अंतरराष्ट्रीय
बांग्लादेश चुनाव से पहले हिंसा का खतरा, जमात-ए-इस्लामी और आईएसआई की भूमिका पर खुफिया एजेंसियों की चेतावनी
नई दिल्ली, 31 जनवरी : बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने जा रहा है। चुनाव से पहले देश में अपराध और राजनीतिक हिंसा की घटनाओं के मद्देनजर भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसियों ने आगाह किया है। एजेंसियों का कहना है कि संसदीय चुनाव और नेशनल रेफरेंडम एक साथ कराने के दौरान गंभीर हिंसा हो सकती है।
पिछले साल बांग्लादेश में शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने के दौरान भारी हिंसा हुई थी और आईएसआई समर्थित कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी का नाम उभरकर सामने आया था। इंटेलिजेंस एजेंसियों का कहना है कि अगर बांग्लादेश में चुनाव जीतने के लिए जमात-ए-इस्लामी पूरी ताकत लगा देगी, लेकिन अगर उन्हें लगा कि वे जीत नहीं पा रहे हैं, तो देश की सड़कों पर कई कट्टरपंथी तत्व छोड़ दिए जाएंगे और ऐसी स्थिति में बहुत हिंसा हो सकती है।
बांग्लादेश चुनाव में सीधा मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात के बीच होगा। बांग्लादेश पर नजर रखने वालों का कहना है कि अगर बीएनपी सत्ता में आती है तो पाकिस्तान की निश्चित रूप से इसमें भूमिका होगी, क्योंकि मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान पाकिस्तान को आसान यात्रा, व्यापार और हथियारों के सौदे संबंधी कई छूट दी गई हैं, हालांकि पाकिस्तान यह नहीं चाहेगा कि बांग्लादेश भारत के साथ संबंध बनाए।
तारिक रहमान की वापसी के बाद से उम्मीद लगाई जा रही है कि उनकी सरकार बनने के बाद बीएनपी भारत के साथ अपने संबंध खराब नहीं करेगी, हालांकि दूसरी तरफ बीएनपी पाकिस्तान को भी खुश रखने की कोशिश करेगी। खालिदा जिया के समय में भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में तनाव देखने को मिला था। ऐसे में बीएनपी सरकार की वापसी पर ज्यादा उम्मीदें नहीं की जा सकती हैं।
वहीं अगर जमात सत्ता में आती है, तो वह आईएसआई की कठपुतली के अलावा कुछ नहीं होगी। जमात सरकार हर वह काम करेगी जो पाकिस्तान उसे करने को कहेगा। यही कारण है कि पाकिस्तान किसी भी कीमत पर जमात सरकार चाहता है।
अगर जमात सत्ता में आती है तो पूरी संभावना है कि यूनुस को देश का राष्ट्रपति बनाया जाएगा। यूनुस, आईएसआई और जमात नेतृत्व के बीच कई बैठकें हुई हैं, जिनमें उनकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर चर्चा हुई है। राष्ट्रपति बनने के लिए यूनुस ने पाकिस्तान और जमात दोनों के लिए कई छूट दी हैं।
शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद से बांग्लादेश में आईएसआई काफी तेजी से एक्टिव हो गया है और इसका श्रेय जमात-ए-इस्लामी को जाता है। आईएसआई चाहती है कि जमात किसी भी कीमत पर यह चुनाव जीते ताकि वह देश पर अपना नियंत्रण बनाए रख सके।
जब यूनुस ने सत्ता संभाली थी, तो सबसे पहले उन्होंने जमात पर लगा बैन हटाया। उन्होंने संगठन के कहने पर कई कट्टर कट्टरपंथियों और आतंकवादियों को रिहा भी किया। अधिकारियों का कहना है कि ये सभी सोची-समझी चालें थीं ताकि ये लोग जमात के पक्ष में माहौल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर हिंसा कर सकें।
हालिया सर्वे में बीएनपी को जमात पर बढ़त हासिल है। अगर यह चुनाव के दिन तक जारी रहा, तो हिंसा पक्की है। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव टालने की पूरी कोशिश की जाएगी ताकि मौजूदा अंतरिम सरकार राज करती रहे।
हालांकि हिंसा भड़काने की योजना पहले से ही बनाई जा रही है, लेकिन बांग्लादेश का चुनाव आयोग चाहता है कि पूरी प्रक्रिया आसानी से हो जाए। बांग्लादेशी चुनाव आयोग ने सरकारी अधिकारियों को रेफरेंडम में ‘हां’ वोट के लिए कैंपेन न करने का आदेश दिया है।
इसमें कहा गया कि इस तरह के कैंपेन से रेफरेंडम के नतीजे पर असर पड़ेगा। अगर वोटर रेफरेंडम के दौरान ‘हां’ में वोट देकर जुलाई चार्टर को मंजूरी देते हैं, तो नई पार्लियामेंट 84 सुधार प्रस्तावों को लागू करने के लिए कानूनी तौर पर मजबूर हो जाएगी। इनमें बड़े संवैधानिक बदलाव शामिल हैं। इस रेफरेंडर के लागू होने के साथ ही कार्यकारी शक्ति, न्यायपालिका, चुनाव प्रक्रिया और राज्य के स्ट्रक्चर पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, ‘बंगाली’ शब्द की जगह ‘बांग्लादेशी’ शब्द इस्तेमाल करके राज्य की पहचान भी बदल जाएगी।
बड़े पैमाने पर हिंसा की आशंका को देखते हुए भारत की सीमा ‘बहुत हाई अलर्ट’ पर है। इस दौरान नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों और पश्चिम बंगाल में घुसपैठ की कोशिशें की जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि गैर-कानूनी इमिग्रेशन को रोकने के लिए बॉर्डर इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि हिंसा में अल्पसंख्यकों को भी निशाना बनाया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय
कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।
कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।
इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
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ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
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