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वेलफेयर फ्रॉड को रोकने के लिए अमेरिकी सरकार ने बनाया टास्क फोर्स

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वॉशिंगटन, 28 मार्च : ट्रंप सरकार ने वेलफेयर प्रोग्राम में फ्रॉड पर रोक लगाने के लिए एक फेडरल टास्क फोर्स शुरू की है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चेतावनी दी है कि यह समस्या बहुत बड़ी परेशानी बन गई है जिससे टैक्सपेयर का पैसा खत्म हो रहा है।

वरिष्ठ अधिकारियों की एक मीटिंग में उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा कि सरकार एंटी-फ्रॉड सेफगार्ड्स को फिर से लागू करेगा और फेडरल बेनिफिट प्रोग्राम्स में गलत इस्तेमाल का पता लगाने के लिए क्रॉस-डिपार्टमेंटल कोऑर्डिनेशन लागू करेगा।

उन्होंने कहा, “हमें फ्रॉड के मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा। सालों से मौजूद प्रोटेक्शन बंद कर दिए गए थे और उन्हें फिर से लागू करने की जरूरत थी। हम उन एंटी-फ्रॉड प्रोटेक्शन को फिर से चालू करने जा रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि इस कोशिश में पूरी सरकार का नजरिया शामिल होगा, जिसमें स्वास्थ्य, हाउसिंग, कृषि और वित्त के कामों को संभालने वाली एजेंसियों को एक साथ लाया जाएगा ताकि गड़बड़ियों की पहचान की जा सके और इंटेलिजेंस शेयर की जा सके।

वेंस ने कहा, “यह सिर्फ अमेरिकी लोगों के पैसे की चोरी नहीं है, यह उन जरूरी सेवाओं की भी चोरी है जिन पर अमेरिकी लोग भरोसा करते हैं।”

उन्होंने मिनेसोटा में मेडिकेड से जुड़ी सेवाओं का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि धोखाधड़ी की गतिविधियों के कारण ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों के लिए निर्धारित लाखों-करोड़ों डॉलर का फंड दूसरी जगह भेज दिया गया। बता दें, ऑटिज्म एक एक न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को सामाजिक बातचीत, सामान्य बातचीत और व्यवहार में चुनौतियां आती है।

उन्होंने कहा, “ऐसे परिवार हैं जिन्हें इन सेवाओं की जरूरत है, जो इन्हें नहीं ले पा रहे हैं क्योंकि लोग फ्रॉड स्कीम से अमीर हो रहे हैं।”

टास्क फोर्स को लीड कर रहे एक अधिकारी ने कहा कि फ्रॉड ने सरकारी प्रोग्राम्स पर लोगों का भरोसा खत्म कर दिया है और अगर इसे रोका नहीं गया तो इसके बड़े नतीजे होंगे।

अधिकारी ने कहा, “स्कैम उस सामाजिक भरोसे को खत्म कर देता है जिस पर ये प्रोग्राम और हमारा पूरा देश निर्भर करता है।” उन्होंने इस संकट को अस्तित्व का खतरा बताया और इससे निपटने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति बनाने का वादा किया।

अधिकारी ने आगे कहा कि टास्क फोर्स अपराधियों पर मुकदमा चलाने और फेडरल बेनिफिट सिस्टम में जवाबदेही सुनिश्चित करने में न्यायिक विभाग की मदद करेगी।

व्हाइट हाउस के सीनियर सलाहकार स्टीफन मिलर ने कहा कि कई वेलफेयर प्रोग्राम लिमिटेड वेरिफिकेशन के साथ चलते हैं, जिससे गलत इस्तेमाल बढ़ता है।

उन्होंने कहा, “हमारी सभी प्रणालियां एक उच्च-विश्वास वाली समाज के लिए बनाई गई थीं। कुछ मामलों में तो लोगों के नामांकन से पहले किसी तरह का सत्यापन भी नहीं किया जाता।”

उन्होंने आरोप लगाया कि लोग बिना चेक के बेनिफिट पाने के लिए व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी को गलत तरीके से बता सकते हैं। अमेरिकी अधिकारी ने इसे अमेरिकी टैक्सपेयर के डॉलर की बड़ी चोरी बताया।

मिलर ने पॉलिटिकल विरोधियों पर एनफोर्समेंट मैकेनिज्म को कमजोर करने और ओवरसाइट की कोशिशों का विरोध करने का भी आरोप लगाया और कहा कि प्रोग्राम डेटा की जांच करने की कोशिशों को रोक दिया गया था।

वेंस ने कहा कि टास्क फोर्स को कैबिनेट में सभी का समर्थन है और वह जस्टिस विभाग में नए नेतृत्व के साथ मिलकर एंटी-फ्रॉड एनफोर्समेंट को तेज करने के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा, “हम अमेरिकी लोगों के खिलाफ हो रहे फ्रॉड को रोकने जा रहे हैं।”

यह टास्क फोर्स राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के बाद बनी है, जिसमें फेडरल खर्च पर निगरानी को कड़ा करने और पब्लिक वेलफेयर प्रोग्राम में जवाबदेही को बेहतर बनाने के लिए कहा गया है।

खासकर महामारी के समय में बड़े पैमाने पर खर्च के बाद फेडरल मदद को बढ़ाने के बाद, यूएस बेनिफिट सिस्टम में धोखाधड़ी को लेकर चिंताएं ऑडिट और कांग्रेसनल रिव्यू में बार-बार सामने आई हैं।

अंतरराष्ट्रीय

मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

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भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।

सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।

गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”

गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”

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ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।

हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

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ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

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तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।

फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।

ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।

इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।

ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”

आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।

वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।

इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।

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