अंतरराष्ट्रीय समाचार
अफगान सरकार ने तालिबान कैदियों का ब्योरा किया साझा
अफगान सरकार ने तालिबान कैदियों की एक सूची जारी की, जिससे पता चला कि अधिकतर कैदी कंधार, हेलमंद, नंगरहार और फराह के चार प्रांतों से हैं। टोलो न्यूज के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने सूची जारी किया, जिससे पता चला कि सभी 34 प्रांतों के कैदियों को रिहा कर दिया गया है।
इससे पता चला कि सबसे कम कैदी पंजशीर, बामियान और नूरिस्तान से थे।
तालिबान के करीबी सूत्रों ने कहा कि हाल के दिनों में 592 कैदियों की रिहाई हुई है, जिनके बारे में सरकार और आतंकवादी समूह के बीच मतभेद थे।
अफगान सरकार ने अब तक कम से कम 4,200 तालिबान सदस्यों को रिहा कर दिया है, जबकि आतंकवादियों ने 845 हिरासत में लिए गए सुरक्षा बलों को रिहा किया है।
यह प्रकिया इंट्रा-अफगान नेगोसिएसन के तहत हुआ है। सरकार ने 5,000 तालिबान कैदियों की रिहा किया है, जबकि तालिबान ने 1,000 कैदियों को मुक्त किया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यूएई दौरा सम्पन्न, व्यापक रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर रहा जोर

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात का दो दिन का आधिकारिक दौरा पूरा कर लिया है। दौरे के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर संयुक्त अरब अमीरात के दो दिवसीय दौरे को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दो दिनों के दौरे पर यूएई नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर था।
एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो के फॉर्मेट में पोस्ट किया। इस दौरे के दौरान, डॉ. जयशंकर ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पर्सनल मैसेज उन्हें दिया। बातचीत में ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने, ट्रेड बढ़ाने और दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहा।
मीटिंग के दौरान दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम भी मौजूद थे। डॉ. जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ भी अलग से बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच इस चर्चा में इलाके की स्थिरता और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के साथ-साथ इलाके में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिशों पर भी बात हुई।
इससे पहले, शनिवार को यूएई पहुंचने पर एस. जयशंकर ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत की। उन्होंने बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच उनकी सुरक्षा और भलाई से जुड़ी चिंताओं पर बात की और भारतीय समुदाय का समर्थन करने के लिए सरकार की कोशिशों पर जोर दिया।
यह दौरा खाड़ी देशों से एनर्जी सप्लाई हासिल करने के लिए भारत की बड़ी कूटनीतिक कोशिशों के हिस्से के तौर पर हो रहा है। इससे पहले यूएई के राष्ट्रपति के साथ मीटिंग के दौरान डॉ. जयशंकर ने वेस्ट एशिया में संघर्ष के दौरान यूएई में भारतीय समुदाय की भलाई सुनिश्चित करने के लिए शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का शुक्रिया अदा किया।
दो दिवसीय यात्रा पर गए जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया, “अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मिलकर बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं और पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान भारतीय समुदाय की भलाई सुनिश्चित करने के लिए हमारा शुक्रिया। भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए उनके निर्देश के लिए उन्हें धन्यवाद।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान का विश्वास हासिल करना ही अमेरिका के लिए मौजूदा स्थिति से निकलने का रास्ता: बाकेर कालिबाफ

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर क़ालिबाफ ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए मौजूदा स्थिति से बाहर निकलने का एकमात्र तरीका यह है कि वह अपना निर्णय ले और ईरानी राष्ट्र का विश्वास हासिल करे।
उन्होंने यह टिप्पणी पाकिस्तान की अपनी यात्रा से ईरान लौटते समय पत्रकारों को संबोधित करते हुए की, जहां उन्होंने अपने साथ आए प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ शांति वार्ता में भाग लिया था।
क़ालिबाफ ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका ईरानी जनता का ऋणी है और उसे इसकी भरपाई के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।”
उन्होंने कहा, “अगर वे लड़ेंगे, तो हम भी लड़ेंगे और अगर वे तर्क के साथ आगे आते हैं, तो हम तर्क से जवाब देंगे। हम किसी भी धमकी के सामने झुकेंगे नहीं। वे हमारी इच्छाशक्ति को एक बार फिर परख सकते हैं और हम उन्हें और बड़ा सबक सिखाएंगे।”
क़ालिबाफ ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता को “बहुत गहन, गंभीर और चुनौतीपूर्ण” बताया। उन्होंने कहा कि सक्षम विशेषज्ञों के सहयोग और व्यापक व विविध दृष्टिकोण के साथ, ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने देश की सद्भावना दिखाने के लिए “बेहतरीन पहल” तैयार कीं, “जिससे बातचीत में प्रगति हुई।”
उन्होंने जोर देकर कहा, “हमने शुरू से ही घोषणा की थी कि हमें अमेरिकियों पर भरोसा नहीं है। हमारे अविश्वास की दीवार 77 साल पुरानी है। यह ऐसे समय में है जब 12 महीनों से भी कम समय में उन्होंने बातचीत के दौरान दो बार हम पर हमला किया। इसलिए, उन्हें ही हमारा विश्वास जीतना होगा।”
क़ालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ हालिया धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी धमकियों का ईरानी जनता पर कोई असर नहीं पड़ता।
ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों ने शनिवार और रविवार तड़के इस्लामाबाद में लंबी बातचीत की। ये वार्ताएं किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकीं। यह बातचीत 40 दिनों की लड़ाई के बाद बुधवार को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद हुई थी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान ने बातचीत विफल होने के लिए यूएस को ठहराया दोषी, अमेरिका पर शर्तों को बदलने का लगाया आरोप

ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने एक संभावित समझौते को अंतिम चरण में आकर पटरी से उतार दिया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के मुताबिक, बातचीत के दौरान अमेरिका ने ज्यादा से ज्यादा दबाव बनाने, बार-बार शर्तें बदलने (गोलपोस्ट शिफ्ट करने) और नाकाबंदी जैसी रणनीतियों का सहारा लिया, जिससे सहमति बनने की प्रक्रिया बाधित हो गई।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का दावा है कि प्रस्तावित “इस्लामाबाद समझौता” (एमओयू) लगभग तैयार था और दोनों पक्ष अंतिम सहमति के बेहद करीब थे।
उनका कहा है कि इन परिस्थितियों के चलते 21 घंटे तक चली गहन और मुश्किल बातचीत आखिरकार बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। तेहरान ने यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत के दौरान शर्तों में लगातार बदलाव न किए जाते, तो यह डील संभव हो सकती थी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान ने 47 सालों में वॉशिंगटन के साथ अपनी सबसे ऊंचे स्तर की सीधी बातचीत ईमानदारी और चल रहे झगड़े को खत्म करने में मदद करने के इरादे से की है। अराघची ने दुख जताया कि “कोई सबक नहीं मिला”।
अराघची ने एक्स पर लिखा, “47 सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर हुई गहरी बातचीत में, ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ अच्छी नीयत से बातचीत की। लेकिन जब ‘इस्लामाबाद एमओयू’ से बस कुछ इंच दूर थे, तो हमें गोलपोस्ट बदलने और ब्लॉकेड का सामना करना पड़ा। कोई सबक नहीं मिला। अच्छी नीयत से अच्छी नीयत पैदा होती है। दुश्मनी से दुश्मनी पैदा होती है।”
ईरानी विदेश मंत्री का यह कहना कि दोनों पक्ष एक समझौते को फाइनल करने से कुछ ही दूर थे, यह दिखाता है कि आखिरी स्टेज पर तनाव तेजी से बढ़ने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत सफलता के कितने करीब आ गई थी।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका के साथ डिप्लोमैटिक ब्रेकथ्रू की संभावना अभी भी है, बशर्ते वॉशिंगटन अपना नजरिया बदले। उन्होंने अमेरिका से “सर्वाधिकारवाद” को छोड़ने और ईरान के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की। ऐसा बदलाव एक समझौते का रास्ता बना सकता है। बता दें, सर्वाधिकारवाद एक ऐसी राजनीतिक प्रणाली है, जिसमें राज्य सार्वजनिक और निजी जीवन के हर पहलू पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने एक्स पर एक पोस्ट में बातचीत करने वाले डेलिगेशन के सदस्यों की सराहना करते हुए कहा, “अगर अमेरिकी सरकार अपना सर्वाधिकारवाद छोड़ दे और ईरानी देश के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते तक पहुंचने के रास्ते जरूर मिल जाएंगे।”
इस बीच, अमेरिका ने घोषणा की है कि वह 13 अप्रैल से ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी तरह से समुद्री नाकाबंदी लागू करना शुरू कर देगा।
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