महाराष्ट्र
मुंबई में नाले की सफाई में लापरवाही और ढिलाई बरतने पर ठेकेदारों पर जुर्माना, मुंबई नगर निगम प्रशासन ने की सख्त कार्रवाई
मुंबई महानगरपालिका ने नाले की सफाई के काम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम से मिली कमियों और टेंडर की शर्तों के मुताबिक मशीनरी लगाने में देरी के लिए ठेकेदारों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। साथ ही, संबंधित ठेकेदारों पर 92,572,830 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह जुर्माना ठेकेदार के बिलों से वसूला जा रहा है।
मनपा कमिश्नर अश्विनी भिड़े के निर्देश पर सीवरेज विभाग ने यह कार्रवाई की है। हर साल मुंबई में बारिश शुरू होने से पहले महानगरपालिका का सीवरेज विभाग मुंबई महानगर क्षेत्र की मीठी नदियों और बड़े नालों से गाद निकालता है। जबकि छोटे नालों से गाद निकालने का काम वार्ड लेवल पर किया जाता है। नेचुरल नालों, बरसाती नालों, अंडरग्राउंड नालों, चैंबरों और पुलों को खोलकर साफ किया जाता है। नालों से कचरा निकालने से बारिश के पानी की निकासी तेजी से होती है। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में बारिश के अनुभव और बारिश की तेज़ी को ध्यान में रखते हुए, नालों से कितनी गाद निकालनी है, इसकी स्टडी करके गाद हटाने का टारगेट तय किया जाता है। हर साल की तरह इस साल भी मार्च के पहले हफ़्ते में नालों से गाद निकालने का काम तेज़ी से शुरू किया गया। म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने सिस्टम को इन नाले की सफ़ाई के कामों पर असरदार तरीके से नज़र रखने का निर्देश दिया है। गाद हटाने का काम ठीक से हो और उसकी मॉनिटरिंग हो, यह पक्का करने के लिए म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन ने पिछले साल से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) सिस्टम बनाया है। इस सिस्टम के ज़रिए नालों की सफ़ाई के काम पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। इसके मुताबिक, इन कामों के लिए फ़ोटोग्राफ़ी के साथ 30 सेकंड की फ़िल्मिंग (वीडियो) ज़रूरी कर दी गई है। जबकि छोटे नालों से गाद निकालने से पहले और बाद में सीसीटीवी से फ़िल्मिंग और वीडियो बनाना ज़रूरी कर दिया गया है। म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन कचरा हटाने से जुड़े मिले सभी वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम की मदद से एनालाइज़ कर रहा है। इससे एडमिनिस्ट्रेशन को नालों से कचरा हटाने के कामों पर सही तरीके से नज़र रखने और कामों में पूरी ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने में मदद मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम को लागू करते हुए, एआई सिस्टम सभी अपलोड की गई तस्वीरों और वीडियो की स्क्रीनिंग करता है। यह उनमें त्रुटियों का भी पता लगाता है। इन त्रुटियों और कमियों का पता लगाने के लिए मानदंड तय किए गए हैं। जब वाहन वजन के लिए वेब्रिज पर पहुंचता है, तो तिरपाल हटाया जा रहा है या नहीं (तिरपाल का पता लगाना), एक ही तस्वीर का दोबारा उपयोग या तस्वीरों में असंगति (इमेज घोस्टिंग), कीचड़ निपटान के दौरान वाहन से उड़ने वाली धूल की मात्रा का अवलोकन (धूल निरीक्षण), तस्वीर की उपलब्धता (आवश्यक उपलब्धता), तस्वीर की अनुपलब्धता (मैनुअल निरीक्षण), कीचड़ उतारने के संचालन के वीडियो का अपलोड न करना (उतारने का वीडियो उपलब्ध नहीं) और पंजीकृत वाहनों या कार्य कोड और वास्तविक कार्य विवरण के बीच विसंगतियों (वाहन/कार्य कोड बेमेल) का पता इन महत्वपूर्ण पहलुओं के अनुसार लगाया गया है। इसके अलावा, नाले की सफ़ाई के काम में कई तरह की कमियां पाई गई हैं, जैसे ज़रूरी प्लांट, मशीनरी और गाड़ियों का कम होना, मैनपावर की कमी, नाले की सफ़ाई का काम करने वाले मज़दूरों को सुरक्षा उपकरण न देना, जमा हुए कीचड़ को तय तरीके से प्रोसेस न करना और तय समय में काम में धीरे काम करना।
एआई-बेस्ड इंस्पेक्शन, डिजिटल सबूतों के वेरिफ़िकेशन और फ़िज़िकल साइट इंस्पेक्शन की वजह से काम में हुई गलतियों का समय पर पता चला और संबंधित कॉन्ट्रैक्टर पर फ़ाइनेंशियल ज़िम्मेदारी तय की गई है। काम में हुई गलती के हिसाब से पेनल्टी की रकम तय की गई है और कॉन्ट्रैक्टर से मिलने वाली रकम में से पेनल्टी की रकम वसूली जा रही है।
एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (प्रोजेक्ट्स) अभिजीत बांगर ने कहा कि म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन नाले की सफ़ाई के काम में क्वालिटी और ट्रांसपेरेंसी को लेकर बहुत सजग है। नाले की सफ़ाई के काम में कोई भी गलती, चाहे जानबूझकर हो या अनजाने में, माफ़ करने लायक नहीं है। इस मामले में एडमिनिस्ट्रेशन की ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी बनी हुई है। एक तरफ़, नाले की सफ़ाई के काम की क्वालिटी को बेहतर बनाने की बहुत कोशिश की गई है और किए गए काम की क्वालिटी बनाए रखने की कोशिश की गई है। हालांकि, टेक्नोलॉजी के ज़रिए काम करके कॉन्ट्रैक्टर की छोड़ी गई गलतियों को ढूंढकर सज़ा देने वाली कार्रवाई की गई है और इस कार्रवाई का मकसद यह मैसेज देना है कि नाले की सफ़ाई के काम में पूरी तरह से लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर भविष्य में कोई चूक पाई जाती है, तो नगर निगम प्रशासन सख्त रुख अपनाएगा। अभिजीत बांगर ने कहा कि ए आई-बेस्ड मॉनिटरिंग और ऑन-साइट इंस्पेक्शन सिस्टम दोनों ने नालों की सफ़ाई के काम में हुई कमियों को असरदार तरीके से सामने लाया है। खास तौर पर, साइट इंस्पेक्शन न करना और वीडियो अपलोड न करना सज़ा देने वाली कार्रवाई के मुख्य कारण थे।
महाराष्ट्र
सीएम फडणवीस का विपक्ष पर हमला, प्रशांत भूषण की टिप्पणी के बाद कहा- ‘आखिर होठों पर आ गई मन में छुपी बात’

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के विवादित ‘सत्ता परिवर्तन’ (रेजीम चेंज) बयान के बाद छिपा हुआ सच आखिरकार सामने आ गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रशांत भूषण का एक वीडियो क्लिप शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “हो गया भाई, सब कुछ सामने आ गया। आखिरकार, यह सब ‘सत्ता परिवर्तन’ (रेजीम चेंज) के बारे में ही तो था।”
मुख्यमंत्री फडणवीस ने विपक्ष पर अराजकता फैलाने और सत्ता हथियाने के लिए विरोध प्रदर्शनों को एक बहाने के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। फडणवीस ने अपने पोस्ट में लिखा, “आखिर मन में छुपी बात होठों पर आ ही गई। सारा खेल सत्ता की कुर्सी पाने का है, फिर उसके लिए विद्यार्थियों और किसानों को उकसाना ही क्यों ना पडे। जाति और भाषा के नाम पर द्वेष फैलाना पडे, या देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं की प्रतिमा मलीन करनी पडे।”
विपक्षी दलों और प्रशांत भूषण पर हमला जारी करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाना ही ‘इनका’ उद्देश्य है।”
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब प्रशांत भूषण ने सीजेपी प्रतिनिधियों और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खुले तौर पर ‘सत्ता परिवर्तन’ (रेजीम चेंज) से जुड़े उद्देश्यों पर चर्चा की।
इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर शांतिपूर्ण आंदोलन की आड़ में सुनियोजित तरीके से अराजकता फैलाने के आरोप लगाए। सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं का कहना है कि इन बयानों (प्रशांत भूषण की टिप्पणी) ने विपक्ष के असली एजेंडे को उजागर कर दिया है।
तीखी आलोचना के बाद सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने सफाई देने की कोशिश की। देर रात हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिपके ने कहा कि उनके विरोध-प्रदर्शन का मकसद ‘सत्ता परिवर्तन’ नहीं था, बल्कि वे सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
महाराष्ट्र
विरार में महिला ने की आत्महत्या, फिल्म इंडस्ट्री में काम दिलाने के नाम पर ब्लैकमेलिंग का आरोप, आरोपी की तलाश जारी

महाराष्ट्र के विरार में एक महिला की आत्महत्या का मामला सामने आया है। महिला ने ओलांडा स्थित एक सार्वजनिक पार्क में कीटनाशक पी लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटनास्थल पर मिले सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अर्नाला सागरी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सतीश निकम ने बताया कि मृतका (ननीली जोशी ) जेपी नगर की रहने वाली थी। आत्महत्या से पहले लिखे गए सुसाइड नोट में ‘पतकी’ नामक व्यक्ति पर फिल्म इंडस्ट्री में काम दिलाने के बहाने महिला से समय-समय पर पैसे लेने और बाद में निजी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर कथित तौर पर ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, सुसाइड नोट में उल्लेख है कि महिला जनवरी से आरोपी के संपर्क में थी। आरोप है कि फिल्म इंडस्ट्री में काम दिलाने का भरोसा देकर उससे पैसे लिए गए। इसके बाद दोनों के बीच संबंध बने और इस दौरान महिला के कुछ निजी वीडियो बनाए गए। महिला को कथित तौर पर इन वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर दोबारा पैसों की मांग की जा रही थी।
चिट्ठी में करीब एक करोड़ रुपए की रकम का उल्लेख किया गया है। हालांकि, पैसों के लेन-देन और कथित मांग की सटीक रकम की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
मृतका के भाई ने भी पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि महिला और आरोपी जनवरी से एक-दूसरे के संपर्क में थे। शिकायत के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर अलग-अलग बहानों से महिला को परेशान और ब्लैकमेल कर रहा था। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सतीश निकम के मुताबिक, आरोपी मुंबई का रहने वाला है और मृतका का परिचित बताया जा रहा है। फिलहाल उसका मोबाइल फोन बंद है। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है। मृतका के भाई को भी आरोपी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होने के कारण पुलिस उसके अन्य विवरण जुटाने में लगी है।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 308 (जबरन वसूली) के तहत मामला दर्ज किया है। घटनास्थल का पंचनामा और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सतीश निकम के अनुसार, फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है और आरोपी (योगेश म्हापणकर उर्फ सौरभ पतकी) की गिरफ्तारी पुलिस की प्राथमिकता है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र : एसटी बस में बुजुर्ग यात्री से जेवर और नकदी चोरी, 4 महिला चोर गिरफ्तार

ARREST
महाराष्ट्र के वाशिम जिले में एक स्टेट ट्रांसपोर्ट (एसटी) बस में यात्रा कर रही 70 वर्षीय महिला से 1.5 लाख रुपये के सोने के गहने और 28,000 रुपये नकद चुराने के आरोप में चार महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बुधवार को इस बारे में जानकारी दी।
पुलिस ने चोरी हुए गहने और नकदी बरामद कर बुजुर्ग महिला, जिनकी पहचान चंद्रकला बोडखे के रूप में हुई है, को वापस कर दिए।
यह घटना मंगरुलपीर से अकोला जा रही एसटी बस में हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, चारों आरोपियों ने यात्रा के दौरान बुजुर्ग यात्री के उस बैग को निशाना बनाया जिसमें सोने के गहने और नकदी थी।
जब बस शेलू बाजार पहुंची, तो चारों महिलाएं उतर गईं। अन्य यात्रियों को शक हुआ, जिसके बाद बोडखे ने अपना बैग चेक किया और पाया कि उनके सोने के गहने और 28,000 रुपये नकद वाला बैग गायब था। बुजुर्ग महिला ने शोर मचाया और अन्य यात्रियों से मदद मांगी।
घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि चारों महिलाएं ऑटो-रिक्शा से उस इलाके से चली गई थीं।
तेजी से कार्रवाई करते हुए पुलिस ने संदिग्धों का पीछा किया और चारों महिलाओं को पकड़ लिया। उनके पास से चोरी हुए सोने के गहने और नकदी बरामद की गई और बाद में बुजुर्ग महिला को वापस सौंप दी गई।
यह घटना भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करने वाले यात्रियों, खासकर कीमती सामान ले जाने वाले बुजुर्ग यात्रियों के लिए सतर्क रहने की जरूरत को उजागर करती है।
एक अलग घटना में, पुणे पुलिस ने शहर में दर्ज चोरी के नौ मामलों के सिलसिले में हरियाणा के तीन लोगों को गिरफ्तार किया। कई राज्यों में लगभग 4,600 किलोमीटर की यात्रा वाली जांच के बाद पुलिस ने लगभग 23 लाख रुपये का कीमती सामान जब्त किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने गणेशोत्सव समारोह और गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान भीड़-भाड़ वाली जगहों पर लोगों को निशाना बनाया था। इन मामलों की जांच विश्रामबाग पुलिस ने की, जिसने संदिग्धों की पहचान हरियाणा के पलवल के रहने वालों के तौर पर की।
इस बीच, गुजरात की अरावली पुलिस ने एक अन्य मामले के सिलसिले में उन्हीं तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। गुजरात पुलिस की मदद से पुणे पुलिस की एक टीम ने आरोपियों को हिरासत में लिया। उनकी पहचान अजय शमशेर विनोद कुमार रूपसिंह कोली (20), अमन शमशेर अनिल कुमार नारायणसिंह कोली (24) और दीपक शमशेर राजूभाई सापसिंह (21) के तौर पर हुई।
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