व्यापार
सकारात्मक वैश्विक संकेतों से कीमती धातुओं को मिला सपोर्ट, सोने-चांदी में करीब 1.5 प्रतिशत तक की बढ़त
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और निवेशकों की बढ़ती खरीदारी के चलते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को दोनों कीमती धातुओं, सोने और चांदी, में मजबूती लौटी है, और इनमें 1 प्रतिशत से ज्यादा तक की तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों, डॉलर में नरमी और मध्य पूर्व से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने कीमती धातुओं को समर्थन दिया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना दो महीने के निचले स्तर से उबरकर फिर मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं घरेलू वायदा बाजार और सर्राफा बाजार में भी इसका सीधा असर देखने को मिला।
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज कॉमेक्स पर सोने की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिसके बाद यह लगभग 4,200 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। इसी तरह चांदी भी मजबूत खरीदारी के दम पर 60 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करती दिखाई दी, जिसमें करीब 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में नरमी और बॉन्ड यील्ड में कमी से सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग बढ़ी है। साथ ही निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दर नीति पर भी नजर बनाए हुए हैं।
वहीं, घरेलू बाजार की बात करें तो, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर भी शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में अच्छी तेजी देखने को मिली। शुक्रवार के शुरुआती कारोबार के दौरान दिसंबर डिलीवरी वाले सोने का भाव 1,51,200 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव 1,49,610 रुपए से 1,590 रुपए यानी 1.06 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है।
वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी ने 2,24,500 रुपए प्रति किलोग्राम का उच्च स्तर टच किया, जो पिछले बंद भाव 2,21,233 रुपए से 3,267 रुपए यानी 1.47 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है।
हालांकि खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 11 बजे) दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 1,493 रुपए यानी 1 प्रतिशत चढ़कर 1,51,103 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता नजर आया, तो वहीं दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी 3,088 रुपए यानी 1.40 प्रतिशत की उछाल के साथ 2,24,321 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान, जिसमें उन्होंने नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर किसी सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार किया, ने बाजारों को कुछ राहत दी है।
हालांकि मध्य पूर्व की स्थिति अभी भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इसी वजह से सुरक्षित निवेश विकल्पों के रूप में सोने और चांदी की मांग बनी हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी कीमतों को प्रभावित कर रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि दशहरा, धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों के नजदीक आने के साथ सोने-चांदी की मांग और बढ़ सकती है। भारत में त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में आभूषणों की खरीदारी बढ़ने से कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।
हालांकि निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी ब्याज दरों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि आने वाले दिनों में इन्हीं कारकों के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
व्यापार
गिरावट के बाद संभला बाजार, सेंसेक्स में 400 से ज्यादा अंकों की बढ़त; आईटी शेयरों में सबसे अधिक तेजी

सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पिछले सत्र में आई गिरावट से उबरते हुए बढ़त के साथ खुला।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 183.43 अंक यानी 0.26 प्रतिशत बढ़कर 71,776.67 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 83.15 अंक यानी 0.37 प्रतिशत चढ़कर 22,314.95 पर खुला।
वहीं खबर लिखे जाने तक, सेंसेक्स 452.95 अंकों यानी 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 72,046 के करीब ट्रेड करते नजर आया, जबकि निफ्टी 50 167.05 (0.75 प्रतिशत) अंक उछलकर 22,398 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत, तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.01 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
वहीं, सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा (3 प्रतिशत से ज्यादा) की तेजी देखने को मिली। इसके साथ ही निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी फार्मा और निफ्टी ऑयल एंड गैस में गिरावट देखने को मिली।
निफ्टी50 इंडेक्स में टीसीएस, इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, आयशर मोटर्स, अपोलो हॉस्पिटल्स और एचसीएल टेक के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई, जबकि इसके विपरीत बीईएल, रिलायंस, सिप्ला, बीएसई और कोल इंडिया के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
इस बीच, मध्य पूर्व में तनाव फिर से बढ़ने से आपूर्ति-जोखिम प्रीमियम बहाल होने के बाद ब्रेंट तेल 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।
हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड अभी भी बाजार के लिए चिंता का विषय हैं। उनका मानना है कि इन कारकों के कारण निकट अवधि में बाजार की संरचना अभी भी “रैली पर बिकवाली” वाली बनी हुई है।
विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली ने मंदड़ियों (बीयर्स) को मजबूत किया है और वे मजबूत बुनियादी कंपनियों में भी बिकवाली कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड उच्च स्तरों पर बनी रहती हैं, तब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रह सकती है, विशेषकर लार्ज-कैप शेयरों में।
हालांकि बाजार का इतिहास बताता है कि बड़े सुधार अक्सर दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अवसर लेकर आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट के दौर में गुणवत्ता वाले शेयरों में धीरे-धीरे निवेश के अवसर बन रहे हैं।
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, 22,050 का स्तर अब नजदीक बना हुआ है, लेकिन निफ्टी निचले बोलिंजर बैंड के आसपास होने के कारण अल्पकालिक रिकवरी की संभावना भी बनी हुई है।
उनके अनुसार यदि निफ्टी 22,290-22,350 के दायरे के ऊपर टिकता है, तो 22,440 से 22,600 तक की तेजी देखी जा सकती है। वहीं नीचे की ओर 22,140 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है।
वैश्विक संकेत अभी भी मिश्रित बने हुए हैं। अमेरिकी आईटी शेयरों में कमजोरी और पश्चिम एशिया में जारी तनावों के कारण ऊंची तेल कीमतें निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कुछ नरमी से बाजार को सीमित राहत मिली है।
गुरुवार को एफआईआई ने 12,943 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि डीआईआई ने 10,703 करोड़ रुपए की खरीदारी कर बाजार को कुछ समर्थन दिया।
अक्टूबर में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 36,210 करोड़ रुपए निकाल चुके हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।
राष्ट्रीय समाचार
पीक आवर्स में बिजली संकट से निपटने की तैयारी, 3,000 मेगावाट खरीदेगा तमिलनाडु

तमिलनाडु की बिजली कंपनी ने शाम के पीक आवर्स (जब बिजली की खपत सबसे ज्यादा होती है) के दौरान 3,000 मेगावाट तक बिजली खरीदने के लिए एक अर्जेंट टेंडर जारी किया है। अक्टूबर में लंबे समय से जारी गर्मी और हवा से बिजली उत्पादन में कमी के कारण बिजली की मांग 20,000 मेगावाट के करीब बनी हुई है।
तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (टीएनपीडीसीएल) बिजली की कमी को पूरा करने के लिए आधी रात से सुबह 2 बजे के बीच 1,500 मेगावाट तक बिजली खरीदेगा। यह खरीद 12 से 31 अक्टूबर तक के लिए होगी।
केंद्र सरकार के ‘डिस्कवरी ऑफ एफिशिएंट इलेक्ट्रिसिटी प्राइस’ (डीईईपी) पोर्टल के जरिए जारी किए गए टेंडर में तमिलनाडु के अंदर और बाहर के प्राइवेट बिजली उत्पादकों से सप्लाई के लिए आवेदन मंगाए गए हैं।
बड़ी मात्रा में बिजली की खरीद शाम 6 बजे से आधी रात तक की अवधि के लिए होगी। कॉन्ट्रैक्ट फाइनल होने पर कीमतें तय की जाएंगी।
यह कंपनी पहले से ही शॉर्ट टर्म खरीद और पावर स्वैप व्यवस्थाओं के जरिए 3,000 मेगावाट तक बिजली ले रही है, साथ ही पीक आवर्स के दौरान पावर एक्सचेंज से भी इतनी ही मात्रा में बिजली खरीद रही है।
टीएनपीडीसीएल के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि सितंबर से ही गर्मी का मौसम लंबा खिंचने के कारण बिजली की जरूरतें असामान्य रूप से ज्यादा बनी हुई हैं। हवा से बिजली उत्पादन में कमी और सेंट्रल जेनरेटिंग स्टेशनों से कम सप्लाई के कारण अतिरिक्त खरीद जरूरी हो गई है।
अल नीनो की स्थितियों के कारण गर्मी का मौसम लंबा खिंचने से गर्मियों के बाद भी बिजली की भारी खपत बनी हुई है, जिससे कंपनी बाहरी सप्लाई पर निर्भर है। अधिकारी ने कहा कि बिजली की कमी मुख्य रूप से शाम के समय होती है, जबकि दिन के समय तेज सोलर पावर उत्पादन से राज्य में बिजली सरप्लस (अतिरिक्त) रहती है।
अगर 20 अक्टूबर तक नॉर्थ-ईस्ट मानसून आ जाता है, तो मांग कम हो सकती है। इससे कंपनी को अगली गर्मियों से पहले सालाना मेंटेनेंस के लिए कुछ थर्मल यूनिट्स को बंद करने में मदद मिलेगी। हालांकि कमजोर मानसून के कारण नवंबर में और बिजली खरीदनी पड़ सकती है।
मंगलवार को राज्य में 432.6 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हुई, जो पिछले साल दर्ज की गई सबसे ज्यादा दैनिक खपत के करीब है। पीक डिमांड 19,921 मेगावाट तक पहुंच गई।
टीएनपीडीसीएल के थर्मल स्टेशनों ने 80 मिलियन यूनिट बिजली सप्लाई की, जबकि सेंट्रल जेनरेटिंग स्टेशनों ने 83.4 मिलियन यूनिट का योगदान दिया। शॉर्ट टर्म खरीद से 38.5 मिलियन यूनिट और पावर एक्सचेंज से 36.5 मिलियन यूनिट बिजली मिली।
ऊर्जा संसाधन मंत्री आर. निर्मलकुमार ने कहा कि पिछले साल की तुलना में पीक आवर डिमांड 3,000 मेगावाट बढ़ गई है। सेंट्रल पूल से मिलने वाली 3,000 मेगावाट बिजली भी उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण शॉर्ट टर्म टेंडर जारी करने पड़े।
मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु पहले ही ओपन मार्केट से 4,500 मेगावाट बिजली खरीद चुका है और मांग के आधार पर आगे और खरीद की व्यवस्था करेगा। उन्होंने सप्लाई पर दबाव की वजह आंशिक रूप से विंड पावर से बिजली उत्पादन में कमी और सेंट्रल स्टेशनों से बिजली की कम उपलब्धता को बताया।
व्यापार
गिरावट के बाद संभला बाजार, सेंसेक्स में 400 से ज्यादा अंकों की बढ़त; आईटी शेयरों में सबसे अधिक तेजी

सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पिछले सत्र में आई गिरावट से उबरते हुए बढ़त के साथ खुला।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 183.43 अंक यानी 0.26 प्रतिशत बढ़कर 71,776.67 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 83.15 अंक यानी 0.37 प्रतिशत चढ़कर 22,314.95 पर खुला।
वहीं खबर लिखे जाने तक, सेंसेक्स 452.95 अंकों यानी 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 72,046 के करीब ट्रेड करते नजर आया, जबकि निफ्टी 50 167.05 (0.75 प्रतिशत) अंक उछलकर 22,398 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत, तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.01 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
वहीं, सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा (3 प्रतिशत से ज्यादा) की तेजी देखने को मिली। इसके साथ ही निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी फार्मा और निफ्टी ऑयल एंड गैस में गिरावट देखने को मिली।
निफ्टी50 इंडेक्स में टीसीएस, इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, आयशर मोटर्स, अपोलो हॉस्पिटल्स और एचसीएल टेक के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई, जबकि इसके विपरीत बीईएल, रिलायंस, सिप्ला, बीएसई और कोल इंडिया के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
इस बीच, मध्य पूर्व में तनाव फिर से बढ़ने से आपूर्ति-जोखिम प्रीमियम बहाल होने के बाद ब्रेंट तेल 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।
हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड अभी भी बाजार के लिए चिंता का विषय हैं। उनका मानना है कि इन कारकों के कारण निकट अवधि में बाजार की संरचना अभी भी “रैली पर बिकवाली” वाली बनी हुई है।
विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली ने मंदड़ियों (बीयर्स) को मजबूत किया है और वे मजबूत बुनियादी कंपनियों में भी बिकवाली कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड उच्च स्तरों पर बनी रहती हैं, तब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रह सकती है, विशेषकर लार्ज-कैप शेयरों में।
हालांकि बाजार का इतिहास बताता है कि बड़े सुधार अक्सर दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अवसर लेकर आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट के दौर में गुणवत्ता वाले शेयरों में धीरे-धीरे निवेश के अवसर बन रहे हैं।
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, 22,050 का स्तर अब नजदीक बना हुआ है, लेकिन निफ्टी निचले बोलिंजर बैंड के आसपास होने के कारण अल्पकालिक रिकवरी की संभावना भी बनी हुई है।
उनके अनुसार यदि निफ्टी 22,290-22,350 के दायरे के ऊपर टिकता है, तो 22,440 से 22,600 तक की तेजी देखी जा सकती है। वहीं नीचे की ओर 22,140 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है।
वैश्विक संकेत अभी भी मिश्रित बने हुए हैं। अमेरिकी आईटी शेयरों में कमजोरी और पश्चिम एशिया में जारी तनावों के कारण ऊंची तेल कीमतें निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कुछ नरमी से बाजार को सीमित राहत मिली है।
गुरुवार को एफआईआई ने 12,943 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि डीआईआई ने 10,703 करोड़ रुपए की खरीदारी कर बाजार को कुछ समर्थन दिया।
अक्टूबर में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 36,210 करोड़ रुपए निकाल चुके हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।
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