राष्ट्रीय समाचार
बाजार की पाठशाला: डेट फंड्स क्या होते हैं, इनमें कैसे होता है निवेश? जानिए इनके फायदे और किन जोखिमों का रखना चाहिए ध्यान
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के बीच इक्विटी फंड काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन हर निवेशक ज्यादा जोखिम लेकर शेयर बाजार में पैसा लगाना नहीं चाहता, ऐसे निवेशकों के लिए डेट फंड्स एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। अगर आप भी डेट फंड्स के बारे में विस्तार से समझना चाहते हैं कि ये क्या हैं, इनमें निवेश कैसे होता है और इनके फायदे-नुकसान क्या हैं, तो चलिए हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, डेट फंड म्यूचुअल फंड की ऐसी श्रेणी हैं, जो मुख्य रूप से बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियों, ट्रेजरी बिल, कॉरपोरेट डेट और अन्य निश्चित आय वाले साधनों में निवेश करते हैं, जिनका उद्देश्य निवेशकों के पैसे को अपेक्षाकृत स्थिर आय वाले साधनों में लगाकर रिटर्न हासिल करना होता है।
डेट फंड को आसान भाषा में समझें तो ये ऐसे म्यूचुअल फंड हैं, जिनमें आपका पैसा कंपनियों या सरकार द्वारा जारी किए गए डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है। जब कोई कंपनी या सरकार बॉन्ड जारी करके पैसा जुटाती है, तो निवेशक को उस रकम पर ब्याज मिलता है। डेट फंड इसी तरह के कई साधनों में निवेश करके एक पोर्टफोलियो तैयार करते हैं।
डेट फंड की अलग-अलग श्रेणियां होती हैं। इनमें लिक्विड फंड, ओवरनाइट फंड, अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड, शॉर्ट ड्यूरेशन फंड, मीडियम ड्यूरेशन फंड, कॉरपोरेट बॉन्ड फंड और गिल्ट फंड जैसी कैटेगरी शामिल हैं। हर कैटेगरी की अवधि, जोखिम और रिटर्न की संभावना अलग हो सकती है।
डेट फंड में निवेश करना म्यूचुअल फंड की अन्य योजनाओं की तरह ही आसान है। निवेशक किसी म्यूचुअल फंड कंपनी, म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म या निवेश ऐप के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार डेट फंड चुन सकता है। निवेश करने से पहले फंड की कैटेगरी, पोर्टफोलियो में शामिल प्रतिभूतियां, क्रेडिट क्वालिटी, औसत अवधि, खर्च अनुपात और जोखिम स्तर को समझना जरूरी है।
निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार एकमुश्त निवेश या एसआईपी के जरिए भी डेट फंड में पैसा लगा सकता है। हालांकि, डेट फंड चुनते समय केवल पिछले रिटर्न को देखकर फैसला करना सही नहीं है। निवेश का उद्देश्य और वह पैसा कितने समय के लिए निवेश करना है, इसके आधार पर फंड का चुनाव करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर डेट फंड को पूरी तरह सुरक्षित निवेश मान लिया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। डेट फंड में जोखिम इक्विटी फंड की तुलना में अलग प्रकार का होता है। इसमें मुख्य रूप से क्रेडिट रिस्क और ब्याज दर का जोखिम महत्वपूर्ण होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, क्रेडिट रिस्क तब होता है जब फंड जिस कंपनी के बॉन्ड में निवेश करता है, उसकी वित्तीय स्थिति खराब हो जाए या वह ब्याज अथवा मूलधन चुकाने में समस्या का सामना करे। वहीं ब्याज दर बढ़ने पर लंबी अवधि वाले बॉन्ड की कीमत प्रभावित हो सकती है। इसलिए ब्याज दरों में बदलाव का असर डेट फंड के रिटर्न पर भी पड़ सकता है।
वहीं, डेट फंड के फायदे की बात करें तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक को अपने पोर्टफोलियो में स्थिर आय वाले साधनों का एक्सपोजर मिलता है। इक्विटी फंड की तुलना में इनमें आमतौर पर बाजार की तेज उतार-चढ़ाव वाली स्थितियों का असर कम होता है। इसी वजह से कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी के साथ डेट फंड का इस्तेमाल विविधीकरण के लिए करते हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डेट फंड उन निवेशकों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं जिनका निवेश लक्ष्य कुछ महीनों से लेकर कुछ वर्षों तक का है और जो अपने पैसे को सीधे किसी एक बॉन्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट में लगाने के बजाय विभिन्न डेट इंस्ट्रूमेंट्स में फैलाना चाहते हैं। फंड मैनेजर अलग-अलग प्रतिभूतियों में निवेश करके जोखिम को फैलाने की कोशिश करता है।
यह कहना सही नहीं होगा कि डेट फंड हमेशा एफडी से ज्यादा रिटर्न देते हैं। बैंक एफडी में ब्याज दर पहले से तय होती है, जबकि डेट फंड का रिटर्न बाजार की परिस्थितियों, ब्याज दरों और फंड के पोर्टफोलियो पर निर्भर करता है। इसलिए डेट फंड में मिलने वाला रिटर्न निश्चित नहीं होता।
यही कारण है कि डेट फंड को गारंटीड रिटर्न वाला उत्पाद समझकर निवेश नहीं करना चाहिए। निवेश करने से पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित फंड किस तरह की प्रतिभूतियों में पैसा लगा रहा है और उसका जोखिम स्तर क्या है।
डेट फंड का एक महत्वपूर्ण नुकसान यह है कि इनमें रिटर्न की गारंटी नहीं होती। ब्याज दरों में बदलाव, बॉन्ड की क्रेडिट क्वालिटी में गिरावट या बाजार की परिस्थितियों के कारण फंड का एनएवी बढ़ या घट सकता है। कुछ डेट फंड में कम अवधि के बावजूद जोखिम हो सकता है, जबकि लंबी अवधि वाले डेट फंड ब्याज दरों में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
इसके अलावा, डेट फंड में निवेश करने पर फंड मैनेजमेंट और अन्य खर्चों का असर भी रिटर्न पर पड़ता है। इसलिए किसी भी फंड का चयन करते समय केवल उसका पिछला प्रदर्शन देखना पर्याप्त नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे निवेशक जो अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी की तुलना में अपेक्षाकृत कम उतार-चढ़ाव वाले निवेश को शामिल करना चाहते हैं, उनके लिए डेट फंड एक विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, सही फंड का चुनाव निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार होना चाहिए। छोटी अवधि के लक्ष्य के लिए अलग तरह के डेट फंड और लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए अलग कैटेगरी उपयुक्त हो सकती है।
डेट फंड में पैसा लगाने से पहले क्रेडिट क्वालिटी, ब्याज दर का जोखिम, फंड की अवधि, पोर्टफोलियो में शामिल बॉन्ड, खर्च अनुपात और फंड की कैटेगरी को जरूर समझें। यह भी ध्यान रखें कि डेट फंड बैंक एफडी की तरह निश्चित रिटर्न या मूलधन की गारंटी नहीं देते।
राष्ट्रीय समाचार
ब्राह्मण चेहरों के अभाव में बसपा 2027 में कैसे साधेगी सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला?

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 2007 के विधानसभा चुनाव में दलित-ब्राह्मण गठजोड़ के जरिए यूपी में सत्ता हासिल की थी, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामने उस सामाजिक गठजोड़ को फिर से मजबूत करने की चुनौती है।
पिछले कुछ वर्षों में बसपा के कई प्रमुख ब्राह्मण चेहरे पार्टी से अलग हुए या निष्कासित किए गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मायावती पुराने चेहरों के आभाव के बीच ब्राह्मण समाज और अन्य सामाजिक समूहों को साथ लेकर नया सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला कैसे तैयार करेंगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2007 में बसपा की सत्ता में वापसी में ब्राह्मण मतदाताओं के एक बड़े हिस्से का समर्थन महत्वपूर्ण रहा था। उस समय पार्टी ने दलित आधार के साथ ब्राह्मण समाज को जोड़कर व्यापक सामाजिक गठजोड़ तैयार किया था। अब पार्टी के सामने चुनौती केवल नए ब्राह्मण चेहरों को आगे बढ़ाने की नहीं, बल्कि समाज के बीच पुराने भरोसे को दोबारा कायम करने की भी है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि बसपा के सामने इस समय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भरोसा बनाए रखने की चुनौती है। हाल ही में अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को पार्टी से निष्कासित किया गया है। इससे पहले राकेशधर त्रिपाठी, रंगनाथ मिश्रा, रामू द्विवेदी, कुशल तिवारी, विनय शंकर तिवारी, ब्रजेश पाठक और गुड्डू त्रिपाठी जैसे कई प्रमुख ब्राह्मण चेहरे बसपा से अलग हो चुके हैं। रामवीर उपाध्याय का परिवार भी बसपा की राजनीति में सक्रिय रहा है। इनमें से कई नेता बाद में दूसरे राजनीतिक दलों में महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई दिए और कुछ को मंत्री पद भी मिला।
विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक, वर्तमान में सतीश चंद्र मिश्रा बसपा के प्रमुख ब्राह्मण चेहरे के रूप में पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं। ऐसे में 2027 में सत्ता की दावेदारी के लिए मायावती को केवल ब्राह्मण समाज ही नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संतुलन साधते हुए संगठन को भी मजबूत करना होगा।
ब्राह्मण संगठन से जुड़े अभिषेक पांडेय कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण है। कई विधानसभा क्षेत्रों में यह समुदाय चुनावी मुकाबले को प्रभावित करने की स्थिति में रहता है। ऐसे में 2027 से पहले ब्राह्मण समाज का समर्थन हासिल करना किसी भी राजनीतिक दल के व्यापक सामाजिक गठजोड़ की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।
हालांकि, मायावती का कहना है कि पार्टी से निकाले गए या निजी स्वार्थ के चलते दूसरे दलों में गए नेताओं के राजनीतिक समर्पण का आकलन उनके कार्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे कई लोगों ने बसपा सरकार के दौरान भी अपने निजी और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता दी और पार्टी तथा समाज के हित में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई।
मायावती ने यह भी कहा कि पार्टी में लंबे समय से ईमानदार और निष्ठावान वरिष्ठ नेता नए कर्मठ एवं समर्पित कार्यकर्ताओं, खासकर युवाओं को तैयार कर रहे हैं। पार्टी की यह ‘नर्सरी’ लगातार जारी है और नए लोगों को संगठन में आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है।
बसपा से निष्कासित अनंत मिश्रा ने कहा कि 2007 में ब्राह्मण समाज को बसपा से जोड़ने में सतीश मिश्रा के चेहरे, मायावती के प्रति समाज के भरोसे और जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने कहा कि उस समय ब्राह्मण समाज को सम्मान और राजनीतिक भागीदारी का स्पष्ट संदेश मिला था। लगातार पार्टी के राजनीतिक प्रदर्शन में गिरावट पर नेतृत्व को आत्मचिंतन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अब वह अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच जाकर उनकी राय लेंगे और उनके सुझाव के आधार पर आगे की रणनीति तय करेंगे।
राष्ट्रीय समाचार
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस नेता और उनके बेटे की गोली मारकर हत्या, नेताओं ने सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल

नादिया जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष अनीसुर रहमान और उनके बेटे अबू सुफियान रहमान की शनिवार रात नकाशीपाड़ा अंडरपास के पास कथित तौर पर गोली मारकर और धारदार हथियार से हमला करके हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि पिता-पुत्र कार से घर लौट रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ। जिस गाड़ी पर गोलियों के कई निशान हैं, उसे पुलिस ने जब्त कर लिया है। पश्चिम बंगाल की नकाशीपाड़ा पुलिस ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है। वहीं, विपक्षी दल के नेताओं ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
नादिया के नकाशीपाड़ा में कांग्रेस नेता अनीसुर रहमान और उनके बेटे की हत्या पर सीपीआईएम नेता मीनाक्षी मुखर्जी ने आईएएनएस से कहा, “कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल के हालात नहीं बदले हैं। सिर्फ तीन महीने पहले ही एक पार्टी ने सरकार बनाई थी, फिर भी पश्चिम बंगाल को हत्या, जबरन वसूली, आम लोगों की समस्याओं, महिलाओं पर अत्याचार, रिश्वतखोरी, दबदबे और पुलिस की प्रताड़ना से कोई आजादी नहीं मिली है। ये वे मुद्दे हैं जिन पर लोगों ने अपनी चिंता जाहिर की थी। इसके बजाय, एक पार्टी के जाने के बाद दूसरी पार्टी आ गई है, जो बिल्कुल उसी अंदाज में काम कर रही है, लेकिन राज्य को चलाने के लिए और भी अधिक खतरनाक और अहंकारी तरीका अपना रही है।”
कांग्रेस नेता पूजा रॉय चौधरी ने कहा, “नादिया के नकाशीपाड़ा में सबसे अधिक गुंडागर्दी, हंगामा और दादागीरी होती है। यहां आए दिन बवाल होता रहता है। डबल मर्डर हो गया लेकिन पुलिस को पहले से इसकी खबर नहीं थी। अस्पताल ने बताया है गोली किसी पेशेवर अपराधी ने मारी थी। अनीसुर रहमान को 13 और उनके बेटे को 12 गोलियां मारी गई। इस मामले में जिस टीएमसी नेता का नाम सामने आ रहा है, पुलिस उसे क्यों नहीं गिरफ्तार कर पा रही है?
राज्य कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पांच बार लोकसभा सदस्य रहे अधीर रंजन चौधरी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि हालांकि राज्य में मौजूदा भाजपा सरकार ‘डर खत्म, भरोसा कायम’ के नारे के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन असल में स्वतंत्रता दिवस पर हुई ऐसी भयानक घटना ने लोगों की सुरक्षा और राजनीति में खुलकर हिस्सा लेने के अधिकार पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने मामले की उचित और निष्पक्ष जांच और दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। चौधरी ने कहा, “कांग्रेस नेतृत्व इस मुश्किल समय में पीड़ित परिवार के साथ है।”
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में अल्पसंख्यकों और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिशों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी, और इसलिए कांग्रेस कार्यकर्ता आज पूरे राज्य में काला दिवस मना रहे हैं।
स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह हमला जेल में बंद तृणमूल कांग्रेस नेता जुब्बार शेख के “आदेश” पर किया गया था। “जुब्बार ने जेल से ही बदमाशों का इस्तेमाल करके इस इलाके पर कब्जा करने के लिए यह घटना करवाई। अगर प्रशासन उचित और निष्पक्ष जांच करे, तो यह मामला पूरी तरह साफ हो जाएगा।” स्थानीय कांग्रेस नेता टीपू सुल्तान ने मीडिया से कहा, “हम कड़ी से कड़ी सजा की मांग करते हैं।”
कृष्णानगर पुलिस जिले के अतिरिक्त अधीक्षक (ग्रामीण) सुरजीत कुमार ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच चल रही है। अभी इस बारे में और कुछ भी कहना संभव नहीं है।
इसके पहले पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट किया था, “नादिया के कांग्रेस नेता अनीसुर रहमान और उनके बेटे अबू सुफियान की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। हम लोकतंत्र में यकीन रखने वाले सभी लोगों से अपील करते हैं कि वे बंगाल में इस हत्या की राजनीति के खिलाफ एकजुट हों। इस बर्बर हत्याकांड के विरोध में, राज्य भर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कल (16 अगस्त ’26) ‘काला दिवस’ मनाने की अपील की जा रही है।”
राष्ट्रीय समाचार
सरकारी योजनाओं के दम पर भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार मजबूत, 10.88 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ रहा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर

केंद्र सरकार की उत्पादन, आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास से जुड़ी नीतियों के चलते भारत का विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार बनकर उभरा है। सरकार द्वारा शनिवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, उत्पादन, निर्यात और निवेश में लगातार वृद्धि के कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
फैक्टशीट के अनुसार, भारत का विनिर्माण क्षेत्र वर्तमान में देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 16 से 17 प्रतिशत का योगदान देता है और इससे 2.7 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। स्थिर कीमतों पर इस क्षेत्र की सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) वृद्धि दर का चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) 10.88 प्रतिशत रहा है, जो इसकी मजबूत विकास क्षमता को दर्शाता है।
सरकार ने बताया कि जुलाई 2026 में भारत का माल निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 36.98 अरब डॉलर था। वहीं जून 2026 में विनिर्माण उत्पादन में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो औद्योगिक गतिविधियों में लगातार सुधार का संकेत है।
रक्षा क्षेत्र में भारत ने पिछले एक दशक में उल्लेखनीय बदलाव देखा है। आत्मनिर्भरता पर जोर, लक्षित निवेश और नीतिगत सुधारों के परिणामस्वरूप स्वदेशी रक्षा उत्पादन का मूल्य वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष के 1,54,071 करोड़ रुपए की तुलना में 15.6 प्रतिशत अधिक है। तुलना करें तो वर्ष 2014-15 में देश का रक्षा उत्पादन केवल 46,429 करोड़ रुपए था।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र ने भी तेज गति से विस्तार किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 11.32 लाख करोड़ रुपए की तुलना में 15.8 प्रतिशत अधिक है। मोबाइल फोन विनिर्माण और निर्यात में भी बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। मोबाइल फोन निर्यात बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जिससे भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
भारत अब सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार के अनुसार, सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 1.0 के तहत जुलाई 2026 तक 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश वाली 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक एकीकृत गैलियम नाइट्राइड माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं।
इसके अलावा, बड़े पैमाने के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (एलएसईएम) के लिए लागू प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना ने मोबाइल निर्माण इकोसिस्टम में करीब 96,000 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है। सरकार का मानना है कि इन पहलों से भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने में मदद मिलेगी।
फैक्टशीट में यह भी कहा गया है कि फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में उत्पादन, नवाचार और निर्यात में लगातार वृद्धि ने भारत की पहचान एक विश्वसनीय वैश्विक दवा आपूर्तिकर्ता के रूप में और मजबूत की है। भारतीय दवा उद्योग वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आने वाले वर्षों में इसके और विस्तार की उम्मीद है।
-
दुर्घटना12 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
