Connect with us
Friday,23-October-2026
ताज़ा खबर

व्यापार

डेटा लीक पर एसबीआई ने जारी किया बयान, “ग्राहक का फंड पूरी तरह सुरक्षित”

Published

on

देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने शुक्रवार को साइबर हमले में डार्क वेब पर 3,897 ग्राहकों के डेटा लीक पर बयान जारी कर कहा है कि इसमें ग्राहकों के खातों में जमा राशि (फंड) में कोई नुकसान नहीं हुआ है।

एसबीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक बयान में कहा, “हाल ही में हुई साइबर घटना के संबंध में हमारी पिछली पोस्ट के बाद, बैंक ने उन सभी ग्राहकों को ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए अलग से सूचित कर दिया है, जिनका डेटा इस घटना से प्रभावित हुआ है।”

साथ ही कहा, “हम फिर से स्पष्ट करते हैं कि आपके खाते की शेष राशि और फंड हमारे पास सुरक्षित हैं।”

बैंक ने ग्राहकों को सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग तौर-तरीके अपनाने, अपना ओटीपी, पिन या पासवर्ड कभी किसी के साथ साझा न करने और संदिग्ध कॉल, मैसेज व ईमेल को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है, जब इस हफ्ते की शुरुआत में भारत के सबसे बड़े बैंक ने स्पष्ट किया कि उसके यहां डेटा लीक हुआ है, जिसमें 3,897 ग्राहकों का डेटा डार्क वेब पर पब्लिश हो गया है।

हफ्ते की शुरुआत में, बैंक ने बताया कि उसे अपने ‘थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर’, ‘डिफेंस साइबर एजेंसी’ और ‘सीईआरटी-इन’ से ग्राहकों के डेटा के संभावित रूप से लीक होने के संबंध में एक अलर्ट मिला है।

बैंक ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि डार्क वेब पर मौजूद लगभग 3,75,000 रिकॉर्ड्स के शुरुआती विश्लेषण के दौरान, 3,897 ऐसे ग्राहक रिकॉर्ड मिले हैं जिनमें उनकी निजी पहचान से जुड़ी जानकारी शामिल है।

बैंक के अनुसार, लीक हुई जानकारी में ग्राहकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, जन्म तिथि, नाम, लिंग, ईमेल पते, घर के पते, ब्रांच और सीआईएफ आइडेंटिफायर, लीड आईडी और लोन या लीड रिकॉर्ड से जुड़े मेटाडेटा तथा अन्य संबंधित फाइलें शामिल हैं।

सरकारी बैंक ने बताया कि उसने तुरंत अपने ‘साइबर इंसिडेंट रिस्पॉन्स’ और ‘कंटेनमेंट प्रोटोकॉल’ को सक्रिय कर दिया है। साथ ही, मामले की व्यापक जांच करने और डेटा लीक की प्रकृति एवं इसके दायरे का पता लगाने के लिए सीईआरटी-इन द्वारा मान्यता प्राप्त एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया है।

बैंक ने कहा कि लीक हुए डेटा की सत्यता और पूर्णता की पुष्टि करने, इसके संभावित स्रोत और दायरे का पता लगाने, एवं इससे जुड़े जोखिमों का आकलन करने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है।

व्यापार

अफगानिस्तान सीमा बंद होने से पाकिस्तान के दवा निर्यात में 30 फीसदी से ज्यादा की गिरावट

Published

on

अफगानिस्तान के साथ व्यापार बाधित होने के कारण पाकिस्तान के दवा निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान का फार्मास्युटिकल निर्यात 30.26 प्रतिशत घट गया, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में इसके मूल्य में 25.53 प्रतिशत की और गिरावट आई। पाकिस्तान के मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, उद्योग जगत ने इस गिरावट के लिए अफगानिस्तान के साथ व्यापार बंद होने को प्रमुख कारण बताया है।

पाकिस्तान के समाचार पत्र ‘द न्यूज’ की गुरुवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के दवा उद्योग के सबसे बड़े बाजारों में शामिल रहा है। सीमा बंद होने और व्यापारिक गतिविधियां बाधित होने से इस उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (पीबीएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान का फार्मास्युटिकल निर्यात घटकर 31.90 करोड़ डॉलर रह गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 45.74 करोड़ डॉलर था। इस तरह निर्यात के मूल्य में 13.84 करोड़ डॉलर की कमी आई।

निर्यात की मात्रा में भी गिरावट दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान ने 1,12,517 मीट्रिक टन फार्मास्युटिकल उत्पादों का निर्यात किया था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 83,104 मीट्रिक टन रह गया। इस दौरान निर्यात की मात्रा में 26.14 प्रतिशत यानी 29,413 मीट्रिक टन की कमी आई।

गिरावट का सिलसिला चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी जारी रहा। जुलाई से सितंबर 2026 के बीच पाकिस्तान का दवा निर्यात घटकर 7.33 करोड़ डॉलर रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह 9.84 करोड़ डॉलर था। इस तरह निर्यात आय में 2.51 करोड़ डॉलर यानी 25.53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि इन आंकड़ों में सर्जिकल उत्पादों और चिकित्सा उपकरणों का निर्यात शामिल नहीं है।

अन्य मीडिया रिपोर्टों में भी अफगानिस्तान को पाकिस्तान के दवा उद्योग के प्रमुख निर्यात बाजार के रूप में रेखांकित किया गया है। ‘बिजनेस रिपोर्टर’ के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को 15.568 करोड़ डॉलर मूल्य की दवाओं का निर्यात किया था। यह उस वर्ष पाकिस्तान के कुल 45.7456 करोड़ डॉलर के फार्मास्युटिकल निर्यात का लगभग 34.1 प्रतिशत था।

पाकिस्तान फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (पीपीएमए) के पूर्व अध्यक्ष तौकीर उल हक ने ‘द न्यूज’ से बातचीत में कहा कि अफगानिस्तान के साथ व्यापार निलंबित होने से पाकिस्तान के दवा उद्योग और राष्ट्रीय राजकोष को बड़ा नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि इसका असर अफगानिस्तान के मरीजों पर भी पड़ रहा है, जिन्हें अब अपेक्षाकृत महंगी दवाओं की ओर रुख करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पीपीएमए ने इस मुद्दे को पाकिस्तान सरकार के समक्ष उठाया है। संघीय योजना मंत्री अहसान इकबाल ने संबंधित अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाने और पाकिस्तान से अफगानिस्तान को दवाओं का निर्यात दोबारा शुरू करने के रास्ते तलाशने का आश्वासन दिया था। हालांकि, तौकीर उल हक ने इस मामले में आगे की कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रही है। दोनों देशों के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा डूरंड रेखा है, जिसे ब्रिटिश शासन के दौरान तत्कालीन भारत और अफगानिस्तान के बीच सीमा निर्धारित करने के लिए खींचा गया था।

अगस्त 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंध और तनावपूर्ण हो गए। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल सीमा पार हमलों को अंजाम देने वाले आतंकवादी समूहों, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और इस्लामिक स्टेट-खुरासान (आईएसआईएस-के), द्वारा किया जा रहा है। वहीं, अफगानिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है और पाकिस्तान पर अपनी आंतरिक समस्याओं के लिए उसे जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाता है।

रिपोर्टों के अनुसार, सीमा पार हिंसा के बाद अक्टूबर 2025 से पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा बंद है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार प्रभावित हुआ है। वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी, चिकित्सा उपचार के लिए सीमा पार यात्रा में बाधा और स्थानीय लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर जैसे परिणाम सामने आए हैं। इसके अलावा, सीमा बंद होने से राजनयिक संबंधों में तनाव बढ़ा है और कारोबारियों को वैकल्पिक क्षेत्रीय व्यापार मार्ग तलाशने पड़ रहे हैं।

काबुल से आई रिपोर्टों के मुताबिक, अफगानिस्तान की दवा आपूर्ति व्यवस्था लंबे समय तक पाकिस्तान पर काफी हद तक निर्भर रही। दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव और सीमा बंद होने की घटनाओं ने इस निर्भरता से जुड़े जोखिमों को उजागर किया है। अब अफगानिस्तान दवाओं की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक साझेदारों की ओर रुख कर रहा है। इससे एक ओर पाकिस्तान के दवा उद्योग के लिए मुश्किलें बढ़ी हैं, वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान अपनी चिकित्सा आपूर्ति व्यवस्था में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है।

Continue Reading

व्यापार

अदाणी टोटल गैस ने लागत बढ़ने के चलते सीएनजी की कीमतों में किया इजाफा

Published

on

अदाणी टोटल गैस लिमिटेड (एटीजीएल) ने शुक्रवार को अहमदाबाद में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमत में 4.45 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी की। कंपनी ने इसकी वजह वैश्विक स्तर पर गैस की ऊंची कीमतों, घरेलू गैस की उपलब्धता में कमी और आपूर्ति में लगातार कटौती के कारण प्राकृतिक गैस की खरीद लागत में तेज वृद्धि को बताया।

संशोधन के बाद शहर में सीएनजी की खुदरा कीमत बढ़कर 98.47 रुपए प्रति किलो हो गई है। इससे पहले कंपनी ने अगस्त 2026 में भी सीएनजी की कीमत में 4 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद कीमत 94.20 रुपए प्रति किलो हो गई थी।

ताजा बढ़ोतरी के बारे में बताते हुए कंपनी ने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रम, घरेलू गैस की कम उपलब्धता और आपूर्ति में जारी बाधाओं के बीच प्राकृतिक गैस की खरीद लागत में भारी वृद्धि के कारण कीमतों में संशोधन आवश्यक था।

एटीजीएल के प्रवक्ता ने कहा, “भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच वैश्विक स्तर पर गैस की ऊंची कीमतों, घरेलू गैस की कम उपलब्धता और आपूर्ति में लगातार कटौती के कारण प्राकृतिक गैस की खरीद लागत में काफी वृद्धि हुई है। इसी वजह से सीएनजी की कीमतों में संशोधन करना जरूरी हो गया। एटीजीएल उपभोक्ताओं पर इसके प्रभाव को सीमित रखने के साथ-साथ सीएनजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने पर लगातार ध्यान दे रही है। सीएनजी अब भी एक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन विकल्प है।”

कंपनी ने बताया कि न्यू वेल गैस (एनडब्ल्यूजी) और हाई प्रेशर हाई टेम्परेचर (एचपीएचटी) गैस की उपलब्धता घटने के साथ-साथ हाजिर बाजार में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की कीमतें बढ़ने से सीएनजी क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली गैस की भारित औसत लागत में काफी वृद्धि हुई है।

एटीजीएल के अनुसार, वैश्विक हाजिर एलएनजी की कीमतें फरवरी 2026 में लगभग 10-12 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से बढ़कर फिलहाल करीब 30 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू हो गई हैं। इससे आयातित गैस की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है।

कंपनी ने यह भी कहा कि गैस के अपस्ट्रीम उत्पादकों की ओर से आपूर्ति में लगातार कटौती की जा रही है। इसके चलते उसे गैस की जरूरत पूरी करने के लिए वैकल्पिक और अधिक महंगे स्रोतों से गैस खरीदनी पड़ रही है।

एटीजीएल ने कहा कि एनडब्ल्यूजी के आवंटन में हालिया कमी के कारण सीएनजी की बिक्री के लिए प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध घरेलू गैस की मात्रा घट गई है। इसके अलावा, 19 अक्टूबर 2026 को जारी एक कार्यालय ज्ञापन के जरिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में खपत के लिए उपलब्ध एचपीएचटी गैस की मात्रा भी कम कर दी गई है। इससे घरेलू गैस की आपूर्ति पर दबाव और बढ़ गया है।

Continue Reading

व्यापार

वैश्विक दबाव के चलते सोना-चांदी धड़ाम; सिल्वर में 6,799 रुपए की गिरावट, कीमत 2 लाख के नीचे फिसली

Published

on

पिछले कुछ समय से कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है। पिछले दिन की गिरावट के बाद हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में एक बार फिर सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली।

वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका ने निवेशकों का रुख प्रभावित किया है, जिसका असर सोने और चांदी दोनों पर पड़ा, जिसके चलते घरेलू बाजार में चांदी का भाव एक बार फिर 2 लाख प्रति किलोग्राम के नीचे पहुंच गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव 1,43,309 रुपए से 1,251 रुपए यानी 0.87 प्रतिशत फिसलकर 1,42,058 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं दिन के कारोबार में एक समय यह 1,503 रुपए यानी 1.04 प्रतिशत गिरकर 1,41,806 रुपए प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गया।

कारोबार के दौरान इसमें कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन खबर लिखे जाने तक सोना 629 रुपए या 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,680 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।

वहीं, चांदी में गिरावट और भी अधिक रही। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद भाव 1,99,599 रुपए से 3,012 रुपए यानी 1.50 प्रतिशत लुढ़ककर 1,96,587 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुली।

जबकि दिन के कारोबार में एक समय इसमें 6,799 रुपए यानी 3.40 प्रतिशत की भारी दर्ज की गई और यह 1,92,800 रुपए प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गई, और इस तरह यह 2 लाख रुपए से नीचे लुढ़क गई है।

हालांकि कारोबार के दौरान इसमें भी कुछ सुधार देखने को मिली और यह 1.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,96,276 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर ट्रेड करती नजर आई।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंची ऊर्जा कीमतें महंगाई संबंधी चिंताओं को बढ़ा रही हैं। यदि महंगाई ऊंची बनी रहती है तो प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकते हैं। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सोने और चांदी में सावधानी बरत रहे हैं। इस बीच, वैश्विक बाजार में सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गई है, जिससे बाजार में कमजोरी का माहौल बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में भी सोना और चांदी दोनों कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखे। सोना करीब 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,034 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता नजर आया, वहीं चांदी 1.30 प्रतिशत की गिरावट के साथ 54.29 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी। निवेशकों का ध्यान अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान और केंद्रीय बैंकों की अगली नीतियों पर है।

विश्लेषकों का कहना है कि ऊंची बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के कमजोर पड़ने से सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी आगे चलकर कुछ समर्थन दे सकती है।

गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में सोने ने एमसीएक्स पर 1,80,779 रुपए प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। वहीं चांदी 4,20,048 रुपए प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक उच्च स्तर तक पहुंच गई थी। मौजूदा कीमतों को देखें तो सोना अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुका है, जबकि चांदी रिकॉर्ड स्तर से करीब आधी कीमत पर कारोबार कर रही है।

बाजार जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, चीन की अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतों, वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी।

Continue Reading
Advertisement
राष्ट्रीय समाचार2 hours ago

राष्ट्रपति ने केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम की शक्तियां सौंपीं

मनोरंजन2 hours ago

रीमा लांबा से मल्लिका शेरावत बनने की कहानी, पिता बोले-नाम खराब करेगी तो उनका छोड़ मां के सरनेम अपनाकर बनाई पहचान

अपराध3 hours ago

गुजरात राजमार्ग पर कार-ट्रक की टक्कर में दो की मौत, चार घायल

राजनीति3 hours ago

सोनिया गांधी मेरी आदर्श नेता, उनकी बराबरी कोई नहीं कर सकता: संध्या सवलखे

राजनीति3 hours ago

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर वामपंथी दलों और छात्र समूहों का चुनाव आयोग तक मार्च

राष्ट्रीय समाचार4 hours ago

विश्व विकास सूचना दिवस की ऐसे हुई थी शुरुआत, 1972 में संयुक्त राष्ट्र ने दिया था प्रस्ताव

खेल4 hours ago

न्यूजीलैंड के क्रिकेट फैंस के बीच रोहित और विराट को देखने का आकर्षण है: जेम्स पैमेंट

खेल5 hours ago

‘लगातार सही लेंथ पर गेंदबाजी करने वालों को वनडे सीरीज में मिलेगी सफलता’: जेम्स पैमेंट

खेल5 hours ago

एशियन पैरा गेम्स: नितेश, थुलसिमथी ने बैडमिंटन मिक्स्ड डबल्स में सिल्वर जीता

व्यापार5 hours ago

डेटा लीक पर एसबीआई ने जारी किया बयान, “ग्राहक का फंड पूरी तरह सुरक्षित”

अपराध2 weeks ago

दिल्ली पुलिस ने मकोका के दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया, 30 लाख रुपए बरामद

बॉलीवुड3 weeks ago

टीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी सुसाइड केस में 10 साल बाद कोर्ट ने बॉयफ्रेंड पर सुनाया फैसला

राजनीति2 weeks ago

“आप” का आरोप: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली छावनी में तब्दील

राष्ट्रीय समाचार2 weeks ago

दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों से विरोध-प्रदर्शन के कारण यात्रा की योजना पहले से बनाने की दी सलाह

खेल3 weeks ago

‘आपकी जीत बेहतरीन प्रदर्शन, दृढ़ संकल्प और टीम वर्क की भावना का सबूत,’ गोल्ड जीतने पर राष्ट्रपति मुर्मु ने टीम इंडिया को सराहा

राजनीति4 weeks ago

अखिलेश यादव का चुनावी ऐलान : सत्ता में आए तो पुरानी पेंशन बहाल, शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने का वादा

व्यापार3 weeks ago

गांधी जयंती के चलते भारतीय शेयर बाजार बंद, एनएसई और बीएसई पर नहीं होगा कारोबार

मनोरंजन3 weeks ago

‘तुम झूठे हो गौतम गुलाटी’, प्रियंका चाहर चौधरी से भिड़े गौतम, ‘राइज एंड फॉल 2’ में छिड़ी तीखी जंग

मनोरंजन4 weeks ago

बर्थडे बॉय रणबीर कपूर पर बॉलीवुड ने बरसाया प्यार, मां नीतू और रवि दुबे ने भी दी बधाई

मनोरंजन2 weeks ago

कनिका-लव की लड़ाई में कूदी आम्रपाली, गुल्लू से हुई बहस

रुझान