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Sunday,16-August-2026
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देश की शीर्ष 10 में से छह कंपनियों का मार्केटकैप 88 हजार करोड़ रुपए से अधिक बढ़ा, आईसीआईसीआई बैंक टॉप गेनर रहा

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देश की शीर्ष 10 में से छह कंपनियों का मार्केटकैप बीते हफ्ते 88,678.1 करोड़ रुपए बढ़ा है। इसमें आईसीआईसीआई बैंक के बाजार पूंजीकरण में सबसे अधिक इजाफा हुआ है।

इसके अतिरिक्त, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फाइनेंस, एसबीआई और एलएंडटी के मार्केटकैप में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, भारती एयरटेल, एलआईसी, टीसीएस और एचयूएल के बाजार पूंजीकरण में गिरावट दर्ज की गई है।

आईसीआईसीआई बैंक के वैल्यूएशन में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई और इसका मार्केट कैप 29,588.75 करोड़ रुपए बढ़कर 9,95,610.74 करोड़ रुपए हो गया।

एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण 24,718.3 करोड़ रुपए बढ़कर 12,25,981.44 करोड़ रुपए हो गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केटकैप 12,043.96 करोड़ रुपए बढ़कर 17,83,926.92 करोड़ रुपए हो गया है।

बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 11,580.28 करोड़ रुपए बढ़कर 6,10,081.53 करोड़ रुपए, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का बाजार पूंजीकरण 9,322.93 करोड़ रुपए बढ़कर 9,64,738 करोड़ रुपए और एलएंडटी का बाजार पूंजीकरण 1,423.88 करोड़ रुपए बढ़कर 5,80,550.83 करोड़ रुपए हो गया है।

दूसरी तरफ, भारती एयरटेल का मार्केटकैप 35,615.21 करोड़ रुपए घटकर 11,27,348.09 करोड़ रुपए, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (एलआईसी) का मार्केटकैप 21,188.74 करोड़ रुपए कम होकर 5,35,537.56 करोड़ रुपए, टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का बाजार पूंजीकरण 11,143.71 करोड़ रुपए घटकर 7,58,206.42 करोड़ रुपए और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) का मार्केटकैप कम होकर 5,321.83 करोड़ रुपए घटकर 5,10,624.92 करोड़ रुपए हो गया है।

बीते हफ्ता शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव भरा रहा। इस दौरान सेंसेक्स 0.39 प्रतिशत बढ़कर 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,056 पर बंद हुआ।

भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होने वाला है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील, कच्चे तेल की कीमत, एफआईआई का रुझान और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से शेयर बाजार की चाल निर्धारित होगी।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अगले हफ्ते निवेशकों की निगाहें रहेंगी। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा था कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं।

राष्ट्रीय समाचार

साइबर सुरक्षा आकलन में मानवीय निर्णय क्षमता की परीक्षा को एनआईईएलआईटी ने ‘साइबर कुश्ती 2026’ लॉन्च किया

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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) ने ‘साइबर कुश्ती 2026’ की शुरुआत की है। यह एक राष्ट्रव्यापी साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हैकाथॉन है, जिसका उद्देश्य प्रतिभागियों की केवल कमजोरियों की पहचान करने की क्षमता नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा आकलन के दौरान मानवीय निर्णय क्षमता का परीक्षण करना है। इसकी घोषणा रविवार को की गई।

‘साइबर कुश्ती 2026’ को साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक और इंटेलिजेंस पर आयोजित तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन (एनसीसीडीएफआई 2026) के आधिकारिक समानांतर तकनीकी ट्रैक के रूप में शुरू किया गया है। इस पहल का आयोजन नेशनल सिक्योरिटी डेटाबेस (एनएसडी) के अंतर्गत इन्फॉर्मेशन शेयरिंग एंड एनालिसिस सेंटर के सहयोग से किया जा रहा है, जबकि सीईआरटी-इन इसमें नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभा रहा है।

प्रतियोगिता के लिए पंजीकरण 15 अगस्त से शुरू हो चुका है और 10 सितंबर तक जारी रहेगा। इसमें भाग लेना पूरी तरह निःशुल्क है और तीन सदस्यीय टीमों में छात्र तथा स्वतंत्र शोधकर्ता हिस्सा ले सकते हैं। पारंपरिक साइबर सुरक्षा प्रतियोगिताओं से अलग, जो मुख्य रूप से कमजोरियों की पहचान या ‘कैप्चर द फ्लैग’ (सीटीएफ) चुनौतियों पर केंद्रित होती हैं, ‘साइबर कुश्ती 2026’ को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह प्रतिभागियों की सुरक्षा जोखिमों का मूल्यांकन और प्राथमिकता तय करने की क्षमता की जांच कर सके।

आयोजकों ने कहा कि यह प्रतियोगिता ऐसे पेशेवरों की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो स्वचालित प्रणालियों द्वारा उत्पन्न गलत संकेतों (फॉल्स पॉजिटिव) और वास्तविक खतरों के बीच अंतर कर सकें।

प्रतियोगिता के प्रारूप के तहत सभी टीमों को एक समान, जानबूझकर अपूर्ण रखा गया ‘सिक्योरिटी असेसमेंट पैकेज’ प्रदान किया जाएगा। इस पैकेज में एआई द्वारा तैयार निष्कर्ष, सोर्स कोड, एप्लिकेशन लॉग, आर्किटेक्चर दस्तावेज, स्टैटिक एनालिसिस रिपोर्ट, डिपेंडेंसी स्कैन और सीक्रेट्स स्कैन जैसी सामग्री शामिल होगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि प्रतिभागियों की विश्लेषणात्मक क्षमता को परखने के लिए आयोजकों ने जानबूझकर इसमें कुछ गलत, दोहराए गए और वास्तविक निष्कर्ष शामिल किए हैं, जबकि कुछ वास्तविक कमजोरियों को छोड़ा भी गया है। प्रतिभागियों को एक संशोधित और प्राथमिकता-आधारित सुरक्षा आकलन रिपोर्ट तैयार करनी होगी तथा अपने निष्कर्षों और निर्णयों का स्पष्ट औचित्य भी बताना होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिभागियों को केवल वास्तविक सुरक्षा खामियों की पहचान करने के लिए ही नहीं, बल्कि गलत या भ्रामक निष्कर्षों को सही ढंग से खारिज करने के लिए भी पुरस्कृत किया जाएगा।

कार्यक्रम के शुभारंभ पर प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि साइबर सुरक्षा का परिदृश्य अब केवल समस्याओं की पहचान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तय करना अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि कौन-सी खामियां सबसे गंभीर हैं और किन पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मशीनें बड़े पैमाने पर सुरक्षा संबंधी निष्कर्ष तैयार कर सकती हैं, लेकिन उनकी सत्यता की पुष्टि करने और प्राथमिकता तय करने के लिए मानवीय विवेक और निर्णय क्षमता अब भी अपरिहार्य है।

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राष्ट्रीय समाचार

ब्राह्मण चेहरों के अभाव में बसपा 2027 में कैसे साधेगी सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला?

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 2007 के विधानसभा चुनाव में दलित-ब्राह्मण गठजोड़ के जरिए यूपी में सत्ता हासिल की थी, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामने उस सामाजिक गठजोड़ को फिर से मजबूत करने की चुनौती है।

पिछले कुछ वर्षों में बसपा के कई प्रमुख ब्राह्मण चेहरे पार्टी से अलग हुए या निष्कासित किए गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मायावती पुराने चेहरों के आभाव के बीच ब्राह्मण समाज और अन्य सामाजिक समूहों को साथ लेकर नया सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला कैसे तैयार करेंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2007 में बसपा की सत्ता में वापसी में ब्राह्मण मतदाताओं के एक बड़े हिस्से का समर्थन महत्वपूर्ण रहा था। उस समय पार्टी ने दलित आधार के साथ ब्राह्मण समाज को जोड़कर व्यापक सामाजिक गठजोड़ तैयार किया था। अब पार्टी के सामने चुनौती केवल नए ब्राह्मण चेहरों को आगे बढ़ाने की नहीं, बल्कि समाज के बीच पुराने भरोसे को दोबारा कायम करने की भी है।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि बसपा के सामने इस समय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भरोसा बनाए रखने की चुनौती है। हाल ही में अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को पार्टी से निष्कासित किया गया है। इससे पहले राकेशधर त्रिपाठी, रंगनाथ मिश्रा, रामू द्विवेदी, कुशल तिवारी, विनय शंकर तिवारी, ब्रजेश पाठक और गुड्डू त्रिपाठी जैसे कई प्रमुख ब्राह्मण चेहरे बसपा से अलग हो चुके हैं। रामवीर उपाध्याय का परिवार भी बसपा की राजनीति में सक्रिय रहा है। इनमें से कई नेता बाद में दूसरे राजनीतिक दलों में महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई दिए और कुछ को मंत्री पद भी मिला।

विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक, वर्तमान में सतीश चंद्र मिश्रा बसपा के प्रमुख ब्राह्मण चेहरे के रूप में पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं। ऐसे में 2027 में सत्ता की दावेदारी के लिए मायावती को केवल ब्राह्मण समाज ही नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संतुलन साधते हुए संगठन को भी मजबूत करना होगा।

ब्राह्मण संगठन से जुड़े अभिषेक पांडेय कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण है। कई विधानसभा क्षेत्रों में यह समुदाय चुनावी मुकाबले को प्रभावित करने की स्थिति में रहता है। ऐसे में 2027 से पहले ब्राह्मण समाज का समर्थन हासिल करना किसी भी राजनीतिक दल के व्यापक सामाजिक गठजोड़ की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।

हालांकि, मायावती का कहना है कि पार्टी से निकाले गए या निजी स्वार्थ के चलते दूसरे दलों में गए नेताओं के राजनीतिक समर्पण का आकलन उनके कार्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे कई लोगों ने बसपा सरकार के दौरान भी अपने निजी और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता दी और पार्टी तथा समाज के हित में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई।

मायावती ने यह भी कहा कि पार्टी में लंबे समय से ईमानदार और निष्ठावान वरिष्ठ नेता नए कर्मठ एवं समर्पित कार्यकर्ताओं, खासकर युवाओं को तैयार कर रहे हैं। पार्टी की यह ‘नर्सरी’ लगातार जारी है और नए लोगों को संगठन में आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है।

बसपा से निष्कासित अनंत मिश्रा ने कहा कि 2007 में ब्राह्मण समाज को बसपा से जोड़ने में सतीश मिश्रा के चेहरे, मायावती के प्रति समाज के भरोसे और जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने कहा कि उस समय ब्राह्मण समाज को सम्मान और राजनीतिक भागीदारी का स्पष्ट संदेश मिला था। लगातार पार्टी के राजनीतिक प्रदर्शन में गिरावट पर नेतृत्व को आत्मचिंतन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अब वह अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच जाकर उनकी राय लेंगे और उनके सुझाव के आधार पर आगे की रणनीति तय करेंगे।

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राष्ट्रीय समाचार

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस नेता और उनके बेटे की गोली मारकर हत्या, नेताओं ने सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल

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नादिया जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष अनीसुर रहमान और उनके बेटे अबू सुफियान रहमान की शनिवार रात नकाशीपाड़ा अंडरपास के पास कथित तौर पर गोली मारकर और धारदार हथियार से हमला करके हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि पिता-पुत्र कार से घर लौट रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ। जिस गाड़ी पर गोलियों के कई निशान हैं, उसे पुलिस ने जब्त कर लिया है। पश्चिम बंगाल की नकाशीपाड़ा पुलिस ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है। वहीं, विपक्षी दल के नेताओं ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

नादिया के नकाशीपाड़ा में कांग्रेस नेता अनीसुर रहमान और उनके बेटे की हत्या पर सीपीआईएम नेता मीनाक्षी मुखर्जी ने आईएएनएस से कहा, “कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल के हालात नहीं बदले हैं। सिर्फ तीन महीने पहले ही एक पार्टी ने सरकार बनाई थी, फिर भी पश्चिम बंगाल को हत्या, जबरन वसूली, आम लोगों की समस्याओं, महिलाओं पर अत्याचार, रिश्वतखोरी, दबदबे और पुलिस की प्रताड़ना से कोई आजादी नहीं मिली है। ये वे मुद्दे हैं जिन पर लोगों ने अपनी चिंता जाहिर की थी। इसके बजाय, एक पार्टी के जाने के बाद दूसरी पार्टी आ गई है, जो बिल्कुल उसी अंदाज में काम कर रही है, लेकिन राज्य को चलाने के लिए और भी अधिक खतरनाक और अहंकारी तरीका अपना रही है।”

कांग्रेस नेता पूजा रॉय चौधरी ने कहा, “नादिया के नकाशीपाड़ा में सबसे अधिक गुंडागर्दी, हंगामा और दादागीरी होती है। यहां आए दिन बवाल होता रहता है। डबल मर्डर हो गया लेकिन पुलिस को पहले से इसकी खबर नहीं थी। अस्पताल ने बताया है गोली किसी पेशेवर अपराधी ने मारी थी। अनीसुर रहमान को 13 और उनके बेटे को 12 गोलियां मारी गई। इस मामले में जिस टीएमसी नेता का नाम सामने आ रहा है, पुलिस उसे क्यों नहीं गिरफ्तार कर पा रही है?

राज्य कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पांच बार लोकसभा सदस्य रहे अधीर रंजन चौधरी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि हालांकि राज्य में मौजूदा भाजपा सरकार ‘डर खत्म, भरोसा कायम’ के नारे के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन असल में स्वतंत्रता दिवस पर हुई ऐसी भयानक घटना ने लोगों की सुरक्षा और राजनीति में खुलकर हिस्सा लेने के अधिकार पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने मामले की उचित और निष्पक्ष जांच और दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। चौधरी ने कहा, “कांग्रेस नेतृत्व इस मुश्किल समय में पीड़ित परिवार के साथ है।”

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में अल्पसंख्यकों और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिशों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी, और इसलिए कांग्रेस कार्यकर्ता आज पूरे राज्य में काला दिवस मना रहे हैं।

स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह हमला जेल में बंद तृणमूल कांग्रेस नेता जुब्बार शेख के “आदेश” पर किया गया था। “जुब्बार ने जेल से ही बदमाशों का इस्तेमाल करके इस इलाके पर कब्जा करने के लिए यह घटना करवाई। अगर प्रशासन उचित और निष्पक्ष जांच करे, तो यह मामला पूरी तरह साफ हो जाएगा।” स्थानीय कांग्रेस नेता टीपू सुल्तान ने मीडिया से कहा, “हम कड़ी से कड़ी सजा की मांग करते हैं।”

कृष्णानगर पुलिस जिले के अतिरिक्त अधीक्षक (ग्रामीण) सुरजीत कुमार ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच चल रही है। अभी इस बारे में और कुछ भी कहना संभव नहीं है।

इसके पहले पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट किया था, “नादिया के कांग्रेस नेता अनीसुर रहमान और उनके बेटे अबू सुफियान की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। हम लोकतंत्र में यकीन रखने वाले सभी लोगों से अपील करते हैं कि वे बंगाल में इस हत्या की राजनीति के खिलाफ एकजुट हों। इस बर्बर हत्याकांड के विरोध में, राज्य भर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कल (16 अगस्त ’26) ‘काला दिवस’ मनाने की अपील की जा रही है।”

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