राजनीति
अखिलेश यादव बोले-यूपी कोरोना के साथ राजनीति संक्रमण से रहा है जूझ
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोला और कहा कि यूपी कोरोना संक्रमण के साथ राजनीतिक संक्रमण से भी जूझ रहा है। कहा कि भाजपा सरकार के कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में अब मुख्यमंत्री का नियंत्रण भी ढीला पड़ता जा रहा है। अखिलेश ने आज यहां जारी बयान में कहा कि जिस तरह से दिल्ली-लखनऊ के बीच तनातनी के संकेत हैं, उससे लगता है कि जो दिख रहा है वह अगले संकट का संकेत हैं। सरकार नाकाम है और मुख्यमंत्री नाकाम, फिर भी दिल्ली की दौड़ किस लिए हो रही है राज्य की जनता सच्चाई से परिचित है। इसीलिए प्रदेश में कोरोना के साथ राजनीति संक्रमण जैसे हालात हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण की संख्या आंकड़ों में भले हेराफेरी से कम हो गई है लेकिन अभी भी अस्पतालों में और घरों में संक्रमित कम नही है। खुद पीजीआई की सर्वे रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि 80 प्रतिशत मरीजों के साइनस पर फंगस हमला कर रहा है। फंगस के समुचित इलाज की सुविधाएं अभी भी अपर्याप्त हैं। कोरोना संक्रमितों में अब दूसरी बीमारियों के लक्षण भी दिखाई पड़ने लगे हैं। मरीज तड़प रहे हैं। डाक्टर अपने प्रशासनिक अधिकार छीने जाने से परेशान है, संविदा पर नियुक्त पैरामेडिकल स्टाफ शटल बने हुए है।
राष्ट्रीय समाचार
मुंबई: अदालतों में आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की कमी पर वकील का पत्र जनहित याचिका में बदला गया

मुंबई, 28 नवंबर: शहर के वकील आसिफ नकवी द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्र, जिसमें उन्होंने अदालत परिसर के अंदर बुनियादी आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की कमी के बारे में चिंता व्यक्त की थी, अब एक जनहित याचिका (पीआईएल) में बदल गया है।
नकवी, जो बॉम्बे सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव भी हैं, ने 7 नवंबर को पत्र लिखकर महाराष्ट्र और देश के बाकी हिस्सों की सभी अदालतों में वकीलों के लिए आपातकालीन चिकित्सा और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं का अनुरोध किया।
वकील ने प्रार्थना की है कि न्यायालय केंद्र और सभी राज्य सरकारों तथा प्रमुख सार्वजनिक ट्रस्ट अस्पतालों को दिशानिर्देश/निर्देश जारी करे, ताकि न्यायालय के समय में तत्काल हृदय संबंधी या अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा सहायता की आवश्यकता वाले अधिवक्ताओं के लिए एक स्पष्ट, त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित किया जा सके।
नकवी ने आगे अनुरोध किया है कि अदालत परिसर के भीतर प्रमुख और आसानी से सुलभ स्थानों पर कम से कम दो स्वचालित बाह्य डिफाइब्रिलेटर (एईडी) होने चाहिए ताकि हृदय संबंधी आपात स्थितियों में तत्काल प्रतिक्रिया की जा सके।
नकवी ने कुछ घटनाओं का हवाला दिया है, जिनमें अदालत में उपस्थित होने आए वकीलों को अचानक हृदयाघात हुआ और उनकी मृत्यु हो गई, क्योंकि अदालत परिसर में बुनियादी आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं।
पिछले साल अगस्त में नागपुर में हुई एक घटना का ज़िक्र करते हुए, पत्र में कहा गया है कि वकील तलत इक़बाल कुरैशी की अदालत में दलीलें पेश करते समय दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। जज पवार उन्हें अपनी कार से सदर स्थित एक निजी अस्पताल ले गए, लेकिन वहाँ पहुँचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
उन्होंने हाल ही में घटित एक घटना का भी उल्लेख किया जिसमें 17 अक्टूबर को अदालत में प्रतीक्षा करते समय एक महिला वकील को हृदयाघात हो गया था।
पर्यावरण
दिल्ली में लगातार 15वें दिन भी वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बरकरार, एक्यूआई 300 के पार

नई दिल्ली, 29 नवंबर: दिल्ली की वायु गुणवत्ता शनिवार को लगातार 15वें दिन भी बहुत खराब श्रेणी में बनी रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सुबह 7 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 338 दर्ज किया।
यह आंकड़ा शुक्रवार के 385 के लेवल से थोड़ा बेहतर है, फिर भी नवंबर महीने में राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण का लेवल लगातार ज्यादा बना हुआ है। शुक्रवार को शहर का 24 घंटे का औसत एक्यूआई 369 था, जिससे दिल्ली में आधे महीने तक हवा की क्वालिटी बहुत खराब बनी रही।
एयर क्वालिटी और मौसम एजेंसियों के अनुमान बताते हैं कि आने वाले सप्ताह में हालात में कोई खास सुधार होने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि मौसम के कारण प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों के फैलने के लिए ज़्यादातर खराब बने हुए हैं।
दिल्ली में प्रदूषित हवा से अभी लोगों को राहत मिलने वाली नहीं है। मौसम विभाग और एयर-क्वालिटी एजेंसियों का कहना है कि अगले पूरे हफ्ते तक हालात ऐसे ही खराब रहेंगे। हवा रुकी हुई है और धुआं-धूल ऊपर नहीं उठ पा रहा, इसलिए प्रदूषण कम होने के आसार बहुत कम हैं।
शनिवार सुबह के सीपीसीबी के मॉनिटरिंग डेटा से पता चला कि ज्यादातर स्टेशन एक्यूआई लेवल को बहुत खराब ब्रैकेट में ही बता रहे हैं। इनमें आनंद विहार (354), अशोक विहार (347), बवाना (364), बुराड़ी (347), चांदनी चौक (351), द्वारका सेक्टर 8 (368), ITO (343), पटपड़गंज (341), पंजाबी बाग (355), रोहिणी (364) और विवेक विहार (358) शामिल थे।
हालांकि, कुछ जगहों पर खराब कैटेगरी में थोड़ी बेहतर रीडिंग दर्ज की गई। इनमें आईजीआई एयरपोर्ट (295), दिलशाद गार्डन (272), मंदिर मार्ग (251) और NSIT द्वारका (252) शामिल थे, जिससे थोड़ी राहत मिली।
एनसीआर के शहरों में भी ऐसा ही पैटर्न दिखा। नोएडा में एक्यूआई 344, गाजियाबाद में 333, फरीदाबाद में 207, और गुरुग्राम में 293 दर्ज किया गया, जो पूरे इलाके में खराब से बहुत खराब एयर क्वालिटी को दिखाता है।
इससे पहले शुक्रवार को, दिल्ली के 39 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से कुल 19 ने सुबह के समय एयर क्वालिटी को गंभीर कैटेगरी में रिकॉर्ड किया, जिसके बाद दिन में हालात थोड़े बेहतर हुए।
पूरे सप्ताह दिल्ली की रोजाना की औसत एक्यूआई रीडिंग में लगातार खराब लेवल दिखे। इनमें गुरुवार को 377, बुधवार को 327, मंगलवार को 352, और सोमवार को 382, ये सभी बहुत खराब रेंज में थे।
मौसम की बात करें तो, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने शनिवार को कोहरे का अनुमान लगाया है। ज्यादा से ज्यादा तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है, जबकि कम से कम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।
राजनीति
मध्य प्रदेश में खाद की लाइन में लगी महिला की मौत, प्रायोजित हत्या : कमलनाथ

भोपाल, 28 नवंबर : मध्य प्रदेश के गुना जिले में खाद की लाइन में लगी एक आदिवासी महिला की ठंड लगने से हुई कथित मौत के मामले में कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने महिला की मौत को सरकार की लापरवाही से प्रायोजित हत्या करार दिया है।
दरअसल, गुना जिले के बमोरी के बगेरा डबल लॉक खाद वितरण केंद्र पर यूरिया लेने के लिए कतार में लगी भूरी बाई नामक महिला की रात में मौत हो गई। आदिवासी महिला की मौत पर सियासत तेज हो गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि मध्यप्रदेश में खाद के लिए भटकती एक आदिवासी महिला किसान भूरी बाई की मौत कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि सरकार की लापरवाही से हुई प्रायोजित हत्या है। भूरी बाई तीन दिनों तक लगातार खाद की लाइन में लगी। कभी मशीन खराब मिलती, कभी अधिकारी गायब रहते, कभी सिस्टम बंद बताया जाता।
उन्होंने कहा कि भूख, ठंड और थकान से उनकी हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन न सरकार ने एम्बुलेंस की व्यवस्था की, न समय पर उपचार मिला। जब उनके परिवार वाले रात में उन्हें अस्पताल ले जा पाए, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। यह मृत्यु नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था का नतीजा है जिसे सरकार ने खुद बनाया और किसानों पर थोप दिया है। कड़कड़ाती ठंड में किसान जमीन पर लेटकर रातें गुजारने को मजबूर हैं। असली किसान लाइन में ठिठुर रहा है और सत्ता सिर्फ बयानबाजी में व्यस्त है।
कमलनाथ ने प्रशासन के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि सबसे दर्दनाक सच्चाई यह है कि प्रशासन तभी जागता है जब कोई किसान मर जाता है। भूरी बाई की मौत के बाद अचानक सिस्टम चल पड़ा। रात में मशीनें ठीक हो गईं, और सुबह साढ़े छह बजे तक खाद वितरण शुरू कर दिया गया। यह साबित करता है कि किसानों की मौतें इस सरकार के लिए चेतावनी का अलार्म बन चुकी हैं। सरकार वही काम करती है जो उसे पहले करना चाहिए था, लेकिन तब करती है जब किसी की जान चली जाती है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा, “असलियत यह है कि खाद की कमी वास्तविक कमी नहीं है। कमी सिर्फ नीयत की है। प्रदेश में खाद मौजूद है, लेकिन उसे किसानों तक पहुंचने से पहले रोक दिया जाता है। माफिया, दलाल और कुछ अधिकारी मिलकर खाद को मुनाफे का साधन बना चुके हैं। गोदामों में बोरी छिपाकर रखी जाती है और बाजार में कालाबाजारी से बेची जाती है। इस पूरे खेल में किसान सिर्फ पीड़ित नहीं, बल्कि एक बलि का बकरा बन गया है।”
किसानों की मौत की चर्चा करते हुए कमलनाथ ने कहा, “यह संकट सिर्फ खाद का संकट नहीं है, यह मानवीय संवेदनाओं का संकट है। मध्य प्रदेश में किसान बार-बार मर रहे हैं, कभी कर्ज से, कभी खाद की लाइन में, कभी सरकारी उपेक्षा के कारण। लेकिन सरकार की संवेदनशीलता शून्य बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि भूरी बाई सिर्फ खाद लेने नहीं गई थीं, वे अपना जीवन, अपनी इज्जत और किसान का अधिकार मांगने गई थीं। लेकिन सरकार ने उन्हें लाइन में खड़ा रखकर उनकी जान ले ली। यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक तंत्र द्वारा की गई हत्या है। और जब सरकार किसानों की मौत पर भी मौन रहे, तो वही मौन उसकी सहमति साबित करता है।
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