राष्ट्रीय समाचार
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पीएम मोदी ने आदमपुर एयरबेस पहुंच बढ़ाया जवानों का हौसला
जालंधर, 13 मई। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पंजाब के आदमपुर एयरबेस पर पहुंचकर एयरफोर्स अधिकारियों और बहादुर जवानों के साथ मुलाकात और बातचीत की। पीएम मोदी मंगलवार सुबह आदमपुर एयरबेस पहुंचे।
पीएम मोदी ने इस मुलाकात की तस्वीरें और जानकारी अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर भी शेयर की। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “आज सुबह मैं एएफएस आदमपुर गया और हमारे बहादुर वायु योद्धाओं और सैनिकों से मिला। साहस, दृढ़ संकल्प और निडरता के प्रतीक लोगों के साथ रहना एक बहुत ही खास अनुभव था। भारत हमारे सशस्त्र बलों के प्रति हमेशा आभारी रहेगा, क्योंकि वे हमारे देश के लिए सब कुछ करते हैं।”
पीएम मोदी की वायुसेना के जवानों से बातचीत की कई तस्वीरें भी सामने आई हैं। फोटो में देखा जा सकता है कि पीएम मोदी सेना के जवानों का हौसला अफजाई करते हुए दिख रहे हैं। खास बात यह है कि एक फोटो में पीएम मोदी के पीछे भारतीय लड़ाकू विमान की तस्वीर भी नजर आ रही है, इसके ऊपर लिखा है- “क्यों दुश्मनों के पायलट ठीक से सो नहीं पाते?”
इससे पहले, पीएम मोदी ने सोमवार को रात 8 बजे ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार देश को संबोधित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख को स्पष्ट किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ में इस बात पर जोर दिया कि आतंक के खिलाफ लड़ाई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने एक नई लकीर खींची है। उन्होंने कहा कि आतंक की लड़ाई में एक नई लकीर खींच दी है, एक नया पैमाना, न्यू नॉर्मल तय कर दिया गया है।
पीएम मोदी ने कहा कि पहला पैमाना यह है कि भारत पर आतंकी हमला हुआ तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हम अपने तरीके से, अपनी शर्तों पर जवाब देकर रहेंगे। हर उस जगह जाकर कठोर कार्रवाई करेंगे, जहां से आतंक की जड़ें निकलती हैं।
दूसरा पैमाना यह है कि कोई भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल भारत नहीं सहेगा। न्यूक्लियर ब्लैकमेल की आड़ में पनप रहे आतंकवादी ठिकानों पर भारत सटीक और निर्णायक प्रहार करेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा तीसरा पैमाना यह है कि हम आतंक की सरपरस्त सरकार और आतंक के आकाओं को अलग-अलग नहीं देखेंगे। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान दुनिया ने पाकिस्तान का वह घिनौना सच फिर देखा है, जब मारे गए आतंकियों को विदाई देने, पाकिस्तानी सेना के बड़े-बड़े अफसर उमड़ पड़े। सरकार प्रायोजित आतंकवाद का यह बहुत बड़ा सबूत है। हम भारत और अपने नागरिकों को किसी भी खतरे से बचाने के लिए लगातार निर्णायक कदम उठाते रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के मैदान में हमने हर बार पाकिस्तान को धूल चटाई है। और इस बार ऑपरेशन सिंदूर ने नया आयाम जोड़ा है। हमने रेगिस्तानों और पहाड़ों में अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया, और साथ ही, न्यू एज वॉरफेयर में भी अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। इस ऑपरेशन के दौरान, हमारे ‘मेड इन इंडिया’ हथियारों की प्रमाणिकता सिद्ध हुई। आज दुनिया देख रही है, 21वीं सदी के वॉरफेयर में ‘मेड इन इंडिया’ डिफेंस इक्विपमेंट्स, इसका समय आ चुका है।
राष्ट्रीय समाचार
मध्य प्रदेश : कूनो में चीते को गोली मारे जाने की जांच के लिए एसटीएफ का गठन

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के नर चीते को गोली मारने के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वन विभाग ने बुधवार को बताया कि इस घटना की जांच के लिए वन और पुलिस अधिकारियों को मिलाकर एक स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया गया है।
यह चीता (केएनजी22) मंगलवार सुबह इलाज के दौरान मर गया। उसे 25 अक्टूबर को श्योपुर टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिवीजन के कंपार्टमेंट नंबर 748 से रेस्क्यू किया गया था। वन विभाग के बयान के अनुसार इमरजेंसी सर्जरी के दौरान उसके शरीर से पैलेट गन के पांच छर्रे निकाले गए।
प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (वाइल्डलाइफ) और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन समिता राजोरा ने बताया कि पहले जानवर का एक्स-रे किया गया, जिसमें उसके शरीर में अलग-अलग जगहों पर कई बाहरी वस्तुएं फंसी हुई दिखीं। इसके बाद उसे जबलपुर के नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी के वेटरनरी सर्जरी और रेडियोलॉजी विभाग में विस्तृत जांच और गहन इलाज के लिए भेजा गया।
सीटी स्कैन में पता चला कि बाहरी वस्तुओं ने चीते के अंदरूनी अंगों, मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाया है। समिता राजोरा ने बयान में कहा, “इमरजेंसी सर्जरी की गई, जिसके दौरान उसके शरीर से बंदूक के पांच छर्रे निकाले गए।”
सर्जरी और वेटरनरी टीम के लगातार प्रयासों के बावजूद चीते को नहीं बचाया जा सका। समिता राजोरा ने कहा कि घटना की विस्तृत जांच के लिए वन और पुलिस अधिकारियों वाली एसटीएफ का गठन किया गया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि जानवर को किन परिस्थितियों में गोली मारी गई और क्या इसके लिए कोई जिम्मेदार है।
वन विभाग ने अभी संदिग्ध गोलीबारी या किसी आरोपी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। केएनजी22 की मौत के साथ भारत में चीतों की आबादी अब 58 रह गई है, जिसमें कूनो नेशनल पार्क में 52, गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में चार और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीते हैं।
श्योपुर जिले में स्थित कूनो भारत के चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम का मुख्य स्थल है, जो सितंबर 2022 में नामीबिया से चीतों को लाने के साथ शुरू हुआ था। बाद में भारत में इस प्रजाति की स्थायी आबादी बसाने के प्रयासों के तहत दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाए गए, जहां 1952 में चीते विलुप्त घोषित हो गए थे।
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काली पूजा और दीपावली से पहले कोलकाता में एक्यूआई कम, चक्रवात अर्नब के कारण अस्थायी राहत

चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से बुधवार सुबह कोलकाता की वायु गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ, और शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक एक दिन पहले के उच्च स्तर से काफी नीचे आ गया।
हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह राहत कुछ समय के लिए ही हो सकती है, क्योंकि काली पूजा और दीपावली के दौरान प्रदूषण का स्तर फिर से बढ़ने की आशंका है।
आमतौर पर, काली पूजा और दीपावली से पहले कोलकाता की हवा की गुणवत्ता खराब होने लगती है। लोगों के पटाखे जलाने से पहले ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है। पिछले सालों में, इस समय तक शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के पार चला जाता था। लेकिन, इस बार स्थिति कुछ अलग है। इस बार वायु प्रदूषण काफी कम है।
बुधवार को शहर का एक्यूआई 98 था। विशेषज्ञों का मानना है कि चक्रवात के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन भी इसका एक कारण है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती सिस्टम के कारण हवा में नमी बढ़ी है और जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम के पैटर्न में भी बदलाव आया है। इस साल बार-बार कम दबाव वाले सिस्टम और चक्रवाती गतिविधियों के कारण सामान्य से अधिक बारिश हुई है, जिससे हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व कम हो गए हैं।
दुर्गा पूजा के दौरान हुई बारिश ने भी प्रदूषण के स्तर को उस तेजी से बढ़ने से रोक दिया, जो आमतौर पर त्योहारों के मौसम में देखने को मिलता है।
पर्यावरणविद डॉ. स्वाति नंदी चक्रवर्ती ने कहा कि इस साल काली पूजा से पहले वायु प्रदूषण का स्तर काफी कम है और कहा जा सकता है कि स्थिति काफी हद तक सामान्य है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने यह मान लेने के प्रति आगाह किया है कि हवा हमेशा साफ रहेगी। ग्रीन टेक्नोलॉजिस्ट और पर्यावरणविद सोमेंद्र मोहन घोष ने आईएएनएस को बताया कि हवा में अभी जो सुधार दिख रहा है, वह वायुमंडल में अधिक नमी होने की वजह से एक अस्थायी असर है। उन्होंने अनुमान जताया कि 6 नवंबर के बाद प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ सकता है और यह मार्च 2027 के मध्य तक जारी रह सकता है।
उन्होंने कहा कि यह हवा में अधिक नमी के कारण एक अस्थायी असर है, लेकिन 6 नवंबर के बाद प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ेगा और मार्च 2027 के मध्य तक बना रहेगा।
पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, काली पूजा और दीपावली के दौरान प्रदूषण पर नजर रखने के लिए एक विशेष टीम तैयार रखी गई है। अधिकारियों द्वारा पटाखों के इस्तेमाल पर भी पाबंदियां लागू किए जाने की उम्मीद है; संभवतः पटाखे केवल रात 8 बजे से 10 बजे के बीच ही जलाने की अनुमति दी जाएगी।
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मध्य प्रदेश में 1236 कृष्णमृगों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया : सीएम मोहन यादव

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव शाजापुर जिले के रंथभंवर गांव पहुंच कर कृष्णमृगों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के अभियान के दूसरे चरण का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया है कि लगभग 1,236 काले हिरणों को पकड़ा गया है, जिन्हें श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट में छोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री यादव बुधवार को शाजापुर के दौरे पर रहे इस दौरान उन्होंने वन विभाग-प्रशासनिक अधिकारियों से अभियान की प्रगति और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। साथ ही, कैमोफ्लाज्ड मचान से बोमा पद्धति से किए जा रहे कृष्णमृग रेस्क्यू कार्य का निरीक्षण किया।
उन्होंने बोमा स्थल पर वन विभाग-प्रशासनिक टीम के साथ ग्रुप फोटो भी खिंचवाया। मुख्यमंत्री यादव ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि किसान कल्याण वर्ष पूरे प्रदेश में मनाया जा रहा है। ऐसे में हमारे किसानों की फसलों को जंगली जानवरों, खासकर काले हिरण और नीलगाय से बचाने के लिए सरकार द्वारा अफ्रीका से एक विशेष टीम बुलाई गई है। इस टीम की मदद से काले हिरणों को न केवल सुरक्षित रूप से पकड़कर पिंजरों में रखा जाता है, बल्कि इस बात का भी विशेष ध्यान रखा जाता है कि किसी भी जानवर को चोट न पहुंचे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पूरे दक्षिण एशिया में पहली बार हेलीकॉप्टर की मदद से बोमा पद्धति के आधार पर वन्यजीवों के रेस्क्यू का यह अभियान चलाया गया है। मुझे अब तक जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार लगभग 1,236 काले हिरणों को पकड़ा गया है, जिन्हें श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट में छोड़ा जा रहा है। हमारा उद्देश्य है कि वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो और किसानों की फसलों की रक्षा भी की जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस काम के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। पशु चिकित्सकों, आवश्यक उपकरणों और पूरी सावधानी के साथ जानवरों को सुरक्षित रूप से ले जाने की यह व्यवस्था वास्तव में अद्भुत है। मुझे विश्वास है कि इस परियोजना की सफलता के आधार पर देश के कई अन्य राज्य और दूसरे देश भी इस पद्धति को अपनाएंगे।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद से ही हमने लगातार जनकल्याणकारी कार्यों को तेजी से धरातल पर उतारने का काम किया है। विशेष रूप से किसान कल्याण, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने तथा प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में हमने महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
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