व्यापार
लाल निशान में खुला भारतीय शेयर बाजार, निफ्टी 25,170 स्तर से नीचे कर रहा कारोबार
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मुंबई, 13 अक्टूबर: भारतीय शेयर बाजार कारोबारी हफ्ते के पहले दिन सोमवार को लाल निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक फाइनेंशियल सर्विस और फार्मा सेक्टर में बिकवाली देखी जा रही है।
सुबह करीब 9.34 बजे, सेंसेक्स 422.88 अंक या 0.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,077.94 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 121.85 अंक या 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,163.50 पर कारोबार कर रहा था।
ब्रॉडकैप सूचकांकों में, निफ्टी मिडकैप 100 में 0.22 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टोरल फ्रंट पर निफ्टी ऑटो 0.18 प्रतिशत, पीएसयू बैंक 0.22 प्रतिशत और फाइनेंशियल सर्विस 0.19 प्रतिशत की गिरावट में थे। निफ्टी रियलिटी 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। निफ्टी फार्मा 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहा था। निफ्टी आईटी 0.63 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 0.58 प्रतिशत की गिरावट में रहे। निफ्टी एफएमसीजी 0.30 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था।
बाजार जानकारों के अनुसार, ” हम इस सप्ताह की शुरुआत अपने ऊपरी लक्ष्य को 25,460 तक सीमित रखते हुए कर रहे हैं। जैसे-जैसे सप्ताह आगे बढ़ेगा, अस्थिरता बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि निकटतम समर्थन 25230/15 पर दिखाई दे रहा है, 25113 के बाद सीधी गिरावट का इंतजार किया जाएगा, ताकि ऊपरी दांव से दूर रह सकें।”
इस बीच, सेंसेक्स पैक में टाटा मोटर्स, इंफोसिस, टाटा स्टील, एलएंडटी, पावरग्रिड, अल्ट्राटेक सीमेंट और एचडीएफसी बैंक टॉप लूजर्स थे। वहीं, इटरनल, भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व टॉप गेनर्स थे।
जानकारों ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा चीन पर अतिरिक्त 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी और इस तरह अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध को फिर से भड़काने की धमकी के बाद शुक्रवार को हुई बिकवाली के बाद, वैश्विक शेयर बाजारों में स्थिरता लौटती दिख रही है।
अमेरिकी बाजार में आखिरी ट्रेडिंग सेशन में शुक्रवार को डाउ जोंस 878.82 अंक या 1.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ 45,479.60 पर बंद हुआ। वहीं, एसएंडपी 500 इंडेक्स 182.60 अंक या 2.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ 6,552.51 और नैस्डेक 820.20 अंक या 3.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,204.43 पर लाल निशान में बंद हुआ।
सुबह के कारोबार में अधिकांश एशियाई मार्केट लाल रंग में कारोबार कर रहे थे। चीन का शंघाई इंडेक्स 1.30 प्रतिशत की गिरावट में रहा। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 3.31 प्रतिशत की गिरावट में रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.45 प्रतिशत की गिरावट में करोबार कर रहा था।
बाजार जानकारों के अनुसार, “भारत में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार खरीदारी ने बाज़ार को स्थिरता प्रदान की है। पिछले चार कारोबारी दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 3289 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं। बाजार में तेजी के रुख ने शॉर्ट कवरिंग को बढ़ावा दिया है, जिससे बाजार को मजबूत होने में मदद मिली है।”
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) 10 अक्टूबर को शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने 459.20 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 1,707.83 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे।
व्यापार
जी20 व्यापार मंत्रियों ने भोजन को हथियार बनाने की निंदा की, जबरन मजदूरी पर नहीं बनी सहमति

जी20 के व्यापार मंत्रियों ने राजनीतिक या आर्थिक दबाव के लिए भोजन को हथियार बनाने की सर्वसम्मति से निंदा की है। खास बात यह है कि ये इस बैठक में बनी एक दुर्लभ आम सहमति है, क्योंकि जबरन श्रम, औद्योगिक अति-क्षमता और वैश्विक व्यापार नियमों के भविष्य जैसे मुद्दों पर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच मतभेद सामने आए हैं।
यह समझौता अमेरिका की अध्यक्षता में मिल्वौकी में दो दिन तक चली जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में हुआ। मंत्रियों ने भोजन को हथियार बनाने का मतलब बताया कि जब कोई सरकार जानबूझकर किसी दूसरे देश से राजनीतिक फायदा लेने के लिए खाने-पीने की चीजों, खेती के सामान या खेती में इस्तेमाल होने वाली चीजों के व्यापार को धीमा कर दे, रोक दे या अपने फायदे के लिए मोड़ दे।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा, “रचनात्मक चर्चा के बाद, जी20 व्यापार मंत्रियों ने भोजन को हथियार बनाने की निंदा करने पर सहमति जताई, क्योंकि यह एक बड़ा मानवीय और आर्थिक खतरा है।”
उन्होंने कहा, “दशकों से, भोजन, कृषि उत्पादों और कृषि इनपुट के व्यापार को आर्थिक या राजनीतिक कारणों से दबाव बनाने के लिए हथियार बनाया गया है। यह लक्षित देशों में लोगों की आजीविका को खतरे में डालता है, प्रतिस्पर्धा को बिगाड़ता है और वैश्विक व्यापार प्रणाली में विश्वास को कमजोर करता है।”
सहमति वाले बयान में कहा गया कि इस तरह की कार्रवाइयां कृषि और खाद्य आपूर्ति शृंखला को बाधित कर सकती हैं, खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल सकती हैं, खासकर कमजोर आबादी के लिए और किसानों की आजीविका को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि मंत्रियों ने दबाव बनाने वाली व्यापारिक कार्रवाइयों और वैध घरेलू उपायों के बीच फर्क किया। समझौते में कहा गया कि उनकी चिंता उन उपायों पर लागू नहीं होती जो पारदर्शी तरीके से अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार अपनाए गए हैं और वैध घरेलू नीतिगत उद्देश्यों (जिसमें खाद्य सुरक्षा भी शामिल है) को आगे बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं। यह फर्क मिल्वौकी चर्चा के मुख्य मुद्दों में से एक था।
मंत्रियों ने खाने के मुद्दे पर सहमति बना ली, वे वैश्विक सप्लाई चेन से जबरन मजदूरी को खत्म करने पर सहमति नहीं बना पाए। अमेरिका, मैक्सिको और अर्जेंटीना ने इसके बजाय जबरन मजदूरी से बने सामानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए एक अलग बयान जारी किया।
जैमीसन ग्रीर ने कहा, “मैं नैतिक और आर्थिक वास्तविकता के साथ खड़े होने और यह मानने के लिए मैक्सिको और अर्जेंटीना के अपने सहयोगियों की सराहना करता हूं कि जबरन मजदूरी का जारी रहना एक घृणित मानवाधिकार मुद्दा है जो वैश्विक सप्लाई चेन को बिगाड़ता है।”
उनके बयान में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुमान का हवाला दिया गया कि 2021 में दुनियाभर में 28 मिलियन लोग जबरन मजदूरी में थे, जो पिछले पांच सालों में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि है। इसमें देशों से जबरन मजदूरी के जरिए पूरी तरह या आंशिक रूप से उत्पादित आयात के खिलाफ सहयोग और उपायों को मजबूत करने का आह्वान किया गया।
अध्यक्ष के बयान में कहा गया कि इस प्रस्ताव को कुछ सदस्यों को छोड़कर सभी ने समर्थन दिया, कुछ ने सामूहिक कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ने से इनकार कर दिया।
मंत्रियों ने डब्ल्यूटीओ के मोस्ट-फेवर्ड नेशन (एमएफएन) सिद्धांत में सुधार पर भी चर्चा शुरू की। कई सदस्यों ने एमएफएन को बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की आधारशिला बताया, जबकि बढ़ती संख्या ने संकेत दिया कि इस सिद्धांत के काम करने के तरीके की जांच करने में ही भलाई है।
यह बैठक 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को अमेरिकी जी20 अध्यक्षता के तहत हुई थी। इसमें चार मुख्य विषयों- भोजन को हथियार बनाना, जबरन मजदूरी, संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता और एमएफएन सिद्धांत में सुधार पर चर्चा हुई। अमेरिका 2027 में जी20 की अध्यक्षता ब्रिटेन को सौंपेगा।
व्यापार
गांधी जयंती के चलते भारतीय शेयर बाजार बंद, एनएसई और बीएसई पर नहीं होगा कारोबार

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को गांधी जयंती के चलते बंद रहेगा। इस दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के सभी सेगमेंट में कारोबार नहीं होगा।
दोनों एक्सचेंजों पर इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (एसएलबी), करेंसी डेरिवेटिव्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग आज बंद रहेगी।
कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट भी सुबह और शाम दोनों सत्र में बंद रहेगा।
भारतीय शेयर बाजार 3 और 4 अक्टूबर को शनिवार और रविवार होने के चलते 5 अक्टूबर को खुलेगा।
इसके अलावा, भारतीय शेयर बाजार में अगली छुट्टी दशहरा के अवसर पर 20 अक्टूबर को होगी। वहीं, 10 नवंबर को दिवाली-बलिप्रतिपदा, 24 नवंबर को प्रकाश गुरपर्व और 25 दिसंबर को क्रिसमस पर शेयर बाजार बंद रहेगा।
भारतीय शेयर बाजार ऊंची ऊर्जा की कीमतें और बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों में वृद्धि के चलते गुरुवार को लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान निफ्टी 198.50 अंक या 0.88 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,421.95 पर बंद हुआ।
निफ्टी में बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, श्रीराम फाइनेंस, टाटा स्टील, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, आयशर मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि इसके विपरीत इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई लाइफ, मैक्स हेल्थ और टीसीएस के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली।
जानकारों के मुताबिक, बाजार में गिरावट की मुख्य वजह बाहरी कारण रहे हैं; बॉन्ड यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और कच्चे तेल की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं, जिससे 2026-27 के आर्थिक आउटलुक को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं, देश के भीतर भी निवेशक दूसरी तिमाही के नतीजों और अगले हफ्ते आने वाली आरबीआई की पॉलिसी को लेकर सतर्क हैं।
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि उम्मीद है कि दूसरी तिमाही की कमाई पहली तिमाही के मुकाबले कमजोर रहेगी, क्योंकि पहली तिमाही में ऑपरेटिंग कॉस्ट के असर का फायदा मिला था, जो इस बार शायद वैसा न हो।
व्यापार
बड़ी आईटी कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं मिड-साइज आईटी कंपनियां, चुनौतियों के बावजूद मजबूत संभावनाएं: रिपोर्ट

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितताओं और जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जेन-एआई) के प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बावजूद, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मिड-साइज आईटी कंपनियों के अपने बड़े प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना है। यह बात ब्रोकरेज फर्म नुवामा की एक नई रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी तिमाही के दौरान आईटी सेवाओं की कुल मांग का माहौल व्यापक रूप से स्थिर बना रहा। हालांकि सितंबर में वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बिगड़ने से कारोबारी भावना पर कुछ असर जरूर पड़ा है।
नुवामा का मानना है कि आगामी तिमाही नतीजों के दौरान आईटी कंपनियों का प्रबंधन वैश्विक तनाव, कमजोर व्यापक आर्थिक वातावरण और जेन-एआई के बदलते प्रभाव को लेकर सतर्क रुख अपनाएगा। हाल के महीनों में इन कारकों ने निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले नौ महीनों में आईटी इंडेक्स में लगभग 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे प्लेटफॉर्म आधारित जेन-एआई से संभावित व्यवधान और खाड़ी क्षेत्र से जुड़ी अनिश्चितताओं को प्रमुख वजह माना गया है।
हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद नुवामा ने आईटी सेवा क्षेत्र को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जेन-एआई आईटी कंपनियों के मौजूदा बिजनेस मॉडल के लिए खतरा नहीं है, बल्कि इससे नए अवसर पैदा होने की संभावना अधिक है।
ब्रोकरेज ने कहा, “हम लगातार मानते हैं कि आईटी सर्विसेज मॉडल आगे भी मजबूत बना रहेगा और जेन-एआई का प्रभाव इस उद्योग के लिए बड़े अवसरों का रास्ता खोलेगा।”
रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि अधिकांश आईटी कंपनियों के मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है। परिचालन दक्षता बढ़ाने और लागत नियंत्रण उपायों का लाभ कंपनियों को मिलने की उम्मीद है।
हालांकि कुछ कंपनियां अपनी राजस्व वृद्धि के अनुमान में बदलाव कर सकती हैं, लेकिन नुवामा का मानना है कि मार्जिन संबंधी मार्गदर्शन में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।
ब्रोकरेज ने डॉलर-रुपया विनिमय दर को लेकर भी अपना अनुमान संशोधित करते हुए 93 रुपए प्रति डॉलर से बढ़ाकर 95 रुपए प्रति डॉलर कर दिया है। साथ ही मूल्यांकन के लिए वित्त वर्ष 2028 से वित्त वर्ष 2029 के औसत प्राइस-टू-अर्निंग (पी/ई) मल्टीपल्स को आधार बनाया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन मध्यम और लंबी अवधि में आईटी सेवा क्षेत्र की संभावनाएं मजबूत दिखाई देती हैं। स्थिर मांग, डिजिटल परिवर्तन परियोजनाओं में बढ़ता निवेश और एआई-आधारित समाधान आने वाले वर्षों में उद्योग के लिए नए विकास अवसर पैदा कर सकते हैं।
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