अंतरराष्ट्रीय
ईरान को लेकर ट्रंप की धमकियों का पूरे अमेरिका में हो रहा है विरोध
TRUMP
वॉशिंगटन, 6 अप्रैल : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करने की हालिया धमकी ने देश के भीतर विरोध को जन्म दिया है। कानूनी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकती है जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तेहरान के साथ तनाव लगातार बढ़ रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोलता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों को निशाना बना सकता है।
पोलिटिको के अनुसार, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मंगलवार ईरान में पावर प्लांट डे और ब्रिज डे होगा-सब एक साथ। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा। उस स्ट्रेट को खोलो, नहीं तो तुम लोग नरक में जियोगे, देख लेना।”
यह बयान उस समय आया है जब इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर तनाव बढ़ रहा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अहम मार्ग है।
ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य खोलने के लिए एक समयसीमा भी दी। सीएनएन के अनुसार, उन्होंने संकेत दिया कि यदि तेहरान कार्रवाई नहीं करता, तो हमले हो सकते हैं।
व्हाइट हाउस ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि अमेरिका “हमेशा कानून के दायरे में रहकर काम करेगा।”
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत गंभीर चिंता का विषय है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, पावर प्लांट और परिवहन प्रणाली जैसे ढांचे “ईरान में नागरिक जीवन की नींव हैं” और उनका विनाश “ज्यादातर मामलों में अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध माना जा सकता है।”
अंतरराष्ट्रीय कानून नागरिक ठिकानों पर हमले की अनुमति नहीं देता, जब तक कि वे सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग में न हों और सैन्य लाभ नागरिक नुकसान से अधिक न हो।
द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, एक कानूनी विशेषज्ञ ने कहा कि “सभी पुलों या पावर प्लांट्स पर बिना भेदभाव के हमला करने की धमकी देना युद्ध अपराध करने की धमकी के समान हो सकता है।” इन टिप्पणियों पर दोनों दलों के नेताओं ने आलोचना की है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, सीनेटर क्रिस मर्फी ने ट्रंप के बयान को “पूरी तरह असंतुलित” बताया। रिपब्लिकन प्रतिनिधि डॉन बेकन ने कहा कि अमेरिकी “अपने राष्ट्रपति से अशोभनीय भाषा की उम्मीद नहीं करते,” और नेतृत्व में आत्मसंयम जरूरी है।
हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीज़ ने कहा कि प्रशासन ने अमेरिका को “बिना योजना के एक लापरवाह युद्ध” में धकेल दिया है।
कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने प्रशासन का समर्थन भी किया। प्रतिनिधि माइक लॉरलर ने सैन्य अभियान को “अविश्वसनीय ऑपरेशन” बताया।
ईरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज कर दिया है। सीएनएन के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य “तब तक बंद रहेगा जब तक ईरान को युद्ध क्षति का भुगतान नहीं मिल जाता।”
ट्रंप ने अपनी बयानबाजी और तेज कर दी। द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यदि ईरान नहीं मानता, तो वह “अपने हर पावर प्लांट और अन्य संयंत्र खो सकता है।”
उन्होंने कहा, “अगर उन्होंने मंगलवार शाम तक कुछ नहीं किया, तो उनके पास कोई पावर प्लांट और कोई पुल नहीं बचेगा।”
इन बयानों से अमेरिका के सहयोगियों में भी चिंता बढ़ी है। द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, इन टिप्पणियों ने सहयोगियों को झटका दिया है, खासकर तब जब वॉशिंगटन कूटनीतिक प्रयास भी कर रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह रणनीति दबाव और बातचीत का मिश्रण है लेकिन इसमें तनाव बढ़ने का खतरा भी है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, “अमेरिका की भाषा और कार्रवाई के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं,” और इस तरह की बयानबाजी अंतरराष्ट्रीय मानकों को कमजोर कर सकती है।
पेंटागन ने नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की किसी योजना की पुष्टि नहीं की है और इस पर सवालों को यूएस सेंट्रल कमांड की ओर भेजा है।
ट्रंप ने अपनी रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि ईरान पर दबाव जरूरी है और बातचीत की संभावना अभी भी बनी हुई है।
फॉक्स न्यूज के अनुसार, उन्होंने कहा, “हम स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखे हुए हैं।” यह टकराव होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है। यहां किसी भी व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार पर पड़ सकता है।
हालिया तनाव अमेरिका-ईरान संबंधों के सबसे गंभीर चरणों में से एक माना जा रहा है, जिसमें सैन्य दबाव, आर्थिक जोखिम और तीखी बयानबाजी शामिल है।
पिछले अनुभव बताते हैं कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले की धमकियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ा सकती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि स्थिति अभी भी बदलती हुई है और कूटनीतिक व सैन्य दबाव लगातार बढ़ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।
फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।
ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।
इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”
आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।
इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।
-
दुर्घटना12 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
