राष्ट्रीय समाचार
लोकतंत्र में सरकार बदलना प्रक्रिया का हिस्सा : पी चिदंबरम
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने शनिवार को ‘सरकार बदलना’ शब्द के इस्तेमाल का बचाव करते हुए इसे एक “सामान्य” लोकतांत्रिक प्रकिया बताया और कहा कि “चुनावों के जरिए सरकार को हटाना” विपक्ष का काम है।
यह तब हुआ जब विपक्षी नेताओं और छात्र कार्यकर्ता ने ‘वोट चोरी’ को लेकर इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ईसीआई) और चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन के बीच ‘सरकार बदलना’ शब्द का इस्तेमाल किया।
सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि प्रोटेस्ट अब “सरकार बदलने की लड़ाई” में बदल गया है और इसे नागरिकों का “लोकतांत्रिक अधिकार” बताया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के जेन जी मूवमेंट की भी तारीफ की थी, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि यह भारत में युवाओं के लिए “प्रेरणा” का काम करता है, जिससे भाजपा को गुस्सा आया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भाजपा ‘रिजीम चेंज’ शब्द के इस्तेमाल पर दिखावटी गुस्से से क्यों भड़क रही है? लोकतंत्र में ‘रिजीम चेंज’ नॉर्मल है।”
उन्होंने कहा, “विपक्ष का काम सरकार का ‘विरोध करना, उसे बेनकाब करना और उसे हटाना’ है। इसका मतलब है राजनीति में विरोध करना, संसद में बेनकाब करना और चुनावों के जरिए उसे हटाना है।”
भाजपा ने इन बातों को इस बात का सबूत बताया है कि विरोध उनकी बताई गई मांगों से कहीं ज्यादा है और आरोप लगाया है कि भारत की इकॉनमी को “अस्थिर” करने के मकसद से एक बड़ा विवाद है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को कहा था, “कांग्रेस, इंडी और कम होते पब्लिक सपोर्ट का सामना कर रही लेफ्ट पार्टियों को राजनीतिक सफलता की बहुत कम उम्मीद दिख रही है। नतीजतन, ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्द, जिनका मतलब हिंसक संघर्ष, साज़िश, या विदेशी ताकतों के साथ मिलकर सरकारों को गिराने की कोशिशों से है, भारतीय राजनीति में तेजी से सामने आ रहे हैं।” हालांकि, प्रदर्शन करने वालों और विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और वोटर लिस्ट में बदलाव में कथित गड़बड़ियों की आलोचना जारी रखी है।
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने कहा था कि सत्ताधारी भाजपा सत्ता पर अपनी पकड़ खोने से डरी हुई है और इसलिए ‘शासन बदलने’ की मांग को “देश-विरोधी और अराजक” बताकर एक खास तरह की कहानी को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस शासन को बदलने के लिए गंभीर है और इसे वाकई बदला जाएगा।
राष्ट्रीय समाचार
भारत की आर्थिक प्रगति जश्न मनाने लायक, अगले वर्षों में भी मजबूत विकास की संभावनाएं : शीर्ष अर्थशास्त्री

शीर्ष अर्थशास्त्री क्युंघून किम ने रविवार को कहा कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक प्रगति सराहना की हकदार है। उन्होंने कहा कि देश की लगातार मजबूत आर्थिक वृद्धि और बेहतर होती आर्थिक स्थिति भविष्य के लिए आशावाद के पर्याप्त कारण प्रदान करती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में किम ने कहा कि भारत के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद आर्थिक रूप से तेजी से आगे बढ़ने की देश की क्षमता और मध्यम अवधि की विकास संभावनाएं बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
उन्होंने कहा, “मेरा निष्कर्ष वही है। भारत के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन विशेष रूप से पिछले दशक में उसकी आर्थिक प्रगति और मध्यम अवधि में सकारात्मक विकास संभावनाएं जश्न मनाने योग्य हैं। 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए यह प्रगति बेहद महत्वपूर्ण है।”
किम की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उन्होंने एक दिन पहले ही भारत की मजबूत विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और विश्व बैंक जैसे लगभग सभी प्रमुख वैश्विक संस्थानों ने चालू वर्ष और अगले वर्ष के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 7 प्रतिशत से अधिक कर दिया है।
अर्थशास्त्री के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने असाधारण मजबूती का प्रदर्शन किया है। महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी, लेकिन इसके बाद 2021 में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई और अगले चार वर्षों तक विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर बनी रही।
किम ने कहा कि उनके सहित कई अर्थशास्त्रियों को लगातार अपनी विकास दर संबंधी भविष्यवाणियों में ऊपर की ओर संशोधन करना पड़ा, क्योंकि प्रत्येक तिमाही के जीडीपी आंकड़े उम्मीदों से बेहतर रहे।
उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप भारत ने लगातार पांच वर्षों तक 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर दर्ज की है। यह प्रदर्शन 2003 से 2007 के उस दौर के बराबर है, जब भारत पहली बार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ था।
किम ने यह भी कहा कि वर्ष 2021 से 2025 के दौरान 7.83 प्रतिशत की औसत वार्षिक विकास दर 1960 के बाद किसी भी पांच वर्षीय अवधि की दूसरी सबसे ऊंची औसत वृद्धि दर है। इससे अधिक केवल 2003 से 2007 के दौरान 7.89 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर रही थी।
भारत की अर्थव्यवस्था के बढ़ते आकार का उल्लेख करते हुए किम ने कहा कि आज का भारत दो दशक पहले की तुलना में बिल्कुल अलग आर्थिक स्तर पर खड़ा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 1 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक था, जबकि अब यह 4 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रही है। ऐसे में समान विकास दर का अर्थ अब कहीं अधिक बड़े पैमाने पर आर्थिक विस्तार और मूल्य सृजन से है।
राष्ट्रीय समाचार
सीईसी को कोई नहीं बचा सकता, चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम को दुरुस्त करने की जरूरत: जयराम रमेश

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने रविवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पर राजनीतिक दलों को आठ साल तक खोजने योग्य (सर्च करने लायक) मतदाता सूची न देकर ‘वोट चोरी’ में मदद करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) को तुरंत रोकने की भी मांग की।
जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में कहा, “पिछले दो वर्षों से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार और दृढ़ता से यह मांग कर रहे हैं कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) सभी राजनीतिक दलों को खोजने योग्य (सर्च करने योग्य) प्रारूप में मतदाता सूची उपलब्ध कराए। ईसीआई ने बार-बार इस मांग को ठुकरा दिया और 2018 में सर्च करने योग्य मतदाता सूची देना बंद कर दिया था, जब कांग्रेस को मध्य प्रदेश में लाखों फर्जी मतदाता मिले थे। ‘वोट चोरी’ को संभव बनाने के लिए 8 वर्षों तक इस मांग को खारिज किया गया।”
कांग्रेस नेता ने कहा, “15 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने एक आदेश जारी किया कि 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दो साल के अंतराल के बाद फिर से शुरू हुए ‘विशेष सारांश पुनरीक्षण’ (एसएसआर) के लिए राजनीतिक दलों को सर्च करने योग्य प्रारूप में मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाएगी। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि पूरा देश ‘वोट चोरों’ के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है।”
जयराम रमेश ने आरोप लगाया, “हर बार जब ‘वोट चोरी’ पकड़ी जाती है, तो केंद्र सरकार कोई नया हथकंडा अपनाती है, जैसे कि सर्च करने योग्य मतदाता सूची को रोकना, फर्जी मतदाताओं को जोड़ना या एसआईआर का इस्तेमाल करना लेकिन इस बार ऐसा नहीं चलेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को कोई नहीं बचा सकता, जिन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों पर काम करते हुए चुनाव आयोग में जनता के भरोसे और विश्वास को खत्म कर दिया है। उन्हें पद से हटना ही होगा। हालांकि सिर्फ इतना ही काफी नहीं होगा। भारतीय चुनाव आयोग और उसके आईटी सिस्टम में पूरी तरह से बदलाव (ओवरहॉल) करने की जरूरत है। एसआईआर की वजह से 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के संवैधानिक मताधिकार को खतरे में डाल दिया है, इसे तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए।
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सिरसा थाना ग्रेनेड हमला मामला: एनआईए ने 4 और आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया आरोप-पत्र

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने हरियाणा के पंचकूला स्थित विशेष अदालत में 4 आरोपियों के खिलाफ एक पूरक आरोप-पत्र दाखिल किया है। एजेंसी ने रविवार को बताया कि आरोप-पत्र में साजिश और इन 4 आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं का विवरण दिया गया है।
एजेंसी ने बताया कि यह मामला 25 नवंबर 2025 को हरियाणा के सिरसा में महिला पुलिस स्टेशन के पास हुए ग्रेनेड हमले से जुड़ा है। इसमें पंचकूला स्थित विशेष एनआईए अदालत में शनिवार को आरोपी राजबीर सिंह उर्फ फौजी, वेद प्रकाश उर्फ पम्मा, जीवनजोत सिंह ग्रेवाल उर्फ ज्योति और चिराग ठकराल के खिलाफ पूरक आरोप-पत्र दाखिल किया गया।
एनआईए के अनुसार, यह मामला मूल रूप से 26 नवंबर 2025 को हरियाणा के सिरसा स्थित सिविल लाइन पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। बाद में, 30 दिसंबर 2025 को एनआईए ने इसे फिर से दर्ज किया।
मामले में इसी साल 24 मई को एनआईए ने पंचकूला की विशेष अदालत में 9 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जिनमें पाकिस्तानी नागरिक शहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच भी शामिल थे।
एजेंसी ने कहा कि पूरक आरोप-पत्र में इस साजिश और इन 4 आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं का विवरण दिया गया है। साथ ही, आगे की जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों को भी इसमें शामिल किया गया है। इन लोगों पर भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 61(2) (धारा 109 के साथ पठित) और 238, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम-1908 की धारा 5 और 6, तथा यूए(पी) अधिनियम-1967 की धारा 18, 18बी और 20 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
एजेंसी के अनुसार, जांच से पता चला है कि आरोपी राजबीर सिंह उर्फ फौजी कोऑर्डिनेटर के रूप में काम कर रहा था। वह भारत में हथियारों, हैंड ग्रेनेड और नशीले पदार्थों को इकट्ठा करने और उनकी आवाजाही के लिए विदेशों में बैठे हैंडलरों के साथ मिलकर काम करता था। आरोपी चिराग ठकराल, जीवनजोत सिंह ग्रेवाल उर्फ ज्योति और वेद प्रकाश उर्फ पम्मा ने आरोपी राजबीर सिंह उर्फ फौजी के निर्देशों पर काम करते हुए सिरसा के महिला पुलिस स्टेशन पर हुए ग्रेनेड हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों को पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
यह हमला शहजाद भट्टी नेटवर्क के सदस्यों की ओर से एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया था। इसका मकसद पुलिसकर्मियों को नुकसान पहुंचाना और आम जनता के बीच दहशत और डर पैदा करना था। एनआईए की जांच में इस साजिश के तार विदेशों में बैठे उन हैंडलरों से जुड़े पाए गए हैं, जो सीमा पार से आतंकी नेटवर्क चला रहे हैं।
एजेंसी ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच जारी है, ताकि साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जा सके और इस हमले के पीछे के पूरे सीमा पार आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
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