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भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2030 तक 530 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान
भारत वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा बाजार में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। देश की बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा क्षमता से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो रही है। साथ ही, आयातित ईंधन पर निर्भरता कम हो रही है। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की ओर से जारी एक नई रिपोर्ट में दी गई।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट में जारी ‘इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग चार गुना बढ़ गई है और 2026 में यह 300 गीगावाट के आंकड़े को पार कर गई है।
भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाजार और सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) मॉड्यूल का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माता बन गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने 2025 में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हासिल करने का लक्ष्य पूरा कर लिया, जो निर्धारित समय से पांच साल पहले है। यह देश में स्वच्छ ऊर्जा बदलाव की तेज रफ्तार को दर्शाता है।
आईईए के अनुसार, नवीकरणीय बिजली के तेजी से विस्तार से पहले ही अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को बड़े फायदा हुआ है। नवीकरणीय ऊर्जा से बिजली उत्पादन के कारण भारत को 2011 से 2025 के बीच कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर होने वाले खर्च में 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत हुई। दशक के अंत तक यह कुल बचत दोगुने से भी अधिक होने की उम्मीद है।
एजेंसी ने अनुमान जताया कि 2010 के बाद से जोड़ी गई सौर, पवन और जैव ऊर्जा क्षमता नहीं होती, तो 2025 में भारत का कोयला आयात लगभग 11 करोड़ टन अधिक होता।
आगे की संभावनाओं पर रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 530 गीगावाट तक पहुंच जाएगी। इसमें सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) ऊर्जा की हिस्सेदारी सभी नई स्थापित होने वाली क्षमताओं में 80 प्रतिशत से अधिक रहने की उम्मीद है।
विकास की यह रफ्तार भारत को गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता से जुड़े अपने व्यापक लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ाती रहेगी।
आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बड़े लाभ दे रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत का अनुभव दर्शाता है कि स्थिर और निरंतर नीतिगत उपाय नवीकरणीय ऊर्जा की लागत कम करने, निवेश आकर्षित करने और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण सबक देने में मदद कर सकते हैं।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि एक प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा शक्ति के रूप में भारत का उभरना हाल के वर्षों में हुई प्रगति को दर्शाता है।
व्यापार
कमजोर वैश्विक संकेतों से बाजार की फ्लैट शुरुआत, सेंसेक्स में 358 अंकों की बढ़त; आईटी शेयरों ने दिखाया दम

पिछले दिनों की लगातार शानदार तेजी के बाद, अमेरिकी और एशियाई बाजारों में आई तेज गिरावट के चलते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ खुला।
बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 79,310.01 से 103.65 अंक यानी 0.13 प्रतिशत चढ़कर 79,413.66 पर खुला। हालांकि कुछ ही समय बाद इसमें और गिरावट दर्ज की गई और यह 293.95 अंक यानी 0.37 प्रतिशत गिरकर 79,016.05 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि बाद के कारोबार में बाजार ने फिर से रिकवरी की और यह 358.36 अंकों यानी 0.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 79,668.37 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद भाव 24,536.60 की तुलना में 24,538.20 पर फ्लैट खुला और कुछ ही देर में इसमें और गिरावट दर्ज की गई और यह 148.55 अंक या 0.60 प्रतिशत गिरकर 24,388.05 के दिन के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया। हालांकि बाद के कारोबार में इसने भी रिकवरी की और 108.55 अंक या 0.44 प्रतिशत चढ़कर 24,645.15 के दिन के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया।
इस बीच, व्यापक बाजारों में कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.89 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टोरल आधार पर सबसे ज्यादा दबाव मेटल शेयरों पर देखने को मिला, और निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.7 प्रतिशत गिर गया। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी में 1.56 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। केमिकल, ऑयल एंड गैस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में भी 1.34 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।
इसके विपरीत आईटी सेक्टर ने बाजार की धारणा को कुछ हद तक संभाला। निफ्टी आईटी करीब 2 प्रतिशत चढ़ गया। निफ्टी ऑटो, निफ्टी फार्मा, मिडस्मॉल आईटी एवं टेलीकॉम, प्राइवेट बैंक और मीडिया शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी बाजारों में आई भारी गिरावट का असर दुनिया के अधिकांश शेयर बाजारों पर दिखाई दे सकता है, लेकिन भारत पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है। उनका कहना है कि नैस्डैक में 5.6 प्रतिशत की तेज गिरावट डेटा सेंटर निवेश में संभावित मंदी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कारोबार की विकास दर को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण आई।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक तकनीकी शेयरों में आई गिरावट और एआई आधारित निवेश थीम की रफ्तार कम होने का भारतीय बाजार को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है, क्योंकि इससे विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी अन्य उभरते बाजारों की ओर बढ़ सकती है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक बना हुआ है। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में एफआईआई ने 35,781 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं। गुरुवार को उन्होंने लगातार पांचवें सत्र में 14,974 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार बिकवाली कर रहे हैं और गुरुवार को उन्होंने 10,444 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में जारी हालिया तेजी को मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों का समर्थन मिला है। खासकर लार्जकैप शेयरों में आकर्षक मूल्यांकन के कारण निवेशकों की खरीदारी बढ़ी है, जिससे बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है।
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 100.31 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 1 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 91.91 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया।
विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में वैश्विक बाजारों की अस्थिरता, कच्चे तेल की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक और एफआईआई की खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक कारक बने हुए हैं।
व्यापार
धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने वालों की मौज, गोल्ड-सिल्वर के दाम 4,500 रुपए तक गिरे

धनतेरस के मौके पर सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर है। आज के दिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। पिछले कुछ दिनों से सोने-चांदी में तेज उतार-चढ़ाव बना हुआ था, लेकिन हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को कीमतों में आई नरमी से खरीदारों को अपेक्षाकृत सस्ते भाव पर खरीदारी का मौका मिला है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव 1,44,095 रुपए से शुक्रवार को 1,934 रुपए यानी 1.34 प्रतिशत टूटकर 1,42,161 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं दिन के कारोबार में यह 2,651 रुपए यानी 1.83 प्रतिशत तक गिर गया।
वहीं चांदी की कीमतों में कमजोरी और ज्यादा रही। शुरुआती कारोबार में दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद भाव 1,87,140 रुपए से 4,555 रुपए यानी 2.43 प्रतिशत फिसलकर 1,82,585 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गई। जबकि यह आज 1,641 रुपए यानी 0.87 प्रतिशत गिरकर 1,85,499 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुली।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में भी गुरुवार की तेजी के बाद शुक्रवार को मुनाफावसूली देखने को मिली। सोने का भाव 1.51 प्रतिशत गिरकर 4,051.40 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि चांदी 2.13 प्रतिशत टूटकर 51.260 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की नजर अब अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल डेटा और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति से जुड़े संकेतों पर बनी हुई है, जिसके कारण निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि कॉमेक्स गोल्ड के लिए 4,070 से 4,100 डॉलर प्रति औंस का स्तर अब महत्वपूर्ण प्रतिरोध बन गया है, जबकि नीचे की ओर 4,000 डॉलर का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है।
वहीं, एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1.43 लाख से 1.437 लाख रुपए का दायरा प्रमुख प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) है, जबकि 1.40 लाख रुपए का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो कीमतों में और कमजोरी देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में भी हालिया तेजी के बाद दबाव लौटता दिख रहा है। तकनीकी संकेतकों के मुताबिक, एमसीएक्स सिल्वर के लिए 1.86 लाख से 1.88 लाख रुपए का स्तर प्रतिरोध बना हुआ है, जबकि 1.78 लाख से 1.80 लाख रुपए का क्षेत्र प्रमुख सपोर्ट माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक संकेतक चांदी को आगे भी समर्थन दे सकते हैं।
बाजार जानकारों के अनुसार, धनतेरस पर आई यह गिरावट उन ग्राहकों के लिए अच्छा अवसर हो सकती है जो सोना-चांदी की खरीदारी करना चाहते हैं। हालांकि निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को केवल त्योहार की भावना के आधार पर नहीं, बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।
व्यापार
एलआईसी का मुनाफा दूसरी तिमाही में करीब 20 बढ़ा, नेट प्रीमियम आय 1.47 लाख करोड़ रुपए के पार

देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एसआईसी) ने गुरुवार को वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए। इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड कर के बाद (पीएटी) मुनाफा सालाना आधार पर 19.96 प्रतिशत बढ़कर 12,114.78 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि में 10,098.48 करोड़ रुपए था।
एलआईसी की एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में उसकी नेट प्रीमियम आय सालाना आधार पर 16.15 प्रतिशत बढ़कर 1,47,433.15 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,26,930.04 करोड़ रुपए थी।
बीमा कंपनी की पहले साल के प्रीमियम से आय सालाना कम होकर 10,483.85 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में 10,884.48 करोड़ रुपए थी।
हालांकि, रिन्यूएल प्रीमियम से आय सालाना आधार पर बढ़कर 68,717.96 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 65,320.48 करोड़ रुपए थी। वहीं, सिंगल प्रीमियम आय पिछले वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही के 50,882.30 करोड़ रुपए से बढ़कर 68,425.31 करोड़ रुपए हो गई है।
एलआईसी की वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में निवेश से शुद्ध आय सालाना आधार पर 2.22 प्रतिशत बढ़कर 1,15,033.85 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 1,12,528.25 करोड़ रुपए थी।
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में एलआईसी ने कमीशन पर कुल 6,089.30 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, जो कि वित्त वर्ष 26 दूसरी तिमाही में 5,807.35 करोड़ रुपए था।
नतीजे आने से पहले कारोबारी सत्र में एलआईसी का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर 408 रुपए पर सपाट बंद हुआ।
एलआईसी ने बीते एक महीने में 4.97 प्रतिशत और बीते छह महीने में 2.09 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। हालांकि, बीते एक साल में एलआईसी ने 8.94 प्रतिशत का नकारात्मक रिटर्न दिया है।
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