राष्ट्रीय समाचार
एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर रैडिसन ब्लू दिल्ली के संचालक, फ्लिपकार्ट और बिगबास्केट को जारी किए नोटिस
खाद्य नियामक ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ (एफएसएसएआई) ने शुक्रवार को बताया कि उसने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में एक ‘रेडिसन ब्लू होटल’ के संचालक और ई-कॉमर्स कंपनियों ‘फ्लिपकार्ट’ तथा ‘बिगबास्केट’ को नोटिस जारी किए हैं।
नई दिल्ली में रेडिसन ब्लू होटल चलाने वाली एबी होटल्स को दिए नोटिस में एफएसएसएआई ने कहा कि परिसर और उपकरणों का रखरखाव खराब पाया गया। इसमें जंग लगी मशीनरी, फ्रीजर से रिसाव और रेफ्रिजरेशन, तापमान की निगरानी, वेंटिलेशन, फर्श और लाइटिंग में कमियां शामिल थीं।
इसमें अपर्याप्त सफाई और स्वच्छता, रुके हुए पानी, जल निकासी और खाद्य अपशिष्ट संबंधी समस्याएं, साथ ही तिलचट्टे और मक्खियों की मौजूदगी सहित कीट नियंत्रण में कमियां पाई गईं।
नियामक ने कहा कि खाद्य पदार्थों की खरीद और प्राप्ति की जांच अपर्याप्त पाई गई, जिसमें फफूंद से प्रभावित और खराब हो चुके फल और सब्जियां प्राप्त होना, अनुमोदित विक्रेताओं के रिकॉर्ड और ट्रेसबिलिटी में कमियां शामिल हैं।
एफएसएसएआई ने यह भी बताया कि खाना पकाने वाले तेल की उपयुक्तता की जांच नियमानुसार नहीं की गई थी, और एनवाईसी किचन में ऐसे तेल का इस्तेमाल हो रहा था, जिनका टीपीसी मान 31 और 24.4 था।
जांच में पाया गया कि कच्चे और पके हुए खाने, शाकाहारी और मांसाहारी चीजों को सही ढंग से अलग-अलग नहीं रखा गया था। साथ ही, खाना बनाने वाले कर्मचारी बिना दस्ताने और हेयरनेट पहने काम कर रहे थे और उन्होंने गहने पहन रखे थे तथा उनके नाखून भी लंबे थे।
एफएसएसएआई ने ऑपरेटर को तुरंत सुधार के कदम उठाने और एक विस्तृत ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (एटीआर) जमा करने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें एफएसएसएआई लाइसेंस को सस्पेंड करना भी शामिल है।
एक अलग नोटिस में, एफएसएसएआई ने ‘फ्रीडम कुकिंग राइस ब्रैन ऑयल’ के बारे में भ्रामक दावे करने के लिए जेमिनी एडिबल्स एंड फैट्स इंडिया लिमिटेड, इनोवेटिव रिटेल कॉन्सेप्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (बिगबास्केट) और फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया है।
नियामक ने बताया कि इस प्रोडक्ट का प्रचार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर ऐसे दावों के साथ किया जा रहा था, जैसे कि ‘यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखता है या बढ़ाता है’ और इसमें ‘10,000प्लस पीपीएम नेचुरल ओरिजानोल’ है। इन दावों के जरिए इसके सेवन को कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट और हृदय स्वास्थ्य से जोड़ा जा रहा था।
नियामक के अनुसार, ‘एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स रेगुलेशंस, 2018’ के तहत खाद्य वनस्पति तेलों के लिए इस तरह के दावे करने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, जेमिनी एडिबल्स अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट के जरिए ऐसे प्रोडक्ट बेच रही थी, जबकि उसके पास ई-कॉमर्स गतिविधियों के लिए कोई वैध सेंट्रल लाइसेंस नहीं था।
संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
एक अन्य कार्रवाई में, नियामक ने डीएनवी फूड प्रोडक्ट्स लिमिटेड का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। जांच में पाया गया कि वहां खाद्य पदार्थों का निर्माण, पैकिंग और भंडारण बहुत ही अस्वच्छ परिस्थितियों में किया जा रहा था। वहां मक्खियां थीं, पानी जमा था और जाले लगे हुए थे; यहां तक कि पापड़ के ऊपर एक मक्खी भी बैठी हुई मिली।
राष्ट्रीय समाचार
तुकाराम मुंढे को बनाया जाए मुख्य चुनाव आयुक्त, ज्ञानेश कुमार को हटाओ: अबू आजमी

समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने टीपू सुल्तान को लेकर जारी विवाद, अधिकारी तुकाराम मुंढे की कार्रवाई, चुनाव आयोग और मतदाता सूची में बदलाव के मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने टीपू सुल्तान को अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाला संघर्षशील व्यक्ति बताया और उनके बारे में गलत बातें फैलाने का आरोप लगाया। इसके अलावा, उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में बदलावों को लेकर भी सरकार की आलोचना की।
मालेगांव में टीपू सुल्तान के समर्थन में नारे लगाए जाने और इसे देश के खिलाफ बताए जाने पर अबू आजमी ने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले भारत की आजादी की लड़ाई का इतिहास पढ़ना चाहिए। उन्होंने टीपू सुल्तान को अंग्रेजों से लड़ने वाला बहादुर व्यक्ति बताया और कहा कि उनके योगदान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। आजमी ने कहा कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था। टीपू सुल्तान द्वारा मंदिर तोड़े जाने के आरोपों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में मस्जिदों को तोड़े जाने का मुद्दा उठाया।
कांग्रेस की ओर से टीपू सुल्तान के समर्थन में नारे लगाए जाने को देश के खिलाफ बताए जाने पर आजमी ने कहा कि यदि संविधान की किताब में टीपू सुल्तान की तस्वीर और उनकी बहादुरी के किस्से दर्ज हैं, तो स्वतंत्रता सेनानी के खिलाफ बोलने वालों के तर्कों पर भी सवाल उठना चाहिए।
तुकाराम मुंढे की ओर से की जा रही कार्रवाई पर अबू आजमी ने उनकी तारीफ की। उन्होंने कहा कि मुंडे लोगों की जिंदगी बचाने और खाद्य पदार्थों में मिलावट तथा भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो किसी मंत्री या अन्य व्यक्ति के दबाव में आए बिना नियमों के मुताबिक कार्रवाई करें। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में चुनाव आयोग के नियमों को सख्ती से लागू करने की शुरुआत हुई थी। आजमी ने चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि तुकाराम मुंढे को चुनाव आयोग की जिम्मेदारी दी जाए, तो लोगों की कई शिकायतें दूर हो सकती हैं।
मतदाता सूची में एसआईआर और एसएसआई प्रक्रिया के तहत बदलावों पर आजमी ने सवाल किया कि जब इतने समय से एसआईआर चल रहा था, तो अब नई प्रक्रिया की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद नई प्रक्रियाएं लाई जा रही हैं। आजमी ने कहा कि देश में पैदा हुए सभी लोगों के नाम मतदाता सूची में होने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार दबाव में है और चुनाव आयोग पर लगे आरोपों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।
राहुल गांधी पर राजनाथ सिंह के आरोपों और बांग्लादेश जैसी सत्ता परिवर्तन की कोशिश संबंधी बयान पर आजमी ने कहा कि ऐसी कोई कोशिश नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के नेता घबराए हुए हैं और उनका समय खत्म होता जा रहा है।
राजनीति
चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाना कांग्रेस की प्राथमिकता: इमरान मसूद

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने राहुल गांधी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान, परिसीमन बिल, रूसी तेल पर अमेरिकी टैरिफ, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीट बंटवारे की बातचीत और व्यापारियों के हो रहे नुकसान के मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और छोटे व्यापारियों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए।
राहुल गांधी पर राजनाथ सिंह के बयान को लेकर मसूद ने कहा कि व्यवस्था तो परिवर्तन करना ही चाहते हैं, लोग आपसे उबर गए हैं। लेकिन, हम लोकतांत्रिक लोग हैं, आपकी तरह चुराएंगे नहीं। हम लूटा हुआ लोकतंत्र नहीं लेंगे। कांग्रेस की प्राथमिकता चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाना है।
परिसीमन बिल को लेकर कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि इसके बहाने देश की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। इससे उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच नई राजनीतिक भावना पैदा हो सकती है और प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या डीएमके इस मुद्दे पर भाजपा के साथ जा सकती है, मसूद ने कहा कि ऐसा करना डीएमके के लिए आत्महत्या जैसा होगा।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे की बातचीत पर मसूद ने कहा कि दोनों पक्ष प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं और कोशिश है कि अक्टूबर में इसे पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि बातचीत जारी है और सभी इस विषय को लेकर चिंतित हैं।
सपा नेताओं की ओर से कांग्रेस को 50 सीटों को लेकर परेशानी न होने संबंधी बयान पर उन्होंने कहा कि इस तरह की बातों का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने इंडिया गठबंधन की मजबूती का जिक्र करते हुए कहा कि गठबंधन एकजुट होकर खड़ा है।
रूसी तेल पर अमेरिकी टैरिफ से जुड़े सवाल पर मसूद ने कहा कि इस मामले में आगे क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संदर्भ में टिप्पणी की कि वह कुछ भी कर सकते हैं और उनके अगले कदम का अनुमान लगाना आसान नहीं है।
दिल्ली में प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को रोजाना करीब 50 करोड़ रुपए का नुकसान होने के दावे पर मसूद ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब व्यापारियों का सामान बिक ही नहीं रहा, तो नुकसान के आकलन को किस आधार पर बताया जा रहा है। उन्होंने जीएसटी और महंगाई का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों ने छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचाया है। छोटे व्यापारियों के पास काम कम है और महंगाई ने उनकी स्थिति और मुश्किल कर दी है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 2014 से पहले माफिया राज और अब रामराज्य होने के बयान पर भी मसूद ने कटाक्ष किया। उन्होंने राज्य में अपराध, महिलाओं की सुरक्षा और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने योगी सरकार के कानून-व्यवस्था संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार सब कुछ ठीक होने की बात करती है, जबकि उनके अनुसार जमीनी स्थिति पर सवाल बने हुए हैं।
राजनीति
सिद्धारमैया के स्टिंग वीडियो विवाद में कर्नाटक पुलिस ने यूट्यूब से मांगी जानकारी

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े स्टिंग वीडियो विवाद की जांच कर रही पुलिस ने यूट्यूब को पत्र लिखकर तकनीकी जानकारी मांगी है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि पुलिस ने वीडियो अपलोड किए जाने वाले आईपी एड्रेस और उसे अपलोड करने वाले व्यक्ति की जानकारी मांगी है।
वीडियो अपलोड करने वाले की पहचान और आईपी एड्रेस की जानकारी मांगी, साइबर क्राइम पुलिस कई पहलुओं से कर रही जांच
साइबर क्राइम पुलिस वायरल वीडियो की कई पहलुओं से जांच कर रही है। इसमें वीडियो के मूल स्रोत, इसे प्रसारित करने में शामिल लोगों की पहचान और इसे बनाने तथा प्रसारित करने के पीछे के मकसद का पता लगाना शामिल है।
कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और कांग्रेस सरकार के बीच टकराव सामने आया है। कुमारस्वामी ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खरगे पर तीखा हमला बोला है। शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि खरगे ने उनका जोरदार खंडन किया है। खरगे ने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले में कुमारस्वामी को गिरफ्तार भी किया जा सकता है।
इसके जवाब में कुमारस्वामी ने राज्य सरकार को उन्हें गिरफ्तार करने की चुनौती दी और बेंगलुरु पुलिस आयुक्त कार्यालय में विरोध प्रदर्शन किया।
पुलिस इस मामले की जांच मुख्य रूप से तीन पहलुओं पर कर रही है। पहले चरण में यूट्यूब से वीडियो अपलोड करने से संबंधित तकनीकी जानकारी मांगी गई है। इसमें आईपी एड्रेस और अन्य विवरण शामिल हैं, जिनकी मदद से वीडियो अपलोड करने वाले व्यक्ति की पहचान की जा सके। दूसरे चरण में पुलिस वीडियो की प्रामाणिकता की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि वीडियो मूल है या उसके साथ छेड़छाड़ की गई है। इसके अलावा वीडियो बनाने वाले और उसे सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान करने की भी कोशिश की जा रही है। तीसरे पहलू के तहत पुलिस वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने के पीछे के मकसद की जांच कर रही है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इसके पीछे कोई विशेष उद्देश्य या अन्य मंशा तो नहीं थी।
पुलिस को उम्मीद है कि तकनीकी जांच और वीडियो के मूल स्रोत का पता चलने के बाद घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने तथा जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इस बीच, कन्नड़ के एक निजी मीडिया संस्थान के प्रमुख ने दावा किया है कि उन्होंने ही स्टिंग वीडियो बनाया है। उन्होंने यह भी कहा है कि इस संबंध में सभी जानकारी संबंधित जांच अधिकारियों को दे दी गई है।
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