राष्ट्रीय समाचार
भारत-बेल्जियम रक्षा साझेदारी को मिलेगी मजबूती, 10 बड़े समझौतों से बढ़ेगा सैन्य-औद्योगिक सहयोग
भारत और बेल्जियम के बीच रक्षा सहयोग केवल राजनीतिक वार्ता तक सीमित नहीं रहने वाला है। दोनों देश सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीक के साथ-साथ रक्षा उत्पादन क्षेत्र में भी साझेदारी को जमीन पर उतारने की तैयारी में हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर और रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन की भारत यात्रा के दौरान रक्षा उद्योग से जुड़े 10 प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ 15 रक्षा कंपनियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। इनमें से अधिकांश कंपनियों का प्रतिनिधित्व उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारी कर रहे हैं। प्रस्तावित समझौतों के तहत बेल्जियम की कई रक्षा तकनीकों का भारत में उत्पादन और असेंबली शुरू होने की संभावना है। इनमें रॉकेट, गोला-बारूद, हथियार प्रणालियां, ड्रोन, रडार और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी तकनीक शामिल हैं।
बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की एक तेजी से उभरती आर्थिक और सैन्य शक्ति बताते हुए कहा, “यूरोप और एशिया की सुरक्षा अब एक-दूसरे से अलग नहीं देखी जा सकती। रूस-यूक्रेन में युद्ध जारी है और वह ईरान तथा उत्तर कोरिया के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। वहीं चीन हिंद-प्रशांत में लगातार अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है। ऐसे में एशिया में होने वाली घटनाओं का असर यूरोप पर और यूरोप की घटनाओं का असर एशिया पर पड़ता है।”
फ्रांकेन के मुताबिक, बेल्जियम जैसे खुले व्यापार वाले देश के लिए दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा बेहद जरूरी है इसलिए भारत जैसे मजबूत साझेदार के साथ सैन्य, तकनीकी और औद्योगिक स्तर पर सहयोग बढ़ाना समय की जरूरत है।
भारत और बेल्जियम के बीच मौजूदा रक्षा पहल की नींव पिछले आर्थिक मिशन के दौरान रखी गई थी। उस दौरान दोनों देशों की कंपनियों के बीच संपर्क बढ़ा और राजनीतिक स्तर पर भी सहयोग के रास्ते खुले।
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बेल्जियम के प्रधानमंत्री की बैठक और दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ पर हस्ताक्षर इस बढ़ते विश्वास को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इस समझौते में दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, अधिकारियों का आदान-प्रदान, अनुसंधान एवं विकास, सेमिनार, संयुक्त सैन्य अभ्यास और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का ढांचा तैयार किया जाएगा।
दोनों देश रक्षा उद्योग के लिए एक साझा औद्योगिक रोडमैप तैयार करने पर भी काम करेंगे। इसके अलावा बेल्जियम डिफेंस कॉलेज 2027 में अपनी ‘वर्ल्ड स्टडी ट्रिप’ के लिए भारत को मेजबान देश के रूप में चुनने की योजना बना रहा है।
फ्रांकेन ने कहा कि अब अगला चरण सिर्फ घोषणाओं का नहीं, बल्कि संयुक्त प्रशिक्षण, औद्योगिक परियोजनाओं और कंपनियों के लिए वास्तविक कारोबारी अवसर पैदा करने का है।
भारत के रक्षा उद्योग संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैनुफैक्चर्स (एसआईडीएम) और बेल्जियम के बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री (बीएसडीआई) के बीच भी सहयोग समझौता किया जाएगा।
इसका उद्देश्य दोनों देशों की रक्षा कंपनियों को भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संयुक्त विकास और उत्पादन परियोजनाओं में भाग लेने का रास्ता आसान करना है।
बेल्जियम का मानना है कि भारत जिस बड़े पैमाने पर अपनी सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहा है, उससे उसकी कंपनियों के लिए लंबे समय के बड़े कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।
दोनों देशों के बीच सहयोग का एक बड़ा क्षेत्र ‘समुद्री सुरक्षा’ है। भारत अपनी नौसेना की माइन काउंटरमेजर्स क्षमता, स्वायत्त समुद्री प्रणालियों, अंडरवाटर रोबोटिक्स और अत्याधुनिक सेंसरों को मजबूत करना चाहता है।
बंदरगाहों, पाइपलाइनों और समुद्र के भीतर बिछी डेटा केबल जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी संरचनाओं की सुरक्षा भी सहयोग के दायरे में है।
इसके अलावा हथियार प्रणालियों, गोला-बारूद, रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम तथा काउंटर-ड्रोन तकनीक में भी बेल्जियम की कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
बेल्जियम की न्यू लाचौसे और भारत की टेंबो क्लासिक इंजीनियरिंग के बीच होने वाली परियोजना सबसे ठोस औद्योगिक समझौतों में से एक है।
इसके तहत दो प्रकार के गोला-बारूद के लिए पूरी उत्पादन लाइन और दो अन्य कैलिबर के लिए उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रस्तावित संयंत्र की क्षमता करीब 10 करोड़ राउंड प्रति वर्ष होगी।
परियोजना का अनुमानित मूल्य 5 करोड़ यूरो है और इसकी डिलीवरी 2028 तथा 2029 में निर्धारित की गई है। इसके बाद मशीनरी के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और आधुनिकीकरण में भी बेल्जियम की कंपनी की भूमिका बनी रहेगी।
इसके अलावा दो कंपनियों के बीच हुए सहयोग के तहत बेल्जियम के 70 मिमी रॉकेट अब भारत में भी असेंबल किए जाएंगे। भारतीय कंपनियां इसकी उत्पादन प्रक्रिया में भाग लेंगी। भारत में पूरी तरह निर्मित पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत में तैयार होने की उम्मीद है।
एक्सैल बेल्जियम और लार्सन एंड टुब्रो के बीच सहयोग भी बेहद महत्वपूर्ण है। एलएंडटी भारत के लिए माइन काउंटरमेजर वेसल बना रही है, जबकि एक्सैल इन जहाजों के लिए समुद्री बारूदी सुरंगों को खोजने, पहचानने और निष्क्रिय करने वाली स्वायत्त प्रणालियां उपलब्ध कराएगी।
पहले चरण में 12 जहाजों का कार्यक्रम है, लेकिन भविष्य में यह संख्या 59 तक पहुंच सकती है।
बेल्जियम की एफएन हर्स्टल और कल्याणी स्ट्रेटजिक सिस्टम्स भारत में हथियार तथा काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन की संभावनाएं तलाशेंगी।
बेल्जियम की ओआईपी सेंसर सिस्टम्स और भारत की सरकारी कंपनी इंडिया ओप्टेल के बीच भी सहयोग जारी है।
ओआईपी पहले ही अर्जुन एमके-I टैंक के लिए 130 से अधिक साइट उपलब्ध करा चुकी है। अर्जुन एमके-II के लिए कंपनी ने नया फायर-कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है, जो लेजर-गाइडेड मिसाइलों को लॉन्च करने में भी सक्षम है।
यह सहयोग भविष्य में भारतीय बख्तरबंद वाहनों के नए संस्करणों और अपग्रेड कार्यक्रमों तक बढ़ सकता है।
वहीं, भारत के हल्के टैंक जोरावर कार्यक्रम में भी बेल्जियम की जॉन कॉकेरिल डिफेंस महत्वपूर्ण भूमिका हासिल करने की कोशिश कर रही है। कंपनी जोरावर के लिए टरेट (टैंक या युद्धपोत पर लगी वह घूमने वाली संरचना जिसमें तोप या मशीन गन फिट होती है) उपलब्ध कराने की दावेदार है।
जोरावर को ऊंचाई वाले इलाकों में सैन्य अभियानों के लिए विकसित किया जा रहा है और इसका संबंध चीन से लगी भारत की सीमा पर सैन्य क्षमता बढ़ाने से भी है।
बेल्जियम की पिटागन भारत में अपनी मोबाइल बैरियर तकनीक के उत्पादन और बिक्री के लिए क्रिशना एलिड के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित कर रही है। इसमें पिटागन बेल्जिमय की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
कंपनी भारत को केवल घरेलू बाजार के लिए नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे बाजारों तक पहुंच बनाने के संभावित केंद्र के रूप में भी देख रही है।
इसी तरह ऑक्टेव और भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (भेल) के बीच सहयोग भारत की वायु रक्षा प्रणालियों में पहले से मौजूद है। ऑक्टेव की तकनीक आकाश तीर, अरुधरा, आईपीएसएस और आईएसीसीएस जैसे कार्यक्रमों में इस्तेमाल हो रही है।
वहीं बेल्जियम और भारतीय कंपनियों के बीच समुद्री इंजन क्षेत्र में सहयोग की बातचीत चल रही है। भारतीय कंपनी पहला पूरी तरह भारत में विकसित 6 मेगावाट का समुद्री डीजल इंजन तैयार कर रही है।
भारत और बेल्जियम के बीच यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब यूरोप और हिंद-प्रशांत दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
बेल्जियम के लिए भारत केवल एक बड़ा रक्षा बाजार नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार भी बन रहा है। वहीं भारत के लिए बेल्जियम के साथ सहयोग का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इससे अत्याधुनिक यूरोपीय तकनीक के साथ-साथ संयुक्त उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और वैश्विक सप्लाई चेन में नए अवसर खुल सकते हैं।
फ्रांकेन के शब्दों में, दोनों देशों ने भरोसा कायम कर लिया है और अब उस भरोसे को “ठोस सहयोग” में बदलने का समय है।
राजनीति
पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने शहरी निकाय चुनावों में सीट बंटवारे की संभावना से किया इनकार

पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने अगले महीने होने वाले राज्य के सात शहरी निकायों के चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट या माकपा (सीपीआई-एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा अथवा किसी भी दल के साथ सीट साझेदारी की संभावना से साफ तौर पर इनकार कर दिया है।
पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (डब्ल्यूबीपीसीसी) के सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट की ओर से सीट बंटवारे की संभावना को लेकर अनौपचारिक संकेत दिए गए थे लेकिन राज्य कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
राज्य कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि आगामी शहरी निकाय चुनाव ऐसे किसी प्रयोग के लिए उपयुक्त मंच नहीं हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के अनुसार, आगामी नगर निकाय चुनावों के लिए किसी भी प्रकार का सीट साझा समझौता अर्थहीन होगा क्योंकि पिछले अनुभव बताते हैं कि सत्तारूढ़ दल और राज्य प्रशासन के संयुक्त प्रभाव के कारण स्थानीय निकाय चुनाव अक्सर एक औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।
उन्होंने कहा, “इस बार भी स्थिति अलग नहीं होगी और पूरी संभावना है कि इन सात नगर निकायों के अधिकांश वार्डों में भाजपा उम्मीदवार अपने प्रभाव का लाभ उठाकर जीत हासिल करेंगे। ऐसे में भाजपा यह दावा कर सकेगी कि संयुक्त विपक्ष के खिलाफ उसे जनता का स्वतःस्फूर्त समर्थन मिला है। इसलिए शहरी निकाय चुनाव सीट साझेदारी के प्रयोग के लिए उचित अवसर नहीं हैं।”
वहीं, माकपा नेतृत्व ने भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (इंडिया) का हिस्सा होने के बावजूद स्थानीय निकाय चुनावों में वाम मोर्चा किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ सीट बंटवारा किए बिना स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगा।
माकपा की केंद्रीय समिति के एक सदस्य ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा, “तृणमूल कांग्रेस के किसी भी गुट के साथ सीट साझेदारी का सवाल ही नहीं उठता। साथ ही, इस समय कांग्रेस के साथ भी किसी प्रकार की समझदारी वांछनीय नहीं है क्योंकि हमारा मानना है कि आगामी शहरी निकाय चुनाव हमारी संगठनात्मक ताकत का आकलन करने का सबसे अच्छा अवसर हैं।”
इस बीच, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के गुट ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी शहरी निकाय चुनाव किसी भी दल के साथ समझौता किए बिना लड़ेगा।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए 20 लोकसभा सदस्यों का समूह, जो स्वयं को भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बताता है, नगर निकाय चुनावों के लिए भाजपा के साथ सीट साझेदारी का इच्छुक है।
कोलकाता और हावड़ा नगर निगम सहित सात शहरी निकायों के चुनावों का संभावित कार्यक्रम नवंबर के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित है जबकि परिणाम दिसंबर के पहले सप्ताह में घोषित किए जाने की संभावना है।
राजनीति
कांग्रेस नेता ने किया शरजील इमाम का समर्थन बोले, कहा- ‘न्यायपालिका भी नहीं दे रही न्याय’

कांग्रेस नेता उदित राज ने दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया में दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर, फ्री शरजील इमाम’ जैसे विवादित नारों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए वाइस चासंलर की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। साथ ही, उदित राज ने शरजील इमाम के विषय पर कहा कि जमानत मिलनी चाहिए।
यूनिवर्सिटी की दीवारों पर लिखे नारों को लेकर उदित राज ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “जांच होनी चाहिए। सरकार को जांच करना चाहिए कि किसने लिखा है। आईबी से जांच कराई जानी चाहिए। एनआईए भी जांच कर सकती है।” कांग्रेस नेता ने आगे कहा, “वाइस चांसलर भी आरएसएस-भाजपा समर्थक हैं। वाइस चांसलर की जिम्मेदारी तय हो।”
शरजील इमाम का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, “शरजील इमाम को जमानत मिलनी चाहिए। जमानत देने से इनकार करना गलत बात है।” उदित राज ने आरोप लगाया कि एक विशेष समुदाय से आने के कारण ऐसा हो रहा है। दुर्भाग्य है कि न्यायपालिका भी न्याय नहीं दे रही है।
उदित राज ने यह भी कहा कि न्यायपालिका के ऊपर सरकार का दबाव है। कॉलेजियम प्रणाली को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तय करते हैं। अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (एआईजेएस) जब तक लागू नहीं होगी, तब तक न्यायपालिका से कोई न्याय लिया जाना मुश्किल है।
उदित राज ने केरल के राज्यपाल के लोकभवन में ‘सिर्फ शाकाहारी रसोई’ वाले कथित आदेश पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “अब वह खुद खाएं न खाएं, वह अलग बात है। लेकिन राजभवन में रोक लगा देना कि लोग ही न खाएं, वह गलत बात है। यह जानबूझकर के एक एजेंडा खड़ा करते हैं। आप न खाइए। 80 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय नॉनवेज खाते हैं, तो आप 80 प्रतिशत से ज्यादा जनता की भावना को दरकिनार करके अपना खुद का थोपना चाहते हैं? आप खाइए वेज, कौन रोक रहा है? अब राजभवन में नहीं बनेगा, यह तो बात दुरुस्त नहीं है।”
आईटीबीपी डीपी के चीन के संबंध में आए बयान पर कांग्रेस नेता ने कहा, “हमारी जमीन कब्जा होती जा रही है। हम जानते हैं कि हमारी सेना का शौर्य है और वह साहसी है, लेकिन वहां सरकार सिर्फ शो करा रही है। ताकत दिखाने का भी कोई मतलब होता है या सिर्फ राजनीतिक उद्देश्य निकाले जाते हैं। इसलिए जो हो रहा है, उसके बाद में सरकार को स्पष्ट बताना चाहिए।”
राष्ट्रीय समाचार
राष्ट्रपति ने केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम की शक्तियां सौंपीं

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सभी केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 के तहत अपने-अपने क्षेत्रों में शक्तियों का प्रयोग करने और कार्यों का निर्वहन करने का अधिकार सौंपा है।
गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना के माध्यम से राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 के तहत कार्यों के निर्वहन के लिए शक्तियों के प्रत्यायोजन की घोषणा की है। ये शक्तियां दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी, चंडीगढ़, लद्दाख और लक्षद्वीप के उपराज्यपालों और प्रशासकों को सौंपी गई हैं।
आदेश में लिखा, “संविधान के अनुच्छेद 239 के खंड (1) के अनुसरण में, राष्ट्रपति एतद्द्वारा निर्देश देते हैं कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी, चंडीगढ़, लद्दाख और लक्षद्वीप के केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक (चाहे वे उपराज्यपाल या प्रशासक के रूप में जाने जाएं) राष्ट्रपति के नियंत्रण के अधीन रहते हुए और अगले आदेश तक, अपने-अपने केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 (21 ऑफ 2023) की धारा 29, 48 और 56 के तहत राज्य सरकार की शक्तियों का प्रयोग और कार्यों का निर्वहन करेंगे।”
राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 देश में दंत चिकित्सा पेशे को विनियमित करता है, गुणवत्तापूर्ण और किफायती दंत शिक्षा प्रदान करता है, और देश भर में उच्च गुणवत्ता वाली मौखिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को सुलभ बनाता है।
यह ऐतिहासिक कानून अपने नागरिकों के लिए उच्चतम स्तर की दंत चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 ने राष्ट्रीय दंत आयोग (एनडीसी) की स्थापना करके एक अभूतपूर्व नियामक ढांचा पेश किया, जिसने मौजूदा भारतीय दंत परिषद (डीसीआई) का स्थान लिया और दंत चिकित्सक विधेयक, 1948 को निरस्त कर दिया।
इस अधिनियम का उद्देश्य दंत चिकित्सा शिक्षा और पेशे के परिदृश्य में व्यापक सुधार करके इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाना है। अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं में राष्ट्रीय दंत आयोग और राज्य दंत परिषदों का गठन, तीन स्वायत्त बोर्डों का प्रावधान; आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और सचिव के लिए निश्चित कार्यकाल (पुनर्नियुक्ति की कोई संभावना नहीं); उद्योग सहयोग और तकनीकी नवाचार; ऑनलाइन राष्ट्रीय रजिस्टर और दंत सलाहकार परिषद; और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया शामिल हैं।
यह अधिनियम राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, भारतीय फार्मेसी परिषद, भारतीय नर्सिंग परिषद, भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग, होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग और संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों के लिए राष्ट्रीय आयोग सहित संबंधित वैधानिक निकायों के साथ संयुक्त बैठकें आयोजित करने की सुविधा भी प्रदान करता है।
यह अधिनियम आयोग को निजी दंत चिकित्सालयों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में 50 प्रतिशत सीटों के लिए शुल्क निर्धारण के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का अधिकार भी देता है। यह अधिनियम दंत चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण नियामक सुधार लाने के लिए तैयार है। यह जनता के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यावसायिकता को बढ़ावा देता है।
किफायती मौखिक स्वास्थ्य देखभाल की उपलब्धता को बढ़ावा देकर और भारतीय दंत चिकित्सकों की वैश्विक स्तर पर रोजगार क्षमता को बढ़ाकर, आयोग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दंत चिकित्सा मानकों को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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