राष्ट्रीय समाचार
आधार ऐप ने डिजिटल सेवाओं को लोगों के लिए बनाया आसान, डाउनलोड की संख्या 5 करोड़ के पार
आधार ऐप के डाउनलोड की संख्या 5 करोड़ के महत्वपूर्ण आंकड़े को पार कर गई है। यह लोगों के बीच सुविधाजनक और डिजिटल माध्यम से आधार सेवाओं को अपनाने के बढ़ते ट्रेंड को दर्शाता है। यह जानकारी आईटी मंत्रालय की ओर से गुरुवार को दी गई।
मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में कहा कि यह उपलब्धि आधार ऐप की भूमिका में महत्वपूर्ण विस्तार को दर्शाती है। ऐप नागरिकों और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के बीच एक डिजिटल माध्यम के रूप में काम करता है। इसके जरिए आधार नंबर धारक अपने स्मार्टफोन से कई सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। इनमें मोबाइल नंबर अपडेट, पता अपडेट, ईमेल अपडेट, बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक और ई-आधार डाउनलोड जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
लॉन्च के बाद से आधार ऐप का लगातार बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है। 60 लाख से अधिक लोगों ने आधार ऐप के जरिए अपना मोबाइल नंबर अपडेट किया, जबकि 15 लाख से अधिक पता अपडेट और 23 लाख से अधिक ईमेल अपडेट ऐप के माध्यम से किए गए हैं।
बयान में कहा गया कि इन सेवाओं को बढ़ता अपनाया जाना दर्शाता है कि लोग आधार केंद्र पर जाने के बजाय डिजिटल माध्यम से आधार से जुड़ी सेवाओं का लाभ उठाना अधिक पसंद कर रहे हैं।
आधार ऐप को “शो, शेयर और वेरिफाई” के सिद्धांत पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य आधार नंबर धारकों को अपनी आधार जानकारी के इस्तेमाल पर अधिक नियंत्रण देना और सुविधाजनक पहचान सत्यापन की सुविधा उपलब्ध कराना है।
आधार ऐप के विस्तार के साथ-साथ यूआईडीएआई सुरक्षित और सुविधाजनक ऑफलाइन सत्यापन के इकोसिस्टम का भी विस्तार कर रहा है।
बयान के अनुसार, जनवरी में इसकी शुरुआत के बाद से यूआईडीएआई ने अब तक 200 से अधिक संस्थाओं को ऑफलाइन सत्यापन चाहने वाली संस्थाएं (ओवीएसई) के रूप में अपने साथ जोड़ा है।
यह उपलब्धि आधार के ऑफलाइन माध्यम से सुरक्षित, सहमति-आधारित और कागजरहित सत्यापन को सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सेवा प्रदाताओं और आम लोगों दोनों को लाभ मिलेगा।
बयान में कहा गया कि इन ओवीएसई साझेदारों का जुड़ना आधार-आधारित, गोपनीयता-केंद्रित डिजिटल सत्यापन व्यवस्था में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है, जिसमें उपयोगकर्ता के नियंत्रण और आसान पहुंच को प्राथमिकता दी जाती है।
क्यूआर कोड आधारित सत्यापन और सुरक्षित डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेजों जैसे आधार ऑफलाइन सत्यापन तरीकों का इस्तेमाल करके ये संस्थाएं अब यूआईडीएआई के केंद्रीय डेटाबेस से रियल-टाइम कनेक्टिविटी के बिना पहचान संबंधी जानकारी सत्यापित कर सकेंगी।
इस व्यवस्था में लोगों की जरूरतों को केंद्र में रखा गया है। आधार नंबर धारक केवल उतनी ही जानकारी साझा कर सकेंगे, जितनी आवश्यक होगी। इससे उनकी गोपनीयता को और मजबूत किया जा सकेगा। यह सरल सत्यापन प्रक्रिया पारदर्शी और सहमति-आधारित तरीके से लोगों का भरोसा बढ़ाने में मदद करेगी।
बयान में कहा गया कि ये पहल सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन और सुरक्षित, सुलभ तथा तकनीक-आधारित सार्वजनिक सेवाओं के जरिए लोगों के जीवन को आसान बनाने के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप हैं।
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कर्नाटक : विधान परिषद में सत्तापक्ष का विपक्ष पर कार्यवाही बाधित करने का आरोप, कार्रवाई की मांग

कर्नाटक विधान परिषद के सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने परिषद के सभापति सलीम अहमद से शिकायत की है कि पिछले चार दिनों से विपक्षी सदस्यों के लगातार विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हो रही है। उनका कहना है कि इससे उन्हें जनता से जुड़े मुद्दे उठाने का अधिकार भी नहीं मिल पा रहा है।
शुक्रवार को सभापति को सौंपे गए पत्र में सदस्यों ने कहा कि विपक्ष के विरोध के कारण सदन में प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य विधायी कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
पूर्व मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) और एमएलसी इवान डी’सूजा सहित अन्य सदस्यों ने कहा कि कर्नाटक की जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है क्योंकि सदन की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है।
सदस्यों ने बताया कि राज्य इस समय भीषण सूखे का सामना कर रहा है, लेकिन व्यवधानों के कारण परिषद में सूखे का मुद्दा नहीं उठा पाए और न ही केंद्र सरकार से आवश्यक वित्तीय सहायता देने की मांग कर सके।
उन्होंने कहा, “लोग सूखे के प्रभाव से परेशान हैं। हम इस मुद्दे पर सदन में चर्चा किए बिना सीधे जनता के बीच नहीं जा सकते।”
सदस्यों ने मालनाड क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष, कस्तूरीरंगन रिपोर्ट, पेयजल संकट, किसानों की समस्याएं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा का अवसर देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि इन विषयों पर चर्चा के लिए कई प्रस्ताव पहले ही दिए जा चुके हैं, लेकिन लगातार हो रहे व्यवधानों के कारण उन्हें अवसर नहीं मिल रहा है। सिर्फ सदन का समय बर्बाद हो रहा है।
उन्होंने विपक्षी सदस्यों के आचरण पर उचित कार्रवाई करने की मांग की।
सत्तापक्ष के सदस्यों का कहना है कि विपक्ष का यह व्यवहार सदन की कार्यप्रणाली के खिलाफ है। उन्होंने सभापति से अनुरोध किया कि विधायी कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
शुक्रवार को कर्नाटक कांग्रेस के विधायक और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) भाजपा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर उतर आए। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह जनजातीय कल्याण मामले में कथित संलिप्तता को लेकर योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग करते हुए विधानसभा की कार्यवाही बाधित कर रही है।
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एथेनॉल उत्पादन से चीनी कीमतों में बढ़ोतरी को केंद्र ने किया खारिज, कहा- मक्के का हो रहा उपयोग

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी का कारण एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का इस्तेमाल करना बताना गलत है।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग हो रही चीनी का शेयर 2025-26 में कम होकर करीब 9 प्रतिशत हो गया है, जो कि 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत था।
साथ ही, कहा कि मौजूदा समय में देश में एथेनॉल के उत्पादन के लिए मक्के का उपयोग हो रहा है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बताया कि चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी कई वजहों से हो रही है, जिनमें उम्मीद से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारों के मौसम से पहले बढ़ी हुई मांग, मौसम की वजह से गन्ने की फसल को हुआ नुकसान, दुनिया भर में चीनी की सप्लाई में कमी और इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों की तरफ से सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं।
मौजूदा सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उगाने वाले राज्यों का शुरुआती अनुमान लगभग 343 एलएमटी था।
गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ-साथ ज्यादा बारिश की वजह से जलभराव से भी उत्पादन पर असर पड़ा है।
अनुमान से कम उत्पादन के बावजूद, अक्टूबर में नया क्रशिंग सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
सरकार ने बताया कि वर्तमान में चीनी की आपूर्ति में कमी एक ग्लोबल समस्या है और यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है।
2026-27 के लिए दुनिया भर में चीनी की कमी का अनुमान लगभग 33 एलएमटी लगाया गया है। मौसम के हालात को लेकर चिंता ने भी ग्लोबल आउटलुक पर असर डाला है।
नतीजतन, चीनी की इंटरनेशनल कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। 30 जून 2026 को ये 474 डॉलर प्रति टन थीं, जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई हैं, जो कि दो महीने से भी कम समय में 16 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी को दिखाता है।
मंत्रालय के मुताबिक, भारत में आम तौर पर हर साल लगभग 320-340 एलएमटी चीनी का उत्पादन होता है, जबकि देश में इसकी खपत लगभग 280-290 एलएमटी होती है। जब उत्पादन जरूरत से ज्यादा होता है, तो अतिरिक्त स्टॉक के कारण चीनी मिलों का पैसा फंस जाता है और गन्ना किसानों को भुगतान में देरी हो सकती है।
अतिरिक्त चीनी का एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल करने से इस बुनियादी समस्या को हल करने में मदद मिली है और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है।
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कोलकाता होटल अग्निकांड के बाद एक्शन, मिर्जा गालिब स्ट्रीट के 17 और होटलों को नोटिस

कोलकाता के मिर्जा गालिब स्ट्रीट इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन सख्त हो गया है। पश्चिम बंगाल अग्निशमन विभाग ने शुक्रवार को मध्य कोलकाता के भीड़भाड़ वाले मिर्जा गालिब स्ट्रीट और आसपास के 17 और होटलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन होटलों पर आग से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं रखने का आरोप है।
इससे पहले गुरुवार को भी विभाग ने इसी इलाके के 9 अन्य होटलों और गेस्ट हाउसों को नोटिस दिया था। इस तरह कुल 26 होटलों और गेस्ट हाउसों को नोटिस दिया जा चुका है।
शुक्रवार को जिन 17 होटलों को नोटिस दिया गया है, उन्हें 24 घंटे के अंदर जवाब देने को कहा गया है। अगर वे जवाब नहीं देते हैं तो उनके होटलों को बंद करने का आदेश भी दिया जा सकता है।
यह कार्रवाई मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात होटल में लगी आग के बाद की जा रही है। इस हादसे में 7 बांग्लादेशी नागरिकों समेत कुल 9 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में 6 पुरुष, 2 महिलाएं और एक बच्चा शामिल है। सभी की मौत जलने से नहीं, बल्कि धुएं के कारण दम घुटने से हुई थी।
पुलिस ने गुरुवार को ‘शिखा इन’ होटल के लीज धारक अबू जफर को गिरफ्तार कर लिया था। उसे गुरुवार दोपहर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 2 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, जफर ने बिरेश्वर मित्रा से 40,000 रुपए महीने पर होटल लीज पर लिया था। होटल का असली मालिक बिरेश्वर मित्रा अभी भी फरार है।
भाजपा ने मिर्जा गालिब स्ट्रीट अग्निकांड के लिए तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और नगर निगम मामलों के मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने सवाल उठाया है कि बिना सुरक्षा इंतजाम के इन होटलों को ट्रेड लाइसेंस कैसे मिल गया।
जिस पांच मंजिला इमारत में आग लगी थी, उसमें कई होटल और गेस्ट हाउस चल रहे थे। ‘शिखा इन’ होटल इसी इमारत की तीसरी मंजिल पर 1100 वर्ग फुट में चल रहा था।
इस हादसे के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मिर्जा गालिब स्ट्रीट इलाके के सभी होटलों, लॉज और गेस्ट हाउसों का विशेष ऑडिट कराने का ऐलान किया है। न्यू मार्केट पुलिस स्टेशन ने, जिसके अधिकार क्षेत्र में यह इमारत आती है, स्वतः संज्ञान लेते हुए केस दर्ज किया है। राज्य के अग्निशमन विभाग ने भी अलग से शिकायत दर्ज कराई है।
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