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Wednesday,07-October-2026
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भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, मेटल और रियल्टी में रहा दबाव

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भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 429.11 अंक या 0.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,638.70 और निफ्टी 173.05 अंक या 0.76 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,603.05 पर था।

बाजार पर दबाव बनाने का काम मेटल और रियल्टी स्टॉक्स ने किया। सूचकांकों में निफ्टी मेटल -2.33 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी -1.77 प्रतिशत की कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी ऑटो -1.58 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज -1.43 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस -1.41 प्रतिशत, निफ्टी आईटी -1.34 और निफ्टी पीएसई -1.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

केवल निफ्टी पीएसयू बैंक 1 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 0.69 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.08 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुए।

लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 378.60 अंक या 0.63 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 59,382.60 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 58.25 अंक या 0.30 प्रतिशत की तेजी के साथ 19,506.95 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स पैक में कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस हरे निशान में थे। टाइटन, बीईएल, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एलएंडटी, टाटा स्टील, एमएंडएम, एचसीएल टेक, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, इंडिगो, एचयूएल, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट और टेक महिंद्रा लाल निशान में थे।

जानकारों ने कहा कि आरबीआई द्वारा उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरें बढ़ाने के बाद, घरेलू बाजार ने पॉलिसी के रुख में ‘न्यूट्रल’ से ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ की ओर बदलाव पर ज्यादा तेजी से प्रतिक्रिया दी, जो ब्याज दर चक्र में बदलाव का संकेत है।

वहीं, यूएस एफओएमसी की बैठक से पहले, यूएस यील्ड में बढ़ोतरी, मजबूत डॉलर और एफआईआई की लगातार निकासी के बीच रुपया दबाव में रहा, जिससे बाजार में गिरावट और बढ़ गई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो, ऊंची ब्याज दरों वाले माहौल में मार्जिन से फायदे की उम्मीद में बैंकिंग शेयरों ने बाजार की कमजोरी के उलट अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि बाजार के ज्यादातर हिस्सों में बिकवाली का दबाव बना रहा।

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एसएमई ग्रोथ फंड से छोटे उद्योगों को फंडिंग तक मिलेगी आसान पहुंच, निवेशकों का बढ़ेगा विश्वास : इंडस्ट्री

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केंद्र सरकार की ओर से 10,000 करोड़ रुपए का एसएमई ग्रोथ फंड बनाने से छोटे उद्योगों को फंडिंग तक आसान पहुंच मिलेगी। साथ ही, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा। यह जानकारी इंडस्ट्री की ओर से बुधवार को दी गई।

पीएचडीसीसीआई के सीईओ और महासचिव रणजीत मेहता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 10,000 करोड़ रुपए का एसएमई ग्रोथ फंड बनाना एक बड़ा कदम है और इससे छोटे उद्योगों की सबसे बड़ी समस्या आसान फंडिंग तक पहुंच का समाधान होगा। सरकार इसमें इक्विटी के जरिए भाग लेगी, तो इससे निवशकों का भी छोटे उद्योगों पर विश्वास बढ़ेगा।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार इसमें एमएसएमई आईपीओ के जरिए भाग लेगी। इससे उन एमएसएमई को बढ़ावा मिलेगा, जो इक्विटी मार्केट में आना चाहते हैं और अपने कारोबार को बढ़ाना चाहते हैं।

फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफकेसीसीआई) के उपाध्यक्ष के सतीश नागराज ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि हमें लगता है कि यह एक बहुत अच्छा कदम है। सेबी से मंजूरी प्राप्त बैंकों के जरिए एमएसएमई को दस हजार करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं। इसका तीन गुना फायदा उठाया जाएगा, जिससे एमएसएमई को लगभग चालीस हजार करोड़ रुपए का फंड मिलेगा और इसका लक्ष्य टियर-2 और टियर-3 शहर हैं। पहले हमें प्राइवेट बैंकों से फंड मिलता था, लेकिन वे कभी टियर-2 और टियर-3 शहरों में नहीं आते थे। इसलिए अब सेबी से मंजूरी प्राप्त बैंकों के तीस हजार करोड़ रुपए जोड़ने से, कुल फंड चालीस हजार करोड़ रुपए का हो जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को 10,000 करोड़ रुपए के एसएमई ग्रोथ फंड (एसजीएफ) को स्थापित करने को मंजूरी दे दी थी। इसका उद्देश्य भारत के छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए विकास केंद्रित पूंजी को बढ़ावा देना और मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन-आधारित सेक्टर और रणनीतिक वैल्यू चेन में बेहतरीन भारतीय उद्यमों के विस्तार को सक्षम बनाना है।

यह केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई उन व्यापक घोषणाओं का हिस्सा था, जिनका मकसद पूरे एमएसएमई इकोसिस्टम के लिए इक्विटी, लिक्विडिटी और प्रोफेशनल सपोर्ट उपलब्ध कराना था।

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व्यापार

आरबीआई एमपीसी फैसले से पहले बाजार में छाई लाली, सेंसेक्स 462 अंक फिसला

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पिछले दो सत्रों की बढ़त के बाद बुधवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर गिरावट देखने को मिली और प्रमुख बेंचमार्क लाल निशान में खुले। निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसले से पहले सतर्क रुख अपनाए रहे, जबकि वैश्विक संकेत भी मिश्रित रहे।

कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स 462.44 अंक (0.63 प्रतिशत) गिरकर 72,605.37 तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 175.65 अंक (0.77 प्रतिशत) टूटकर 22,600 के स्तर पर आ गया।

दिन की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 72,965.38 और निफ्टी 22,690.45 पर खुला था, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार और दबाव में आ गया।

व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप में 0.45 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

सेक्टोरल सूचकांकों में सबसे ज्यादा कमजोरी निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में रही, जो 1.55 प्रतिशत तक गिर गया। इसके बाद निफ्टी मेटल में 1.34 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक 0.94 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.82 प्रतिशत, तथा रियल्टी और एफएमसीजी सूचकांक करीब 0.7 प्रतिशत तक कमजोर रहे।

दूसरी ओर, फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दी। निफ्टी फार्मा में 0.16 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि निफ्टी 500 हेल्थकेयर भी सकारात्मक क्षेत्र में कारोबार करता दिखा। निफ्टी मीडिया में लगभग 0.74 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

बाजार प्रतिभागियों की नजर केवल आरबीआई की नीति समीक्षा पर ही नहीं, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की गतिविधियों, रुपए की चाल और आरबीआई के विकास एवं महंगाई आकलन पर भी बनी हुई है।

विश्लेषकों के अनुसार, पिछले सप्ताह के निचले स्तरों से निफ्टी में करीब 558 अंकों की रिकवरी निवेशकों के लिए राहत लेकर आई थी। हालांकि इस तेजी को आगे बढ़ाने में कई चुनौतियां मौजूद हैं। ब्रेंट क्रूड फिर से 101 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती नहीं दिख रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू तरलता और दूसरी तिमाही (क्यू2) के संभावित मजबूत नतीजे फिलहाल बाजार को समर्थन दे रहे हैं। लेकिन आज बाजार का मुख्य फोकस आरबीआई के नीतिगत रुख और गवर्नर संजय मल्होत्रा के संदेश पर रहेगा।

बाजार में व्यापक रूप से यह माना जा रहा है कि 25 आधार अंकों (0.25 प्रतिशत) की रेपो रेट बढ़ोतरी की संभावना पहले ही कीमतों में शामिल हो चुकी है। हालांकि निवेशक इस बात पर अधिक ध्यान देंगे कि आरबीआई भविष्य की महंगाई और वृद्धि पर क्या दृष्टिकोण पेश करता है।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच ब्याज दरों का अंतर काफी कम हो गया है। ऐसे में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती को देखते हुए पूंजी निकासी रोकने तथा रुपए को स्थिर रखने पर भी आरबीआई का ध्यान रह सकता है।

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, हालांकि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन बाजार में ऊपर की ओर बढ़त की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि 22,930 तथा उसके बाद 23,100-23,220 का दायरा निफ्टी के लिए संभावित लक्ष्य हो सकता है। वहीं 22,574 के ऊपर बने रहने पर तेजी की संभावना कायम रह सकती है।

एशियाई बाजारों में बुधवार को मिश्रित कारोबार देखने को मिला। निवेशक अमेरिकी शेयर बाजार की चाल, ऊंची ट्रेजरी यील्ड और भू-राजनीतिक तनावों पर नजर बनाए हुए हैं। मंगलवार को अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे क्योंकि तेल कीमतों में कुछ स्थिरता और बॉन्ड यील्ड में नरमी से निवेशकों को राहत मिली थी।

वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को फिर तेजी देखी गई। बाजार एक ओर अमेरिकी उत्पादन क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे तूफान और सऊदी अरब पर हूती हमलों से संभावित आपूर्ति व्यवधानों को लेकर चिंतित है, जबकि दूसरी ओर मध्य पूर्व से बढ़ते तेल निर्यात कीमतों को कुछ राहत दे रहे हैं।

अब बाजार की अगली दिशा काफी हद तक आरबीआई के ब्याज दर फैसले, नीति रुख और महंगाई-विकास संबंधी संकेतों पर निर्भर करेगी।

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राष्ट्रीय समाचार

विश्व बैंक ने बढ़ाया भारत की विकास दर का अनुमान, वित्त वर्ष 2027 में 7.1 प्रतिशत ग्रोथ की उम्मीद

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विश्व बैंक (वर्ल्ड बैंक) ने भारत की आर्थिक मजबूती पर भरोसा जताते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की विकास दर का अनुमान बढ़ा दिया है। अपनी ताजा साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट रिपोर्ट में विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है।

विश्व बैंक के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों में विस्तार और सेवा क्षेत्र की निरंतर मजबूती से समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की विकास गति मजबूत बनी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को पिछले वर्षों में लागू किए गए कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधारों से मजबूती मिली है। इनमें श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) का एकीकरण, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधार, टैरिफ युक्तिकरण, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) और भौतिक एवं डिजिटल अवसंरचना में बड़े निवेश शामिल हैं।

विश्व बैंक ने कहा कि कृषि क्षेत्र में कुछ चुनौतियों के बावजूद व्यापक अर्थव्यवस्था में मौजूद मजबूती भारत को मौजूदा वित्त वर्ष में मजबूत विकास दर बनाए रखने में मदद करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू मांग आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार बनी हुई है और यही भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।

हालांकि, विश्व बैंक ने कुछ जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंची ऊर्जा कीमतें और एल नीनो से जुड़े प्रतिकूल मौसमीय प्रभाव आने वाले महीनों में आर्थिक वृद्धि और महंगाई प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकते हैं।

दक्षिण एशिया के परिदृश्य पर नजर डालें तो विश्व बैंक ने वर्ष 2026 के लिए क्षेत्र की विकास दर का अनुमान भी बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.3 प्रतिशत था। रिपोर्ट के अनुसार, इस सुधार का सबसे बड़ा कारण भारत की अपेक्षा से बेहतर आर्थिक प्रदर्शन है।

दिलचस्प बात यह है कि भारत को छोड़कर दक्षिण एशिया के बाकी देशों की विकास दर का अनुमान 4.1 प्रतिशत से घटाकर 3.6 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका मुख्य कारण बांग्लादेश की विकास दर के अनुमान में की गई बड़ी कटौती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया के सामने वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां मौजूद हैं। क्षेत्र कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए ऊंची ऊर्जा कीमतों का सीधा असर महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। इसके अलावा, अल नीनो के कारण कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है, जो दक्षिण एशिया की बड़ी आबादी के लिए आजीविका का प्रमुख स्रोत है।

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