व्यापार
खुशखबरी: एक्जिम बैंक ने मैनेजर सहित 8 पदों के लिए आवेदन की तारीख बढ़ाई, अब 21 अक्टूबर तक मौका
बैंकिंग सेक्टर में नौकरी तलाश रहे लोगों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल, इंडिया एक्जिम बैंक ने बैकलॉग रिक्तियों के लिए विशेष भर्ती अभियान (एसआरडी) के तहत मैनेजर सहित कुल 8 पदों पर पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए थे।
एक्जिम बैंक की ओर से जारी रिक्तियों में डिप्टी मैनेजर (ग्रेड/स्केल जेएम I) के 6 और मैनेजर (एम)-(ग्रेड/स्केल एमएम II) के 2 पद शामिल हैं। वहीं, श्रेणी के आधार पर इन पदों के लिए जारी वैकेंसी में एससी के 2, एसटी के 3 और ओबीसी के 3 पद शामिल हैं।
डिप्टी मैनेजर और मैनेजर के इन सभी पदों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू हो गई और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर तक तय की गई थी, जिसे अब आगे बढ़ाकर 21 अक्टूबर तक कर दिया गया है। ऐसे में जो अभ्यर्थी इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरने से चूक गए थे, वे अब एक्जिम बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय नई अंतिम तिथि तक अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं।
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से कम से कम 50 प्रतिशत अंक या सीजीपीए के साथ 3 वर्ष का फुल-टाइम कोर्स वाला ग्रेजुएशन की डिग्री और कम से कम 2 वर्ष का फुल-टाइम कोर्स वाला पोस्ट ग्रेजुएशन (एमबीए/पीजीडीबीए/पीजीडीबीएम/एमएमएस), जिसमें फाइनेंस/इंटरनेशनल बिजनेस/फॉरेन ट्रेड में स्पेशलाइजेशन या चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) हो, होना चाहिए। इसके अलावा, कैंडिडेट्स के पास प्रासंगिक क्षेत्र में पद के अनुसार निर्धारित एक से तीन वर्षों का अनुभव भी अनिवार्य है।
आवेदकों की अधिकतम आयु श्रेणी के अनुसार डिप्टी मैनेजर पद के लिए 31 से 33 वर्ष और मैनेजर पोस्ट के लिए 33 से 35 वर्ष के बीच तय की गई है, जिसकी गणना 31 अगस्त 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार दिव्यांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूबीडी) के लिए अधिकतम आयु सीमा में 10 वर्ष और पूर्व-सैनिकों के लिए 5 वर्ष की छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की जांच, लिखित परीक्षा, पर्सनल इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी डिप्टी मैनेजर पद के लिए 48,480 से 85,920 रुपए के बीच और मैनेजर पोस्ट के लिए 64,820 से 93,960 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। वहीं, लिखित परीक्षा नवंबर में आयोजित होने की संभावना है।
आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो ओबीसी के लिए 600 रुपए और एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी एवं महिला उम्मीदवारों के लिए 100 रुपए तय किया गया है।
व्यापार
वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम में हुई 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी, रिकॉर्ड 1.47 लाख करोड़ रुपए का कारोबार

एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (एच1) में भारत का सिक्योरिटाइजेशन (प्रतिभूतिकरण) बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस अवधि में कुल सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम यानी मात्रा 1.47 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 42 प्रतिशत अधिक है।
आईसीआरए (आईसीआरए) की रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी तिमाही में गतिविधियों में तेज उछाल देखने को मिला और वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम 86,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
इस वृद्धि को मुख्य रूप से गोल्ड लोन सेगमेंट में बढ़ती मांग, वाहन ऋण सिक्योरिटाइजेशन में सुधार तथा एमएसएमई और बिजनेस लोन पोर्टफोलियो में लगातार बने आकर्षण का समर्थन मिला।
आईसीआरए के अनुसार, सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम में तेजी का एक प्रमुख कारण गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा अपनी फंडिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए इस माध्यम पर बढ़ती निर्भरता भी रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि गोल्ड लोन इस वृद्धि का सबसे बड़ा चालक रहा। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में गोल्ड लोन सिक्योरिटाइजेशन का वॉल्यूम सालाना आधार पर लगभग डेढ़ गुना बढ़ गया।
आईसीआरए के वाइस प्रेसिडेंट और स्ट्रक्चर्ड फाइनेंस रेटिंग्स के सह-समूह प्रमुख सचिन जोगलेकर ने कहा कि वाहन, एमएसएमई या व्यावसायिक लोन और मॉर्गेज जैसे पारंपरिक सेगमेंट भी स्थिर गति से बढ़ते रहे, जिससे कुल वॉल्यूम को मजबूती मिली।
उन्होंने कहा कि पहली छमाही के मजबूत प्रदर्शन से आईसीआरए के उस अनुमान को समर्थन मिलता है, जिसके अनुसार पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम 2.6 लाख करोड़ से 2.7 लाख करोड़ रुपए के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।
हालांकि सबसे अधिक वृद्धि गोल्ड लोन श्रेणी में रही, लेकिन वाहन लोन सिक्योरिटाइजेशन ने भी अपनी खोई हुई हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा वापस हासिल किया है।
वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कुल सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम का लगभग एक-तिहाई हिस्सा वाहन ऋणों का रहा, जबकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में इसकी हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ऋणदाताओं ने दोबारा इस बाजार में प्रवेश किया है, जबकि कुछ ने दूसरी तिमाही में अपनी बिक्री की मात्रा बढ़ाई है।
गोल्ड लोन और वाहन लोन के बाद मॉर्गेज लोन, स्मॉल बिजनेस लोन और माइक्रोलोन अन्य प्रमुख परिसंपत्ति श्रेणियां रहीं, जिनकी हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (एच1) की कुल वॉल्यूम में 12 से 15 प्रतिशत के बीच रही।
लेनदेन संरचना के लिहाज से सिक्योरिटाइजेशन बाजार में पास-थ्रू सर्टिफिकेट (पीटीसी) और डायरेक्ट असाइनमेंट (डीए) दोनों मार्गों की हिस्सेदारी लगभग बराबर रही। यह रुझान पिछली तिमाही जैसा ही बना रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड लोन, वाहन लोन और एमएसएमई फाइनेंसिंग जैसे क्षेत्रों की मजबूत मांग, साथ ही एनबीएफसी की बढ़ती फंडिंग जरूरतें, आने वाले महीनों में भी सिक्योरिटाइजेशन बाजार को गति देती रह सकती हैं।
राष्ट्रीय समाचार
भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में सौदों का मूल्य 2026 की तीसरी तिमाही में दोगुने से अधिक बढ़कर 7.3 अरब डॉलर रहा

भारत के वित्तीय सेवा क्षेत्र में 2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 7.3 अरब डॉलर के 67 सौदे दर्ज किए गए। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान सौदों का कुल मूल्य तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 129 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सौदों की संख्या मामूली रूप से 65 से बढ़कर 67 हो गई।
सौदों के मूल्य में इस तेज वृद्धि के पीछे बड़े मूल्य वाले विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) सौदे और सार्वजनिक बाजार में पूंजी जुटाने की गतिविधियों की अहम भूमिका रही। इनमें दो बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भी शामिल थे।
आईपीओ और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) को छोड़कर विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) और प्राइवेट इक्विटी/वेंचर कैपिटल (पीई/वीसी) गतिविधियों के तहत 3 अरब डॉलर के 58 सौदे हुए।
2026 की तीसरी तिमाही में एमएंडए सौदों का मूल्य पिछली तिमाही की तुलना में 54 प्रतिशत बढ़ा। साथ ही, सार्वजनिक बाजार के माध्यम से पूंजी जुटाने की गतिविधियों में मजबूती आई, वहीं पीई/वीसी निवेश में सौदों की संख्या और मूल्य, दोनों में गिरावट दर्ज की गई।
फिनटेक, बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का संयुक्त रूप से कुल सौदों की संख्या में लगभग 67 प्रतिशत योगदान रहा। यह प्रौद्योगिकी आधारित वित्तीय प्लेटफॉर्म और ऋण कारोबार में निवेशकों के लगातार बने हुए विश्वास को दर्शाता है।
ग्रांट थॉर्नटन भारत में फाइनेंशियल सर्विसेज रिस्क एडवाइजरी के पार्टनर और एनबीएफसी इंडस्ट्री लीडर विवेक अय्यर ने कहा, “जैसे-जैसे पूंजी निवेश के मामले में चयनात्मक रुख बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ग्रोथ को टिकाऊ रिटर्न में बदलने की क्षमता यह तय करेगी कि किन वित्तीय कंपनियों को निवेश मिलेगा।”
उन्होंने कहा कि अधिक लागत वाले माहौल में मजबूत फंडिंग मॉडल, बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स और नियामकीय चुनौतियों से निपटने की क्षमता उतनी ही महत्वपूर्ण होगी, जितना कि कारोबार का विस्तार करने का अवसर।
उन्होंने आगे कहा, “भारत के वित्तीय इकोसिस्टम में विकास की अभी भी काफी संभावनाएं हैं, लेकिन अगले चरण में उन कारोबारों को फायदा होगा जो केवल तेजी से नहीं, बल्कि टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ सकते हैं।”
2026 की तीसरी तिमाही में एमएंडए गतिविधियों के तहत 2.3 अरब डॉलर के 23 सौदे दर्ज किए गए। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में सौदों की संख्या में 4 प्रतिशत की गिरावट आई, लेकिन एक बड़े सौदे के कारण कुल मूल्य में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
घरेलू सौदों की कुल संख्या में 78 प्रतिशत हिस्सेदारी रही, लेकिन सौदों के कुल मूल्य में उनका योगदान केवल 9 प्रतिशत था। वहीं, विदेश से भारत में किए गए तीन सौदों का एमएंडए के कुल मूल्य में लगभग 90 प्रतिशत योगदान रहा।
विदेशों में भारतीय कंपनियों की ओर से किए गए सौदों की गतिविधियां भी धीमी रहीं। दूसरी तिमाही में ऐसे सात सौदे हुए थे, जबकि तीसरी तिमाही में इनकी संख्या घटकर दो रह गई।
व्यापार
हफ्ते के पहले दिन सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, बाजार खुलते ही 1,400 रुपए टूटा सोना; चांदी 1,500 रुपए से ज्यादा फिसली

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शुरुआती कारोबार के दौरान सोना करीब 1,400 रुपए प्रति 10 ग्राम तक टूट गया, जबकि चांदी में भी 1,400 रुपए से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में रुपए की मजबूती का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर दिखाई दिया।
एमसीएक्स पर 4 दिसंबर डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में 1,51,499 रुपए प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जो सोमवार को 1,51,596 पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में तेज बिकवाली के चलते करीब 1,50,056 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर तक फिसल गया, जो 1,443 रुपए यानी 0.95 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू बाजार में गिरावट का मुख्य कारण रुपए में मजबूती और मुनाफावसूली रहा। तकनीकी रूप से सोने के लिए 1,50,000-1,50,700 रुपए का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है।
वहीं, सोमवार को चांदी की कीमतों में भी दबाव देखा गया। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले सत्र में 2,25,755 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी, जो सोमवार को 0.11 प्रतिशत गिरकर 2,25,494 रुपए पर खुली। लेकिन कारोबार के दौरान इसमें और गिरावट दर्ज की गई और एक समय यह 1,552 रुपए यानी 0.68 प्रतिशत फिसलकर 2,24,203 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गई।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक मांग चांदी को कुछ हद तक समर्थन दे सकती है, लेकिन निकट भविष्य में रुपए की मजबूती कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है।
वहीं, वैश्विक बाजारों की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड और सिल्वर दोनों में हल्की तेजी देखी गई। सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करता नजर आया, तो वहीं चांदी में भी मजबूती देखने को मिली और यह 61.1 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती हुई नजर आई।
इसके बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें नीचे आई हैं क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हालिया कदमों से रुपया मजबूत हो सकता है। मजबूत रुपए का मतलब है कि आयातित सोना और चांदी घरेलू बाजार में अपेक्षाकृत सस्ते पड़ते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार की नजर अब अमेरिका के मुद्रास्फीति (सीपीआई) आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीति पर है। वहीं, दिसंबर में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीद पहले से बाजार में शामिल है।
उच्च ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों के आकर्षण को कम करती हैं। इसी वजह से निवेशकों का रुख आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर बदल सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की व्यापार एवं विकास एजेंसी ने हाल ही में अनुमान जताया है कि 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रह सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बने हुए हैं।
हालांकि, ऐसे भू-राजनीतिक जोखिम लंबे समय में सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन भी दे सकते हैं।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के लिए तत्काल सपोर्ट 1.50 लाख के आसपास है। यदि यह स्तर टूटता है, तो भाव 1.48 लाख रुपए तक जा सकते हैं। वहीं, ऊपर की ओर 1.52-1.53 लाख रुपए का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
वहीं, चांदी के लिए 2.24 लाख रुपए का स्तर महत्वपूर्ण है, जबकि मजबूती आने पर 2.28 लाख रुपए की ओर बढ़त संभव है।
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