राष्ट्रीय समाचार
सोने और चांदी में उछाल, करीब 1.1 प्रतिशत तक बढ़े दाम
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सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को उछाल देखने को मिला है और इससे दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 1.1 प्रतिशत तक बढ़ गया है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,48,858 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,49,355 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।
सुबह 10 बजे यह 793 रुपए या 0.53 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,49,651 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,49,164 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,49,648 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ है।
चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,25,836 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,27,993 रुपए प्रति किलो पर खुला।
फिलहाल यह 2,549 रुपए या 1.13 प्रतिशत की मजबूती के साथ 2,28,385 रुपए प्रति किलो पर था।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,27,481 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,28,401 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। सोना 0.56 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,323 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62.49 डॉलर प्रति औंस पर था।
जानकारों ने कहा कि हाल की तेजी को कमजोर अमेरिकी डॉलर और संभावित अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते को लेकर बढ़ती उम्मीदों का समर्थन मिला है, जिससे भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद बाजार का मूड सकारात्मक बना हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की उम्मीद है क्योंकि निवेशक बातचीत के बारे में और साफ जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि अगले 48 घंटों में कोई अहम नतीजा सामने आ सकता है। निवेशक शुक्रवार को आने वाले अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल्स (एनएफपी) और बेरोजगारी के आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे, क्योंकि ये आंकड़े फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों के नजरिए को लेकर उम्मीदें तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। तकनीकी तौर पर, उम्मीद है कि एमसीएक्स गोल्ड की ट्रेडिंग आने वाले समय में 1,47,000–1,52,000 रुपए प्रति 10 ग्राम की रेंज में होगी।
राष्ट्रीय समाचार
चार राज्यों में विधान परिषद चुनाव का ऐलान; 23 अक्टूबर को मतदान, 27 को होगी मतगणना

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव का ऐलान कर दिया है। इन चार राज्यों की कुल 28 सीटों पर चुनाव होगा, जहां मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म हो रहा है।
चुनाव आयोग ने बताया कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। कुल 28 सीटों में से बिहार की 8 सीटें, कर्नाटक की 4 सीटें, महाराष्ट्र की 5 सीटें और उत्तर प्रदेश की 11 सीटें शामिल हैं।
बिहार में 4 स्नातक और 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव होगा। इनमें पटना स्नातक से नीरज कुमार, दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार, तिरहुत स्नातक से बंसीधर ब्रजवासी और कोसी स्नातक से डॉ. एनके यादव का कार्यकाल 16 नवंबर को खत्म हो रहा है। वहीं पटना शिक्षक से नवल किशोर यादव, दरभंगा शिक्षक से डॉ. मदन मोहन झा, तिरहुत शिक्षक से संजय कुमार सिंह और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य का कार्यकाल भी इसी दिन समाप्त होगा।
बता दें कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र भारतीय राज्यों की विधान परिषद (उच्च सदन) के सदस्य (एमएलसी) चुनने के लिए बने विशेष क्षेत्र होते हैं, जहां आम जनता नहीं बल्कि केवल योग्य स्नातक और शिक्षक वोट डालते हैं।
कर्नाटक में 2 स्नातक और 2 शिक्षक सीटों पर चुनाव होगा। कर्नाटक दक्षिण-पूर्व स्नातक से चिदानंद एम गौड़ा, कर्नाटक पश्चिम स्नातक से एस.वी. संकानुर, कर्नाटक उत्तर-पूर्व शिक्षक से शशिल जी. नमोशी और बैंगलोर शिक्षक से श्री पुट्टन्ना का कार्यकाल 11 नवंबर को खत्म हो रहा है।
महाराष्ट्र में 3 स्नातक और 2 शिक्षक सीटों पर चुनाव होगा। औरंगाबाद डिवीजन स्नातक से चव्हाण सतीश भानुदासराव, पुणे डिवीजन स्नातक से अरुण गणपति लाड, नागपुर डिवीजन स्नातक से अभिजीत गोविंदराव वंजारी, अमरावती डिवीजन शिक्षक से सरनाईक किरण रामराव और पुणे डिवीजन शिक्षक से जयंत दिनकर आसगावकर का कार्यकाल 6 दिसंबर को समाप्त होगा।
उत्तर प्रदेश में 5 स्नातक और 6 शिक्षक सीटों पर चुनाव होगा। लखनऊ डिवीजन स्नातक से इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह, वाराणसी डिवीजन स्नातक से आशुतोष सिन्हा, आगरा डिवीजन स्नातक से डॉ. मानवेन्द्र प्रताप सिंह ‘गुरु जी’, मेरठ डिवीजन स्नातक से दिनेश कुमार गोयल और इलाहाबाद-झांसी डिवीजन स्नातक से डॉ. मान सिंह यादव का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को खत्म हो रहा है। इसी तरह लखनऊ शिक्षक से उमेश द्विवेदी, वाराणसी शिक्षक से लाल बिहारी यादव, आगरा शिक्षक से डॉ. आकाश अग्रवाल, मेरठ शिक्षक से श्रीचंद शर्मा, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक से हरि सिंह ढिल्लो और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक से ध्रुव कुमार त्रिपाठी का कार्यकाल भी 6 दिसंबर को समाप्त होगा।
चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, 29 सितंबर को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्तूबर तक है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी जबकि 9 अक्तूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।
मतदान 23 अक्तूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को होगी और 31 अक्टूबर तक पूरी चुनाव प्रक्रिया खत्म कर ली जाएगी।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में रूसी तेल की मांग आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े झटकों का परिणाम, डिस्काउंट नहीं: रिपोर्ट

भारत में रूसी तेल की मांग डिस्काउंट नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े झटकों का परिणाम है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत रूस से औसत 60 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात कर रहा है, जो कि वित्त वर्ष 23-26 में औसत 46 मिलियन बैरल कच्चे तेल से अधिक है।
एक्सिस बैंक की इकोनॉमिक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूस से 298 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात किया है।
हालांकि मार्च 2022 से जून 2023 के बीच भारत के आयातित कच्चे तेल में रूस की हिस्सेदारी शून्य से बढ़कर 30 प्रतिशत हो गई (जिसकी वजह शायद डिस्काउंट थी), लेकिन मार्च 2026 से हर दिन अतिरिक्त 1 मिलियन बैरल आयात को “सिर्फ कीमतों में बदलाव से नहीं समझाया जा सकता।”
रिपोर्ट में कहा गया, “पहला, 2023 से पश्चिम एशिया के मुकाबले रूसी कच्चे तेल पर औसत डिस्काउंट 3-5 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहा है। दूसरा, 7 डॉलर प्रति बैरल तक के प्रीमियम के बावजूद भारत के कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़ी है। अगर भारत स्पॉट मार्केट से ये अतिरिक्त 60-80 मिलियन बैरल खरीदता, तो तेल की कीमतें आज की तुलना में ज्यादा होतीं।”
रिपोर्ट के अनुसार, हाल के अनुभव से पता चलता है कि बहुत अधिक टैरिफ लगाने की धमकी, असल में टैरिफ लगाने की तुलना में व्यापार बातचीत में ज्यादा काम की होती है, और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे तौर पर अमेरिका में खुदरा महंगाई पर पड़ता है।
ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों के कारण रिपब्लिकन पहले से ही मध्यावधि चुनावों में मुश्किल स्थिति में हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, “कांग्रेस का समर्थन इस टैरिफ की धमकी को कानूनी रूप से मजबूत बनाता है, जबकि अतिरिक्त क्षमता पर सेक्शन 301 के तहत लंबित नतीजों से टैरिफ में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। भारत के लिए, एक काम का आधार वह 18 प्रतिशत की हेडलाइन दर है जिस पर फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा आईईईपीए अधिकार के तहत टैरिफ को अमान्य घोषित किए जाने से पहले सहमति बनी थी।”
जब इसे लागू किया जाता है, तो छूट के कारण प्रभावी दर भी हेडलाइन दर से कम होती है।
इस वित्त वर्ष (अब तक) में भारत का निर्यात साल-दर-साल 19 प्रतिशत बढ़ा है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो/पार्ट्स, धातु और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की मुख्य भूमिका रही है, साथ ही अमेरिका को होने वाले निर्यात में भी सुधार हुआ है।
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भारत की जीडीपी ग्रोथ वित्त वर्ष 27 में 7.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद, मौद्रिक नीति का महंगाई पर होगा फोकस: अर्थशास्त्री

भारत की विकास दर वित्त वर्ष 27 में औसत 7.3 प्रतिशत रह सकती है और इसे मजबूत कैपिटल इनफ्लो से सहारा मिलेगा। यह बयान डीबीएस बैंक में अर्थशास्त्री राधिका राव ने मंगलवार को दिया।
भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 27 की शुरुआत मजबूती से की है। इस दौरान पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर विकास दर 7.8 प्रतिशत रही, जिसे मजबूत घरेलू मांग, खपत, सरकारी पूंजीगत व्यय और मैन्युफैक्चरिंग का सहारा मिला।
डीबीएस बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राधिका राव ने कहा, “जीएसटी कलेक्शन, ई-वे बिल, बिजली की मांग और डिजिटल पेमेंट जैसे हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर मजबूत बने हुए हैं। हालांकि, वित्त वर्ष27 की दूसरी छमाही में विकास दर के धीमे होने की उम्मीद है, क्योंकि मुश्किल वित्तीय हालात, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और बड़ा आधार अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर असर डालेंगे।”
अगस्त में महंगाई दर बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई। चीनी, दूध, प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों और खाने के तेल जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ ऊर्जा और ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ने से यह दबाव बना।
औसत से कम मानसूनी बारिश और अल-नीनो का बढ़ता खतरा आने वाली फसल की पैदावार पर दबाव डाल सकता है।
राव के अनुसार, इन हालात को देखते हुए उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में हेडलाइन महंगाई दर 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी, जिससे मॉनेटरी पॉलिसी का मुख्य ध्यान महंगाई से जुड़े जोखिमों पर रहेगा।
इसके अलावा, विदेशी मुद्रा के आने में तेजी से बढ़ोतरी ने भारत के बाहरी बफर को मज़बूत किया है, लेकिन इससे लिक्विडिटी मैनेजमेंट की एक बड़ी चुनौती भी पैदा हुई है।
आरबीआई की स्पेशल स्वैप विंडो के जरिए 143 अरब डॉलर जुटाए गए हैं, जिसमें एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट के जरिए जुटाए गए 133 अरब डॉलर भी शामिल हैं। इससे विदेशी मुद्रा भंडार 780 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है।
अर्थशास्त्री का कहना है कि साथ ही, बैंकिंग सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी तेजी से बढ़ी है। इसलिए, अतिरिक्त लिक्विडिटी और यील्ड पर इसके असर को मैनेज करने के लिए वीआरआरआर और ओपन-मार्केट ऑपरेशन जैसे उपाय करने की जरूरत है।
डीबीएस को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 27 में करंट अकाउंट घाटा जीडीपी का लगभग 1.1 प्रतिशत रहेगा, जबकि कैपिटल इनफ्लो की वजह से बैलेंस ऑफ पेमेंट(बीओपी) अधिशेष में रह सकता है।
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