राजनीति
अतीक अहमद व उसका भाई अपहरण मामले में दोषी करार
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), 28 मार्च : प्रयागराज की एमपी/एमएलए कोर्ट ने गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद, उसके भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ और अन्य को 2006 में बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल के अपहरण का दोषी ठहराया है। अदालत ने अभी सजा की घोषणा नहीं की है। गौरतलब है कि 25 जनवरी 2005 को बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के बाद तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य उमेश पाल ने पुलिस को बताया था कि वह हत्याकांड का चश्मदीद है।
उमेश पाल ने आरोप लगाया कि जब उसने अतीक अहमद के दबाव में मामले में पीछे हटने से इनकार कर दिया, तो 28 फरवरी, 2006 को बंदूक के बल पर उसका अपहरण कर लिया गया।
मामले में 5 जुलाई, 2007 को अतीक अहमद, उसके भाई और चार अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
उमेश पाल की 24 फरवरी, 2023 को उनके प्रयागराज आवास के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ पर उमेश पाल को मारने की साजिश में शामिल होने का आरोप भी लगाया गया है।
फैसला सुनाए जाने के समय अतीक अहमद, उसका भाई अशरफ और एक अन्य आरोपी अदालत में मौजूद था।
राष्ट्रीय समाचार
ब्राह्मण चेहरों के अभाव में बसपा 2027 में कैसे साधेगी सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला?

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 2007 के विधानसभा चुनाव में दलित-ब्राह्मण गठजोड़ के जरिए यूपी में सत्ता हासिल की थी, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामने उस सामाजिक गठजोड़ को फिर से मजबूत करने की चुनौती है।
पिछले कुछ वर्षों में बसपा के कई प्रमुख ब्राह्मण चेहरे पार्टी से अलग हुए या निष्कासित किए गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मायावती पुराने चेहरों के आभाव के बीच ब्राह्मण समाज और अन्य सामाजिक समूहों को साथ लेकर नया सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला कैसे तैयार करेंगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2007 में बसपा की सत्ता में वापसी में ब्राह्मण मतदाताओं के एक बड़े हिस्से का समर्थन महत्वपूर्ण रहा था। उस समय पार्टी ने दलित आधार के साथ ब्राह्मण समाज को जोड़कर व्यापक सामाजिक गठजोड़ तैयार किया था। अब पार्टी के सामने चुनौती केवल नए ब्राह्मण चेहरों को आगे बढ़ाने की नहीं, बल्कि समाज के बीच पुराने भरोसे को दोबारा कायम करने की भी है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि बसपा के सामने इस समय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भरोसा बनाए रखने की चुनौती है। हाल ही में अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को पार्टी से निष्कासित किया गया है। इससे पहले राकेशधर त्रिपाठी, रंगनाथ मिश्रा, रामू द्विवेदी, कुशल तिवारी, विनय शंकर तिवारी, ब्रजेश पाठक और गुड्डू त्रिपाठी जैसे कई प्रमुख ब्राह्मण चेहरे बसपा से अलग हो चुके हैं। रामवीर उपाध्याय का परिवार भी बसपा की राजनीति में सक्रिय रहा है। इनमें से कई नेता बाद में दूसरे राजनीतिक दलों में महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई दिए और कुछ को मंत्री पद भी मिला।
विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक, वर्तमान में सतीश चंद्र मिश्रा बसपा के प्रमुख ब्राह्मण चेहरे के रूप में पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं। ऐसे में 2027 में सत्ता की दावेदारी के लिए मायावती को केवल ब्राह्मण समाज ही नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संतुलन साधते हुए संगठन को भी मजबूत करना होगा।
ब्राह्मण संगठन से जुड़े अभिषेक पांडेय कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण है। कई विधानसभा क्षेत्रों में यह समुदाय चुनावी मुकाबले को प्रभावित करने की स्थिति में रहता है। ऐसे में 2027 से पहले ब्राह्मण समाज का समर्थन हासिल करना किसी भी राजनीतिक दल के व्यापक सामाजिक गठजोड़ की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।
हालांकि, मायावती का कहना है कि पार्टी से निकाले गए या निजी स्वार्थ के चलते दूसरे दलों में गए नेताओं के राजनीतिक समर्पण का आकलन उनके कार्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे कई लोगों ने बसपा सरकार के दौरान भी अपने निजी और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता दी और पार्टी तथा समाज के हित में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई।
मायावती ने यह भी कहा कि पार्टी में लंबे समय से ईमानदार और निष्ठावान वरिष्ठ नेता नए कर्मठ एवं समर्पित कार्यकर्ताओं, खासकर युवाओं को तैयार कर रहे हैं। पार्टी की यह ‘नर्सरी’ लगातार जारी है और नए लोगों को संगठन में आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है।
बसपा से निष्कासित अनंत मिश्रा ने कहा कि 2007 में ब्राह्मण समाज को बसपा से जोड़ने में सतीश मिश्रा के चेहरे, मायावती के प्रति समाज के भरोसे और जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने कहा कि उस समय ब्राह्मण समाज को सम्मान और राजनीतिक भागीदारी का स्पष्ट संदेश मिला था। लगातार पार्टी के राजनीतिक प्रदर्शन में गिरावट पर नेतृत्व को आत्मचिंतन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अब वह अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच जाकर उनकी राय लेंगे और उनके सुझाव के आधार पर आगे की रणनीति तय करेंगे।
महाराष्ट्र
मुंबई स्थित आवास में नौसेना के नाविक, उसकी पत्नी और दो बच्चों के शव मिले

पुलिस ने बताया कि भारतीय नौसेना के एक नाविक, उनकी पत्नी और उनके दो नाबालिग बच्चे दक्षिण मुंबई के कोलाबा स्थित नेवी नगर में अपने आवास पर मृत पाए गए।
यह घटना 15 अगस्त को सामने आई। पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नाविक की मौत आत्महत्या से होने की आशंका है, जबकि उनकी पत्नी और दो बच्चों, जिनकी उम्र दो महीने और तीन वर्ष बताई गई है, की मौत जहर देने के कारण होने की आशंका है। हालांकि, मौतों की वास्तविक परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हो सकी हैं।
पुलिस ने बताया कि शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और मामले की आगे जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के अन्य पहलुओं से मौत के कारणों तथा घटनाक्रम की पुष्टि होने की उम्मीद है।
पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मनीष कलवानिया ने कहा कि प्रथमदृष्टया जांच में संकेत मिले हैं कि नाविक की मौत फांसी लगाने से हुई जबकि उनकी पत्नी और बच्चों की मौत का कारण विषाक्तता प्रतीत होता है। भारतीय नौसेना ने भी घटना की पुष्टि की है और कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग दे रही है।
नौसेना ने एक बयान में कहा, “कोलाबा के नेवी नगर में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 15 अगस्त 2026 को भारतीय नौसेना के एक नाविक, उनकी पत्नी और दो बच्चों के शव उनके आवास पर पाए गए। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है और भारतीय नौसेना हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है।”
इस घटना के बाद पुलिस और नौसेना दोनों ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारी मौतों से पहले की परिस्थितियों और अन्य संबंधित साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं। अब तक उपलब्ध जानकारी में मृतकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि जांच जारी है और पोस्टमार्टम के माध्यम से मौतों के सटीक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय समाचार
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस नेता और उनके बेटे की गोली मारकर हत्या, नेताओं ने सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल

नादिया जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष अनीसुर रहमान और उनके बेटे अबू सुफियान रहमान की शनिवार रात नकाशीपाड़ा अंडरपास के पास कथित तौर पर गोली मारकर और धारदार हथियार से हमला करके हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि पिता-पुत्र कार से घर लौट रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ। जिस गाड़ी पर गोलियों के कई निशान हैं, उसे पुलिस ने जब्त कर लिया है। पश्चिम बंगाल की नकाशीपाड़ा पुलिस ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है। वहीं, विपक्षी दल के नेताओं ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
नादिया के नकाशीपाड़ा में कांग्रेस नेता अनीसुर रहमान और उनके बेटे की हत्या पर सीपीआईएम नेता मीनाक्षी मुखर्जी ने आईएएनएस से कहा, “कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल के हालात नहीं बदले हैं। सिर्फ तीन महीने पहले ही एक पार्टी ने सरकार बनाई थी, फिर भी पश्चिम बंगाल को हत्या, जबरन वसूली, आम लोगों की समस्याओं, महिलाओं पर अत्याचार, रिश्वतखोरी, दबदबे और पुलिस की प्रताड़ना से कोई आजादी नहीं मिली है। ये वे मुद्दे हैं जिन पर लोगों ने अपनी चिंता जाहिर की थी। इसके बजाय, एक पार्टी के जाने के बाद दूसरी पार्टी आ गई है, जो बिल्कुल उसी अंदाज में काम कर रही है, लेकिन राज्य को चलाने के लिए और भी अधिक खतरनाक और अहंकारी तरीका अपना रही है।”
कांग्रेस नेता पूजा रॉय चौधरी ने कहा, “नादिया के नकाशीपाड़ा में सबसे अधिक गुंडागर्दी, हंगामा और दादागीरी होती है। यहां आए दिन बवाल होता रहता है। डबल मर्डर हो गया लेकिन पुलिस को पहले से इसकी खबर नहीं थी। अस्पताल ने बताया है गोली किसी पेशेवर अपराधी ने मारी थी। अनीसुर रहमान को 13 और उनके बेटे को 12 गोलियां मारी गई। इस मामले में जिस टीएमसी नेता का नाम सामने आ रहा है, पुलिस उसे क्यों नहीं गिरफ्तार कर पा रही है?
राज्य कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पांच बार लोकसभा सदस्य रहे अधीर रंजन चौधरी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि हालांकि राज्य में मौजूदा भाजपा सरकार ‘डर खत्म, भरोसा कायम’ के नारे के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन असल में स्वतंत्रता दिवस पर हुई ऐसी भयानक घटना ने लोगों की सुरक्षा और राजनीति में खुलकर हिस्सा लेने के अधिकार पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने मामले की उचित और निष्पक्ष जांच और दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। चौधरी ने कहा, “कांग्रेस नेतृत्व इस मुश्किल समय में पीड़ित परिवार के साथ है।”
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में अल्पसंख्यकों और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिशों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी, और इसलिए कांग्रेस कार्यकर्ता आज पूरे राज्य में काला दिवस मना रहे हैं।
स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह हमला जेल में बंद तृणमूल कांग्रेस नेता जुब्बार शेख के “आदेश” पर किया गया था। “जुब्बार ने जेल से ही बदमाशों का इस्तेमाल करके इस इलाके पर कब्जा करने के लिए यह घटना करवाई। अगर प्रशासन उचित और निष्पक्ष जांच करे, तो यह मामला पूरी तरह साफ हो जाएगा।” स्थानीय कांग्रेस नेता टीपू सुल्तान ने मीडिया से कहा, “हम कड़ी से कड़ी सजा की मांग करते हैं।”
कृष्णानगर पुलिस जिले के अतिरिक्त अधीक्षक (ग्रामीण) सुरजीत कुमार ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच चल रही है। अभी इस बारे में और कुछ भी कहना संभव नहीं है।
इसके पहले पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट किया था, “नादिया के कांग्रेस नेता अनीसुर रहमान और उनके बेटे अबू सुफियान की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। हम लोकतंत्र में यकीन रखने वाले सभी लोगों से अपील करते हैं कि वे बंगाल में इस हत्या की राजनीति के खिलाफ एकजुट हों। इस बर्बर हत्याकांड के विरोध में, राज्य भर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कल (16 अगस्त ’26) ‘काला दिवस’ मनाने की अपील की जा रही है।”
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