राष्ट्रीय समाचार
बैंक ऑफ अमेरिका ने अदाणी ग्रुप की कवरेज शुरू की, ‘ओवरवेट’ की दी रेटिंग
नई दिल्ली, 11 नवंबर: बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) ग्लोबल रिसर्च ने अदाणी ग्रुप की कवरेज शुरू कर दी है, साथ ही कुछ यूएस डॉलर बॉन्ड्स को ‘ओवरवेट’ की रेटिंग दी है। इसकी वजह समूह का मजबूत आधार और एसेट बेस और कठिन बाजार चुनौतियों के बावजूद फंड जुटाने की क्षमता है।
बोफा ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वैश्विक जांच के बीच समूह ने मजबूत प्रदर्शन, विस्तार और बाजार पहुंच को प्रदर्शित किया है। पोर्ट्स, यूटिलिटीज और रिन्यूएबल बिजनेस में मजबूत संपत्ति आधार अच्छा कैश फ्लो और क्रेडिट प्रोफाल को मजबूत रखने में समूह की मदद कर रहा है।
बोफा की ओर से अदाणी ग्रुप के कई बॉन्ड्स पर ओवरवेट की राय दी गई है, जिनमें अदाणी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एडीएसईजेड) 2031एस और 2032एस बॉन्ड्स, अदाणी इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल (एनडीआईएनसीओ) 2031एस, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस (एडीटीआईएन) 2036एस और अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई (एडीएएनईएम) 2030एस का नाम शामिल है।
बोफा के मुताबिक, ग्रुप की यूएसडी बॉन्ड इश्यू करने वाली कंपनियों का प्रदर्शन बीते दो वर्षों में अच्छा रहा है , जो कि क्षमता विस्तार के चलते ईबीआईटीडीए में बढ़त से संचालित था।
अदाणी ग्रुप देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह में से एक है और ग्रुप की 12 कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं, जिनका मार्केट कैप 200 अरब डॉलर के करीब है।
बोफा ने नोट में कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि अदाणी ट्रांसमिशन लिमिटेड (एडीटीआईएन) और अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई (एडीएएनईएम) अपने विविध परिचालनों और लंबी अवधि के फिक्स्ड-प्राइस कॉन्ट्रैक्ट द्वारा समर्थित स्थिर क्रेडिट प्रोफाइल बनाए रखेंगे।”
बोफा ने कहा कि उनका अनुमान है कि एडीटीआईएन और एडीएएनईएम दोनों अगले तीन वर्षों में 6 गुना से कम लीवरेज और 2गुना से अधिक कवरेज बनाए रखेंगे, जबकि एडीएएनईएम को मॉड्यूलर आउटले जैसे रखरखाव से और अधिक लाभ होगा।
अदाणी ग्रुप के यूएसडी बॉन्ड ने 2023 की शुरुआत से काफी उतार-चढ़ाव का अनुभव किया है। हालांकि, लगातार बाजार पहुंच और घरेलू नियामकों से प्रतिकूल निष्कर्षों की कमी ने पूरे समूह की मजबूत वापसी का समर्थन किया है।
राष्ट्रीय समाचार
झारखंड छात्र आंदोलन पर राहुल गांधी ने बल प्रयोग को बताया गलत, बातचीत से समाधान की अपील

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को गलत बताते हुए राज्य सरकार से छात्रों की बात सुनने और बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करने की अपील की।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि झारखंड में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल का इस्तेमाल गलत है। छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है। उन्होंने झारखंड सरकार से छात्रों की बात सुनने और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की अपील की।
इससे पहले भी राहुल गांधी ने झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों का समर्थन किया था। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से फोन पर बातचीत कर उनकी समस्याएं जानी थीं और उनकी मांगों के प्रति समर्थन जताया था।
इधर, झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि झारखंड में जंतर-मंतर जैसी बर्बरता और संवादहीनता की स्थिति नहीं बनी है। सरकार ने छात्रों के आंदोलन से पहले ही मामले में कार्रवाई शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि सीआईडी जांच, गिरफ्तारियों और डिजिटल समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत जांच जारी है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई दोषी बच न पाए।
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि भर्ती व्यवस्था में मौजूद कमियों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सीधी नजर है। उन्होंने कहा कि छात्रों को व्यवस्था में सुधार का आश्वासन दिया गया है। उनके अनुसार, सरकार ने छात्रों से दोबारा बातचीत का आग्रह किया है और वह संवाद के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने भाजपा पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। मंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट रुख है कि समस्याओं का समाधान संवाद से ही निकाला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कई छात्रों ने भी माना है कि उनकी प्रमुख मांगों पर राज्य सरकार ने सकारात्मक कार्रवाई की है। यह कदम कई अन्य राज्यों में देखने को नहीं मिला है। मंत्री ने कहा कि विधानसभा के मौजूदा सत्र में भी सरकार छात्रों के मुद्दे को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन पहले से तय था और सरकार ने उनसे बातचीत की कोशिश की थी, लेकिन छात्र इसके लिए तैयार नहीं हुए।
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एसबीआई भर्ती 2026: जूनियर एसोसिएट्स के 1,538 पदों पर आवेदन जारी, जानें योग्यता और सैलरी

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने एससी/एसटी/ओबीसी बैकलॉग रिक्तियों के लिए विशेष भर्ती अभियान के तहत क्लर्क कैडर में जूनियर एसोसिएट्स (कस्टमर सपोर्ट और सेल्स) के कुल 1,538 पदों को भरने के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके रिक्तियों की घोषणा की है।
एसबीआई की ओर से जूनियर एसोसिएट्स (कस्टमर सपोर्ट और सेल्स) पोस्ट के लिए राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के आधार पर जारी 1,538 रिक्तियों में आंध्र प्रदेश में 88, कर्नाटक में 120, मध्य प्रदेश में 134, छत्तीसगढ़ में 26, ओडिशा में 111, चंडीगढ़ यूटी में 22, जम्मू एवं कश्मीर यूटी में 42, हिमाचल प्रदेश में 11, पंजाब में 18, तमिलनाडु में 65, तेलंगाना में 32, राजस्थान में 106, पश्चिम बंगाल में 55, उत्तर प्रदेश में 31, महाराष्ट्र में 165, दिल्ली में 17, गुजरात में 289, असम में 39, त्रिपुरा में 22, बिहार में 12 और झारखंड में 133 पद शामिल हैं। इनमें एससी के 207, एसटी के 1,219 और ओबीसी के 112 पद शामिल हैं।
इन सभी रिक्तियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 27 अगस्त तक की गई है। एप्लीकेशन फॉर्म भरने के इच्छुक उम्मीदवार एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपना रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरा कर सकते हैं।
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन या केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कोई समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। वहीं, जिन उम्मीदवारों के पास इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री (आईडीडी) सर्टिफिकेट है, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आईडीडी पास करने की तारीख 31 दिसंबर 2026 या उससे पहले की हो। इसी के साथ जूनियर एसोसिएट्स पोस्ट के लिए वे लोग भी आवेदन कर सकते हैं, जो लोग अपने ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष/सेमेस्टर में हैं, बशर्ते कि प्रोविजनल रूप से चुने जाने पर उन्हें 31 दिसंबर 2026 को या उससे पहले ग्रेजुएशन परीक्षा पास करने का सबूत देना होगा।
आवेदकों की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 28 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 अप्रैल के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन ऑनलाइन टेस्ट (प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा) और चुनी हुई स्थानीय भाषा के टेस्ट के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी 24,050 से 64,480 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे।
फॉर्म भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो ओबीसी के लिए 750 रुपए तय किया गया है। वहीं, एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी/एक्सएस/डीएक्सएस श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी जाएगी।
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केंद्र का 1,847 बड़े इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स पर खर्च बढ़कर 21.97 लाख करोड़ रुपए हुआ

भारत का 1,847 बड़े इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स (जिन्हें अभी बनाया जा रहा है) पर पूंजीगत खर्च जून, 2026 तक 21.97 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यह केंद्र सरकार द्वारा बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए निर्धारित किए गए 40.54 लाख करोड़ रुपए के कुल निवेश का 54 प्रतिशत से अधिक है। यह जानकारी केंद्र द्वारा सोमवार को जारी फैक्टशीट में दी गई।
फैक्टशीट के अनुसार, कई प्रोजेक्ट पूरे होने के एडवांस स्टेज पर पहुंच चुके हैं। लगभग 709 प्रोजेक्ट्स में से 80 प्रतिशत से ज्यादा विकसित हो चुके हैं, जबकि 337 अन्य प्रोजेक्ट्स में 80 प्रतिशत से ज्यादा वित्तीय काम पूरा हो चुका है।
कनेक्टिविटी पर फोकस को देखते हुए, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर 1,341 प्रोजेक्ट्स (जिनकी कीमत 22.32 लाख करोड़ रुपए है) के साथ सबसे आगे है।
ये प्रोजेक्ट देश की आर्थिक विकास दर को बढ़ाने और ज्यादा नौकरियां पैदा करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
पीएआईएमएएनए (राष्ट्र-निर्माण के लिए प्रोजेक्ट असेसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स) डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कुशल निगरानी की जा रही है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा विकसित, पीएआईएमएएनए का इस्तेमाल 150 करोड़ रुपए या उससे ज्यादा लागत वाले चल रहे केंद्रीय क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी के लिए किया जाता है।
प्रोजेक्ट की निगरानी को मजबूत करने के अलावा, पीएआईएमएएनए ने 16 अप्रैल, 2026 को लॉन्च किए गए एक समर्पित ‘परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड’ के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदर्शन की निगरानी में मदद करने के लिए अपनी भूमिका का विस्तार किया है।
‘परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड’ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के प्रदर्शन संकेतक को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक साथ लाता है। ये संकेतक संबंधित मंत्रालयों और विभागों द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक डेटा से संकलित किए जाते हैं और नवीनतम उपलब्ध जानकारी के आधार पर समय-समय पर अपडेट किए जाते हैं।
एक विस्तृत संकेतक ढांचा छह इंफ्रास्ट्रक्चर उप-क्षेत्रों तक फैला हुआ है। इनमें बिजली, नागरिक उड्डयन, दूरसंचार, रेलवे, सड़कें, और बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग शामिल हैं।
‘परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड’ का विस्तार अब 165 संकेतक तक कर दिया गया है। इस विस्तार में 54 नए संकेतक को शामिल किया गया है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदर्शन की निगरानी की व्यापकता में काफी वृद्धि हुई है।
एक ही डिजिटल इंटरफेस क्षेत्र-दर-क्षेत्र प्रदर्शन की निगरानी की सुविधा देता है। यह नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और हितधारकों के लिए इंटरैक्टिव विज़ुअलाइजेशन और टाइम-सीरीज विश्लेषण की सुविधा प्रदान करता है।
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