राष्ट्रीय समाचार
नासिक उत्पीड़न मामला: पुलिस ने एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल को जारी किया समन
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की नासिक बीपीओ इकाई से जुड़े हाईप्रोफाइल उत्पीड़न मामले में छत्रपति संभाजीनगर से एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल को समन जारी किया गया है।
अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि नासिक पुलिस की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने मामले से संबंधित कुछ तथ्यों की जांच और आरोपी निदा खान को कथित रूप से सहायता प्रदान करने के संबंध में मतीन पटेल को पूछताछ के लिए तलब किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है।
इससे पहले 22 मई को नासिक पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ 1,500 पेज का प्रारंभिक आरोपपत्र नासिक रोड स्थित अतिरिक्त सत्र एवं विशेष न्यायालय में दाखिल किया था। यह रेप और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों की जांच के बाद दाखिल किया गया पहला आरोपपत्र है, जो मूल रूप से नासिक के देवलाली पुलिस स्टेशन में दर्ज केस के मामले में किया गया। इसके अलावा मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में टीसीएस कर्मचारियों द्वारा आठ अन्य एफआईआर भी दर्ज की गई है। इनमें से फिलहाल केवल एक मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया है।
नासिक के पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक की टीम द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में बताया गया है कि आरोपों की जांच कर रही एसआईटी ने पीड़िता के जबरन धर्म परिवर्तन से संबंधित सबूत जुटाए हैं, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
पुलिस ने आरोपियों द्वारा पीड़िता का नाम और पहचान बदलने के लिए इस्तेमाल किए गए मूल दस्तावेज भी जब्त कर लिए हैं। इसके अलावा पीड़िता और आरोपियों के मोबाइल फोन से प्राप्त व्हाट्सएप चैट स्क्रीनशॉट के रूप में डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। आरोपपत्र में दानिश एजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तार, निदा एजाज खान और एआईएमआईएम नेता मतीन पटेल को आरोपी बनाया गया है। इनमें से किसी को भी जमानत नहीं मिली है।
कार्यस्थल पर कथित तौर पर हो रहे सुनियोजित उत्पीड़न के विवरण सामने आने के बाद इस मामले ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया और पूरे महाराष्ट्र में आक्रोश फैल गया था।
राष्ट्रीय समाचार
विश्व बैंक ने बढ़ाया भारत की विकास दर का अनुमान, वित्त वर्ष 2027 में 7.1 प्रतिशत ग्रोथ की उम्मीद

विश्व बैंक (वर्ल्ड बैंक) ने भारत की आर्थिक मजबूती पर भरोसा जताते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की विकास दर का अनुमान बढ़ा दिया है। अपनी ताजा साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट रिपोर्ट में विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है।
विश्व बैंक के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों में विस्तार और सेवा क्षेत्र की निरंतर मजबूती से समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की विकास गति मजबूत बनी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को पिछले वर्षों में लागू किए गए कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधारों से मजबूती मिली है। इनमें श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) का एकीकरण, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधार, टैरिफ युक्तिकरण, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) और भौतिक एवं डिजिटल अवसंरचना में बड़े निवेश शामिल हैं।
विश्व बैंक ने कहा कि कृषि क्षेत्र में कुछ चुनौतियों के बावजूद व्यापक अर्थव्यवस्था में मौजूद मजबूती भारत को मौजूदा वित्त वर्ष में मजबूत विकास दर बनाए रखने में मदद करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू मांग आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार बनी हुई है और यही भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।
हालांकि, विश्व बैंक ने कुछ जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंची ऊर्जा कीमतें और एल नीनो से जुड़े प्रतिकूल मौसमीय प्रभाव आने वाले महीनों में आर्थिक वृद्धि और महंगाई प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकते हैं।
दक्षिण एशिया के परिदृश्य पर नजर डालें तो विश्व बैंक ने वर्ष 2026 के लिए क्षेत्र की विकास दर का अनुमान भी बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.3 प्रतिशत था। रिपोर्ट के अनुसार, इस सुधार का सबसे बड़ा कारण भारत की अपेक्षा से बेहतर आर्थिक प्रदर्शन है।
दिलचस्प बात यह है कि भारत को छोड़कर दक्षिण एशिया के बाकी देशों की विकास दर का अनुमान 4.1 प्रतिशत से घटाकर 3.6 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका मुख्य कारण बांग्लादेश की विकास दर के अनुमान में की गई बड़ी कटौती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया के सामने वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां मौजूद हैं। क्षेत्र कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए ऊंची ऊर्जा कीमतों का सीधा असर महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। इसके अलावा, अल नीनो के कारण कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है, जो दक्षिण एशिया की बड़ी आबादी के लिए आजीविका का प्रमुख स्रोत है।
राष्ट्रीय समाचार
गुजरात: 15,000 और सरकारी इमारतों में लगाया जाएगा रूफटॉप सोलर सिस्टम

गुजरात प्रशासन 2026-27 के दौरान 15,000 और सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने की योजना बना रहा है। इस विस्तार से राज्य की मौजूदा रूफटॉप सोलर क्षमता में लगभग 65 मेगावाट की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जिससे इस प्रोग्राम की कुल क्षमता 160 मेगावाट से ज्यादा हो जाएगी।
यह घोषणा तब की गई है जब इस साल मार्च तक गुजरात में 6,014 सरकारी इमारतों में ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए, जिनकी कुल क्षमता 95 मेगावाट है।
2011-12 से क्लाइमेट चेंज डिपार्टमेंट के तहत गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी द्वारा लागू किए जा रहे इस प्रोग्राम का मकसद रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल को बढ़ाना और पारंपरिक बिजली पर सरकारी खर्च को कम करना है।
क्लाइमेट चेंज मिनिस्टर अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि 2025-26 के दौरान, 1,377 सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए, जिससे 17.1 मेगावाट की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जुड़ी। इस विस्तार के साथ मार्च 2026 तक रूफटॉप सोलर सिस्टम वाली सरकारी इमारतों की कुल संख्या 6,014 हो गई, जिससे इस पहल के तहत कुल इंस्टॉल्ड क्षमता 95 मेगावाट तक पहुंच गई।
राज्य ने 2026-27 में इस प्रोग्राम के लिए 314 करोड़ रुपए तय किए हैं। इसमें से 278 करोड़ रुपए सामान्य सरकारी इमारतों के लिए, 3 करोड़ रुपए सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट डिपार्टमेंट के तहत आने वाली इमारतों के लिए और 33 करोड़ रुपए ट्राइबल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट द्वारा मैनेज की जाने वाली इमारतों के लिए आवंटित किए गए हैं।
मोढवाडिया ने कहा कि सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का सबसे बड़ा विस्तार इस साल हो रहा है, क्योंकि हम 15,000 सरकारी इमारतों पर इन्हें लगाने की योजना बना रहे हैं। इस प्रस्तावित विस्तार से लगभग 65 मेगावाट सोलर क्षमता जुड़ने की उम्मीद है, जिससे राज्य के पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल और मजबूत होगा।
इस स्कीम के तहत, राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाली इमारतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जिसमें क्लाइमेट चेंज डिपार्टमेंट के सालाना बजट आवंटन से 100 प्रतिशत कैपिटल-कॉस्ट सपोर्ट दिया जाता है।
सरकार ने कहा कि इन सिस्टम के लगने से सरकारी दफ्तरों में पारंपरिक बिजली की खपत और बिजली पर होने वाले खर्च में कमी आने की उम्मीद है, साथ ही पारंपरिक बिजली उत्पादन से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी।
जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि सोलर इंस्टॉलेशन से कई तरह के पर्यावरण और आर्थिक फायदे होने की उम्मीद है, जैसे पारंपरिक बिजली की खपत में कमी, सरकारी दफ्तरों के बिजली खर्च में कमी और पारंपरिक बिजली उत्पादन से होने वाले प्रदूषण में कमी।
राज्य ने इस साल सरकारी इमारतों पर लगे रिन्यूएबल एनर्जी इंस्टॉलेशन की दूर से निगरानी करने के लिए ‘इंडस्ट्रियल इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ पर आधारित रिन्यूएबल एनर्जी मॉनिटरिंग सिस्टम भी शुरू किया है।
मोढवाडिया ने कहा कि इस सिस्टम का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर स्मार्ट मीटर, सेंसर और एलओटी गेटवे को जोड़ता है जो जीपीआरएस, 4जी और ईथरनेट के जरिए कनेक्टेड हैं। यह ऑटोमेटेड रिमोट अलर्ट देता है और हर 15 मिनट में परफॉर्मेंस डेटा रिकॉर्ड करता है, जिससे रोजाना 96 रीडिंग मिलती हैं। यह इंटरफेस अभी बड़ी क्षमता की निगरानी करता है, जिसमें 142.5 मेगावाट सोलर और 68.3 मेगावाट विंड पावर जनरेशन शामिल है।
सरकार ने कहा कि इस मॉनिटरिंग सिस्टम का मकसद रिन्यूएबल एनर्जी इंस्टॉलेशन से रेगुलर परफॉर्मेंस डेटा देना और ऑपरेशन से जुड़ी दिक्कतों के लिए रिमोट अलर्ट की सुविधा देना है।
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, गुजरात की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 47,178 मेगावाट है और इसने राजस्थान को पीछे छोड़कर रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनने का मुकाम हासिल किया है। राज्य की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में सोलर और विंड पावर का बड़ा हिस्सा है।
राष्ट्रीय समाचार
आदि कैलाश में 14,400 फीट की ऊंचाई पर मदद के लिए पहुंची भारतीय सेना

आदि कैलाश की बर्फीली और दुर्गम ऊंचाइयों में फंसी एक महिला यात्री की मदद के लिए भारतीय सेना ने त्वरित कार्रवाई की है। जवानों ने यहां एक पल भी गंवाए बिना मोर्चा संभाल लिया। करीब 14,400 फीट की ऊंचाई पर सेना को एक व्यक्ति के बीमार होने की सूचना मिली। यह सूचना मिलते ही सेना की पंचशूल ब्रिगेड के जवान तुरंत बचाव अभियान में जुट गए।
दरअसल यह दुर्गम पहाड़ी इलाका आसान नहीं था। ऊंचाई, कठिन रास्ते और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हर कदम पर मुसीबत परीक्षा ले रही थीं। लेकिन सैनिकों का लक्ष्य बिल्कुल साफ था कि संकट में फंसे व्यक्ति को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालना है। पंचशूल ब्रिगेड के जवानों ने कठिन भूभाग की परवाह किए बिना तेजी से कार्रवाई की। बचाव अभियान के दौरान उनकी तत्परता और साहस ने यह दिखाया कि भारतीय सेना के लिए हर जीवन की कीमत है। सेना के जवानों ने महिला को सुरक्षित बचाया और उसे तुरंत आवश्यक मेडिकल सहायता दी गई।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा से लेकर देश के सबसे दुर्गम इलाकों तक, सेना सिर्फ राष्ट्र की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि जरूरत की घड़ी में नागरिकों के साथ भी मजबूती से खड़ी रहती है। 14,400 फीट की ऊंचाई पर मदद की इस पुकार के जवाब में भारतीय सेना की कार्रवाई ने इसे एक बार फिर साबित किया है।
गौरतलब है कि समुद्र के बीच अचानक आई ऐसी एक चिकित्सकीय आपात स्थिति में भारतीय सैन्य बलों ने समय पर कार्रवाई करते हुए एक विदेशी नागरिक की भी जान बचाई है। अंडमान और निकोबार कमान ने समुद्र में घायल हुए वियतनामी नागरिक को सुरक्षित निकालकर उसे आगे के उपचार के लिए कैंपबेल बे पहुंचाया।
यह वियतनामी नागरिक व्यापारी जहाज एमटी सन 09 पर सवार था। एक हादसे में यह विदेशी नागरिक घायल हो गया था। समुद्र में उसकी हालत को देखते हुए चिकित्सकीय सहायता और सुरक्षित निकासी की तत्काल जरूरत थी। सूचना मिलते ही बचाव अभियान शुरू किया। नौसेना के समुद्री घटक का एक जहाज इंदिरा प्वाइंट के आसपास के क्षेत्र में पहुंचा। इसके बाद भारतीय सैन्य दल ने नौका के जरिए घायल व्यक्ति तक पहुंच बनाई। बिना देर किए जख्मी व्यक्ति को सुरक्षित निकालकर जहाज पर लाया गया। जहाज पर ही उसे तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया।
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