राष्ट्रीय
अडानी मीडिया इनिशिएटिव्स और डेलीहंट ने बड़े कहानीकारों को खोजने के लिए ‘स्टोरी फॉर ग्लोरी’ प्रतियोगिता शुरू की
भारत का नंबर 1 स्थानीय भाषा कंटेंट प्लेटफॉर्म डेलीहंट और प्रमुख एकीकृत व्यापार समूह अदानी ग्रुप द्वारा समर्थित एक प्लेटफॉर्म अदानी मीडिया इनिशिएटिव्स ने हाल ही में एक राष्ट्रव्यापी प्रतिभा खोज हैशटैग ‘स्टोरी फॉर ग्लोरी’ शुरू करने की घोषणा की। समाचार, मनोरंजन और सूचनात्मक सामग्री के क्षेत्र में भारत के अगले बड़े कहानीकारों को खोजने के उद्देश्य से, चार महीने का लंबा कार्यक्रम 2 मई, 2022 को दो श्रेणियों- वीडियो और लिखित, के तहत आवेदकों के लिए शुरू हुआ – जहां प्रतिभागी 28 मई, 2022 से पहले सामान्य समाचार और करंट अफेयर्स, व्यापार और अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, जीवन शैली, कला और संस्कृति जैसे विषयों पर हिंदी या अंग्रेजी में दो मिनट का लघु वीडियो या 500 शब्दों में लिखित लेख जमा कर सकते हैं। वर्तमान में प्रतियोगिता को दो भाषाओं में शुरू किया गया है और इसके एडिशंस में और भाषाओं को शामिल किया जाएगा।
हैशटैग ‘स्टोरी फॉर ग्लोरी’ को टैलेंट पूल को पहचानने और अंतत: प्रतिभाशाली कंटेंट क्रिएटर पूल और भविष्य के कहानीकारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया है।
जूरी द्वारा वीडियो और लिखित श्रेणियों के बीस कंटेंट स्टोरीटेलर्स आठ सप्ताह की लंबी फेलोशिप में भाग लेने के लिए बोर्ड पर होंगे, जो उनके कौशल निर्माण और उनकी कहानी कहने और कंटेंट को बेहतरीन बनाने के लिए सीखने पर ध्यान केंद्रित करेगा। वे एक प्रमुख मीडिया संस्थान एमआईसीए के साथ दो सप्ताह के सीखने के पाठ्यक्रम और मान्यता प्राप्त मीडिया प्रकाशन फर्मों के साथ छह सप्ताह के लाइव प्रोजेक्ट और मेंटरशिप से गुजरेंगे। ये कहानीकार फिनाले राउंड में प्रतिस्पर्धा करेंगे जहां वे अपनी लाइव परियोजनाओं को पेश करेंगे और कार्यक्रम के दौरान विकसित उनकी कहानी, सामग्री और पत्रकारिता का मूल्यांकन किया जाएगा। शीर्ष 12 कंटेंट कहानीकारों का चयन किया जाएगा और उन्हें नकद पुरस्कार और प्लेसमेंट के अवसरों से सम्मानित किया जाएगा।
वर्स इन्नोवशन के फाउंडर वीरेंद्र गुप्ता ने कहा, “भारत प्रतिभा का एक पावरहाउस है, हमें केवल इसको टैप करने का एक तरीका चाहिए। इंटरनेट और डिजिटलाइजेशन के लिए धन्यवाद, कंटेंट क्रिएट करना अब वास्तव में लोकतांत्रिक हो गया है। कहानी कहने की ²ष्टि और इसे निष्पादित करने की कला वाला कोई भी दर्शकों पर प्रभाव डाल सकता है। अडानी मीडिया इनिशिएटिव्स के साथ साझेदारी में हमारी ‘स्टोरी फॉर ग्लोरी’ पहल के माध्यम से, मुझे लगता है कि हमारे पास ऐसे कई शानदार कलाकारों के लिए दरवाजे खोलने और उन्हें भविष्य के कहानीकार बनने के लिए एक स्प्रिंगबोर्ड प्रदान करने का एक शानदार अवसर है।”
अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी एएमजी मीडिया नेटवर्क्स लिमिटेड के सीईओ और प्रधान संपादक संजय पुगलिया ने कहा, “हैशटैग ‘स्टोरी फॉर ग्लोरी’ पहल के माध्यम से, अदानी मीडिया इनिशिएटिव्स डेलीहंट के साथ साझेदारी करके बेहद खुश हैं, क्योंकि हम भारत के कहानीकारों को उनकी कहानियों को साझा करने के लिए मंच देने का प्रयास करते हैं। प्रौद्योगिकी ने हमारे उपभोग करने और सामग्री बनाने के तरीके को बदल दिया है और अब लोगों को अपनी कहानियों को अपने सच्चे और प्रामाणिक तरीके से बताने के लिए वापस स्थानांतरित कर दिया है। इस पहल के माध्यम से, हम इस प्रवृत्ति का जश्न मनाने और उत्प्रेरित करने का लक्ष्य रखते हैं क्योंकि हम अपने देश के कहानीकारों पर प्रकाश डालने का प्रयास करते हैं और उन्हें अपने कौशल को विकसित करने और भारत को बनाने वाली कहानियों को बताने का अवसर प्रदान करते हैं।”
हैशटैग ‘स्टोरी फॉर ग्लोरी’ प्रतियोगिता किसी के लिए भी आवेदन करने के लिए ओपन है। वर्तमान में वेबसाइट ‘स्टोरी फॉर ग्लोरी डॉट इन’ पर पंजीकरण करके अंग्रेजी और हिंदी दोनों में लिखित और वीडियो श्रेणी में आवेदन कर सकते हैं। आवेदक अपनी थीम या विषय चुन सकते हैं। ऐसी कोई भी सामग्री जिसके मूल में समाचार, समसामयिक मामले, सूचना और ज्ञान हो, उसका स्वागत है।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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