व्यापार
वैश्विक तनावों के बीच छठे सप्ताह भी बाजार पर दबाव बरकरार, सेंसेक्स और निफ्टी 0.65 प्रतिशत तक फिसले
वैश्विक तनावों के बीच भारतीय शेयर बाजार पर लगातार छठे सप्ताह दबाव बरकरार रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की आशंकाओं के बीच निवेशकों के सतर्क रहने के चलते घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्को में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
साप्ताहिक आधार पर निफ्टी में 0.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन इसमें 0.33 प्रतिशत की बढ़त आई और यह 23,346 अंक पर पहुंच गया। वहीं सेंसेक्स शुक्रवार को 19 अंक या 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74,294 अंक पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत कमजोर रहा।
सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही, लेकिन बाद में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया ऊंचाई से नरमी आने के कारण भारतीय शेयर बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और जापान के केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसले काफी हद तक बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहे। ऊर्जा महंगाई को लेकर चिंताएं कम होने से सरकारी बॉन्ड यील्ड पर दबाव कुछ घटा और इससे इक्विटी बाजारों को सीमित राहत मिली।
हालांकि केंद्रीय बैंकों की भविष्य की नीति संबंधी टिप्पणियों ने संकेत दिया कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक नीति का रुख अभी भी सख्त बना रह सकता है। इससे लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों का माहौल जारी रहने की संभावना बढ़ गई है।
विश्लेषकों का कहना है कि एफआईआई की लगातार बिकवाली ने रुपए पर दबाव बनाए रखा और बाजार की रिकवरी को सीमित कर दिया। इसी वजह से घरेलू शेयर बाजार सप्ताहभर दबाव में रहा।
इस दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बड़े शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। निवेशकों का रुझान ऐसे घरेलू कारोबारों की ओर रहा, जिनकी आय की संभावनाएं मजबूत हैं, ऑर्डर बुक बेहतर है और बैलेंस शीट मजबूत है।
क्षेत्रीय आधार पर हेल्थकेयर और एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन क्षेत्रों को उनकी स्थिर आय और घरेलू मांग से जुड़े होने के कारण समर्थन मिला।
शुक्रवार को रियल्टी और मेटल शेयर भी मजबूत सेक्टरों में शामिल रहे। दूसरी ओर आईटी सेक्टर पर दबाव जारी रहा और निफ्टी आईटी सूचकांक में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सप्ताह के दौरान मिड और स्मॉलकैप आईटी शेयरों तथा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में भी कमजोरी रही। इसके पीछे वैश्विक प्रौद्योगिकी खर्च को लेकर चिंताएं, ऊंची ब्याज दरों के माहौल में विवेकाधीन मांग पर असर और कीमतों पर दबाव प्रमुख कारण रहे।
तकनीकी दृष्टि से विशेषज्ञों का मानना है कि 23,000-23,100 अंक का दायरा निफ्टी के लिए तत्काल समर्थन (सपोर्ट) क्षेत्र बना हुआ है। वहीं 23,400-23,600 अंक का क्षेत्र निकट अवधि में प्रमुख प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार पांचवें सप्ताह शुद्ध विक्रेता बने रहे और उन्होंने 7,620 करोड़ रुपए की बिक्री की। वहीं दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 11,232 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी के साथ अपनी खरीदारी का सिलसिला जारी रखा, जिससे बाजार को सप्ताह के मध्य के निचले स्तर से उबरने में मदद मिली।
इस महीने अब तक एफआईआई ने 7,041 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री की है, जबकि डीआईआई ने 36,219 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की है, जिसके चलते निफ्टी अगस्त के अंत में बंद हुए 24,080.40 से 3.05 प्रतिशत नीचे आ गया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आगे चलकर, एफआईआई की लगातार बिकवाली और वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण बाजार अस्थिर रहने की संभावना है, हालांकि घरेलू संस्थागत खरीद में स्थिरता से गिरावट सीमित रहनी चाहिए।
आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर घरेलू ऋण वृद्धि (क्रेडिट ग्रोथ) और पीएमआई आंकड़ों पर रहेगी, जो आर्थिक गतिविधियों की गति का संकेत देंगे।
इसके अलावा अमेरिका के प्रारंभिक बेरोजगारी दावों (जॉबलेस क्लेम्स) के आंकड़े और फेडरल रिजर्व अधिकारियों की टिप्पणियां वैश्विक तरलता, ब्याज दरों की दिशा और वित्तीय बाजारों की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
व्यापार
हफ्ते भर में सोने की कीमतों में 1.17 प्रतिशत तो चांदी में 3.4 प्रतिशत की उछाल, कच्चे तेल में नरमी से मिला सपोर्ट

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला और साप्ताहिक आधार पर पीली धातु में 1.17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। वहीं सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सोने और चांदी दोनों की कीमतों में उछाल देखने को मिली।
शुक्रवार को एमसीएक्स पर अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट वाला गोल्ड 0.84 प्रतिशत यानी 1,282 रुपए की बढ़त के साथ 1,54,263 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। दिन के कारोबार में एक समय इसने 1,54,600 रुपए का हाई टच किया, जबकि 1,52,171 रुपए का लो छुआ।
वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी 0.16 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,42,000 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। दिन के कारोबार में एक समय इसने 2,43,047 रुपए का हाई टच किया, जबकि 2,38,173 रुपए का लो बनाया।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत शुक्रवार को 1,53,727 रुपए रही, जो पिछले शुक्रवार (11 सितंबर) के 1,51,938 रुपए के स्तर से 1.17 प्रतिशत यानी 1,789 रुपए अधिक है। इससे सप्ताहभर में करीब 1.17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई।
वहीं आईबीजेए के अनुसार, चांदी गुरुवार के 2,29,642 रुपए से 3.16 प्रतिशत यानी 7,266 रुपए चढ़कर 2,36,908 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जो पिछले शुक्रवार के 2,28,920 रुपए से 3.48 प्रतिशत यानी 7,988 रुपए की बढ़त को दर्शाता है।
विश्लेषकों के अनुसार, सप्ताह की शुरुआत में मध्य पूर्व में आपूर्ति से जुड़े जोखिमों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेतों के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। इस दौरान ब्याज दरों में वृद्धि की आशंका के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ी, जिससे बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों जैसे सोने पर दबाव आया।
हालांकि, सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की कीमतें लगातार तीन सत्रों तक गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। बाजार को यह महसूस हुआ कि सऊदी अरब की प्रमुख पाइपलाइन बंद होने का असर शुरुआती आशंकाओं की तुलना में आपूर्ति पर कम पड़ेगा। इससे ऊर्जा महंगाई को लेकर चिंताएं घटीं और सोने को समर्थन मिला।
इसके बावजूद यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अपेक्षा से अधिक सख्त रुख ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। फेड ने इस सप्ताह 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर वृद्धि करते हुए फेडरल फंड्स दर को 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के दायरे में पहुंचा दिया।
फेड अधिकारियों के अधिकांश संकेत यह बताते हैं कि इस वर्ष आगे भी मौद्रिक सख्ती जारी रह सकती है। इसके बाद बाजार ने अक्टूबर में एक और दर वृद्धि की संभावना लगभग 55 प्रतिशत तक आंकी। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत से ऊपर पहुंचने के बाद सोना और चांदी दोनों में मुनाफावसूली देखी गई।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी ने सोने की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। चांदी को लगातार छठे वर्ष संभावित आपूर्ति घाटे का समर्थन मिला। वर्ष 2026 में चांदी की आपूर्ति में लगभग 4.63 करोड़ औंस की कमी रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
तकनीकी दृष्टि से विश्लेषकों का मानना है कि कॉमेक्स गोल्ड के लिए 4,470-4,500 डॉलर का क्षेत्र निकट अवधि का प्रमुख प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) है, जबकि 4,300-4,340 डॉलर का क्षेत्र महत्वपूर्ण समर्थन (सपोर्ट) माना जा रहा है।
वहीं एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1,54,000 से 1,54,700 रुपए का दायरा तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र है, जबकि 1,50,000 से 1,50,700 रुपए का स्तर मजबूत समर्थन प्रदान कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर बनी रहेगी, जो सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
व्यापार
आरबीआई ने अतिरिक्त तरलता के बीच वीआरआरआर नीलामी के माध्यम से अवशोषित किए 2.23 लाख करोड़ रुपए

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि उसने बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने और अल्पकालिक मुद्रा बाजार दरों को रेपो दर के अनुरूप बनाए रखने के लिए वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी के माध्यम से 2.23 लाख करोड़ रुपए अवशोषित किए हैं।
आरबीआई द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 2.25 लाख करोड़ रुपए की निर्धारित राशि के मुकाबले उसे 2,22,629 करोड़ रुपए की बोलियां प्राप्त हुईं और केंद्रीय बैंक ने सभी बोलियों को स्वीकार कर लिया। यह राशि 5.24 प्रतिशत की भारित औसत दर पर अवशोषित की गई।
आरबीआई पिछले महीने से लगातार वीआरआरआर नीलामियां आयोजित कर रहा है, ताकि बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त तरलता को कम किया जा सके और ओवरनाइट मनी मार्केट दरों को नीतिगत रेपो दर के साथ संतुलित रखा जा सके।
केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 17 सितंबर तक बैंकिंग प्रणाली में लगभग 6.94 लाख करोड़ रुपए की अधिशेष तरलता मौजूद थी।
यह ताजा कार्रवाई एक दिन पहले की गई ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) नीलामी के बाद हुई है, जिसके तहत आरबीआई ने 50,000 करोड़ रुपए की सरकारी प्रतिभूतियां बेची थीं।
इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने अपनी व्यापक तरलता प्रबंधन रणनीति के तहत 21 सितंबर और 28 सितंबर को 25,000-25,000 करोड़ रुपए की दो अतिरिक्त ओएमओ बिक्री भी निर्धारित की है।
इस सप्ताह की शुरुआत में भी आरबीआई ने एक अन्य वीआरआरआर नीलामी के जरिए 3.93 लाख करोड़ रुपए की नकदी अवशोषित की थी। उस नीलामी में 5 लाख करोड़ रुपए की निर्धारित राशि के मुकाबले 3,93,352 करोड़ रुपए की बोलियां प्राप्त हुई थीं और पूरी राशि को 5.24 प्रतिशत की कट-ऑफ तथा भारित औसत दर पर स्वीकार किया गया था।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 11 सितंबर तक बैंकिंग प्रणाली में अधिशेष तरलता करीब 10.73 लाख करोड़ रुपए थी। इससे संकेत मिलता है कि हाल के दिनों में केंद्रीय बैंक की तरलता अवशोषण कार्रवाइयों के कारण अतिरिक्त नकदी में कुछ कमी आई है।
व्यापार
पीयूष गोयल ने व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कनाडा के मंत्री मनिंदर सिद्धू से की मुलाकात

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को आगे बढ़ाने के संबंध में एक सार्थक बैठक की।
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दोनों पक्षों ने अपने नेतृत्व की उस प्रतिबद्धता को दोहराया है जिसके तहत सीईपीए वार्ताओं को तेजी से पूरा कर जल्द से जल्द समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इससे वस्तुओं, सेवाओं और निवेश सहित कई क्षेत्रों में नए अवसर खुलेंगे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत-कनाडा सीईपीए का शीघ्र निष्कर्ष दोनों देशों के साझा लक्ष्य को साकार करने में मदद करेगा। इससे द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और भारत-कनाडा आर्थिक साझेदारी को आपसी लाभ के लिए और मजबूत किया जा सकेगा।
इस सप्ताह भारत और कनाडा ने प्रस्तावित सीईपीए के लिए नई दिल्ली में चौथे दौर की वार्ता शुरू की। दोनों देशों का लक्ष्य इस वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देना है।
पांच दिनों तक चली इन वार्ताओं में वस्तुओं का व्यापार, सेवाएं, मूल नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) और तकनीकी व्यापार बाधाएं जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल रहे। इससे पहले तीसरा दौर जुलाई में कनाडा की राजधानी ओटावा में आयोजित किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इसी वर्ष मार्च में नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान सीईपीए वार्ताओं को वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया था। दोनों नेताओं ने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 8.66 अरब डॉलर रहा, जबकि कनाडा को भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर तक पहुंचा।
कनाडा को भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में दवा उत्पाद, मशीनरी एवं यांत्रिक उपकरणों के पुर्जे, लोहे और इस्पात से बने उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कार्बनिक रसायन, आभूषण, रत्न एवं कीमती पत्थर, परिधान एवं वस्त्र, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं।
वहीं कनाडा से भारत के प्रमुख आयातों में दालें, उर्वरक, खनिज ईंधन, लकड़ी का पल्प, रत्न एवं कीमती पत्थर, विमान के पुर्जे, मशीनरी के हिस्से तथा लोहा और एल्युमीनियम स्क्रैप शामिल हैं।
सेवा क्षेत्र में भारत का आईटी उद्योग कनाडा को सेवाओं के निर्यात में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है। सीईपीए के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।
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