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Tuesday,28-July-2026
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2006 मालेगांव ब्लास्ट केस: बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, चार आरोपी हुए बरी

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2006 के मालेगांव ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने बुधवार को चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द कर करते हुए उन्हें बरी कर दिया। मालेगांव में इन धमाकों में 37 लोगों की जान चली गई थी।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चांदक की डिवीजन बेंच ने आरोपियों की ओर से एक स्पेशल कोर्ट के सितंबर 2025 के उस आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर यह फैसला सुनाया, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे। इस अपील में ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय करने के तरीके और मामले में कई सह-आरोपियों को बरी किए जाने पर भी सवाल उठाए गए थे।

फिलहाल, हाईकोर्ट ने जिन चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द किया है, उनमें राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवारिया और लोकेश शर्मा शामिल हैं। हाईकोर्ट के आज के फैसले से इन आरोपियों के खिलाफ मामला बंद हो गया और उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल भी खत्म हो गया।

बेंच ने इससे पहले अपील दायर करने में हुई 49 दिन की देरी को माफ कर दिया था, यह देखते हुए कि यह चुनौती राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम (एनआईए अधिनियम) की धारा 21 के तहत एक वैधानिक अपील थी।

मालेगांव मामला 8 सितंबर 2006 का है, जब इस शहर में हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और अन्य कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच सबसे पहले महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने की थी, जिसने 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया और दिसंबर 2006 में चार्जशीट दायर की।

इसके बाद फरवरी 2007 में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई और बाद में एनआईए ने इसे अपने हाथ में ले लिया। एनआईए ने आगे की जांच के बाद अन्य आरोपियों के साथ-साथ इन चारों को भी आरोपी बनाया था और एक नई चार्जशीट दायर की थी।

राष्ट्रीय समाचार

एयर इंडिया बोइंग विमान हादसे की जांच में कोई देरी नहीं, तय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही जांच: सरकार

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केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में स्पष्ट किया कि अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया बोइंग ड्रीमलाइनर विमान हादसे की जांच में किसी तरह की कोई देरी नहीं हुई है। नागर विमानन मंत्रालय ने कहा कि दुर्घटना की जांच तय प्रक्रियाओं के अनुसार आगे बढ़ रही है और फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्रालय ने कहा कि बड़े विमान हादसों की जांच कई तकनीकी और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर निर्भर करती है। ऐसे मामलों में कई तरह के कारकों की विस्तृत जांच की जाती है, इसलिए अंतिम जांच रिपोर्ट कब तक तैयार होगी, इसके लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की जा सकती। मंत्रालय ने कहा कि किसी बड़े विमान हादसे की जांच पूरी होने का समय पहले से बताना संभव नहीं है।

सरकार ने यह भी बताया कि दुर्घटना के पीछे मौजूद सभी संभावित कारणों और योगदान देने वाले सभी कारकों की व्यापक जांच की जा रही है। इसका मतलब है कि जांच अभी जारी है और अब तक किसी भी संभावित वजह को अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।

मंत्रालय ने संसद को यह भी जानकारी दी कि जांच के तहत विमान के थ्रस्ट कंट्रोल मॉड्यूल की मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) की सुविधा में विस्तृत जांच की जा रही है। यह प्रक्रिया भी चल रही जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इससे पहले भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने संसद में बताया था कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) 12 जून को हुए एयर इंडिया बोइंग विमान हादसे की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ कर रहा है और दुर्घटना के सभी संभावित कारणों की जांच की जा रही है।

मंत्रालय ने बताया कि एएआईबी ने 12 जुलाई 2025 को दुर्घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी की थी, जो उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) के एनेक्स-13 के प्रावधानों के तहत 12 जून 2026 को अंतरिम बयान भी जारी किया गया। अंतिम जांच रिपोर्ट पूरी जांच प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सार्वजनिक की जाएगी।

गौरतलब है कि 12 जून को अहमदाबाद से लंदन-गैटविक जा रही एयर इंडिया की एआई-171 बोइंग 787 ड्रीमलाइनर उड़ान टेकऑफ के महज 35 सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में विमान में सवार 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों सहित कुल 260 लोगों की मौत हुई थी। जमीन पर मौजूद 19 लोगों ने भी अपनी जान गंवाई थी, जबकि विमान में सवार एक यात्री चमत्कारिक रूप से बच गया था।

एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त विमान के दोनों इंजनों की शक्ति उस समय समाप्त हो गई थी, जब दोनों फ्यूल कट-ऑफ स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ स्थिति में चले गए। हालांकि, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) से यह भी सामने आया कि एक पायलट ने दूसरे से कहा था कि उसने फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद नहीं किए थे। दुर्घटना से ठीक पहले इन स्विचों को फिर से ‘रन’ स्थिति में लाया गया था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि एएआईबी की रिपोर्ट केवल प्रारंभिक निष्कर्षों पर आधारित है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने से पहले किसी भी तरह के निष्कर्ष पर न पहुंचें।

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राष्ट्रीय समाचार

बिहार बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों पर एके 47 से फायरिंग करने वाला पुलिसकर्मी निलंबित

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बिहार बंद के दौरान 25 जुलाई को सिवान में हुए बवाल और पुलिस की ओर से एके-47 से फायरिंग के मामले में पुलिस मुख्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है। फायरिंग करने वाले सिपाही अभिषेक पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। वहीं, कुछ पुलिसकर्मियों के बीच इस फैसले को लेकर नाराजगी की भी चर्चा है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर संबंधित सिपाही के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। मामले की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने घटना को गंभीर मानते हुए पहले ही संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की थी।

गौरतलब है कि 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान सिवान में प्रदर्शन के बीच हालात तनावपूर्ण हो गए थे। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई थी और स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आई। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा अत्याधुनिक हथियार एके-47 से फायरिंग की गई।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने संबंधित सिपाही के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई की। अब पूरे घटनाक्रम की विभागीय जांच कराई जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फायरिंग निर्धारित मानकों और परिस्थितियों के अनुरूप की गई थी या नहीं।

उल्लेखनीय है कि बिहार बंद के दौरान शनिवार को सिवान शहर में प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जमकर हंगामा और पथराव किए गए थे। प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

पुलिस का कहना था कि भीड़ को नियंत्रित करने और हालात सामान्य करने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी। हालांकि, एके-47 से की गई फायरिंग का वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद संबंधित सिपाही को निलंबित कर दिया।

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राजनीति

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो सिर्फ शुरुआत, देशभर में हुए प्रदर्शन : शिवसेना (यूबीटी)

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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने भाजपा नीत एनडीए सरकार पर तीखा हमला करते हुए सोमवार को दावा किया कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं और छात्र नेताओं के 35 दिनों तक चले आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार देशभर में हंसी का पात्र बन गई।

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित एक तीखे संपादकीय में ठाकरे गुट ने कहा कि नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ हुए लंबे आंदोलन ने केंद्र सरकार को वास्तविकता का पूरा एहसास कराया और सरकार की छवि को गंभीर झटका पहुंचाया।

संपादकीय में कहा गया कि देशभर के युवाओं के गुस्से ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस आंदोलन का पहला राजनीतिक शिकार बना दिया। पार्टी का दावा है कि शुरुआत में सरकार इस्तीफे के पक्ष में नहीं थी। संपादकीय में उन खबरों का भी जिक्र किया गया, जिनमें कहा गया था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि एनडीए की कार्यशैली में इस्तीफे शामिल नहीं हैं। हालांकि, बढ़ते जनाक्रोश के चलते सरकार को अंतत धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा।

संपादकीय में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के आधिकारिक कारण को भी खारिज किया गया। प्रधान ने कहा था कि उन्होंने राष्ट्रीय एकता बनाए रखने और राष्ट्रविरोधी ताकतों को आंदोलन का फायदा उठाने से रोकने के लिए इस्तीफा दिया है। इस पर संपादकीय में सवाल किया गया, जंतर-मंतर या देशभर के प्रदर्शनों में उन्हें कौन-सी राष्ट्रविरोधी ताकतें दिखाई दीं?

संपादकीय में कहा गया, “छात्र नेताओं और जलवायु कार्यकर्ताओं को राष्ट्रविरोधी बताना पूरे देश में मौजूद वास्तविक आक्रोश का अपमान है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का राष्ट्रीय एकता से कोई संबंध नहीं है। देश तो नीट पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाले 20 युवाओं के बलिदान से एकजुट हुआ था।”

संपादकीय में उन प्रमुख चेहरों का भी उल्लेख किया गया, जिन्होंने 35 दिनों के आंदोलन को गति दी। इनमें अमेरिका से लौटे अभिजीत दीपके, जिन्होंने पेपर लीक के खिलाफ लोगों को संगठित करने के लिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और छात्र नेता नेहा बोरा शामिल हैं।

पार्टी ने सरकार के रुख में विरोधाभास होने का भी आरोप लगाया। संपादकीय में कहा गया कि एक तरफ भाजपा ने सोनम वांगचुक को विदेशी एजेंट बताने की कोशिश की, वहीं दूसरी तरफ उसके मंत्री उनसे मिलकर अनशन समाप्त करने की अपील करते नजर आए।

संपादकीय में कहा गया कि इस पूरे मामले का राजनीतिक असर केवल धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रह सकता। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया और प्रधानमंत्री मोदी से आधिकारिक माफी की मांग की गई।

ठाकरे गुट ने सरकार द्वारा लाए गए नए एंटी-पेपर लीक विधेयक को भी महज एक दिखावा बताया। पार्टी का आरोप है कि यह पुराना कानून ही है, जिसमें सिर्फ सजा और जुर्माने की रकम बदलकर छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित करने की कोशिश की गई है।

संपादकीय में दावा किया गया कि आंदोलन में शामिल युवाओं की डिजिटल समझ, तकनीकी क्षमता और स्वतःस्फूर्त संगठन ने एक महीने तक चले आंदोलन के दौरान भाजपा के डिजिटल प्रचार और आईटी सेल को प्रभावहीन बना दिया।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने चेतावनी दी कि यदि सरकार छात्रों की नाराजगी और प्रशासनिक विफलताओं के मूल कारणों को दूर नहीं करती है, तो देशभर में असंतोष की यह चिंगारी और बढ़ती जाएगी।

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