राजनीति
दिल्ली-बिहार अग्निकांड पर शिवसेना (यूबीटी) का भाजपा सरकार पर हमला, बोली- कुछ नहीं बदला है
मुंबई, 5 जून: शिवसेना (यूबीटी) ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि दिल्ली के एक होटल और बिहार के एक अस्पताल में हाल ही में लगी आग की घटनाओं, जिनमें कई लोगों की जान चली गई, इसने प्रशासन में गहरी जड़ें जमा चुकी प्रशासनिक खामियों को फिर से उजागर कर दिया है।
पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया है कि इस भयंकर आग में आम नागरिकों की जिंदगी कपूर की तरह जलकर राख हुई है।
इसमें कहा गया है कि जो लोग देश बदल रहा है का दावा करते हैं, उनके शासन में असल में कुछ भी नहीं बदला है।
ठाकरे गुट ने कहा कि जो लोग देश में यह दहाड़ते हैं कि मैं किसी को रिश्वत नहीं लेने दूंगा, उन्हीं के घर के नीचे अंधेरा है। इसीलिए कहीं अवैध इमारतें गिर रही हैं तो कहीं होटलों और रेस्तरां में आग लग रही है और कहीं अस्पताल जल रहे हैं।
शॉर्ट सर्किट का बहाना बनाकर मालिक, संचालक और सरकारी अधिकारी इन हादसों के लिए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। संपादकीय में कहा गया है कि अब सरकार दिखावटी कार्रवाई करेगी और किसी एक को बलि का बकरा बना देगी।
संपादकीय में यह भी कहा गया है कि देश पहले से ही महंगाई की आग से जूझ रहा है और ऊपर से आग लगने की घटनाओं में लोगों की जान जा रही है। दिल्ली और बिहार में आग लगने की घटनाओं में हुई मौतों की संख्या चौंकाने वाली है।
इसमें कहा गया कि हालांकि यह सच है कि आपदाएं या दुर्घटनाएं अचानक होती हैं, लेकिन दिल्ली और बिहार की त्रासदियों के कारणों और प्रकृति को देखते हुए, शासक और प्रशासनिक तंत्र अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। इन दोनों हादसों के बाद सामने आई बातें दिल्ली और बिहार में भाजपा के गैर-जिम्मेदार और लापरवाह शासन को सीधे तौर पर कठघरे में खड़ा करती हैं।
संपादकीय के अनुसार, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने उम्मीद के मुताबिक, गहन जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। दिल्ली के गृह मंत्री ने एक कदम आगे बढ़ते हुए दिल्ली में ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ योजना के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले सभी प्रतिष्ठानों को तुरंत सील करने का आदेश दिया।
संपादकीय में दावा किया गया कि लेकिन अब इससे क्या हासिल होगा। क्या इससे गई हुई बेगुनाह जानें वापस आ जाएंगी। यह एक पैटर्न बन गया है। पहले ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ योजना में भ्रष्टाचार का मजा लो और जब कोई हादसा हो तो मनमानी कार्रवाई करो, जांच का नाटक करो और जब जनता का गुस्सा शांत हो जाए तो आम नागरिकों को फिर से किस्मत के भरोसे मरने के लिए छोड़ दो।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट ने रखरखाव और निरीक्षण में लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा अक्सर जिम्मेदारी से बचने के लिए दिया जाता है। इसमें कहा गया है कि शासक मृतक के परिजनों को मुआवजे के तौर पर कुछ पैसे देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश करेंगे और खुद को जिम्मेदारी से दूर रखेंगे।
राजनीति
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी का अमित शाह को पत्र, पैलेट गन के इस्तेमाल पर मांगा जवाब

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया और इस पूरे मामले की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने पत्र में लिखा कि छात्र पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय सुरक्षा बलों ने उन पर अंधाधुंध बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि महिला छात्रों के साथ पुलिसकर्मियों ने मारपीट की।
राहुल गांधी ने विशेष रूप से पैलेट गन के इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने लिखा कि मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की बात सामने आई है, जिनमें एक पत्रकार भी शामिल है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब से मुलाकात की, जो गंभीर दर्द में है और पैलेट गन लगने के कारण उसकी एक आंख की रोशनी जाने की आशंका है।
पत्र में राहुल गांधी ने अमित शाह से दो सीधे सवाल भी पूछे। पहला, क्या प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पैलेट गन समेत घातक बल प्रयोग की मंजूरी गृह मंत्री ने दी थी? यदि नहीं, तो इसकी अनुमति किसने दी? दूसरा, प्रदर्शन के दौरान लाठी लेकर छात्रों पर हमला करते दिखे सादे कपड़ों वाले लोग पुलिसकर्मी थे या स्वयंसेवक और उन्हें किसके आदेश पर तैनात किया गया था।
राहुल गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए निकाले। उन्होंने कहा कि इस तरह की हिंसा लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे पूरे देश में आक्रोश है। देश के युवा और छात्र जवाब और जवाबदेही चाहते हैं और उनकी आवाज जरूर सुनी जाएगी।
इस बीच, 25 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार को जंतर-मंतर पर चल रहा अपना प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा कर दी। यह फैसला केंद्र सरकार के साथ तीसरे दौर की बातचीत के बाद लिया गया। नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह और सीजेपी प्रतिनिधि सौरव दास तथा आशुतोष रांका मौजूद रहे।
जेपी नड्डा ने बताया था कि सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी पुलिस मामले वापस लेने, एफआईआर वापस लेने की लिखित पुष्टि देने और पेपर लीक विवाद से जुड़े घटनाक्रम में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को अधिकतम संभव मुआवजा देने पर सहमति जताई है।
राष्ट्रीय समाचार
प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय, पहले ही दिन वरिष्ठ अधिकारियों संग की बैठक

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। रविवार को उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभाला और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की। जोशी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय सौंपी गई है, जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा चल रही है।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने तुरंत ही शिक्षा मंत्रालय के कामकाज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। दरअसल शिक्षा मंत्रालय देश के भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रालय है। नए शिक्षा मंत्री के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान को भी नई गति देने महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में गिने जाते हैं। वह वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी पहले से ही संभाल रहे हैं। इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों का का कार्यभार संभाल चुके हैं। उनकी पहचान एक अनुभवी संसदीय रणनीतिकार और संगठनात्मक क्षमता वाले नेता के रूप में रही है। कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं।
लंबे संसदीय अनुभव और प्रशासनिक कार्यशैली के कारण उन्हें सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां मिलती रही हैं। फिलहाल जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत करना है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चल रहे सुधारों को गति देना भी उनकी प्राथमिकता है। इसके अलावा विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा, डिजिटल शिक्षा का विस्तार और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहने की संभावना है।
शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी प्रारंभिक बैठकें शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंत्रालय परीक्षा सुधार, तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और छात्रों से जुड़े लंबित विषयों पर तेजी से निर्णय लेने की दिशा में काम करेगा। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि नए शिक्षा मंत्री इन चुनौतियों से किस प्रकार निपटते हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया को किस गति से आगे बढ़ाते हैं।
मनोरंजन
घुटने की सर्जरी के बाद अस्पताल में भर्ती हैं नंदमुरी बालकृष्ण, हालचाल जानने पहुंचे चंद्रबाबू नायडू

टॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और आंध्र प्रदेश की राजनीति का बड़ा चेहरा नंदमुरी बालकृष्ण हैदराबाद के एक अस्पताल में भर्ती हैं। हाल ही में फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके घुटने में गंभीर चोट लग गई, जिसके चलते डॉक्टरों को उनकी सर्जरी करनी पड़ी।
इस बीच उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए रविवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू खुद अस्पताल पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ बालकृष्ण से मुलाकात की, बल्कि डॉक्टरों से भी उनके इलाज, सर्जरी और रिकवरी की पूरी जानकारी ली।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हैदराबाद के एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (एआईजी) अस्पताल पहुंचकर नंदमुरी बालकृष्ण का हालचाल जाना। बालकृष्ण उनके पारिवारिक रिश्तेदारी में आते हैं और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के वरिष्ठ नेता भी हैं। अस्पताल में दोनों के बीच कुछ देर बातचीत हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से मुलाकात कर उनकी मौजूदा स्थिति और आगे की इलाज प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
बता दें, नंदमुरी बालकृष्ण को 21 जुलाई को राजमुंदरी में अपनी नई फिल्म की शूटिंग के दौरान घुटने में चोट लग गई थी। शूटिंग के दौरान हुए इस हादसे के बाद पहले उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया, लेकिन चोट गंभीर होने के कारण अगले ही दिन एयर एंबुलेंस के जरिए हैदराबाद लाया गया। यहां उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कर विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया और कई जरूरी मेडिकल जांच की गईं।
डॉक्टरों की जांच में पता चला कि बालकृष्ण के बाएं पैर के क्वाड्रिसेप्स टेंडन में गंभीर चोट आई है। यह टेंडन जांघ की मांसपेशी को घुटने की हड्डी से जोड़ता है। इसके अलावा घुटने के दोनों तरफ मौजूद सपोर्टिंग टिशू को भी नुकसान पहुंचा। सभी जांचों के बाद डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी को सबसे बेहतर विकल्प माना।
23 जुलाई को नंदमुरी बालकृष्ण की सर्जरी की गई। अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि यह ऑपरेशन करीब तीन घंटे तक चला और यह पूरी तरह सफल रहा।
अस्पताल के अनुसार, फिलहाल नंदमुरी बालकृष्ण की हालत स्थिर है और उन्हें पोस्ट-ऑपरेटिव ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। डॉक्टर लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए हैं।
बालकृष्ण के घायल होने की खबर सामने आने के बाद, आंध्र प्रदेश सरकार में मानव संसाधन विकास, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री नारा लोकेश ने फोन पर उनसे बात कर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी।
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