राजनीति
अमरिंदर सिंह आज होंगे भाजपा में शामिल, अपनी पार्टी का विलय भी करेंगे
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह सोमवार को भाजपा में शामिल हो जाएंगे। उनके साथ उनके बेटे, बेटी और अन्य कई करीबी नेताओं के भी भाजपा में शामिल होने की संभावना है। अमरिंदर सिंह, अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस का विलय भी भाजपा में करने वाले हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर अपनी नई पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस का गठन करने वाले अमरिंदर सिंह पहले ही अपने कई करीबी नेताओं को भाजपा में शामिल करा चुके हैं।
पंजाब में संगठन को मजबूत करने और जनाधार बढ़ाने के मिशन में लगी भाजपा अपनी राज्य इकाई की टीम में बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी में है और यह माना जा रहा है कि भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी जल्द ही उन्हें पंजाब में कोई बड़ी भूमिका दे सकती है। उनके करीबी नेताओं को भी पार्टी संगठन में अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू से टकराव के कारण कांग्रेस आलाकमान के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले अमरिंदर सिंह ने अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस का गठन किया था। उस समय चुनावी रणनीति के तहत अमरिंदर सिंह ने अपने कई करीबियों को भाजपा में शामिल कराया था, लेकिन स्वयं अपने राजनीतिक दल के बैनर तले ही भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। हालांकि अमरिंदर सिंह न तो अपनी पटियाला सीट बचा पाए और न ही अपनी पार्टी के किसी उम्मीदवार को जीता पाएं। आम आदमी पार्टी की आंधी में भाजपा के मंसूबे भी धरे के धरे रह गए।
2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर अब भाजपा राज्य में संगठन का पुनर्गठन करने में जुट गई है और भाजपा के रणनीतिकारों का यह मानना है कि अमरिंदर सिंह के भाजपा में शामिल होने से पार्टी को पंजाब में अपना जनाधार बढ़ाने और संगठन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में अमेरिकी मिशन ने बनाया रिकॉर्ड, अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर का निवेश जुटाया

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस साल अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर (20.5 बिलियन डॉलर) के नए निवेश आकर्षित किए हैं। इस उपलब्धि के साथ भारत में अमेरिकी मिशन निवेश बढ़ाने के मामले में दुनियाभर के सभी अमेरिकी दूतावासों में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के लीडरशिप समिट में बोलते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि यह उपलब्धि भारत में बढ़ते भरोसे और दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंधों का बड़ा संकेत है।
उन्होंने कहा, “हमारी सभी अमेरिकी दूतावासों के बीच एक तरह की प्रतिस्पर्धा रहती है। इस साल नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने 20.5 अरब डॉलर का नया निवेश अमेरिका तक पहुंचाया और हम बाकी सभी मिशनों से काफी आगे रहे। यह हमारे लिए बेहद गर्व और संतोष की बात है।”
सर्जियो गोर ने कहा कि आज भारत एक भरोसेमंद निवेश गंतव्य बनकर उभरा है। यही वजह है कि अमेरिकी कंपनियां भारत के साथ काम करने में पहले से ज्यादा विश्वास दिखा रही हैं।
उन्होंने बताया कि जब कोई अमेरिकी कंपनी उनसे पूछती है कि क्या भारत में निवेश करना सुरक्षित है? क्या यहां उनकी बौद्धिक संपदा (आईपी) सुरक्षित रहेगी? क्या कानून अचानक नहीं बदलेंगे? क्या टैक्स व्यवस्था स्थिर और भरोसेमंद है? तब उन्हें गर्व के साथ जवाब देने का मौका मिलता है कि अमेरिका भारत पर भरोसा करता है और भारत के साथ मिलकर काम करता है।
राजदूत ने कहा कि उन्होंने भारत में अपने छह महीने के कार्यकाल के दौरान कई सकारात्मक बदलाव देखे हैं। अमेरिकी दूतावास अब केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका पूरा ध्यान ठोस आर्थिक परिणाम हासिल करने पर है।
उन्होंने कहा, “जैसा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं, हम परिणामों पर काम करते हैं। मैं भारत सिर्फ स्वागत समारोहों में शामिल होने नहीं आया हूं। मेरा उद्देश्य इस महत्वपूर्ण साझेदारी को और मजबूत करना है, जो दोनों देशों के लिए बेहद जरूरी है।”
सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी दूतावास हमेशा निवेशकों और कारोबारियों के लिए खुला है। उन्होंने कंपनियों से अपील की कि अगर किसी निवेश या कारोबारी परियोजना में नियमों या सरकारी प्रक्रियाओं की वजह से कोई अड़चन आती है, तो वे सीधे दूतावास से संपर्क करें।
उन्होंने कहा, “हमारा दूतावास आपके लिए हमेशा खुला है। आइए, हमसे मिलिए और बताइए कि हम आपकी किस तरह मदद कर सकते हैं। कई बार दोनों देशों में फाइलें सरकारी प्रक्रियाओं में अटक जाती हैं। अगर हम सही व्यक्ति तक मामला पहुंचाकर उसे आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, तो जरूर करेंगे। आपको हमारा दूतावास हमेशा सहयोगी और सकारात्मक मिलेगा।”
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार आर्थिक कूटनीति को विदेश नीति का अहम हिस्सा मानती है। उनका कहना था कि ट्रंप खुद भी अमेरिकी कंपनियों को विदेशों में कारोबार बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा, “कोई भी सौदा छोटा नहीं होता। अगर किसी निवेश से अमेरिका में रोजगार पैदा होता है, तो राष्ट्रपति खुद उस कंपनी के समर्थन में फोन करने के लिए भी तैयार रहते हैं। यह बेहद सक्रिय तरीका है, जैसा हमने पहले किसी भी राजनीतिक दल की सरकार में नहीं देखा।”
सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ तकनीक, रक्षा, विमानन (एविएशन) और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कारोबारी और निवेश संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता भरोसे, साझा अवसरों और दीर्घकालिक साझेदारी पर आधारित है।
उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा, तकनीक और ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ अब कॉमर्शियल डिप्लोमेसी भी भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का एक मजबूत और महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत-अमेरिका संबंधों को व्यापार समझौते से मिली नई रफ्तार, एआई और रक्षा सहयोग पर बढ़ा जोर

अमेरिका और भारत के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में बढ़ते भरोसे का अनुमान लगाते हुए कहा कि लंबे समय से इंतजार किया जा रहा द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा होने वाला है। दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और मजबूत सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम (यूएसआईएसपीएफ) लीडरशिप समिट में इस पर आम सहमति बनी, जहां दोनों सरकारों के अधिकारियों, कानून बनाने वालों और बिजनेस लीडर्स ने बताया कि यह संबंध तकनीक, निवेश और साझा रणनीतिक हितों से प्रेरित होकर एक नए दौर में पहुंच रहा है।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अपने आखिरी चरण में पहुंच गई है।
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि भारत के आर्थिक बदलाव ने इसे वैश्विक विकास, स्थिरता और भरोसेमंद साझेदारी का एक जरूरी सहारा बना दिया है। उन्होंने कहा कि लगातार सुधार, मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी और उच्च तकनीक में निवेश ने भारत को इस दशक के आखिर तक 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर ला खड़ा किया है।
क्वात्रा ने बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी को भारत-अमेरिका सहयोग के अगले मोर्चों के तौर पर पहचाना और कहा कि 2030 तक दोनों देशों का आपसी व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य सप्लाई चेन, इन्वेस्टमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और स्किल्ड टैलेंट के करीबी इंटीग्रेशन पर निर्भर करेगा।
पूरे समिट में चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा को लेकर खास तौर पर बात हुई। अमेरिका के आर्थिक विकास, ऊर्जा और पर्यावरण के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने इंजीनियरिंग टैलेंट में भारत को दुनिया का एकमात्र ऐसा देश बताया जो असल में चीन को टक्कर देता है और इसे भरोसेमंद तकनीकी इकोसिस्टम बनाने में अमेरिका का सबसे जरूरी लॉन्ग-टर्म साझेदार बताया।
हेलबर्ग ने कहा कि वाशिंगटन चीन से आगे जरूरी तकनीकी सप्लाई चेन में विवधिकरण लाना चाहता है। इसके साथ ही भारत के साथ मिलकर एक साझा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेवलपर इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है।
अपनी शुरुआती बातों में, यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष मुकेश अघी ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां चुपचाप चीन पर निर्भरता कम कर रही हैं और भारत में मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च ऑपरेशन बढ़ा रही हैं।
समिट में नई दिल्ली के साथ करीबी संबंधों के लिए वाशिंगटन में दोनों पार्टियों के समर्थन पर भी जोर दिया गया। रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर ही एकमात्र ऐसा कॉम्बिनेशन हैं जो इनोवेशन में चीन के लेवल की बराबरी कर सकते हैं।
डेमोक्रेटिक सेनेटर मार्क वार्नर ने भारत को लंबे समय में अमेरिका के शीर्ष दो या तीन रणनीतिक साझेदारों में से एक बताया। डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि रो खन्ना ने कहा कि यह संबंध आखिर में साझा डेमोक्रेटिक मूल्यों के साथ-साथ बढ़ते रक्षा और आर्थिक सहयोग पर आधारित होना चाहिए।
पूर्व अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने मौजूदा संबंधों को ऐतिहासिक संदर्भ में रखते हुए लोगों के बीच के जुड़ाव को ‘सीक्रेट सॉस’ बताया, जिसने दशकों तक दोनों देशों के संबंधों को बनाए रखा। उन्होंने यूएसआईएसपीएफ की यादगार कॉफी टेबल बुक, ‘वी द पीपल: 250 वॉयसेज दैट हैव शेप्ड द यूएस-इंडिया रिलेशनशिप’ भी लॉन्च की।
बातचीत में यह बात सामने आई कि भारत-अमेरिका के संबंध डिप्लोमेसी और डिफेंस पर अपने पारंपरिक फोकस से कहीं आगे बढ़ गए हैं। अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स ने बार-बार तकनीक, सप्लाई चेन की मजबूती, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश को संबंध के अगले चरण की तय प्राथमिकता बताया।
महाराष्ट्र
वोटर लिस्ट के स्पेशल रिविज़न के तहत, पोलिंग स्टेशन लेवल ऑफिसर (बीएलओएस) 30 जून और 29 जुलाई, 2026 के बीच घर-घर जाकर सर्वे करेंगे।

मुंबई। इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया के निर्देशों के अनुसार, मुंबई रीजन (मुंबई शहर और उपनगर) में एक स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (एसआईआर) ऑफ़ इलेक्टोरल रूल्स प्रोग्राम लागू किया जा रहा है। इसके तहत, पोलिंग स्टेशन लेवल ऑफिसर (बीएलओएस) 30 जून से 29 जुलाई, 2026 के बीच घर-घर जाकर काम करेंगे। डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर और म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिडे ने वोटर्स से अपील की है कि वे संबंधित बीएलओएस को ज़रूरी जानकारी देकर सहयोग करें।
स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (एसआईआर) ऑफ़ इलेक्टोरल रूल्स प्रोग्राम के तहत, पोलिंग स्टेशन लेवल ऑफिसर (बीएलओएस) घर-घर जाकर वोटर्स को उनके एन्यूमरेशन फ़ॉर्म देंगे। फ़ॉर्म में ज़रूरी जानकारी भरनी होगी, साइन करने होंगे और एक कॉपी Bबीएलओएस को वापस करनी होगी। गृह भ्रमण से पहले, यदि संभव हो तो, मतदाताओं को https://voters.eci.gov.in वेबसाइट या ईसी नेट ऐप पर पिछली मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) में अपने या अपने माता-पिता का विवरण (नाम, निर्वाचन क्षेत्र, मतदाता सूची भाग संख्या, क्रम संख्या) खोजना चाहिए। हालांकि, अगर आपका या आपके माता-पिता का नाम पिछली मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) में नहीं है, तो आपको निम्नलिखित दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना चाहिए: जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, कक्षा 10 (मैट्रिक) या शैक्षिक प्रमाण पत्र, निवासी प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी/पेंशनभोगी पहचान पत्र, परिवार प्राधिकरण द्वारा जारी पहचान पत्र, परिवार पंजीकरण के सभी दस्तावेज। सरकार, वन अधिकार प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण का प्रमाण; 1 जुलाई 1987 से पहले बैंक, डाकघर, जीवन बीमा निगम या सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र/प्रमाण पत्र या आधार कार्ड। पिछली वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में अपनी डिटेल्स जानने के लिए, इलेक्शन कमीशन की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं या https://voters.eci.gov.in/searchInSIR/S2UA4DPDF-JK4QWODSE लिंक पर क्लिक करें। ज़्यादा जानकारी के लिए, पास के वोटर रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के ऑफिस या हेल्पलाइन नंबर 1800 22 1850 पर संपर्क करें और वोटर लिस्ट के रिवीजन को सफल बनाएं।
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