस्पीकर भी लगाए गए थे।
शुक्रवार को सीजेपी ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए अपना ‘जेल भरो’ विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।
भारी पुलिस तैनाती और शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन करने की औपचारिक अनुमति न मिलने के बावजूद हजारों नागरिक और समर्थक कार्यक्रम स्थल पर जमा हुए। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निशाना बनाते हुए नारे लगाए गए।
आयोजकों द्वारा अपने आंदोलन का ‘सीजन 2’ बताए गए इस विरोध प्रदर्शन को मुंबई पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे, जबकि दादर इलाके के कई हिस्सों में बैरिकेड्स लगाए गए थे।
इस प्रदर्शन को सार्वजनिक हस्तियों, बुद्धिजीवियों और बॉलीवुड हस्तियों का भी समर्थन मिला, जिन्होंने कार्यक्रम में भाग लिया और मतदान के अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थानों के महत्व के बारे में बात की।
मौजूद लोगों में अभिनेता शबाना आजमी और नसीरुद्दीन शाह के साथ-साथ संगीतकार विशाल ददलानी भी शामिल थे। इस सभा में शामिल लोगों ने वोटिंग के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया।
अभिनेता प्रकाश राज ने भी एक रिकॉर्डेड वीडियो मैसेज के जरिए अपना समर्थन दिया और नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की अपील की।
सभा को संबोधित करते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की।
दिपके ने औपचारिक रूप से ‘जेल भरो’ आंदोलन का आह्वान किया और कहा कि वोटिंग के अधिकार की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होना एक मौलिक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने के खिलाफ पुलिस की चेतावनियों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को चुनौती भी दी।
दिपके ने कहा, “मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आपने हमें सिर्फ तीन दिन के लिए जेल में डालने की बात कही थी। अगर आपने तीन महीने कहा होता तो पूरा मुंबई शहर पूरी तरह ठप हो जाता।”
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