राष्ट्रीय
2025 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 73 प्रतिशत की बढ़ोतरी : यूएनसीटीएडी
संयुक्त राष्ट्र, 22 जनवरी : वर्ष 2025 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट- एफडीआई) में 73 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले साल भारत में कुल 47 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया। यह बढ़ोतरी सेवा और उत्पादन क्षेत्र में बड़े निवेश की वजह से हुई है।
संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि विदेशी निवेश में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में बड़े निवेश की वजह से हुई है। इसमें वित्तीय सेवाएं, आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) और अनुसंधान एवं विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा उत्पादन क्षेत्र में भी निवेश बढ़ा है, जिसे भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जोड़ने वाली सरकारी नीतियों से समर्थन मिला।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की विदेशी निवेश वृद्धि दर दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले देशों में शामिल रही।
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ट्रेंड्स मॉनिटर के नवीनतम अंक के अनुसार, पिछले साल के पहले तीन तिमाहियों में भारत में डाटा सेंटर्स में कुल 7 अरब डॉलर का निवेश हुआ। इस दौरान डाटा सेंटर्स में निवेश पाने वाले देशों की सूची में भारत सातवें स्थान पर रहा।
हालांकि, चौथी तिमाही में डाटा सेंटर क्षेत्र में विदेशी निवेश में अचानक तेज उछाल आया, जिससे यह क्षेत्र और अधिक सक्रिय हो गया।
अक्टूबर में गूगल ने घोषणा की थी कि वह आंध्र प्रदेश में एआई हब के लिए 15 अरब डॉलर का निवेश करेगी।
तो वहीं दिसंबर में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी ने एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डाटा सेंटर्स में 17.5 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की। इसी तरह दिसंबर में ही अमेजन ने कहा कि वह एआई और अन्य क्षेत्रों में 35 अरब डॉलर का निवेश करेगी।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ये सभी निवेश अगले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे किए जाएंगे।
वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो पिछले साल दुनिया भर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और कुल निवेश बढ़कर 1.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2025 में औद्योगिक रुझान यह दिखाते हैं कि अब डाटा सेंटर वैश्विक निवेश को दिशा दे रहे हैं। कुल नए निवेश परियोजनाओं के मूल्य का लगभग पांचवां हिस्सा डाटा सेंटर्स से जुड़ा रहा।
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल नेटवर्क की बढ़ती मांग के कारण इस क्षेत्र में घोषित निवेश 270 अरब डॉलर से अधिक रहा।
इसके साथ ही सेमीकंडक्टर उद्योग भी तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र रहा, जहां हाल ही में घोषित प्रोजेक्ट्स के मूल्य में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
वहीं जिन क्षेत्रों पर शुल्क जोखिम का असर पड़ा, वहां परियोजनाओं की संख्या में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें वस्त्र उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहे।
यूएनसीटीएडी के अनुसार, दुनिया में सबसे अधिक विदेशी निवेश विकसित देशों में गया, जहां कुल निवेश 43 प्रतिशत बढ़कर 728 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत एक अपवाद रहा, जबकि विकासशील देशों में विदेशी निवेश 2 प्रतिशत घटकर 877 अरब डॉलर रह गया।
संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि लगातार तीसरे साल चीन में विदेशी निवेश में गिरावट दर्ज की गई। चीन में निवेश 8 प्रतिशत घटकर 107.5 अरब डॉलर रह गया, हालांकि निवेश का बड़ा हिस्सा रणनीतिक और तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में केंद्रित रहा।
यूएनसीटीएडी ने कहा कि कुल मिलाकर, वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा अभी कमजोर बना हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया, “ऊपरी आंकड़ों में दिखाई दे रही वृद्धि पूरी सच्चाई नहीं बताती। नीति निर्माताओं को केवल धन के प्रवाह पर नहीं, बल्कि वास्तविक निवेश को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।”
निवेशकों के कमजोर भरोसे का संकेत देते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय विलय और अधिग्रहण के मूल्य में 10 प्रतिशत की गिरावट आई।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय परियोजना वित्त पोषण लगातार चौथे साल घटा है। इसकी कुल राशि में 16 प्रतिशत और सौदों की संख्या में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जो 2019 के स्तर के करीब है।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीनफील्ड परियोजनाओं की घोषणाओं की संख्या में 16 प्रतिशत की गिरावट आई है, हालांकि कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स की वजह से कुल परियोजना मूल्य ऊंचा बना रहा।
अपराध
कर्नाटक: ब्लैकमेल कर व्यापारी से 2.77 करोड़ रुपए वसूलने के आरोप में यूथ कांग्रेस नेता और उसका साथी गिरफ्तार

मंगलुरु, 9 जून: कर्नाटक के मंगलुरु में जबरन वसूली का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने एक प्रमुख व्यापारी को ब्लैकमेल करने और लगभग दो साल में 2.77 करोड़ रुपए वसूलने के आरोप में यूथ कांग्रेस के एक पदाधिकारी और उसके साथी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान मंगलुरु यूथ कांग्रेस के महासचिव निजाम और जितेश के तौर पर हुई है। आरोप है कि जितेश ने पहले व्यापारी को अपने जाल में फंसाया और बाद में उसकी अश्लील तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल करके उसे ब्लैकमेल किया। पुलिस ने बताया कि जितेश ने शुरू में 35 लाख की मांग की और वीडियो को पीड़ित की पत्नी को दिखाने की धमकी दी। अपनी बदनामी के डर से व्यापारी ने चेक के जरिए यह रकम दे दी।
जब पैसों की मांग जारी रही तो व्यापारी ने मदद के लिए निजाम से संपर्क किया, हालांकि पुलिस का आरोप है कि निजाम ने मदद करने के बजाय जितेश का साथ दिया और जबरन वसूली के इस रैकेट में शामिल हो गया।
इसके बाद दोनों ने आत्महत्या की एक झूठी कहानी रची। निजाम ने मई 2024 में व्यापारी को बताया कि जितेश ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में पीड़ित का नाम लिखा है। कहानी को सच साबित करने के लिए आरोपियों ने जितेश की मौत और अंतिम संस्कार की तस्वीरें दिखाईं और व्यापारी को आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी दी।
गिरफ्तारी और सामाजिक बदनामी के डर से व्यापारी पैसे देता रहा। पुलिस ने बताया कि 2024 से 2026 के बीच पीड़ित से कुल 2.77 करोड़ रुपए वसूले गए। यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब जून 2026 में व्यापारी ने जितेश को मंगलुरु में जिंदा देखा। जिस व्यक्ति को वह मरा हुआ समझ रहा था, उसे जिंदा देखकर वह हैरान रह गया और उसने उरवा पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने निजाम और जितेश दोनों को गिरफ्तार कर लिया। मामले की और जानकारी के लिए आगे की जांच चल रही है। इस बीच गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर मंगलुरु और पूरे कर्नाटक के कई राजनीतिक नेताओं के साथ निजाम की तस्वीरें वायरल हो गई हैं।
अनन्य
नीट पेपर लीक मामला : दिल्ली की अदालत ने आरोपी शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई

नई दिल्ली, 6 जून। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनार को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 13 मई को सीबीआई ने शुभम खैरनार को नासिक से गिरफ्तार किया था।
आरोपी शुभम खैरनार की शनिवार को न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद उसे राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई।
शुभम खैरनार, महाराष्ट्र के नासिक जिले के नंदगांव का रहने वाला है। उसने मध्य प्रदेश की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से बीएएमएस (आयुर्वेद) की पढ़ाई की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का आरोप है कि उसने पुणे के एक संदिग्ध से यह पेपर 10 लाख में खरीदा और इसे हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख में बेच दिया।
बता दें कि नीट पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जानकारी सामने आई कि सीबीआई अधिकारियों ने शुक्रवार को कल्याण के म्हारल क्षेत्र में रहने वाली एक छात्रा से भी पूछताछ की।
सूत्रों ने बताया कि जांच टीम ने म्हारल इलाके में छात्रा के घर पहुंचकर उसका बयान दर्ज किया। सूत्रों का दावा है कि संबंधित छात्रा नाशिक की एक अन्य छात्रा के संपर्क में थी, जिसकी जांच के दौरान उसका मोबाइल नंबर जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में आया। इसी आधार पर सीबीआई ने उससे पूछताछ की है। हालांकि, सीबीआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। एजेंसियों की शुरुआती जांच में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। इसी आधार पर परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया और अब इसे नए सिरे से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी।
अंतरराष्ट्रीय
हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।
सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
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