मनोरंजन
सलमान खान की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ का बदला नाम, अब ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ के नाम से होगी रिलीज
मुंबई, 16 मार्च : बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान पिछले कुछ समय से अपनी आने वाली फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ को लेकर लगातार चर्चा में हैं। इस फिल्म की कहानी भारत और चीन के बीच हुए गलवान घाटी के घटनाक्रम से प्रेरित बताई जा रही है। लेकिन अब इस फिल्म को लेकर एक नया और बड़ा अपडेट सामने आया है। दरअसल, फिल्म के मेकर्स ने रिलीज से पहले इसका नाम बदल दिया है, जिससे फैंस के बीच फिर से चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, सोमवार को सलमान खान की प्रोडक्शन कंपनी सलमान खान फिल्म्स ने आधिकारिक तौर पर इस फिल्म के नए नाम की घोषणा की। अब यह फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ के नाम से रिलीज होगी। पहले इस प्रोजेक्ट को ‘बैटल ऑफ गलवां’ के नाम से जाना जा रहा था। नाम बदलने के साथ ही मेकर्स ने फिल्म का एक नया पोस्टर भी जारी किया, जिसने सोशल मीडिया पर आते ही लोगों का ध्यान खींच लिया।
इस पोस्टर में सलमान खान बेहद अलग और गंभीर नजर आ रहे हैं। उनके चेहरे पर खून और जख्म साफ दिखाई दे रहे हैं। उनके माथे पर गहरी चोट है और चेहरा धूल-मिट्टी से भरा हुआ है। उनकी आंखों में गुस्सा और दर्द का मिला-जुला भाव है। पोस्टर में सबसे ध्यान खींचने वाला हिस्सा एक ऐसा हथियार है जिसे वह अपने हाथ से रोकते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस हथियार के ऊपर कांटेदार तार लिपटा हुआ है और उस पर खून के निशान भी दिखाई देते हैं। वहीं, बैकग्राउंड को धुएं और धूल से भरा हुआ दिखाया गया है; इसमें कुछ सैनिक हथियार के साथ दौड़ते नजर आ रहे हैं। इस पोस्टर का माहौल युद्ध जैसा महसूस होता है।
सलमान खान ने इस पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’, यानी युद्ध का अंत हो और शांति कायम रहे।
फिल्म में सलमान खान कर्नल संतोष बाबू की भूमिका निभाते नजर आएंगे, जो 16 बिहार रेजिमेंट का नेतृत्व करते हुए लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर स्थिति संभालते हैं। वहीं उनके साथ अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। इसके अलावा, अभिनेता अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया भी फिल्म में अहम किरदार निभाते दिखाई देंगे।
मनोरंजन
रीमा लांबा से मल्लिका शेरावत बनने की कहानी, पिता बोले-नाम खराब करेगी तो उनका छोड़ मां के सरनेम अपनाकर बनाई पहचान

बॉलीवुड अभिनेत्री मल्लिका शेरावत का नाम हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की उन अभिनेत्रियों में शामिल है, जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए न सिर्फ पर्दे पर नए तरह के किरदार चुने, बल्कि निजी जिंदगी में भी कई मुश्किल फैसले किए। फिल्मों में आने के बाद उन्होंने अपना नाम बदला। वह खुद अलग-अलग इंटरव्यू में बताती रही है कि उनके नाम के पीछे उनकी मां का साथ, परिवार की सोच और अपनी पहचान बनाने की इच्छा जुड़ी हुई है।
मल्लिका का जन्म 24 अक्टूबर 1976 को हरियाणा में हुआ था। उनका असली नाम रीमा लांबा है। उन्होंने 2021 में दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता नहीं चाहते थे कि वह फिल्मों में काम करें। उनको लगता था कि फिल्मों में जाने से परिवार का नाम खराब होगा, इसलिए उन्होंने उन्हें परिवार से अलग करने की बात तक कह दी थी।
मल्लिका शेरावत ने इस घटना को अपनी जिंदगी का अहम मोड़ बताया था। उन्होंने कहा था कि जब पिता ने उन्हें परिवार का नाम खराब करने की बात कही, तो उन्होंने भी उनके सरनेम को इस्तेमाल न करने का फैसला किया और अपने पिता का सरनेम इस्तेमाल करने के बजाय अपनी मां का सरनेम अपनाया।
उन्होंने 2005 में एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म इंडस्ट्री में उस समय रीमा नाम की कई अभिनेत्रियां थीं। वह ऐसा नाम चाहती थीं, जिससे उनकी अपनी अलग पहचान बने। उन्हें ‘मल्लिका’ नाम पसंद आया। उन्होंने बताया था कि इस नाम का अर्थ ‘महारानी’ होता है। वहीं, ‘शेरावत’ उनकी मां का नाम था। मल्लिका ने कहा कि उनकी मां हमेशा चुपचाप उनका साथ देती थीं और मुश्किल समय में उनके साथ खड़ी रहती थीं। इसलिए मां के नाम को अपनाना उनके लिए एक तरह से उन्हें सम्मान देने जैसा था।
मल्लिका ने अपने करियर की शुरुआत 2002 में आई फिल्म ‘जीना सिर्फ मेरे लिए’ से की थी। इसके बाद 2003 में फिल्म ‘ख्वाहिश’ में वह मुख्य भूमिका में नजर आईं। हालांकि, उन्हें देशभर में बड़ी पहचान 2004 में आई फिल्म ‘मर्डर’ से मिली। इमरान हाशमी के साथ इस फिल्म में उनके बोल्ड किरदार की काफी चर्चा हुई। इस पहचान के साथ उन्हें आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा।
मल्लिका शेरावत ने हिंदी फिल्मों के अलावा अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में भी काम किया। वह जैकी चैन के साथ फिल्म ‘द मिथ’ में नजर आईं। ‘प्यार के साइड इफेक्ट्स’, ‘वेलकम’ और ‘डबल धमाल’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया। उनका करियर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा, लेकिन उन्होंने अपनी अलग स्क्रीन पहचान बनाए रखी।
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रसिका दुग्गल ने की बच्चों के लिए फिल्में बनाने की अपील, कहा- उनकी जिज्ञासा को अपनाना जरूरी

अभिनेत्री रसिका दुग्गल का कहना है कि ‘लिटिल थॉमस’ जैसी फिल्में बच्चों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ऐसी कहानियां उन्हें अपने अनुभवों और भावनाओं से जोड़ने का अवसर देती हैं। फिल्म में वह जेसी मिरांडा के किरदार में नजर आ रही हैं।
अभिनेत्री का कहना है कि इस तरह की कहानी बच्चों का मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें सवाल पूछने, कल्पना करने और अपने आसपास की दुनिया को समझने पर आजादी देंगी। उन्होंने कहा, “सिनेमा आपकी दुनिया को बड़ा करने और कल्पना को बढ़ावा देने का एक शानदार तरीका है। बड़े होने पर हमारे मन में जो कई विचार आते हैं, उनका कनेक्शन अक्सर बचपन में देखी गई फिल्मों से होता है।”
बच्चों के लिए अच्छी फिल्मों की जरूरत पर बात करते हुए रसिका ने कहा, “इसलिए हमें ऐसी फिल्मों की जरूरत है, जिनसे बच्चे खुद को जोड़ सकें। ऐसी फिल्में उनकी जिज्ञासा को नजरअंदाज करने के बजाय उसे अपनाएं।”
रसिका ने कहा कि बच्चों के लिए फिल्में बिना हल्की-फुल्की हुए भी मनोरंजक हो सकती हैं। एक्ट्रेस ने कहा, “इस तरह की फिल्में भी बच्चों का मनोरंजन कर सकती हैं। मैं चाहूंगी कि ज्यादा से ज्यादा फिल्ममेकर ऐसी कहानियों को एक्सप्लोर करें जिन्हें बच्चे एन्जॉय कर सकें और जो उनकी कल्पना के लिए नई संभावनाएं खोलें।”
कौशल ओझा द्वारा निर्देशित यह फिल्म 1990 के दशक के गोवा में सात साल के थॉमस और उसके परिवार के जीवन के उतार-चढ़ाव को दिखाती है, जो मालगुडी डेज और रस्किन बॉन्ड की कहानियों की याद दिलाती है। फिल्म में गुलशन देवैया, रसिका दुग्गल और बाल कलाकार हृदांश पारेख मुख्य भूमिकाओं में हैं।
अभिनेत्री रसिका दुग्गल फिल्म में थॉमस की मां ‘जेसी मिरांडा’ का किरदार निभा रही है। जेसी मिरांडा एक ऐसी मां हैं जिनकी दुनिया उनके परिवार, उनकी बेकरी और संगीत के प्रति उनके प्रेम के इर्द-गिर्द घूमती है।
फिल्म में दुनिया को एक बच्चे की नजर से देखने का प्रयास किया गया है, जहां बचपन की जिज्ञासाओं से जन्म लेने वाले सहज और अनपेक्षित बातचीत को प्रमुखता दी गई है। लिटिल थॉमस इसी दृष्टिकोण को पर्दे पर प्रस्तुत करती है। इसकी कहानी एक ऐसे पारिवारिक परिवेश के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां एक बच्चे के मासूम सवाल और उनके उत्तर जानने की उसकी जिद कई दिलचस्प परिस्थितियां पैदा करती है।
मनोरंजन
बर्लिन से टोरंटो तक पहुंची श्वेता त्रिपाठी की फिल्म, कहा- प्रोड्यूसर बनने के बाद कहानी को देखने का बदला नजरिया

एक्ट्रेस श्वेता त्रिपाठी इन दिनों अपनी फिल्म ‘मुझे जान ना कहो मेरी जान’ को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और मार्केट तक ले जा रही हैं। इस साल की शुरुआत में बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल से सफर शुरू करने वाली उनकी बतौर प्रोड्यूसर पहली फीचर फिल्म अब टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (टीआईएफएफ) 2026 तक पहुंच गई है।
श्वेता का कहना है कि प्रोड्यूसर बनने के बाद कहानी को देखने का उनका नजरिया बदल गया है। अब वह सिर्फ फिल्म बनाने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि यह भी सोचती हैं कि फिल्म किन लोगों तक पहुंचेगी और इसके जरिए किस तरह की बातचीत शुरू हो सकती है।
श्वेता ने कहा, ”आप जिस फिल्म पर भरोसा करते हैं, उसे किसी इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म तक ले जाना अपने आप में खास होता है। खासकर तब, जब बतौर प्रोड्यूसर यह आपकी पहली फीचर फिल्म हो। बर्लिन से टोरंटो तक का सफर मेरे लिए बेहद खास रहा है, क्योंकि इस दौरान मुझे ‘मुझे जान ना कहो मेरी जान’ को एक अलग तरीके से पेश करने का मौका मिला।”
उन्होंने आगे कहा, ”जब आप फिल्म को बनाने की प्रक्रिया से आगे बढ़कर देखते हैं, तो आपके मन में यह सवाल आने लगते हैं कि फिल्म किन लोगों तक पहुंचेगी, इसके जरिए किस तरह की बातचीत शुरू हो सकती है और आगे इसके लिए क्या-क्या संभावनाएं हैं। यह मेरे लिए सीखने का शानदार अनुभव रहा है और मैं यह देखने के लिए उत्साहित हूं कि इस सफर का फिल्म के लिए क्या मतलब निकलता है।”
श्वेता त्रिपाठी ने बताया कि बतौर प्रोड्यूसर काम करने से उन्हें कहानी कहने के तरीके को एक नए नजरिए से समझने का मौका मिला है। उन्होंने कहा, ”प्रोड्यूसर बनने के बाद कहानी कहने को लेकर मेरा नजरिया बदल गया है। एक एक्टर के तौर पर आप किसी किरदार और कहानी को पर्दे पर जीवंत करने में पूरी तरह जुटे रहते हैं।”
उन्होंने कहा, ”प्रोड्यूसर के तौर पर आपको यह भी देखना होता है कि फिल्म बनने के बाद उसका सफर कैसा होगा, कौन लोग इससे जुड़ सकते हैं और आप फिल्म को उसके दर्शकों तक पहुंचाने के लिए किस तरह मौके बना सकते हैं। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और मार्केट ऐसे लोगों को एक साथ लाते हैं, जो इन संभावनाओं को हकीकत में बदलने में मदद कर सकते हैं। अपनी पहली प्रोडक्शन को इन प्लेटफॉर्म पर पेश कर पाना मेरे लिए एक अहम कदम रहा है।”
नेशनल अवॉर्ड जीत चुके फिल्ममेकर संजय नाग के निर्देशन में बनी ‘मुझे जान ना कहो मेरी जान’ में तिलोत्तमा शोम और श्वेता त्रिपाठी नजर आएंगी। यह एक क्वीर लव स्टोरी है, जिसमें प्यार और इंसानी रिश्तों को ईमानदारी और बारीकी से दिखाने की कोशिश की गई है।
बतौर प्रोड्यूसर श्वेता का सफर थिएटर से शुरू हुआ था। साल 2010 में उन्होंने अपनी थिएटर प्रोडक्शन कंपनी ‘ऑलमाइटी’ की शुरुआत की थी। इसकी पहली प्रस्तुतियों में ब्रिटिश नाटककार माइक बार्टलेट का क्वीर ड्रामा ‘कॉक’ शामिल था। माइक बार्टलेट ओलिवियर अवॉर्ड जीत चुके हैं।
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