व्यापार
टाटा संस आईपीओ को एसपी ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री ने बताया ‘सामाजिक और नैतिक जरूरत’
टाटा संस की लिस्टिंग पर टाटा ट्रस्ट्स के विरोध के बाद एसपी ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री ने शुक्रवार को टाटा समूह की फ्लेगशिप कंपनी की लिस्टिंग को ‘सामाजिक और नैतिक जरूरत’ बताया।
मिस्त्री ने टाटा संस पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे पूर्ण स्पष्टता आ चुकी है और लिस्टिंग से पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी।
उनके यह टिप्पणी टाटा ट्रस्ट्स के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें ट्रस्ट्स ने कहा था कि वे टाटा संस को पब्लिक करने के लिए सहमत नहीं हैं और सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए, “सिर्फ लिस्टिंग पर ही नहीं”। मिस्त्री ने कहा कि उनका ग्रुप टाटा संस के साथ सकारात्मक बातचीत करने के लिए तैयार है।
फिलहाल टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के बोर्ड के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ टाटा ट्रस्ट्स, जिसकी टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है। वहीं, गुरुवार की बोर्ड बैठक में टाटा संस के बोर्ड सदस्यों ने लिस्टिंग को मंजूरी दी थी।
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस बोर्ड को दिए अपने बयान में ट्रस्ट का रुख फिर से दोहराया और कहा कि बोर्ड लिस्टिंग के मुद्दे पर पहले ही फैसला ले चुका है।
नोएल टाटा ने एक बयान में कहा था, “इस तरह के मामले के लिए कागजात, स्पष्टीकरण, सलाह और समय की जरूरत होती है और मुझे इसमें कोई शक नहीं कि ये सब तैयार किए जा रहे हैं। बोर्ड को पूरी जानकारी दी जाएगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि आरबीआई के आदेश में खास तौर पर लिस्टिंग के बारे में नहीं कहा गया है। नोएल टाटा ने कहा, “आरबीआई के आदेश में ‘लिस्टिंग का कोई जिक्र नहीं है’,” और आगे कहा कि इसमें “किसी खास कदम” का जिक्र नहीं है और न ही यह कहा गया है कि टाटा संस ने नियमों का उल्लंघन किया है।
उन्होंने कहा कि बोर्ड ने अभी तक आरबीआई के कम्युनिकेशन के कानूनी असर पर कोई राय नहीं बनाई है, जिसमें यह भी शामिल है कि टाटा संस को क्या करना है और कब तक करना है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह 13 प्रतिशत बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपए पहुंचा

भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्त वर्ष में अब तक (1 अप्रैल से 17 सितंबर तक) सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। यह जानकारी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से शुक्रवार को दी गई।
सरकारी डेटा के मुताबिक, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 15 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 14.3 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
कॉर्पोरेट कर संग्रह 19.48 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.56 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जबकि व्यक्तिगत आयकर और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) से होने वाला कर संग्रह 6 प्रतिशत बढ़कर 6.16 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है।। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में, 1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) संग्रह 53 प्रतिशत बढ़कर 40,214 करोड़ रुपए हो गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान रिफंड जारी करने में 29 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई और यह 2.2 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया।
17 सितंबर तक एडवांस टैक्स संग्रह 16.18 प्रतिशत बढ़कर 5.22 लाख करोड़ रुपए हो गया। इसमें एडवांस कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 4.16 लाख करोड़ रुपए और नॉन-कॉर्पोरेट एडवांस टैक्स संग्रह 9.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.06 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।
पिछले महीने के आखिर में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में भारत का राजकोषीय घाटा 4.55 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के लिए तय लक्ष्य का 26.8 प्रतिशत है।
यह पिछले साल इसी अवधि के राजकोषीय घाटा से कम है, जो 4.7 लाख करोड़ रुपए था और पूरे वित्त वर्ष के अनुमान का 29.9 प्रतिशत था।
वित्त वर्ष 2027 के लिए, केंद्र सरकार ने 16.96 लाख करोड़ रुपए के राजकोषीय घाटे का बजट रखा है, जो देश की जीडीपी का 4.3 प्रतिशत है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटे लक्ष्य हासिल किया था और राजकोषीय समेकन के तहत मौजूदा वित्त वर्ष के लिए इसे घटाकर जीडीपी का 4.3 प्रतिशत कर दिया है।
राजकोषीय घाटे में कमी आने से अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत होती है और कीमतों में स्थिरता के साथ विकास का रास्ता खुलता है। इससे सरकार की उधारी कम होती है, जिससे बैंकिंग सेक्टर में कॉर्पोरेट्स और उपभोक्ताओं को कर्ज देने के लिए ज्यादा फंड बचता है, और इससे आर्थिक विकास में तेजी आती है।
व्यापार
भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में 7 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद: रिपोर्ट

भारत चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5-7 प्रतिशत हासिल करने की राह पर है। इस दौरान मजबूत घरेलू मांग, बैंक ऋण में तेजी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार के चलते नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 11-12 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। यह जानकारी जेफरीज की ओर से जारी एक रिपोर्ट में दी गई है।
जेफरीज ने अपनी ताजा ‘ग्रीड एंड फियर’ रिपोर्ट में कहा कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन छह महीने पहले की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। इसकी वजह ऋण में व्यापक स्तर पर विस्तार और मांग से जुड़े संकेतकों में सुधार है।
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जुलाई में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जाने वाले ऋण में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उद्योग क्षेत्र को कर्ज 20 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र को ऋण 22.9 प्रतिशत और कॉरपोरेट ऋण में 21.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
रिपोर्ट में कहा गया, “कॉरपोरेट ऋण में तेजी यह भी संकेत देती है कि लंबे समय से प्रतीक्षित निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र की शुरुआत आखिरकार हो रही है।”
जेफरीज में इंडिया रिसर्च के प्रमुख महेश नंदूरकर ने कहा कि आय वृद्धि चालू वित्त वर्ष के 14 प्रतिशत से बढ़कर 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में घरेलू मांग में लगातार बनी मजबूती की ओर भी इशारा किया गया है।
इसके अलावा, अगस्त में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अप्रैल-अगस्त के दौरान बिजली की मांग में वृद्धि बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। इसकी तुलना में जनवरी-मार्च की अवधि में बिजली मांग में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
वहीं, रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एफसीएनआर (बी) पहल के तहत विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह देखने को मिला, जिसके तहत सरकार ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) से उम्मीद से बेहतर 136 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा राशि जुटाई।
राजकोषीय मोर्चे पर ब्रोकरेज ने कहा कि सरकार के राजकोषीय समेकन के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसके और कम होने की उम्मीद है।
व्यापार
वैश्विक स्तर पर मजबूत संकेतों से भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला, रियल्टी और डिफेंस में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत शुक्रवार को तेजी के साथ हुई। इस दौरान सेंसेक्स 260.65 अंक या 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,575.24 और निफ्टी 64.10 अंक या 0.28 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,334.70 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार की खरीदारी को सहारा डिफेंस और रियल्टी शेयरों से मिल रहा था। सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी रियल्टी टॉप गेनर्स थे। इसके अलावा निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी ऑटो और निफ्टी प्राइवेट बैंक भी हरे निशान में थे। केवल निफ्टी आईटी ही लाल निशान में कारोबार कर रहा था।
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी मजबूती के साथ कारोबार हो रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 342 अंक या 0.56 प्रतिशत की मजबूती के साथ 61,775 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 172 अंक या 0.88 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,708 पर था।
सेंसेक्स पैक में इटरनल, इंडिगो, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, टाइटन और बजाज फिनसर्व गेनर्स थे। टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टाटा स्टील, इन्फोसिस,एचयूएल, ट्रेंट, एनटीपीसी, आईटीसी और कोटक महिंद्रा बैंक लूजर्स थे।
एक्सपर्ट्स ने कहा कि भारतीय प्राइमरी मार्केट में चल रही तेजी ने अब सेकेंडरी मार्केट के निवेशकों के लिए भी मौके बना दिए हैं। अब निवेशकों का ध्यान आईपीओ मार्केट और आईपीओ से होने वाले लिस्टिंग गेन्स पर है। नतीजतन, सेकेंडरी मार्केट सुस्त पड़ा है और लार्ज-कैप शेयरों की कीमतें कम हो रही हैं। लंबे समय के लिए निवेश करने वालों के लिए यह एक मौका है। बड़े बैंक, कैपिटल गुड्स की बड़ी कंपनियां, और कुछ ऑटोमोबाइल व फार्मास्युटिकल कंपनियों के शेयर खरीदारी का मौका दे रहे हैं।
ज्यादातर वैश्विक बाजारों में तेजी देखी जा रही है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल हरे निशान में था, जबकि जकार्ता लाल निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को हरे निशान में बंद हुए थे, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.61 प्रतिशत की मजबूती के साथ और टेक्नोलॉजी सूचकांक नैस्डैक 1.69 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
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