राष्ट्रीय समाचार
सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर ममता बनर्जी ने जताई चिंता, बोलीं- लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान होना चाहिए
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने केवल संवाद की मांग की थी, लेकिन उनकी अपील को कई सप्ताह तक नजरअंदाज किया गया।
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “सोनम वांगचुक की सेहत और कुशलक्षेम को लेकर मैं बेहद चिंतित हूं। उन्होंने केवल बातचीत की मांग की, लेकिन उनकी अपील का जवाब लंबे समय तक खामोशी से दिया गया। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण असहमति का सम्मान होना चाहिए, उसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। उनकी आवाज भी वैसे ही अनसुनी कर दी गई, जैसे देश के अनेक युवाओं की आवाजों को नजरअंदाज किया जा रहा है।”
शनिवार तड़के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वांगचुक की भूख हड़ताल का शनिवार को 21वां दिन था। वह कथित नीट-यूजी परीक्षा अनियमितताओं के मामले में केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं।
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि उसके संस्थापक अभिजीत दिपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। पार्टी ने यह भी कहा कि 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा।
ममता बनर्जी ने कहा कि सोनम वांगचुक को किसी निजी अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “जरूरत पड़ने पर उपचार का खर्च नागरिक स्वयं वहन करने के लिए भी तैयार हैं। जनता का विश्वास पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों के सम्मान से हासिल होता है, न कि शांतिपूर्ण आंदोलनों को दबाने या संवाद से बचने से। जो सरकार असहमति को लोकतांत्रिक जिम्मेदारी के बजाय खतरे के रूप में देखती है, वह जवाबदेही से बचते हुए जनता का विश्वास नहीं मांग सकती।”
इससे पहले 14 जुलाई को भी ममता बनर्जी ने दिल्ली में चल रहे सीजेपी के आंदोलन को अपना समर्थन दिया था। उन्होंने फोन पर सोनम वांगचुक की सेहत की जानकारी ली थी और छात्रों को न्याय दिलाने की मांग वाले इस आंदोलन के प्रति एकजुटता भी जताई थी।
ममता के समर्थन का स्वागत करते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया के जरिए उनका आभार व्यक्त किया।
गौरतलब है कि सीजेपी ने 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित नीट पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के समर्थन में आंदोलन शुरू किया था। सोनम वांगचुक शुरुआत से ही इस आंदोलन के साथ जुड़े रहे। बाद में उन्होंने घोषणा की थी कि यदि 27 जून तक केंद्र सरकार प्रश्नपत्र लीक मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो वह आमरण अनशन शुरू करेंगे। केंद्र से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर उन्होंने 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।
राष्ट्रीय समाचार
‘आत्मनिर्भर भारत’ का असली प्रमाण है विक्रम-1 की सफलता: गौतम अदाणी

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने शनिवार को स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल लॉन्चिंग पर बधाई देते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक मिशन भारत के निजी स्पेस इंडस्ट्री के लिए एक नए युग की शुरुआत है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना का सच्चा उदाहरण भी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में गौतम अदाणी ने कहा कि विक्रम-1 की पहली ऑर्बिटल फ्लाइट का सफल होना और मिशन के सभी उद्देश्यों को हासिल करना भारत के तेजी से उभरते निजी स्पेस इकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
उन्होंने कहा, “पवन चंदाना, भारत डाका, स्काईरूट एयरोस्पेस की शानदार टीम और इस मिशन को संभव बनाने वाले इसरो तथा आईएन-स्पेस को मेरी ओर से हार्दिक बधाई।”
गौतम अदाणी ने कहा कि विक्रम-1 ने अपनी पहली ऑर्बिटल फ्लाइट में मिशन के सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए एक नए दौर की शुरुआत कर दी है।
उन्होंने कहा, “इतिहास रच दिया गया है। विक्रम-1 ने अपनी पहली ऑर्बिटल फ्लाइट में मिशन के सभी उद्देश्यों को शानदार तरीके से पूरा किया है। यही ‘आत्मनिर्भर भारत’ का असली प्रमाण है।”
मिशन को भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता और नवाचार की ताकत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है।
उन्होंने कहा, “इस टीम की औसत उम्र सिर्फ 28 वर्ष है। यह पूरी दुनिया के लिए इस बात का प्रमाण है कि युवा भारत क्या हासिल कर सकता है। जय हिंद!”
इससे पहले शनिवार को हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने ‘मिशन आगमन’ के तहत विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण किया। इसके साथ ही भारत, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा ऐसा देश बन गया, जहां किसी निजी कंपनी ने सफलतापूर्वक रॉकेट को ऑर्बिट में पहुंचाने की क्षमता प्रदर्शित की है।
भारत के स्पेस प्रोग्राम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर विकसित चार चरणों वाला विक्रम-1 लॉन्च व्हीकल छोटे सैटेलाइट्स के लिए तेज और मांग के अनुसार लॉन्च सर्विस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
यह मिशन वैश्विक कमर्शियल लॉन्च मार्केट में भारत की स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।
करीब सात मंजिला ऊंचा यह रॉकेट पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट – एलईओ) में लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचने के लिए भेजा गया है।
इस सफल लॉन्चिंग के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियों ने ऑर्बिटल लॉन्च की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है।
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सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में भर्ती, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा; पत्नी बोलीं- परिवार की सहमति बिना शुरू न हो इलाज

दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है। उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज 21वां दिन था। शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें मेडिकल आधार पर जंतर-मंतर स्थित विरोध स्थल से हटाया। फिलहाल, सफदरजंग अस्पताल के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
सफदरजंग अस्पताल के अंदर और बाहर दिल्ली पुलिस की टीमें तैनात हैं। सोनम वांगचुक के समर्थक अस्पताल के अंदर न घुस सकें, इसके लिए पैरामेडिकल कोर्स को भी तैनात किया गया है।
हालांकि, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजंलि अंग्मो अस्पताल पहुंची हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “मैं दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हूं, जहां सोनम वांगचुक को भर्ती कराया गया है। मेरी, उनके परिवार और उन डॉक्टरों की सहमति के बिना उन्हें मुंह से या नस के जरिए कोई भी दवा या चीज नहीं दी जानी चाहिए, जो पिछले 20 दिनों से उनकी सेहत पर नजर रखे हुए हैं।”
इससे पहले, सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाते समय दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की धक्कामुक्की भी हुई। उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस की टीम भीड़ के बीच से सोनम वांगचुक को लेकर मंच से उतरी और उन्हें एंबुलेंस के जरिए अस्पताल लाया गया।
फिलहाल प्रदर्शन स्थल पर स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी तरह की अप्रिय घटना या उपद्रव की सूचना नहीं है। पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।
दिल्ली पुलिस ने ‘एक्स’ पोस्ट में बताया कि हाईकोर्ट के आदेशों और मेडिकल एक्सपर्ट्स की सलाह के अनुसार सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें जरूरी मेडिकल देखभाल के लिए अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए प्रदर्शनकारियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे थोड़ी अफरातफरी मची, लेकिन पुलिस ने बहुत संयम बरता और पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से पूरा किया। हम जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से अपील करते हैं कि वे जल्द से जल्द शांतिपूर्ण तरीके से जगह खाली कर दें।
नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हाईकोर्ट के आदेशानुसार और स्वास्थ्य की स्थिति व मेडिकल सलाह के अनुसार सोनम वांगचुक को जरूरी मेडिकल इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में ले जाया गया है। वे अभी मेडिकल निगरानी में हैं।”
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पश्चिम बंगाल: मुर्शिदाबाद में स्कूल वैन से टकराई ट्रेन, तीन छात्रों समेत चार लोगों की मौत

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में शुक्रवार सुबह ट्रेन ने स्कूल वैन को टक्कर मार दी। इस भयानक हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जिनमें तीन स्कूली बच्चे भी शामिल थे। अन्य तीन छात्र और स्कूल वैन चालक गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
शुरुआती जांच से पता चला है कि रेल गेट को संभालने में रेलवे गेटमैन की गलती इस हादसे की वजह थी। यह जानकारी होने के बावजूद कि निमतिता-कटवा लोकल ट्रेन तेज रफ्तार से आ रही थी, उसने रेल-गेट खुला रखा।
स्थानीय लोगों और चश्मदीदों ने बताया कि हादसा सुबह करीब 7 बजे हुआ। उस समय निमता-कटवा लोकल ट्रेन आ रही थी। चश्मदीदों का दावा है कि ठीक उससे पहले, हावड़ा जाने वाली नबद्वीप एक्सप्रेस गुजरी थी और गोविंदपुर रेल गेट बंद नहीं किया गया था।
उन्होंने कहा, “गेट खुला देखकर कई स्कूली छात्रों को ले जा रही स्कूल वैन ने रेलवे लाइन पार करना शुरू किया। उसी पल निमतिता-कटवा लोकल ट्रेन तेज रफ्तार से आई और सीधे स्कूल वैन को टक्कर मार दी।”
एक चश्मदीद ने मीडिया को बताया, “स्कूल वैन के ड्राइवर की कोई गलती नहीं थी। वह रेलवे लाइन पार कर रहा था और उसे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि ट्रेन तेज रफ्तार से आ रही है।
ट्रेन की टक्कर से स्कूल वैन पूरी तरह से चकनाचूर हो गई। स्थानीय लोगों ने बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस को घटना की सूचना दी गई। मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लिया और सभी घायलों को अस्पताल भिजवाया।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “तीन स्कूली बच्चों समेत चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। तीन अन्य बच्चों और स्कूल वैन के ड्राइवर की हालत गंभीर है। उन्हें पास के बहरामपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। मरने वालों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।”
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