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Sunday,15-March-2026
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कर व्यवस्था पर एशिया में सबसे ज्यादा विश्वास, भारत सबसे आगे : रिपोर्ट

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INCOME TAX

नई दिल्ली, 5 जनवरी: दुनिया में कर (टैक्स) व्यवस्था को लेकर जनता का विश्वास सबसे ज्यादा एशिया में देखा गया है। इस मामले में भारत खास तौर पर आगे है, जहां लोगों में कर चुकाने की नैतिक भावना और सरकारी वित्त व्यवस्था पर भरोसा मजबूत है। सोमवार को एसीसीए, आईएफएसी, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड (सीए एएनजेड) और ओईसीडी द्वारा संयुक्त रूप से जारी एक नई रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के लगभग 45 प्रतिशत लोगों का मानना है कि सरकार द्वारा इकट्ठा किया गया कर जनहित के कामों में खर्च होता है। वहीं 41 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कर देना उनके लिए कोई बोझ नहीं, बल्कि अपने समाज और देश के लिए योगदान है। इससे यह साफ होता है कि भारत में टैक्स को नागरिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 68 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे किसी भी हालत में टैक्स चोरी को सही नहीं ठहराएंगे, चाहे उन्हें ऐसा करने का मौका ही क्यों न मिले। यह भारत में लोगों के उच्च नैतिक मूल्यों को दिखाता है।

सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि भारत में लोग पर्यावरण और समाज के लंबे समय के विकास के लिए टैक्स देने को तैयार हैं।

लगभग 80 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि वे टिकाऊ विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए थोड़ा या ज्यादा अतिरिक्त कर देने को भी तैयार हैं। इससे पता चलता है कि लोग कर नीति को देश और समाज के भविष्य से जोड़कर देखते हैं।

एसीसीए के भारत निदेशक मोहम्मद साजिद खान ने कहा कि भारत के नतीजे पूरे एशिया के रुझान को दिखाते हैं। एशिया में लोग कर व्यवस्था को न्यायपूर्ण, पारदर्शी और जनकल्याण से जुड़ा मानते हैं। भारत में लोगों की अतिरिक्त टैक्स देने की इच्छा यह दिखाती है कि कर नीति और समाज के लक्ष्य एक दिशा में बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट में शामिल 29 देशों के सर्वेक्षण में पाया गया कि एशिया के लोग अपने टैक्स सिस्टम को दूसरे क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा निष्पक्ष और उपयोगी मानते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में तो लगभग 65 प्रतिशत लोगों ने टैक्स को समाज के लिए योगदान माना है, न कि एक खर्च।

एसीसीए की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेलेन ब्रांड ओबीई ने कहा कि एशिया में कर व्यवस्था पर जनता का भरोसा पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है। इस भरोसे को बनाए रखने के लिए सरकारों को लगातार ईमानदारी और पारदर्शिता दिखानी होगी।

ओईसीडी के कर नीति और प्रशासन केंद्र की निदेशक मनल कोर्विन ने कहा कि यह एशिया में कर नैतिकता पर शुरू किए गए एक नए अध्ययन का पहला चरण है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हम सरकारों के साथ मिलकर इन परिणामों पर चर्चा करेंगे ताकि पूरे एशिया में टैक्स सिस्टम में विश्वास के कारकों और विश्वास बढ़ाने के सर्वोत्तम तरीकों की पहचान की जा सके। इससे सरकारों को अधिक निष्पक्ष, अधिक उत्तरदायी और अधिक सुसंगत टैक्स सिस्टम तैयार करने में मदद मिलेगी।

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मुनाफावसूली और डॉलर की मजबूती के चलते इस हफ्ते सोने-चांदी की कीमतों आई गिरावट, गोल्ड 0.73 प्रतिशत फिसला

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GOLD

नई दिल्ली, 14 मार्च: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनावों के चलते वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच इस सप्ताह सोने-चांदी की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

पूरे सप्ताह के दौरान सोने की कीमतों में 0.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि मल्टी-वीक हाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।

शुक्रवार को एमसीएक्स पर गोल्ड फरवरी फ्यूचर्स 0.04 प्रतिशत गिर गया, जबकि एमसीएक्स सिल्वर मार्च फ्यूचर्स में 3.24 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई। फिलहाल सोने का फ्यूचर भाव लगभग 1,58,400 रुपए और चांदी का फ्यूचर भाव 2,59,279 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,58,399 रुपए प्रति 10 ग्राम रही, जो सोमवार को 1,59,568 रुपए थी। वहीं चांदी की कीमत शुक्रवार को 2,60,488 रुपए प्रति किलोग्राम रही।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के कारण कीमती धातुओं की कीमतें ऊंचे स्तर पर टिक नहीं पाईं। हालांकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण सुरक्षित निवेश की मांग अभी भी सोने को समर्थन दे रही है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और आपूर्ति बाधित होने की आशंका बनी हुई है, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में सोना महंगाई से बचाव के एक सुरक्षित निवेश के रूप में निवेशकों को आकर्षित करता है।

उन्होंने बताया कि कई कमोडिटी में बीच-बीच में मुनाफावसूली और इंट्राडे उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के आसपास बाजार में सक्रियता बनी रही।

इसी बीच अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जहां से ईरान के करीब 90 प्रतिशत तेल का निर्यात होता है। इस घटना से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के कारण पिछले सप्ताह सोना और चांदी की कीमतों में तेजी सीमित रही, जबकि आमतौर पर युद्ध जैसी स्थितियों में इनकी कीमतें बढ़ती हैं।

तकनीकी स्तर की बात करें तो एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1,63,000 से 1,63,200 रुपए का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि 1,58,000 से 1,57,500 रुपए का स्तर मजबूत डिमांड जोन बना हुआ है।

वहीं एमसीएक्स सिल्वर इस सप्ताह 2,80,000 से 2,92,000 रुपए के रेजिस्टेंस जोन के ऊपर टिक नहीं पाया और उसमें गिरावट जारी रही। विश्लेषकों के अनुसार 2,58,000 से 2,54,000 रुपए का स्तर चांदी के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट क्षेत्र है।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका-ईरान युद्ध की खबरों, अमेरिकी डॉलर की दर और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से माहौल अस्थिर बना हुआ है, जिसका असर कीमती धातुओं पर देखने को मिला।

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मध्य पूर्व तनाव का असर: इस हफ्ते करीब 6 प्रतिशत गिरा भारतीय शेयर बाजार, एक ही दिन में निवेशकों के डूबे करीब 10 लाख करोड़ रुपए

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SHARE MARKET

मुंबई, 14 मार्च : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। इस सप्ताह प्रमुख घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स लगभग 6 प्रतिशत तक गिर गए, जिससे बाजार में लगातार बिकवाली का माहौल बना रहा।

सप्ताह के दौरान निफ्टी में 5.31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और आखिरी कारोबारी दिन यह 2.06 प्रतिशत टूटकर 23,151 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 1,470.50 अंक यानी 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,564 पर बंद हुआ।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए बढ़ती आर्थिक चिंताओं के कारण बाजार में यह बड़ी गिरावट देखने को मिली।

इस दौरान निफ्टी ऑटो इंडेक्स में करीब 10 से 11 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जो मार्च 2020 के बाद इसका सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है। इस इंडेक्स के लगभग सभी शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बैंकिंग, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।

इस तेज गिरावट के कारण एक ही कारोबारी सत्र (शुक्रवार) में निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपए डूब गए।

वहीं व्यापक बाजार सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 4.59 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 3.66 प्रतिशत गिर गया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए इमीडिएट सपोर्ट स्तर 23,000 के आसपास है, जबकि 23,300 और 23,500 के स्तर पर रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।

वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 53,500 पहला सपोर्ट स्तर माना जा रहा है, इसके बाद 53,000 का स्तर महत्वपूर्ण होगा। दूसरी ओर 54,000 और 54,300 के स्तर को रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

विश्लेषकों ने यह भी बताया कि इंडिया वीआईएक्स 22 के स्तर से ऊपर पहुंच गया है, जो बाजार में बढ़ते डर और आने वाले समय में ज्यादा उतार-चढ़ाव की संभावना का संकेत देता है।

विश्लेषकों का कहना है कि एलएनजी और एलपीजी की संभावित कमी से उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है, जबकि सीएनजी की उपलब्धता पर दबाव पड़ने से उपभोक्ताओं की मांग के पैटर्न में बदलाव आ सकता है, खासकर उन शहरी इलाकों में जहां सीएनजी वाहन ज्यादा इस्तेमाल होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के जोखिम को बढ़ाती हैं और इससे रुपए पर भी दबाव पड़ता है, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर होती है।

इसी बीच भारतीय रुपया लगातार दूसरे सप्ताह कमजोर रहा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.45 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।

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भारतीय शेयर बाजार कमजोर वैश्विक संकेतों से लाल निशान में खुला, आईटी और मेटल में बिकवाली

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share market

मुंबई, 13 मार्च : कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत शुक्रवार को गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स 590.20 अंक या 0.78 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75,444.22 और निफ्टी 176.65 अंक या 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,462.50 पर खुला।

शुरुआती कारोबार में बाजार में गिरावट का नेतृत्व आईटी और मेटल शेयर कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी आईटी और निफ्टी मेटल टॉप लूजर थे। ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक, रियल्टी, सर्विसेज, डिफेंस और इन्फ्रा जैसे सूचकांक भी लाल निशान में थे।

सूचकांकों में केवल एनर्जी इंडेक्स ही हरे निशान में था।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट देखी जा रही है। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 181 अंक या 1.11 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 16,123 और निफटी मिडकैप 100 इंडेक्स 519 अंक या 0.92 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 55,734 पर था।

सेंसेक्स पैक में पावर ग्रिड, आईटीसी, एचयूएल, एनटीपीसी और सन फार्म गेनर्स थे। टाटा स्टील, एलएंडटी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एमएंडएम, एचसीएल, इन्फोसिस और टाइटन लूजर्स थे।

ज्यादातर एशियाई बाजारों में गिरावट देखी जा रही है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता लाल निशान में थे। अमेरिकी बाजार गुरुवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ, जिसमें डाओ जोन्स में 1.56 प्रतिशत और नैस्डैक में 1.78 प्रतिशत की कमजोरी थी।

भारत के साथ वैश्विक बाजारों में कमजोरी की वजह अमेरिका, इजरायल-ईरान युद्ध का जारी रहना है। लंबे समय तक खींचने के कारण इस युद्ध का असर आपूर्ति श्रृंखलाओं पर हो सकता है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले मुकाबले और धीमी हो सकती है या मंदी में जा सकती है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय बाजारों में बिकवाली जारी रखी और गुरुवार को 7,049.87 करोड़ रुपए की इक्विटी से निकासी की। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,449.77 करोड़ रुपए का इक्विटी में निवेश किया।

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