खेल
एडिडास ने अच्छे एथलीटों को टीसीएस वर्ल्ड 10के बेंगलुरु मैराथन 2022 का हिस्सा बनाया
विश्व रिकॉर्ड धारक एथलीट रविवार को आगामी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) वल्र्ड 10के बेंगलुरु मैराथन में भाग लेंगे। मुक्तार एड्रिस, किबिवोट कैंडी, एंडमलेक बेलिहु, जॉयस चेपकेमोई टेले, तादेसे वर्कू और तेलाहुन हैले बेकेले सहित दुनिया के शीर्ष एथलीट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड तोड़े हैं। वहीं, टीसीएस मैराथन के 14वें सीजन में भाग लेंगे, जो महामारी के बाद वर्ष के अंतराल पर लौट रहे हैं।
स्पोर्ट्सवियर की कंपनी एडिडास से जुड़े ये एथलीट दुनिया भर के कुछ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा करेंगे। विश्व स्तर पर एडिडास ने मैराथन जैसे खेलों का हमेशा आगे बढ़कर समर्थन किया है। एडिजेरो एडिओस प्रो 2 जैसे जूते की सीरीज के साथ एथलीटों को विश्व मंच पर रिकॉर्ड तोड़ने में सक्षम बनाता है।
आगामी कार्यक्रम में, मुक्तार एड्रिस, किबिवोट कैंडी, एंडमलेक बेलिहु, तेलाहुन हैले बेकेले और तादेसे वर्कू पुरुष वर्ग में और जॉयस टेले महिलाओं की दौड़ में भाग लेंगी।
सभी की निगाहें दो बार के गत विश्व चैंपियन मुक्तार एड्रिस पर होंगी, जिन्होंने हाल ही में ग्रीष्मकालीन विश्व चैंपियनशिप स्पर्धाओं में लगातार तीन खिताब जीतकर एक रिकॉर्ड बनाया है। इथियोपिया के एथलीट ने 2020 के दिल्ली हाफ मैराथन में भारतीय दौड़ में डेब्यू किया था। वह आने वाले मैराथन का उपयोग आगामी अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों के लिए अपनी तैयारियों के रूप में भाग लेंगे।
केन्याई लंबी दूरी के धावक किबिवोट कैंडी एक और विशिष्ट नाम है, जो आने वाले रविवार को इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। पूर्व विश्व हाफ मैराथन रिकॉर्ड धारक का 10 किमी व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 26:51 है। उन्होंने अक्टूबर 2020 में पोलैंड के गिडेनिया में आयोजित विश्व एथलेटिक्स हाफ मैराथन चैंपियनशिप में दूसरा स्थान हासिल किया था।
टीसीएस बेंगलुरु इवेंट में महिलाओं की दौड़ में भाग लेंने वाली केन्याई एथलीट जॉयस टेले ने आखिरी बार 2021 में 15के नोक्टर्ना वालेंसिया में महिलाओं की 15000 मीटर में पदक जीता था। उन्होंने इस साल की शुरुआत में बर्लिन हाफ मैराथन में दूसरे स्थान पर रहने के लिए 1:05:50 का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था।
विश्व मंच पर इथियोपिया का प्रतिनिधित्व करने वाले तेलाहुन हैले बेकेले का भारतीय मैराथन में दौड़ना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने 2018, 2019 और 2020 में एलीट वर्ग में पदक हासिल किए थे। वह दोहा, कतर में आयोजित 2019 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 10,000 मीटर श्रेणी में 5वें स्थान पर रहे। टीसीएस वर्ल्ड 10के बेंगलुरु की कुल पुरस्कार राशि 210,000 डॉलर है, जहां पुरुष और महिला विजेता को 26,000 डॉलर मिलेंगे।
राजनीति
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से घोषणा पर विपक्ष ने जताई आपत्ति, सरकार से पूछे सवाल

नई दिल्ली, 3 फरवरी : भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के बाद विपक्षी पार्टियां सरकार पर हमलावर हैं। विपक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से इन समझौते की घोषणा किए जाने पर आपत्ति जताई और सरकार से सवाल पूछे हैं।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने पूछा, “सरकार बताए कि क्या देश की राजधानी दिल्ली से वाशिंगटन शिफ्ट हो गई है।” उन्होंने कहा, “‘ऑपरेशन सिंदूर’ रोकने की घोषणा वाशिंगटन करता है, अभी डील की घोषणा भी वाशिंगटन से हो रही है। भारत तेल कहां से खरीदेगा, यह घोषणा भी वाशिंगटन से हो रही है।”
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो चाहते हैं, वह कहते हैं, लेकिन हमारी सरकार से आवाज नहीं आती है। जब ट्रंप ने 100 प्रतिशत टैरिफ किया था, तब खड़े होकर किसी ने नहीं बोला। जब इसे 50 प्रतिशत किया, तब भी किसी ने नहीं बोला। डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने से इनकार किया और वेनेजुएला से खरीदने को कहा, तब भी सरकार ने कुछ नहीं बोला। उन्होंने पाकिस्तान के साथ सीजफायर कराने की घोषणा भी की थी, तब भी सरकार ने कुछ नहीं कहा। लेकिन जब अमेरिकी टैरिफ को 18 प्रतिशत किया गया, तो सरकार में बैठे लोग बड़े खुश हो रहे हैं।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि भारत का टैरिफ अब शून्य है। लेकिन क्या यह सही है कि अमेरिका को होने वाले भारतीय एक्सपोर्ट पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगेगा, जबकि भारत को होने वाले अमेरिकी एक्सपोर्ट पर शून्य टैरिफ लगेगा? ये वे अहम मुद्दे हैं, जिन पर हम स्पष्ट जवाब चाहते हैं।”
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “अभी अमेरिकी टैरिफ 18 प्रतिशत करने पर सहमति बनी है, लेकिन इससे पहले यह टैरिफ कई गुना कम था। अभी 18 प्रतिशत टैरिफ अपने आप में सवाल खड़े करता है। इसकी घोषणा भारत सरकार की तरफ से भी नहीं की गई है।”
डिंपल यादव ने कहा कि यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति ने की है। जिस तरह से अमेरिका भारत के साथ बर्ताव कर रहा है, उससे पता चलता है कि भारत सरकार उस तरह से डील नहीं कर पा रही है, जैसा अमेरिका को करना चाहिए।
राजनीति
पश्चिम बंगाल एसआईआर विवाद पर बुधवार को सुप्रीम सुनवाई, ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल

नई दिल्ली, 3 फरवरी : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अहम सुनवाई होगी। प्रदेश में चल रही एसआईआर प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका पर भी शीर्ष अदालत सुनवाई करेगी।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को सवालों के घेरे में खड़ा किया गया है। सीएम ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। याचिका में इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताया गया है और कहा गया है कि इसका सीधा असर निष्पक्ष चुनाव पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसे बिना पर्याप्त परामर्श व स्पष्ट दिशा-निर्देशों के लागू किया जा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह की प्रक्रिया से आम नागरिकों में भ्रम और भय का माहौल बन रहा है। अपनी याचिका में सीएम ममता ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात और तानाशाही रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि जिस संवैधानिक संस्था से निष्पक्षता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की अपेक्षा की जाती है, वही संस्था अब ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए बेहद चिंताजनक है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि चुनाव आयोग का यह रवैया संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक संतुलन के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। मुख्यमंत्री ममता ने सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले में सीधी दखल देने और समुचित निर्देश जारी करने की मांग की है।
राजनीति
अमित शाह 5 फरवरी से तीन दिनों के लिए जम्मू-कश्मीर दौरे पर, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर करेंगे जायजा

AMIT SHAH
जम्मू, 3 फरवरी : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार से तीन दिनों के लिए जम्मू-कश्मीर का दौरा करेंगे। इस दौरान वे सुरक्षा स्थिति की पूरी समीक्षा करेंगे, कई विकास परियोजनाएं शुरू करेंगे और राजनेताओं से बातचीत करेंगे।
अधिकारियों ने यहां बताया, “केंद्रीय गृह मंत्री 5 फरवरी की शाम को जम्मू पहुंचेंगे। वे उसी शाम लोक भवन में नेताओं से मिलेंगे। 6 फरवरी की सुबह, केंद्रीय गृह मंत्री कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा का दौरा करेंगे।”
अंतरराष्ट्रीय सीमा के दौरे के दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री घुसपैठ रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की ओर से लगाए गए उपकरणों का निरीक्षण करेंगे।
अधिकारियों ने बताया, “6 फरवरी की दोपहर को, वह जम्मू में एक हाई-लेवल सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, गृह मंत्रालय, आईबी के वरिष्ठ अधिकारी, सीएपीएफ के प्रमुख, जम्मू-कश्मीर के सिविल प्रशासन, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा समीक्षा बैठक में शामिल होंगे।”
अधिकारी सूत्रों ने बताया कि 7 फरवरी की सुबह वह श्रीनगर के लिए रवाना होंगे, जहां वह कई विकास परियोजनाएं शुरू करेंगे। इसके बाद दोपहर में वह श्रीनगर से छत्तीसगढ़ के लिए रवाना होंगे।
एक महीने से भी कम समय में, अमित शाह दूसरी बार जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा की समीक्षा करेंगे।
बता दें कि 8 जनवरी को उन्होंने नई दिल्ली में जम्मू-कश्मीर पर एक हाई-लेवल सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की थी। सुरक्षा स्थिति की उनकी समीक्षा के बाद, केंद्रीय गृह सचिव, गोविंद मोहन, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के प्रमुख तपन डेका, सीएपीएफ के प्रमुखों और अन्य एजेंसियों ने 14 और 15 जनवरी को जम्मू का दौरा किया था।
आधिकारिक सूत्रों से पता चला है कि गृह मंत्री जम्मू डिवीजन के ऊपरी इलाकों, जिनमें कठुआ, डोडा, किश्तवाड़ और उधमपुर जिले का भी दौरा कर सकते हैं।
8 जनवरी को नई दिल्ली में हुई सुरक्षा समीक्षा बैठक में, गृह मंत्री शाह ने सुरक्षा बलों को भरोसा दिलाया कि ‘आतंकवाद-मुक्त जम्मू और कश्मीर’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्हें सभी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
उन्होंने सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट रहने और तालमेल से काम करते रहने का निर्देश दिया ताकि आर्टिकल 370 हटाने के बाद हासिल की गई उपलब्धियों को बनाए रखा जा सके।
केंद्रीय गृह मंत्री ने जम्मू और कश्मीर में पूरी तरह से शांति लाने के लिए आतंकवादियों, उनके ओवर-ग्राउंड वर्कर्स और हमदर्दों के खिलाफ आक्रामक ऑपरेशन चलाते हुए लाइन ऑफ कंट्रोल और इंटरनेशनल बॉर्डर पर ज़ीरो घुसपैठ सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
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