राजनीति
प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का करेंगे उद्घाटन
PM MODI
नई दिल्ली, 12 फरवरी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 और 2 का उद्घाटन करेंगे। वे शाम करीब 6 बजे सेवा तीर्थ में कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी कि पीएम नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दोपहर करीब 1:30 बजे सेवा तीर्थ बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स का नामकरण करेंगे। इसके बाद वे सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 और 2 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। यह उद्घाटन भारत के प्रशासनिक शासन संरचना में एक बड़ा बदलाव लाने वाला मील का पत्थर है और यह प्रधानमंत्री के एक मॉडर्न, कुशल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस इकोसिस्टम बनाने के कमिटमेंट को दिखाता है।
दशकों से कई जरूरी सरकारी ऑफिस और मंत्रालय सेंट्रल विस्टा एरिया में अलग-अलग जगहों पर बने हुए थे और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर से काम करते थे। इससे ऑपरेशनल खामियां, कोऑर्डिनेशन की चुनौतियां, बढ़ते मेंटेनेंस खर्च और काम न कर पाने लायक स्थिति बनी हुई थी।
नए बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स, मॉडर्न और भविष्य के लिए तैयार सुविधाओं के अंदर प्रशासनिक कार्यों को एक साथ करके इन समस्याओं का समाधान करते हैं।
सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय बने हुए हैं, जो पहले अलग-अलग जगहों पर थे।
कर्तव्य भवन-1 और 2 में कई मंत्रालय होंगे, जिनमें वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय, शिक्षा, संस्कृति, कानून, सूचना व प्रसारण, कृषि व किसान कल्याण, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और जनजातीय मामलों के मंत्रालय शामिल हैं।
ग्रिहा-4 मानदंडों के अनुसार डिजाइन किए गए इन कॉम्प्लेक्स में रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, पानी बचाने के तरीके, वेस्ट मैनेजमेंट सॉल्यूशन और हाई-परफॉर्मेंस बिल्डिंग एनवेलप शामिल हैं। ये उपाय पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को काफी कम करते हैं और परिचालन दक्षता को बढ़ाते हैं।
बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स में स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, सर्विलांस नेटवर्क और एडवांस्ड इमरजेंसी रिस्पॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बड़े सेफ्टी और सिक्योरिटी ढांचे भी शामिल हैं, जो अधिकारियों और विजिटर्स के लिए सुरक्षित और आसान स्थितियों को सुनिश्चित करते हैं।
राजनीति
निशिकांत दुबे ने 1978 में इंदिरा गांधी को निकाले जाने का किया जिक्र, मूल प्रस्ताव के जरिए राहुल गांधी की सदस्यता खत्म करने की मांग

नई दिल्ली, 14 फरवरी : भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ मूल प्रस्ताव लाने के फैसले के साथ 1978 की ऐतिहासिक संसदीय कार्रवाई का हवाला देकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
निशिकांत दुबे ने दिसंबर 1978 की उस घटना से तुलना की, जब इसी तरह के प्रस्ताव के आधार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी और उन्हें जेल भी भेजा गया था।
संसदीय प्रक्रिया में मूल प्रस्ताव एक स्वतंत्र और स्पष्ट प्रस्ताव होता है, जिसे सदन के सामने निर्णय या राय व्यक्त करने के लिए रखा जाता है। इसे स्वीकार कर सदन में पेश किए जाने के बाद इस पर बहस होती है और अंत में मतदान कराया जाता है।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाते हुए उनके लोकसभा सदस्य पद को रद्द करने और भविष्य के चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में 1978 के संसदीय रिकॉर्ड के अंश भी दिखाए और लिखा कि इसी तरह के प्रस्ताव के आधार पर इंदिरा गांधी की सदस्यता समाप्त हुई थी और उन्हें जेल भेजा गया था।
1978 का मामला 22 नवंबर 1978 को लोकसभा में पेश किए गए मूल प्रस्ताव से जुड़ा था। यह प्रस्ताव विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट के आधार पर लाया गया था, जिसमें इंदिरा गांधी को सदन की अवमानना और विशेषाधिकार हनन का दोषी पाया गया था। आरोप 1975 के आपातकाल के दौरान की गई कार्रवाई से जुड़े थे, जिनमें उनके पुत्र संजय गांधी की मारुति परियोजना की जांच कर रहे चार सरकारी अधिकारियों को कथित रूप से बाधित करने, डराने-धमकाने और झूठे मामले दर्ज कराने का उल्लेख था।
लंबी बहस के बाद 19 दिसंबर 1978 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा लाया गया प्रस्ताव पारित हुआ। इसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया और उन्हें संसदीय सत्र की शेष अवधि के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया गया। हालांकि, यह निष्कासन स्थायी नहीं रहा और 7 मई 1981 को सातवीं लोकसभा ने निर्णय वापस ले लिया, जब वे फिर सत्ता में लौटीं।
गुरुवार को निशिकांत दुबे ने कहा था कि उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ मूल प्रस्ताव शुरू किया है और उन पर ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतों’ के साथ होने का आरोप लगाया। यह कदम लोकसभा में एक दिन पहले हुई तीखी बहस के बाद सामने आया, जब राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस समझौते में भारत और उसके नागरिकों के हितों से समझौता किया गया है और ‘भारत माता को बेच दिया गया’ है।
उनके बयान पर सत्तापक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध किया और इसे ‘असंसदीय’ बताते हुए रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। इसके बाद भाजपा सांसदों ने विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की घोषणा की और राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, खासकर जब देश के ऊर्जा और किसान हितों से जुड़े मुद्दे हों।
बाद में गुरुवार शाम को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सरकार ने फिलहाल अपना प्रस्ताव स्थगित कर दिया है, क्योंकि निजी सदस्य के रूप में निशिकांत दुबे का मूल प्रस्ताव पहले ही पेश किया जा चुका है।
राजनीति
सीएम हिमंत ने असम आगमन पर पीएम मोदी का स्वागत किया, कहा- राज्य में कनेक्टिविटी और टेक्नोलॉजी को मिलेगा बढ़ावा

गुवाहाटी, 14 फरवरी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अपनी यात्रा के दौरान असम को कई बड़ी सौगातें देंगे। उनके असम आगमन पर राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “मां कामाख्या और महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की पवित्र धरती पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का हार्दिक स्वागत है। असम उन ऐतिहासिक प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, जो हमारे राज्य में कनेक्टिविटी, टेक्नोलॉजी और ग्रोथ को बढ़ावा देंगे।”
सीएम हिमंत बिस्वमा सरमा ने कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शेयर कीं। इनमें गुवाहाटी में बनकर तैयार हुए कुमार भास्कर वर्मा सेतु की तस्वीरें शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को असम में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। पीएम मोदी सुबह लगभग 10:30 बजे डिब्रूगढ़ के मोरान बाईपास पर स्थित आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) पर उतरेंगे, जहां वे फाइटर, ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर का हवाई प्रदर्शन देखेंगे।
आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह की पहली सुविधा है। इसे भारतीय वायुसेना के समन्वय से विशेष रूप से आपात स्थिति के दौरान सैन्य और नागरिक विमानों के उतरने और उड़ान भरने के लिए डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए एक महत्वपूर्ण एसेट के रूप में कार्य करेगी, जिससे पूर्वोत्तर में प्राकृतिक आपदाओं या स्ट्रेटेजिक आवश्यकताओं के दौरान बचाव और राहत कार्यों की त्वरित तैनाती संभव हो सकेगी। दोहरे उपयोग वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में परिकल्पित यह ईएलएफ, 40 टन तक के लड़ाकू विमानों और 74 टन के अधिकतम टेक-ऑफ वजन वाले परिवहन विमानों के संचालन में सक्षम है।
इसके बाद पीएम मोदी दोपहर लगभग 1 बजे गुवाहाटी पहुंचेंगे, जहां वे ब्रह्मपुत्र नदी पर लगभग 3,030 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन करेंगे। बाद में दोपहर लगभग 1:30 बजे प्रधानमंत्री गुवाहाटी के लचित घाट पर 5,450 करोड़ रुपए से अधिक की अन्य कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शुभारंभ करेंगे।
राजनीति
‘बलिदान के लिए देश सदैव ऋणी रहेगा’, राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने पुलवामा हमले के शहीदों को याद किया

नई दिल्ली, 14 फरवरी : पुलवामा हमले की 7वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने शहीदों को याद किया है। राहुल गांधी ने कहा कि भारत माता की रक्षा में उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पुलवामा में 2019 के दुस्साहसी आतंकी हमले में शहीद हुए हमारे वीर जवानों को मेरी भावपूर्ण श्रद्धांजलि। भारत माता की रक्षा में उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।” राहुल गांधी ने अपने जम्मू-कश्मीर दौरे की तस्वीर भी शेयर की है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पुलवामा आतंकी हमले में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, “हम सब अपने शहीदों और उनके परिवारजनों के सदैव ऋणी रहेंगे। हमारे जांबाज सैनिकों का साहस, समर्पण, सेवा और शहादत हम सबके लिए अनुकरणीय है।”
इससे पहले, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। खड़गे ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “हम भारत माता के उन वीर शहीदों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने पुलवामा में अपने प्राणों की आहुति दी। बहादुर जवानों का अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति अटल समर्पण हमेशा हमारी यादों में रहेगा। उनका सर्वोच्च बलिदान चिरकाल तक अमर रहेगा। हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे।”
वहीं, एनसीपी-एसपी के प्रमुख शरद पवार ने लिखा, “भारतीय सैनिकों ने हमेशा अपने साहस, बहादुरी, त्याग और बलिदान से देश की सुरक्षा व संप्रभुता को बनाए रखा है। उनकी अटूट राष्ट्र निष्ठा और देशभक्ति को हमेशा याद रखा जाएगा। पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में अपनी जान गंवाने वाले सभी शहीद सैनिकों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने लिखा, “मैं 2019 में आज ही के दिन पुलवामा हमले में शहीद हुए बहादुर सीआरपीएफ जवानों को सलाम करती हूं।”
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